Channabasavanna : Gyan Ki Nidhi
(0)
Author:
Kashinath AmbalgePublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality₹
300
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Available
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छोटा होने से क्या हुआ? या बड़ा होने से?</p> <p>ज्ञान के लिए क्या छोटे-बड़े में अन्तर है?</p> <p>आदि-अनादि से पूर्व, अंडांड</p> <p>ब्रह्मांड कोटि के उत्पन्न होने से पूर्व</p> <p>गुहेश्वर लिंग में तुम ही अकेले एक महाज्ञानी</p> <p>दिखाई पड़े, देखो जी, हे चन्नबसवण्णा!</p> <p> </p> <p>भक्त को शान्तचित्त रहना चाहिए</p> <p>अपनी स्थिति में सत्यवान रहना चाहिए</p> <p>सबके हित में वचन बोलना चाहिए</p> <p>जंगम में निन्दा रहित होकर</p> <p>सभी प्राणियों को अपने समान मानना चाहिए</p> <p>तन मन धन, गुरु लिंग जंगम के लिए समर्पित करना चाहिए।</p> <p>अपात्र को दान न देना चाहिए</p> <p>सभी इन्द्रियों को अपने वश में रखना चाहिए</p> <p>यही पहला आवश्यक वृतनेम है देखो</p> <p>लिंग की पूजा कर प्रसाद पाने के लिए यही मेरे लिए साधन है।
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छोटा होने से क्या हुआ? या बड़ा होने से?</p>
<p>ज्ञान के लिए क्या छोटे-बड़े में अन्तर है?</p>
<p>आदि-अनादि से पूर्व, अंडांड</p>
<p>ब्रह्मांड कोटि के उत्पन्न होने से पूर्व</p>
<p>गुहेश्वर लिंग में तुम ही अकेले एक महाज्ञानी</p>
<p>दिखाई पड़े, देखो जी, हे चन्नबसवण्णा!</p>
<p> </p>
<p>भक्त को शान्तचित्त रहना चाहिए</p>
<p>अपनी स्थिति में सत्यवान रहना चाहिए</p>
<p>सबके हित में वचन बोलना चाहिए</p>
<p>जंगम में निन्दा रहित होकर</p>
<p>सभी प्राणियों को अपने समान मानना चाहिए</p>
<p>तन मन धन, गुरु लिंग जंगम के लिए समर्पित करना चाहिए।</p>
<p>अपात्र को दान न देना चाहिए</p>
<p>सभी इन्द्रियों को अपने वश में रखना चाहिए</p>
<p>यही पहला आवश्यक वृतनेम है देखो</p>
<p>लिंग की पूजा कर प्रसाद पाने के लिए यही मेरे लिए साधन है।
Book Details
-
ISBN9789389742039
-
Pages13
-
Avg Reading Time0 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: विश्व का कल्याण करने वाले महापुरुषों में भगवान् महावीर का नाम बड़े सम्मान एवं श्रद्धा के साथ लिया जाता है। उनका संपूर्ण जीवन मानव-समाज के लिए आदर्श है। राजवंशी होकर भी उन्होंने समस्त सांसारिक यश-वैभव का परित्याग कर अत्यंत साधारण जीवन व्यतीत करने का संकल्प लिया। भगवान् महावीर ने कठिन साधना व तप के बल पर समस्त इंद्रियों को विजित कर लिया था। इसी कारण उन्हें 'जितेंद्रिय' कहा गया। वे धैर्य, क्षमा, संयम और सहनशीलता की साक्षात् प्रतिमूर्ति थे। भगवान् महावीर आजीवन लोगों को सत्य, अहिंसा और सदाचरण का उपदेश देते रहे। उनके जीवन का प्रमुख उद्देश्य ही 'अहिंसा परमो धर्मः' था। आज भी उनका जीवन-दर्शन संपूर्ण विश्व-समाज के कल्याण हेतु अनुकरणीय है। भगवान् महावीर स्वामी की प्रेरक व पठनीय जीवनी।
Hindu Dharma And Sanskriti
- Author Name:
Dr. Sadanand Damodar Sapre
- Book Type:

- Description: DHARMA and RELIGION are altogether different conceptions. Even as per the Oxford dictionary, ‘DHARMA’ means “eternal law of Universe” whereas ‘RELIGION’ means “a particular way of worship and faith.” All of these rules, laws etc. [pertaining to Dharma] have been observed, understood and realised by the people known as Hindu and hence Dharma is known as Hindu Dharma. However, these rules-laws etc. are applicable to every human being (Manav) all over the world (Vishwa), not confined only to Hindus. Hence, Hindu Dharma is Manav Dharma or Vishwa Dharma – the global ethics applicable to the entire humankind. If we look at the things which are considered as very sacred/pious in Hindu Dharma, it can be seen that each one of them possesses special qualities which are quite unique and useful for humankind. The Hindu Sanskriti has a special feature of wishing the well-being of ALL human beings (not just Hindus).
Swami Ramtirth Ke Prerak Vichar
- Author Name:
Anil Kumar
- Book Type:

- Description: "स्वामी रामतीर्थ एक महान तत्वज्ञानी और धर्मोपदेशक थे। उनका जन्म 2 अक्तूबर, 1873 को पंजाब के गुजराँवाला जिले के मुरारीवाला गाँव में हुआ था। सन् 1901 में स्वामी रामतीर्थ ने संन्यास का व्रत ले लिया और भगवा धारण करके निकल पड़े। संन्यास धारण करने के बाद वे दुनिया भर में वेदांत का प्रचार करने की तैयारी में जुट गए। उन्होंने शास्त्रों और पश्चिमी दर्शन का गहन अध्ययन किया। वेदांत का प्रचार करने के उद्देश्य से सन् 1902 में स्वामी रामतीर्थ जापान गए। स्वामी रामतीर्थ अद्वैत वेदांत को अत्यंत सरल करके जनमानस के समक्ष इस तरह से रखा कि साधारण बुद्धिवाला व्यक्ति भी उससे लाभान्वित हो सके। उन्होंने मनुष्य को त्याग, आत्मविश्वास, कर्म, निष्ठा, निर्भयता, दृढ़ता, एकता और विश्व-प्रेम की व्यावहारिक शिक्षा देकर सत्य और मुक्ति का मार्ग दिखाया। स्वामी रामतीर्थ का संपूर्ण जीवन एवं उनके विचार मानव-जाति के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं, जिसकी सहायता से मानव अपने जीवन-लक्ष्य की ओर आगे बढ़ सकते हैं।"
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