Neerja
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महादेवी वर्मा की हिन्दी काव्य-यात्रा में परिपक्वता की दृष्टि से 'नीरजा' का महत्त्वपूर्ण स्थान है। ‘नीरजा’ में बिलकुल परिपक्व भाषा में एक समर्थ कवि बड़े अधिकार के साथ और बड़े सहज भाव से अपनी बात कहता है। महादेवी जी के अनुसार, “ ‘नीरजा’ में जाकर गीति का तत्त्व आ गया, मुझमें और मैंने मानो दिशा भी पा ली है।”
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महादेवी वर्मा की हिन्दी काव्य-यात्रा में परिपक्वता की दृष्टि से 'नीरजा' का महत्त्वपूर्ण स्थान है। ‘नीरजा’ में बिलकुल परिपक्व भाषा में एक समर्थ कवि बड़े अधिकार के साथ और बड़े सहज भाव से अपनी बात कहता है। महादेवी जी के अनुसार, “ ‘नीरजा’ में जाकर गीति का तत्त्व आ गया, मुझमें और मैंने मानो दिशा भी पा ली है।”
Book Details
-
ISBN9788180313004
-
Pages94
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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वे विचारधारा के पुल से होकर रास्ता तय करने वाले कवि नहीं हैं, बल्कि वे कविता की नदी को ख़ुद तैर कर पार करने वाले कवि हैं। कम से कम उनके लम्बे कवि-कर्म का संघर्ष यही प्रतिमान हमारे सामने रखता है। वे हिन्दी कविता के संसार में उन थोड़े से कवियों में हैं जिन्होंने चालू मुहावरे को तोड़कर अपनी कविता में संवेदना और काव्य-शिल्प के लिए अनोखा आयाम चुना है। अपनी काव्यभाषा के चुनाव में वे जितने विरल, संयमी और जागरूक कवि हैं, उतने कम ही कवि रहे हैं। यह उनकी चुनिन्दा कविताओं का संकलन है।
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