Bhagwan Shri Ram Ke 7 Roop
(0)
Author:
Maj. Gen. A.K. ShoriPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality₹
350
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Available
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हमारे प्राचीन ज्ञान के समृद्ध भंडार में बुद्धिमत्ता एवं ज्ञान के ऐसे अमूल्य रत्न छिपे हैं, जिनसे आज की समस्याओं को सुलझाया जा सकता है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के अपने विभिन्न रूपों में प्रत्येक मनुष्य में पुत्र, भाई, पति, योद्धा, शासक और ऋषि के रूप में अंतर्निहित हैं। इस पुस्तक में श्रीराम के ऐसे सात रंग व्याख्यायित हैं। जब सात रंगों के मधुर संगम से पूर्णता आती है, तब मनुष्य ‘पूर्ण’ मानव में परिणत होता है। राम अपने जीवन के माध्यम से ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ के रूप में प्रेरणा का स्रोत तथा आदर्श बने। इनके जीवन से अंतर्वैयक्तिक समस्याओं को सुलझाने तथा समाज को स्वर्ग सा आनंदमय एवं परिपूर्ण बनाने में मदद मिलती है। महाकाव्य रामायण के उदात्त एवं गरिमामय रूप को जानने का यह साहसिक प्रयास है। नित्यकर्म, कर्मकांड तथा बहुमूल्य विचारों को जाग्रत् करनेवाली इस पुस्तक से पाठक निश्चित ही लाभान्वित होंगे। श्रीराम का माहात्म्य बताकर सामान्य जन को भी उनके आदर्श जीवन से संवर्धित करनेवाली पठनीय कृति।
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हमारे प्राचीन ज्ञान के समृद्ध भंडार में बुद्धिमत्ता एवं ज्ञान के ऐसे अमूल्य रत्न छिपे हैं, जिनसे आज की समस्याओं को सुलझाया जा सकता है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के अपने विभिन्न रूपों में प्रत्येक मनुष्य में पुत्र, भाई, पति, योद्धा, शासक और ऋषि के रूप में अंतर्निहित हैं। इस पुस्तक में श्रीराम के ऐसे सात रंग व्याख्यायित हैं। जब सात रंगों के मधुर संगम से पूर्णता आती है, तब मनुष्य ‘पूर्ण’ मानव में परिणत होता है।
राम अपने जीवन के माध्यम से ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ के रूप में प्रेरणा का स्रोत तथा आदर्श बने। इनके जीवन से अंतर्वैयक्तिक समस्याओं को सुलझाने तथा समाज को स्वर्ग सा आनंदमय एवं परिपूर्ण बनाने में मदद मिलती है। महाकाव्य रामायण के उदात्त एवं गरिमामय रूप को जानने का यह साहसिक प्रयास है। नित्यकर्म, कर्मकांड तथा बहुमूल्य विचारों को जाग्रत् करनेवाली इस पुस्तक से पाठक निश्चित ही लाभान्वित होंगे।
श्रीराम का माहात्म्य बताकर सामान्य जन को भी उनके आदर्श जीवन से संवर्धित करनेवाली पठनीय कृति।
Book Details
-
ISBN9789351868118
-
Pages136
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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अभ्यास के उपर्युक्त क्रम में कर्म तथा कर्मफल में अनासक्ति का भाव, जगत के सुख-दुःखादि द्वंदों में समभाव, सभी जीवों में परमात्मा रूप से स्थित 'आत्मा' के एकत्व का भाव, सतत् आनन्ददायक परम सत्ता में प्रेम का भाव तथा उच्चतम आध्यात्मिक उत्कर्ष हेतु आवश्यक अन्यान्य मानवीय कल्याणकारी मूलभूत भावों व गुणों का अन्तःकरण में प्रादुर्भाव ईश्वर की अहैतुकी कृपा से सहज ही हो जाता है। इस प्रकार से प्राप्त लौकिक तथा पारलौकिक दिव्यता के प्रत्यक्ष अनुभव की अभिव्यक्ति सम्पूर्णता से वाणी द्वारा व्यक्त करना कठिन है।
Hindu Dharma Ki Dharohar : Bharatiya Sanskriti
- Author Name:
Sanjay Rai Sherpuria
- Book Type:

- Description: ‘हिंदू धर्म की धरोहरः भारतीय संस्कृति’ यह शीर्षक स्वयं में इस पुस्तक का समग्र परिचय करवा रहा है। सनातन हिंदू धर्म क्या है और किस प्रकार से यह भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि के रूप में निरंतर क्रियाशील है, यही तथ्य इस पुस्तक के आधार तत्व हैं। यज्ञ, हवन, शंख, पद्म, गाय, त्रिशूल, मंदिर, देवस्थान जैसे शब्द सनातन हिंदू वैदिक संस्कृति में ही हैं। ये केवल शब्द ही नहीं हैं बल्कि इन शब्दों के उच्चारण में ही ऐसा ध्वनित होता है कि जीवन और जीवन का रहस्य क्या है। हमारे देवी, देवता और धार्मिक प्रतीक क्या हैं? कैसे हैं? कितने महत्त्वपूर्ण हैं? क्यों हैं? स्वाभाविक है कि जिस प्रकार से समाज बदल रहा है और विश्व पटल पर अनेकानेक उपासना पद्धतियाँ जन्म ले रही हैं, ऐसे परिवेश में किसी को भी यदि हिंदू संस्कृति को जानना और समझना है तो संजय राय ‘शेरपुरिया’ की इस पुस्तक को अवश्य पढ़ना चाहिए। जिस विशिष्टता से इस पुस्तक में सनातन प्रतीकों को मोतियों की माला में पिरोया गया है, वह अद्भुत है। भारतीयता, संस्कृति और हिंदू विरासत को समझने के लिए इस पुस्तक में सभी प्रमुख तथ्य, तत्त्व और प्रतीक उपस्थित हैं। यह पुस्तक एक ऐसी कुंजिका है जो भावी पीढ़ी को अपने मूल से जोड़ने और हिंदू संस्कृति को समझने में सक्षम भूमिका का निर्वहन करेगी। सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति का वैशिष्ट्य और निरंतरता बताती पठनीय पुस्तक।
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