Mahayogiraj Gorakhnath
(0)
Author:
Brajendra Kumar SinghalPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality₹
1895
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‘महायोगिराज गोरखनाथ’ नाथपन्थ की अनन्य विभूति गुरु गोरखनाथ का शोधपूर्ण, विस्तृत और अद्यतन जीवन चरित्र है। भारत की अनेक विभूतियों की तरह, गोरखनाथ के भी कृतित्व और कीर्ति से जनसामान्य जितना परिचित है, उतना उनके व्यक्तिगत जीवन से नहीं। गोरखनाथ ने भी, अगर उनके द्वारा ‘काफिर-बोध’ में दिए गए कुछ संकेतों को छोड़ दें तो अपने व्यक्तिगत जीवन का उल्लेख लगभग नहीं किया है। वस्तुतः दादूपन्थ के सन्त चैनजी की लिखी 'गोरख जनमलीला' ही एकमात्र सबसे पुराना लिखित स्रोत है जिसमें गोरखनाथ की जीवनकथा दी गई है। नाथ-सिद्धों की परम्परा में गोरखनाथ के बारे में जो कुछ श्रुतियाँ पहले से मौजूद थीं, उन्हों को चैनजी ने अपनी कृति में छन्दोबद्ध कर दिया है। स्वाभाविक ही गोरखनाथ सम्बन्धी चर्चाओं का मुख्य आधार ‘गोरख जनमलीला’ रही है। लेकिन ब्रजेन्द्रकुमार सिंहल ने अपने इस ग्रन्थ में गोरख जनमलीला का अनुवाद प्रस्तुत करने के साथ-साथ उसमें वर्णित प्रमेय को विभिन्न ऐतिहासिक पुरातात्त्विक और अन्यान्य साक्ष्यों के साथ रखकर तथ्यगत प्रामाणिकता स्थापित करने का स्तुत्य कार्य किया है। इस प्रकार यह पुस्तक गुरु गोरखनाथ के व्यक्तित्व और कृतित्व से सांगोपांग रूप से परिचित कराती है। साथ ही नाथ-परम्परा, उसके विपुल साहित्य तथा उसकी सुदीर्घ शिष्य-परम्परा और उस परम्परा के अवदान का यथोचित उल्लेख करते हुए एक समग्र परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करती है।
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‘महायोगिराज गोरखनाथ’ नाथपन्थ की अनन्य विभूति गुरु गोरखनाथ का शोधपूर्ण, विस्तृत और अद्यतन जीवन चरित्र है। भारत की अनेक विभूतियों की तरह, गोरखनाथ के भी कृतित्व और कीर्ति से जनसामान्य जितना परिचित है, उतना उनके व्यक्तिगत जीवन से नहीं। गोरखनाथ ने भी, अगर उनके द्वारा ‘काफिर-बोध’ में दिए गए कुछ संकेतों को छोड़ दें तो अपने व्यक्तिगत जीवन का उल्लेख लगभग नहीं किया है। वस्तुतः दादूपन्थ के सन्त चैनजी की लिखी 'गोरख जनमलीला' ही एकमात्र सबसे पुराना लिखित स्रोत है जिसमें गोरखनाथ की जीवनकथा दी गई है। नाथ-सिद्धों की परम्परा में गोरखनाथ के बारे में जो कुछ श्रुतियाँ पहले से मौजूद थीं, उन्हों को चैनजी ने अपनी कृति में छन्दोबद्ध कर दिया है। स्वाभाविक ही गोरखनाथ सम्बन्धी चर्चाओं का मुख्य आधार ‘गोरख जनमलीला’ रही है।
लेकिन ब्रजेन्द्रकुमार सिंहल ने अपने इस ग्रन्थ में गोरख जनमलीला का अनुवाद प्रस्तुत करने के साथ-साथ उसमें वर्णित प्रमेय को विभिन्न ऐतिहासिक पुरातात्त्विक और अन्यान्य साक्ष्यों के साथ रखकर तथ्यगत प्रामाणिकता स्थापित करने का स्तुत्य कार्य किया है। इस प्रकार यह पुस्तक गुरु गोरखनाथ के व्यक्तित्व और कृतित्व से सांगोपांग रूप से परिचित कराती है। साथ ही नाथ-परम्परा, उसके विपुल साहित्य तथा उसकी सुदीर्घ शिष्य-परम्परा और उस परम्परा के अवदान का यथोचित उल्लेख करते हुए एक समग्र परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करती है।
Book Details
-
ISBN9788119989195
-
Pages776
-
Avg Reading Time26 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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