Channabasavanna : Gyan Ki Nidhi
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Author:
Kashinath AmbalgePublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality₹
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छोटा होने से क्या हुआ? या बड़ा होने से?</p> <p>ज्ञान के लिए क्या छोटे-बड़े में अन्तर है?</p> <p>आदि-अनादि से पूर्व, अंडांड</p> <p>ब्रह्मांड कोटि के उत्पन्न होने से पूर्व</p> <p>गुहेश्वर लिंग में तुम ही अकेले एक महाज्ञानी</p> <p>दिखाई पड़े, देखो जी, हे चन्नबसवण्णा!</p> <p> </p> <p>भक्त को शान्तचित्त रहना चाहिए</p> <p>अपनी स्थिति में सत्यवान रहना चाहिए</p> <p>सबके हित में वचन बोलना चाहिए</p> <p>जंगम में निन्दा रहित होकर</p> <p>सभी प्राणियों को अपने समान मानना चाहिए</p> <p>तन मन धन, गुरु लिंग जंगम के लिए समर्पित करना चाहिए।</p> <p>अपात्र को दान न देना चाहिए</p> <p>सभी इन्द्रियों को अपने वश में रखना चाहिए</p> <p>यही पहला आवश्यक वृतनेम है देखो</p> <p>लिंग की पूजा कर प्रसाद पाने के लिए यही मेरे लिए साधन है।
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छोटा होने से क्या हुआ? या बड़ा होने से?</p>
<p>ज्ञान के लिए क्या छोटे-बड़े में अन्तर है?</p>
<p>आदि-अनादि से पूर्व, अंडांड</p>
<p>ब्रह्मांड कोटि के उत्पन्न होने से पूर्व</p>
<p>गुहेश्वर लिंग में तुम ही अकेले एक महाज्ञानी</p>
<p>दिखाई पड़े, देखो जी, हे चन्नबसवण्णा!</p>
<p> </p>
<p>भक्त को शान्तचित्त रहना चाहिए</p>
<p>अपनी स्थिति में सत्यवान रहना चाहिए</p>
<p>सबके हित में वचन बोलना चाहिए</p>
<p>जंगम में निन्दा रहित होकर</p>
<p>सभी प्राणियों को अपने समान मानना चाहिए</p>
<p>तन मन धन, गुरु लिंग जंगम के लिए समर्पित करना चाहिए।</p>
<p>अपात्र को दान न देना चाहिए</p>
<p>सभी इन्द्रियों को अपने वश में रखना चाहिए</p>
<p>यही पहला आवश्यक वृतनेम है देखो</p>
<p>लिंग की पूजा कर प्रसाद पाने के लिए यही मेरे लिए साधन है।
Book Details
-
ISBN9789389742039
-
Pages13
-
Avg Reading Time0 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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