Colombo Se Almora Tak "कोलंबो से अल्मोड़ा तक" | Inspirational Talks on Dharma & Philosophy | Swami Vivekananda Book in Hindi
Author:
Swami VivekanandPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality0 Ratings
Price: ₹ 240
₹
300
Available
"उन्तालिश वर्ष के संक्षिप्त जीवनकाल में स्वामी विवेकानंद जो काम कर गए, वे आनेवाली अनेक शताब्दियों तक पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे। उनका विश्वास था कि पवित्र भारतवर्ष धर्म एवं दर्शन की पुण्यभूमि है। यहाँ बड़े-बड़े महात्माओं तथा ऋषियों का जन्म हुआ यही संन्यास एवं त्याग की भूमि है तथा यहीं, केवल यहीं आदिकाल से लेकर आज तक मनुष्य के लिए जीवन के सर्वोच्च आदर्श अवस्थित हैं एवं मुक्ति का द्वार खुला हुआ है।
उनके कथन—'उठो, जागो, स्वयं जगकर औरों को जगाओ। अपने नर-जन्म को सफल करो और तब तक रुको नहीं, जब तक कि लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।' पर अमल करके व्यक्ति अपना ही नहीं, सार्वभौमिक कल्याण कर सकता है।
‘कोलंबो से अल्मोड़ा' तक इस पुस्तक में स्वामीजी ने भारत सहित देश-विदेश में वेदांत धर्म और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार हेतु देश भर के युवकों का आह्वान किया है। उन्होंने भारतीय समाज में गहरे पैठी असमानता की भावना के प्रति लोगों को सचेत किया है।
आत्मिक उन्नयन का पथ प्रशस्त करके मानव जीवन की सार्थकता को सिद्ध करने की प्रेरणा देती पठनीय पुस्तक ।"
ISBN: 9789355627520
Pages: 144
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
In Service Of Sai
- Author Name:
Dr. Suresh Haware
- Book Type:

- Description: The opportunity of service of Sai Baba came into my life as a divine blessing. As a result, my life was completely transformed. Earlier, I rarely visited Shirdi. During this Period, I visited no other Place but Shirdi. I did not think about Sai Baba very often before. During this period, I thought about nothing other than sai. My feet would always yearn to go to Shirdi
Mathura ke Chaturvedi
- Author Name:
Heramb Chaturvedi
- Book Type:

- Description: माथुर-चतुर्वेदी' 'प्रारम्भिक आर्य' थे, जिन्होंने इस भारत-भूमि को आबाद किया था। उन्होंने अपने बौद्धिक, सांस्कृतिक सैन्य एवं राजनीतिक श्रेष्ठता के चलते, न केवल अपने प्रभुत्व की स्थापना की थी, अपितु, अपनी संस्कृति को भारत में प्रचलित करके अग्रणी संस्कृति और, अन्ततः, प्रभावी या मुख्य-धारा की संस्कृति के रूप में स्थापित कर दिया! हालांकि, उन्होंने उस भूमिका से अपने प्रभुत्व की स्थापना भारत में की थी, जिसे हम बाद के कालों में 'ब्रह्म-क्षत्रिय' की भूमिका के रूप में चिन्हित करते हैं, किन्तु, उनका योगदान न केवल आर्य संस्कृति का प्रचार-प्रसार था, अपितु, उस संस्कृति के ग्रन्थों की रचना का भी था! अतः, वे 'पुरोहित-राजन' की भूमिका में ही दिखाई देते हैं। मनु-उत्तर काल में समाज के सर्वोच्च पद पर प्रतिष्ठित हुए, क्योंकि, वे अपने हाथ से न्यायविद की भूमिका नहीं जाने देना चाहते थे। ये वही लोग थे, जो टेथिस सागर के समापन पर उभरे नवीन स्थल पर आर्य संस्कृति के प्रथम प्रचारक थे!
Morning Musings Sutras for Success & Happiness
- Author Name:
Mahendra Ranga
- Book Type:

- Description: Most of us are trying to make sense of life. ‘Morning Musings’ is author’s framework for handling both professional and private life. It is distilled experience of a perceptive observer. The book contains life lessons in the form of sutras. These lessons have been explained in a simple but lucid manner. The author has used Indian similes to provide the context. The book will help us resolve many a conundrums of life.
Islam Mein Dharmik Chintan Ki Punarrachna
- Author Name:
Mohd. Ikbal
- Book Type:

-
Description:
‘इस्लाम में धार्मिक चिन्तन की पुनर्रचना’ डॉ. मुहम्मद इक़बाल के उन महत्त्वपूर्ण अंग्रेज़ी व्याख्यानों का अनुवाद है जिन्हें उन्होंने मद्रास मुस्लिम एसोसिएशन के निवेदन पर तैयार किया था। ये व्याख्यान दिसम्बर, 1928 के अन्त में मद्रास और जनवरी, 1929 में हैदराबाद और अलीगढ़ में दिए गए थे।
यूरोपीय भाषाओं—जर्मन, फ़्रेंच, इतालवी तथा एशियाई भाषाओं—उर्दू, अरबी, फ़ारसी और तुर्की में इन व्याख्यानों के अनुवाद बहुत पहले हो चुके हैं। ज़रूरत थी कि दक्षिण-पूर्व एशिया की प्रमुख भाषा हिन्दी में भी इनका अनुवाद हो ताकि हिन्दीभाषी पाठक अपने दिक और काल में इस्लाम में धार्मिक चिन्तन के स्वरूप को समझने तथा इसकी पुनर्रचना के इस सबसे आधुनिक एवं समर्थ प्रयास से न केवल परिचित हो सकें, बल्कि इस्लाम में धार्मिक चिन्तन को लेकर फैलाए जा रहे प्रभावों से मुक्त होकर एक समुचित दृष्टिकोण अपना सकें।
इस पुस्तक से एक बार पुनः भारतीय दर्शन की अनेक गंगा-जमुनी समस्याओं का समाधान हो सके, इसी विश्वास के साथ एक विस्तृत परिदृश्य को रेखांकित किया गया है ताकि पाठकों एवं चिन्तकों को न केवल इक़बाल की मनोभूमि का पता चल सके, बल्कि इस्लामी चिन्तन की गहरी अर्थवत्ता और व्यापक मानवीयता का भी बोध हो सके।
Ramkatha In Indian Language
- Author Name:
Yogendra Pratap Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Shri Hanuman Chalisa Rahasy
- Author Name:
Shailesh Tiwari
- Rating:
- Book Type:

- Description: Book
Hindu Dharma : Jeevan Mein Sanatan Ki Khoj
- Author Name:
Vidhyaniwas Mishra
- Book Type:

-
Description:
‘हिन्दू धर्म : जीवन में सनातन की खोज’ पुस्तक में हिन्दू धर्म-दर्शन पर विवेचनापूर्ण विचारों का संकलन किया गया है। इसमें हिन्दू धर्म की व्याख्या नहीं है, बल्कि विद्यानिवास जी के भीतर उमड़ रही सोच की साफ़-सुथरी अभिव्यक्ति है। सनातनता का हिन्दू धर्म के सन्दर्भ में यहाँ परम्परागत अर्थ नहीं है। यह तो एक खोज है, सत्य का अन्वेषण है, जिसे निरन्तर जारी रहना है।
यह पुस्तक उन सभी को सम्बोधित है, जो कहीं मन में यह पीड़ा पाले हुए हैं कि ऐसा हिन्दू होने से क्या हुआ, जो हमें मुसलमान कवि रसखान की अहीर की छोहरी न बना सका, जिसकी छछिया भर छाछ पर पूरी विश्व-सत्ता, पूरा विश्व-रससम्भार और पूरा विश्व-चैतन्य नाचने को बाध्य हो गया।
हिन्दू धर्म का उदात्त भाव, समन्वय की क्षमता, उदारता से भरा-पूरा विराट स्वरूप ही मनुष्य के जीवन को आलोकमय बनाने के साधन हैं। यह पुस्तक सभी के लिए प्रीतिकर प्रमाणित होगी।
Amazing Astro Science
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
- Book Type:

- Description: Amazing Astro Science is the must-read book for anyone interested in space exploration and the latest developments in astronomy. Written by renowned astrophysicist Dr. Sanjay, this comprehensive guide provides readers with an in-depth look into the fascinating world of space science. From the history of astronomy to the latest discoveries in star formation and black holes, this book covers it all. Readers will gain an understanding of the fundamentals of astrophysics and the technology used to explore the outer reaches of the universe. With its easy-to-understand explanation of complex topics and its stunning visuals, Amazing Astro Science is both a captivating and educational read. Whether you’re a student of astronomy, a casual hobbyist, or just curious about the universe, this book will provide readers with a wealth of knowledge and insight.
Harihargita
- Author Name:
Ashok Kumar Sharma
- Book Type:

- Description: आत्मा य : केवलः स्वस्थः शान्तः सूक्ष्मः सनातनः। अस्ति सर्वान्तरः साक्षाच्चिन्मात्रस्तमसः पर:॥ यह आत्मा केवल स्वस्थ, शान्त, सूक्ष्म, सनातन, सभी में विद्यमान परमात्मा के गुणों समान अर्थात् विकारहीन चेतना के रूप में, परमात्मा का प्रतीक अंश ही है और अज्ञान अर्थात् बुरी प्रवृत्तियों से परे है।
Yamgita
- Author Name:
Ashok Kumar Sharma
- Book Type:

- Description: मृत्यु के देवता माने गए यमराज के उपदेशों पर आधारित यमगीता है। कठोपनिषद्, विष्णु पुराण तथा अग्नि पुराण में उपलब्ध यमगीता किसी को भी अज्ञात के भय, भविष्य की चिन्ता और मृत्यु के आतंक से मुक्त करने वाला ग्रंथ है। गीताओं में प्राय: सृष्टि और परमात्मा के रहस्यों की बातें प्रमुख होती हैं, लेकिन यह ग्रंथ जीवन में निराशा से बचने और निरन्तर उन्नति करने के जटिल सिद्धान्त सरल भाषा में बताता है। दुखों-कष्टों एवं असफलताओं से बचने के लिए आध्यात्मिक सिद्धान्तों का भी वर्णन इस गीता में है। इस ग्रंथ में तीन यमगीताओं के सार के साथ ही इनके आधुनिक सन्दर्भ भी हैं।
Vishwa Vandya Vivekananda
- Author Name:
Triloki Nath Sinha
- Book Type:

- Description: स्वामी विवेकानंदजी ने विश्व धर्म संसद् में अपने उद्बोधन से प्रतिनिधियों सहित सभी श्रोताओं की हृद्तंत्री को ऐसा झनझनाया कि वहाँ 17 दिन की सभा में आयोजकों को उन्हें 5 दिन बोलने का अवसर देना पड़ा। भारत के उस अंधकारपूर्ण युग में स्वामी विवेकानंदजी ने भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने व सम्मान दिलाने का अत्यंत महत्त्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने इस संपूर्ण भूमंडल में भारत की श्रेष्ठता की पहचान सर्वत्र करा दी। उन्होंने अपने गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंसजी के दिव्य संदेश को विश्व में प्रचारित करने के साथ ही ‘नर सेवा—नारायण सेवा’ का एक अभिनव सूत्र धर्मप्रिय लोगों व संन्यासियों को देकर श्रीरामकृष्ण आश्रम की स्थापना करके उस सूत्र को व्यवहार में लाने का माध्यम प्रस्तुत कर दिया। स्वामी विवेकानंदजी के जीवन तथा विचारों से संबंधित विपुल साहित्य प्रकाशित हो चुका है, तथापि उनका विस्तृत समस्त विवरण इस छोटी सी पुस्तक के रूप में भारत के समाज-बंधुओं, विशेषकर नवयुवकों एवं विद्यार्थियों के लिए सुलभ कराने का प्रयत्न किया गया है। उनके विचारों को अधिकाधिक उन्हीं के शब्दों में उद्धृत करने का भरसक प्रयास किया गया है, जो उनकी उपलब्ध जीवनियों, पुस्तकालयों, पत्रिकाओं एवं विद्वानों के उद्धरणों से प्रयत्नपूर्वक ढूँढ़कर निकाले गए हैं। विश्व के जनमानस को उद्वेलित करनेवाले तथा दरिद्र नारायण की सेवा का मार्ग प्रशस्त करनेवाले स्वामी विवेकानंद की प्रेरणादायी जीवनी।
Dharamsatta Aur Pratirodh Ki Sanskriti
- Author Name:
Rajaram Bhadu
- Book Type:

-
Description:
कभी धर्म राजनीतिक सत्ता के बावजूद पूर्ण स्वायत्त था। मध्यकालीन भारत में धर्म अपनी स्वायत्तता की रक्षा के लिए सैन्य-संघर्ष तक पर उतारू हो जाता था। मौजूदा दौर में राजनीति धर्म की पारम्परिक सत्ता पर क़ब्ज़ा कर उसे अपनी सफलता की सीढ़ी बनाना चाहती है। पिछले दो दशकों से धर्म इसीलिए बौद्धिक विमर्श के केन्द्र में रहा है। अतः धर्म-सत्ता में आई विकृति के अध्ययन में अन्य अनुशासनों के विचारकों के तत्पर होने की आवश्यकता बनती है कि धार्मिक टकराव के कारण क्या हैं? क्या इसका कारण धर्म के बाहर है या धर्म के भीतर?
बहुदेववादी हिन्दू धर्म की सत्ता कभी केन्द्रीकृत नहीं रही, जबकि एकेश्वरवादी इस्लाम, ईसाइयत, यहूदी, पारसी धार्मिक सत्ता केन्द्रीकृत रही। इस अन्तर के बावजूद सबमें उभयबिन्दु यह है कि सभी धर्म महत् तत्त्व, सुप्रीम बीइंग, में आस्था रखते हैं। धर्म ने स्वयं को दर्शन और सामाजिक कर्तव्यशास्त्र से जोड़ा, इसलिए उसका असर मनुष्य के समस्त ज्ञान-विज्ञान, साहित्य और कलाओं में दिखता है। अपने यहाँ धर्मनिरपेक्षता पर अधिक अध्ययन हुए, धर्म उपेक्षित रह गया। धर्मनिरपेक्षता के प्रवर्तक होली ओक ने 1860 में कहा था, “धर्मनिरपेक्षतावाद न तो धर्मशास्त्र की उपेक्षा करता है, न उसकी स्तुति करता है और न उसे अस्वीकार करता है।” इसीलिए लेखक ने धर्म-निषेध वाले नज़रिए के बजाय धर्म की स्वीकार्यता को प्रस्थान-बिन्दु बनाया है।
प्रकृतिदेव से शुरू हुई अवधारणा ईश्वर के रूप में विकसित हुई। बीसवीं सदी में ईश्वर की अवधारणा क्या है? कहाँ तक विकसित हुई? हिन्दू धर्म के संजाल में पीठ, आश्रम, मठ, धामों के बाद हिन्दू अध्यात्म के नए केन्द्र और नए पैग़म्बर कौन-कौन से हैं? नई धर्म-सत्ता का बाज़ार से क्या रिश्ता है? हिन्दू धर्म सिकुड़ या फैल रहा है? बहुदेववादी हिन्दू धर्म अनुदारता, धार्मिक कट्टरता और बर्बरता की राह पर कैसे चलने लगा? आज हिन्दू धर्म के सम्बन्ध इस्लाम, बौद्ध, जैन और ईसाइयत से तनावपूर्ण हैं। यह तनाव हमारे वृहत्तर समाज के ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर देगा। ऐसे में हिन्दू धर्म के लिए आत्म-परीक्षण का ही मार्ग बचता है। हिन्दू धर्म, उसके सम्प्रदायों, धर्मों के पारस्परिक सम्बन्ध, अद्यतन धार्मिक विकास के विस्तृत विवरणों और विश्लेषण से सजी यह पुस्तक प्रखर आलोचक और समाज-अध्येता राजाराम भादू का गम्भीर प्रयास है। पाठक आस्थावादी हों या अनास्थावादी, यह दोनों के लिए ज़रूरी किताब है।
—अरुण प्रकाश।
Magh Mela
- Author Name:
Vincent Van Ross +2
- Book Type:

- Description: This might come as a surprise to many readers. But, this is indeed the very first book on Magh Mela. As of now, the only book relevant to Magh Mela that is available in the market is a reproduction of the chapter on Magh Mahatmaya appearing in Padma Purana. But, that is purely mythological in content and does not deal with many aspects of the Magh Mela as it plays out in Allahabad. Everybody has heard of Kumbh Mela. But, how many of us have heard of Magh Mela? Does it surprise you to learn that Kumbh Mela is nothing but Magh Mela that is celebrated every twelfth year and Ardh Kumbh is nothing but the sixth Magh Mela celebrated between two Kumbh Melas? In other words, a mini version of the Kumbh Mela is celebrated in Allahabad year after year in the form of Magh Mela which goes almost unnoticed and unreported outside of Allahabad and Uttar Pradesh. Magh Mela is an incredible annual phenomenon in Allahabad (Prayag) from time immemorial. It is a monthlong Hindu festival that is celebrated in the month of Magh at Sangam or the confluence of rivers Ganga, Yamuna and the mythical river Saraswati. Magh Mela is marked by (snan) ritual bathing and taking up temporary residence near Sangam in the month Magh and leading an austere life devoted to prayers and rituals (kalpavas) according to their vows. The month of Magh begins with Paush Purnima and ends with Magh Purnima. But, the Magh Mela begins on Makkar Sankranti or Paush Purnima (whichever is earlier) and ends with Maha Shivaratri because of administrative reasons. Lord Vishnu is the presiding deity of Allahabad as well as the month of Magh which is considered to be the most auspicious month for Hindus. Allahabad is also known as Tirthraj Prayag. In other words, Allahabad is the king of pilgrimage sites for Hindus. Separate chapters are devoted to the most auspicious months of the Hindu calendar in the Puranas in the form of Vaishak Mahatmaya, Kartik Mahatmaya and Magh Mahatmaya explaining the significance of each month. The most important ritual for Vaishak is charity (daan). Similarly, the main ritual for Kartik is offerings in the form of earthen lamps (deep daan); and, the main ritual for Magh is ritual bathing (snan). Therefore, Magh Mela is essentially a bathing festival coupled with kalpavas. And, Tirthraj Prayag is the sacred land that has been designated for Magh Mela by Hindu scriptures. That is the secret of Magh Mela.
Rigved : Mandal-3, 4 & 5
- Author Name:
Govind Chandra Pandey
- Book Type:

-
Description:
वेद सनातनविद्या के काव्यात्मक प्रतिपादन हैं। ऋग्वेद संहिता के अनुवाद एवं व्याख्या का प्रयास अनेक भाषाओं में समय-समय पर होता रहा है, किन्तु अभी तक उपलब्ध सभी अनुवादों में काव्यपक्ष की उपेक्षा अथवा पद्यानुवाद की प्रस्तुति के असम्भव प्रयास ही किए गए हैं जो ऋचाओं के साथ पूरा न्याय नहीं करते हैं। वेदों में भावों की सनातनता एक व्यापक ध्वनि के रूप में सूक्तों, संवादों और आख्यानों में विद्यमान है। प्रस्तुत अनुवाद में पादानुसारी किन्तु भावपरक अनुवाद पर विशेष आग्रह सोद्देश्य है ताकि ऋचाओं की काव्यात्मकता का यथासम्भव सम्प्रेषण एवं मूल की अर्थयोजना का क्रम अनुवाद में सुरक्षित रहे।
भाषान्तर में व्याख्या का सूक्ष्म प्रकार अनिवार्य होता है और वही अनुवाद का वर्तमान और अतीत के मध्य संवाद बनाकर बहुत कुछ को परम्परा में जीवित तथा प्रगतिशील रखता है। अतः ग्रन्थ में अनुवाद के लिए उपयुक्त भाषा, पुरातन ध्वनि बहुलता और समसामयिक सजीवता के संरक्षण की दृष्टि से तत्सम, तद्भव एवं देशी शब्दों के समन्वित प्रयोग किए गए हैं। साथ ही, गम्भीर और बहुमुखी अर्थों को स्पष्ट करने के लिए क्रियापदों के अनुवाद, दुरूह पदों के अर्थनिर्वचन में धातुपाठ, निरुक्त की पद्धति एवं आधुनिक तथा तुलनात्मक व्याकरण के अनुसरण से सहायता ली गई है।
वेद आर्षकाव्य के निर्देशन के साथ-साथ अध्यात्मगवेषियों के मार्गदर्शक भी हैं। अतः ऋचाओं में संश्लिष्ट आधियाज्ञिक, आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक अर्थों को उद्घाटित करने का प्रयास किया गया है। व्याख्याकारों में जहाँ विवाद की स्थिति है, वहाँ प्राचीन एवं नवीन दोनों ही मतों का विवेचन प्रस्तुत किया गया है। इस प्रकार काव्यात्मक पक्ष की प्रस्तुति, निगूढ़ अर्थ के आयामों का विश्लेषण और विवादित स्थलों का तुलनात्मक विवेचन इस ग्रन्थ के अनुवाद एवं व्याख्या की अभीसिप्त विशेषताएँ हैं।
इस खंड में ‘ऋग्वेद’ के तीसरे, चौथे एवं पाँचवें मंडल का व्याख्या सहित हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया गया है।
Bhartiya darshan : saral Parichaya
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description: भारत जैसे बहुभाषी, सामासिक समाज में राष्ट्रीय मानस को समझने के लिए भारतीय दर्शन का अनुशीलन आवश्यक है। यह और भी जरूरी है क्योंकि भारतीय दर्शन की एक सुदीर्घ परंपरा रही है। इसमें आस्था, विश्वास, अंधविश्वास, धर्म जैसे अवयव भी घुले-मिले हैं। मोटे तौर पर दर्शन में दो परस्पर विरोधी धाराएँ तो सक्रिय रही ही हैं। विविधता इतनी विपुल है कि कुछ पंक्तियों में भारतीय दर्शन को परिभाषित करना कठिन है। इसीलिए तर्कसंगत, वैज्ञानिक, दार्शनिक दृष्टिकोण का विकास जरूरी हो जाता है। हम अक्सर अपने दार्शनिक सिद्धांतों, प्राचीन संस्कृति और सभ्यता के प्रति मोहवादी अतिवाद के शिकार हो जाते हैं। पुस्तक के लेखक विख्यात मनीषी देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय ने इस संदर्भ में न केवल संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है बल्कि जहाँ आवश्यक हुआ, वहाँ अवैज्ञानिक और अतार्किक मान्यताओं का खंडन भी किया है। दर्शन हवा में नहीं बल्कि यथार्थ के ठोस धरातल पर जन्म लेते हैं। देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय भारतीय आदर्शवाद तथा मायावाद के पीछे सक्रिय सामाजिक शक्तियों, कर्मवाद के बजाय परलोकवाद का पाठ पढ़ानेवाले निहित स्वार्थों और भारतीय विज्ञान के विकास में बाधा बननेवाले हितों पर विमर्श करते हैं तथा वहीं सकारात्मक शक्तियों को चिह्नित भी करते हैं। इस तरह पुस्तक में भारतीय दर्शन सही परिपे्रक्ष्य में उपस्थित होता है। 'भारतीय दर्शन : सरल परिचय न केवल सामान्य बल्कि सुविज्ञ पाठकों के लिए बहुविध उपयोगी पुस्तक है।
Nath Sampraday
- Author Name:
Hazariprasad Dwivedi
- Book Type:

- Description: र्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ऐसे वांड़्मय-पुरुष हैं जिनका संस्कृत मुख है, प्राकृत बाहु है, अपभ्रंश जघन है और हिन्दी पाद है। नाथ सिद्धों और अपभ्रंश साहित्य पर उनके शोधपरक निबन्ध पढ़ते समय मन की आँखों के सामने उनका यह रूप साकार हो उठता है। ‘नाथ सम्प्रदाय’ में गुरु गोरखनाथ के लोक-संपृक्त स्वरूप का उद्घाटन किया गया है। स्वयं द्विवेदी जी के शब्दों में 'गोरखनाथ ने निर्मम हथौड़े की चोट से साधु और गृहस्थ दोनों की कुरीतियों को चूर्ण-विचूर्ण कर दिया। लोकजीवन में जो धार्मिक चेतना पूर्ववर्ती सिद्धों से आकर उसके पारमार्थिक उद्देश्य से विमुख हो रही थी, उसे गोरखनाथ ने नई प्राणशक्ति से अनुप्राणित किय
Shree Ramcharitmanas
- Author Name:
Tulsidas
- Book Type:

- Description: रामचरितमानस एक चरित-काव्य है जिसमें राम का सम्पूर्ण जीवन वर्णित हुआ है। इसमें चरित और काव्य दोनों के गुण समान रूप से मिलते हैं। इस काव्य के चरितनायक कवि के आराध्य भी हैं इसलिए यह ‘चरित और ‘काव्य'होने के साथ-साथ कवि की भक्ति का प्रतीक भी है। रचना के इन तीनों रूपों में नीचे उसका संक्षिप्त विवेचन किया जा रहा है। ‘चरित’ की दृष्टि से यह रचना पर्याप्त सफल हुई है। इसमें राम के जीवन की समस्त घटनाएँ आवश्यक विस्तार के साथ एक सुसम्बद्ध रूप में कही गई हैं। रावण के पूर्वभव तथा राम के पूर्वाकार की कथाओं से लेकर राम के राज्य-वर्णन तक कवि ने कोई भी प्रासंगिक कथा रचना में नहीं आने दी है। इस सम्बन्ध में यदि वाल्मीकीय तथा अन्य अधिकतर राम कथा ग्रन्थों से रामचरितमानस की तुलना की जाए तो तुलसीदास की विशेषता प्रमाणित होगी। काव्य की दृष्टि से रामचरितमानस एक अति उत्कृष्ट महाकाव्य है। भारतीय साहित्य-शास्त्र में ‘महाकाव्य’ के जितने लक्षण दिए गए हैं वे इसमें पूर्ण रूप से पाए जाते हैं। तुलसीदास की ‘भक्ति’ की अभिव्यक्ति भी इसमें अत्यन्त विशद रूप में हुई है। अपने आराध्य के सम्बन्ध में उन्होंने रामचरितमानस और विनय-पत्रिका में अनेक बार कहा है कि उनके राम का चरित्र ही ऐसा है कि जो एक बार उसे सुन लेता है वह अनायास उनका भक्त हो जाता है। वास्तव में तुलसीदास ने अपने आराध्य के चरित्र की ऐसी ही कल्पना की है।
Jagadguru Adya Shankaracharya
- Author Name:
Shivdas Pandey
- Book Type:

- Description: "शंकराचार्य एक ऐसे शास्त्राचार्य का नाम है, जो संस्कृति-रक्षा को युद्ध मानकर शास्त्रार्थ करता है और जिसका अस्त्र-शस्त्र सबकुछ शास्त्र तथा जिसका युद्ध मात्र शास्त्रार्थ है एवं जिसकी शति हजारो-हजार वर्षों की ऋषि-प्रति-ऋषि एवं तपस्या-प्रति-तपस्या सिद्ध ज्ञान-संपदा है। वह न तो खलीफाओं की तरह युद्ध करता है और न नियोजित बोधिसवों की तरह, न ही जैसा देश, वैसा वेश, वैसा धर्म का सिका चलानेवाले ईसाई पादरियों की तरह। वह शास्त्र के शस्त्र से शास्त्रार्थ का युद्ध लड़ना जानता है—धर्म के क्षेत्र में ज्ञान तथा न्याय के निर्धारित विधानों के सर्वथा अनुरूप। यह युद्ध षड्दर्शनों तथा षड्चक्रों के साधकों के साथ-साथ इन ब्रह्मवादी शैव-दर्शन के तंत्रोन्मुख कश्मीरी शैवों से भी होता है और वह सोलह वर्षों में सभी विवादों का समाधान ढूँढ़कर वैदिक संस्कृति को पुन: स्थापित करता है। शंकराचार्य जैसा आचार्य होना, एक योगसिद्ध-ज्ञानसिद्ध तथा ध्यानसिद्ध आचार्य होना और ऐसे आचार्य का एक सिद्ध जगद्गुरु हो जाने का भी कोई विशेष अर्थ होता है। वह समय आ गया है, जब पुन: एक बार भारत को जगद्गुरु शंकराचार्य का मात्र दर्शन-चिंतन-मंथन वाला युग नहीं, वरन् भारत डॉट कॉम विश्वगुरुवाले नए युग का भी गौरवशाली जगद्गुरु पद प्राप्त होना चाहिए। भारतीय धर्म-दर्शन-संस्कृति परंपराओं के ध्वजवाहक कोटि-कोटि हृदयों के आस्थापुंज जगद्गुरु शंकराचार्य के प्रेरणाप्रद-अनुकरणीय जीवन पर केंद्रित पठनीय उपन्यास। "
Mahayogiraj Gorakhnath
- Author Name:
Brajendra Kumar Singhal
- Book Type:

- Description: ‘महायोगिराज गोरखनाथ’ नाथपन्थ की अनन्य विभूति गुरु गोरखनाथ का शोधपूर्ण, विस्तृत और अद्यतन जीवन चरित्र है। भारत की अनेक विभूतियों की तरह, गोरखनाथ के भी कृतित्व और कीर्ति से जनसामान्य जितना परिचित है, उतना उनके व्यक्तिगत जीवन से नहीं। गोरखनाथ ने भी, अगर उनके द्वारा ‘काफिर-बोध’ में दिए गए कुछ संकेतों को छोड़ दें तो अपने व्यक्तिगत जीवन का उल्लेख लगभग नहीं किया है। वस्तुतः दादूपन्थ के सन्त चैनजी की लिखी 'गोरख जनमलीला' ही एकमात्र सबसे पुराना लिखित स्रोत है जिसमें गोरखनाथ की जीवनकथा दी गई है। नाथ-सिद्धों की परम्परा में गोरखनाथ के बारे में जो कुछ श्रुतियाँ पहले से मौजूद थीं, उन्हों को चैनजी ने अपनी कृति में छन्दोबद्ध कर दिया है। स्वाभाविक ही गोरखनाथ सम्बन्धी चर्चाओं का मुख्य आधार ‘गोरख जनमलीला’ रही है। लेकिन ब्रजेन्द्रकुमार सिंहल ने अपने इस ग्रन्थ में गोरख जनमलीला का अनुवाद प्रस्तुत करने के साथ-साथ उसमें वर्णित प्रमेय को विभिन्न ऐतिहासिक पुरातात्त्विक और अन्यान्य साक्ष्यों के साथ रखकर तथ्यगत प्रामाणिकता स्थापित करने का स्तुत्य कार्य किया है। इस प्रकार यह पुस्तक गुरु गोरखनाथ के व्यक्तित्व और कृतित्व से सांगोपांग रूप से परिचित कराती है। साथ ही नाथ-परम्परा, उसके विपुल साहित्य तथा उसकी सुदीर्घ शिष्य-परम्परा और उस परम्परा के अवदान का यथोचित उल्लेख करते हुए एक समग्र परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करती है।
Sri Ramachnadra
- Author Name:
N R Navlekar +1
- Book Type:

- Description: DESCRIPTION AWAITED
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book