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Tumhari Hansi Sadaneera

In category

Poetry

Language

Hindi

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About the book

अपने बारे में क्या बताऊँ! दस सितंबर चौसठ के दिन केसली ज़िला सागर म.प्र. में पैदा हुआ। पिताजी सरकारी नौकरी में थे, उनकी देखा-देखी पढ़ने में दिलचस्पी जगी। बचपन की हर शाम खंडवा में माणिक्य वाचनालय में गुज़री। किताबें पढ़ने के अलावा कुछ किया ही नहीं मैंने। कॉलेज की पढ़ाई नरसिंहपुर में हुई। इक्कीस का होने पर बैठे-ठाले पीएससी दी और तेईस साल में सरकारी अफ़सर हो गया और फिर एक बेहद सुंदर, शिष्ट और भद्र लड़की मेरे जीवन में आई, राजेश्वरी। दो बच्चे हैं, रोहित और राधा। आजकल एडिशनल कमिश्नर एक्साइज़ मध्यप्रदेश हूँ और जीवन ठीक-ठीक बीत रहा है। अपनी लिखी कविताओं के बारे में क्या कहूँ... इनमें से अधिकांश प्रेम के आसपास रक़्स करती हैं और वह इसलिये कि प्रेम मेरे जीवन का सबसे चमकदार रंग है। ये कविताएँ सप्रयास लिखी गई रचनायें नहीं, बस मेरे अंदर ये बह निकली हैं। आप इनमें बौद्धिकता तलाशेंगे तो शायद निराश हों। ये बस प्रेम जानती हैं और उसी का प्रशस्ति गान करती हैं। मेरी कविताओं में मेरा सुंदर परिवार है, भरोसेमंद रिश्ते हैं, बचपन के दोस्त हैं, आकाश अपने नीले रंग के साथ मौजूद है और साफ़-सुथरी नदियाँ भी बहती हैं। ये उम्मीदों से भरी हैं और रोने-पीटने में भरोसा नहीं करतीं। ये ऐसी इसलिये हैं क्योंकि, ये वही कहती हैं, जो मैंने जिया है। मैं आशा करता हूँ, ये आपको भी अच्छी लगेंगी... मुकेश नेमा

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अपने बारे में क्या बताऊँ! दस सितंबर चौसठ के दिन केसली ज़िला सागर म.प्र. में पैदा हुआ। पिताजी सरकारी नौकरी में थे, उनकी देखा-देखी पढ़ने में दिलचस्पी जगी। बचपन की हर शाम खंडवा में माणिक्य वाचनालय में गुज़री। किताबें पढ़ने के अलावा कुछ किया ही नहीं मैंने। कॉलेज की पढ़ाई नरसिंहपुर में हुई। इक्कीस का होने पर बैठे-ठाले पीएससी दी और तेईस साल में सरकारी अफ़सर हो गया और फिर एक बेहद सुंदर, शिष्ट और भद्र लड़की मेरे जीवन में आई, राजेश्वरी। दो बच्चे हैं, रोहित और राधा। आजकल एडिशनल कमिश्नर एक्साइज़ मध्यप्रदेश हूँ और जीवन ठीक-ठीक बीत रहा है। अपनी लिखी कविताओं के बारे में क्या कहूँ... इनमें से अधिकांश प्रेम के आसपास रक़्स करती हैं और वह इसलिये कि प्रेम मेरे जीवन का सबसे चमकदार रंग है। ये कविताएँ सप्रयास लिखी गई रचनायें नहीं, बस मेरे अंदर ये बह निकली हैं। आप इनमें बौद्धिकता तलाशेंगे तो शायद निराश हों। ये बस प्रेम जानती हैं और उसी का प्रशस्ति गान करती हैं। मेरी कविताओं में मेरा सुंदर परिवार है, भरोसेमंद रिश्ते हैं, बचपन के दोस्त हैं, आकाश अपने नीले रंग के साथ मौजूद है और साफ़-सुथरी नदियाँ भी बहती हैं। ये उम्मीदों से भरी हैं और रोने-पीटने में भरोसा नहीं करतीं। ये ऐसी इसलिये हैं क्योंकि, ये वही कहती हैं, जो मैंने जिया है। मैं आशा करता हूँ, ये आपको भी अच्छी लगेंगी... मुकेश नेमा

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Mandrake Publications
Format
Paperback
Publisher
Mandrake Publications
Weight
120 grams
ISBN-13
9789390540846
Pages
135
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21.2 cm
Language
Hindi

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