NavaeSarosh: Voices from Beyond
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"Navaa-e-Sarosh" (Voices from Beyond) presents the splendid ghazals, alongside their elegant English translations, by 10 Maestro urduPoets of Delhi whose words set hearts ablaze for the times to come. Love, with all its wine-infused passions and experiences of yearning, has preoccupied classic poets of the city. The careful curation and trans-creations render these ghazals readable to novices of classic urdupoetry. The book is a great choice for those who wish to explore the themes of love as conceptualized by classic poets. Entrepreneur, investor and mentor, Sanjiv Saraf juggles many roles, but his passion for urdupoetry is what is closest to his heart. He set up Rekhta Foundation—which hosts the world’s largest and most popular resource for the Hindustani language and literature—apart from doing extensive work for preservation of texts and propagation of the language among youth through festivals and events. An alumnus of the Scindia School (1975) and a graduate from IIT Kharagpur (1980), Sanjiv was involved in business and industry for over thirty years during which he founded Polyplex Corpn. Ltd., an Indian multinational, Manupatra, India’s leading legal database, and other ventures in the green energy space. Thereafter, he turned his energies towards the Hindustani language and is now fully involved in what he considers ‘the most satisfying work of my life, so far’. Sanjiv is a recipient of several awards and honours, including the distinguished Doctor of Letters (D. Litt.) degree by Maulana Azad National urduUniversity Hyderabad in 2016, the National Sir Syed Excellence Award 2018 by Aligarh Muslim University, the Madhav Award as an Old Boy of Eminence for the year 2020 by the Scindia School and the distinguished alumnus award from IIT Kharagpur in 2022.
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"Navaa-e-Sarosh" (Voices from Beyond) presents the splendid ghazals, alongside their elegant English translations, by 10 Maestro urduPoets of Delhi whose words set hearts ablaze for the times to come. Love, with all its wine-infused passions and experiences of yearning, has preoccupied classic poets of the city. The careful curation and trans-creations render these ghazals readable to novices of classic urdupoetry. The book is a great choice for those who wish to explore the themes of love as conceptualized by classic poets. Entrepreneur, investor and mentor, Sanjiv Saraf juggles many roles, but his passion for urdupoetry is what is closest to his heart. He set up Rekhta Foundation—which hosts the world’s largest and most popular resource for the Hindustani language and literature—apart from doing extensive work for preservation of texts and propagation of the language among youth through festivals and events. An alumnus of the Scindia School (1975) and a graduate from IIT Kharagpur (1980), Sanjiv was involved in business and industry for over thirty years during which he founded Polyplex Corpn. Ltd., an Indian multinational, Manupatra, India’s leading legal database, and other ventures in the green energy space. Thereafter, he turned his energies towards the Hindustani language and is now fully involved in what he considers ‘the most satisfying work of my life, so far’. Sanjiv is a recipient of several awards and honours, including the distinguished Doctor of Letters (D. Litt.) degree by Maulana Azad National urduUniversity Hyderabad in 2016, the National Sir Syed Excellence Award 2018 by Aligarh Muslim University, the Madhav Award as an Old Boy of Eminence for the year 2020 by the Scindia School and the distinguished alumnus award from IIT Kharagpur in 2022.
Book Details
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ISBN9780670093809
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Pages224
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Avg Reading Time7 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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आपकी ही बेटी ठहरी, इसलिए मैंने ख़ूब सोच-समझकर, जितना पता लगा सकती थी, पता लगाकर अपने स्कूल के राजीव से प्रेम किया था। वह मुझसे एक क्लास आगे है। सुन्दर और पढ़ाई में बहुत तेज़ है।
आज भी हम दोनों प्रेम के आनन्द की नदी में बहते होते, अगर उसने एक किताब में रखकर यह चिट न दी होती—‘आइ एम प्राउड दैट द मोस्ट ब्यूटीफुल गर्ल ऑन दिस अर्थ बिलांग्स टू मी।’ इसे पढ़ते ही मेरी शिराएँ तन गईं—तो राजीव भी सिर्फ़ मेरी सुन्दरता को चाहता है?
पापा, मुझे लगता है कि वे लड़कियाँ जल्दी परिपक्व हो जाती हैं, जो सामान्य से कम या सामान्य से ज़्यादा सुन्दर होती हैं। शायद दोनों ही हर काम, प्रेम भी ठोक-बजा कर यानी गणितपूर्वक करती हैं। मैं भी अपने को ऐसा ही मानती थी। पर मेरे पहले चुनाव ने ही मुझे बता दिया कि गणित भी हमेशा काम नहीं करता।
लेकिन मेरी समझ में यह नहीं आता कि अगर मुझसे ‘कुछ’ हो ही जाता है, तो उसे ‘गलती’ कहना कहाँ तक ठीक है। आपसे उम्र और बुद्धि में बहुत ही छोटी हूँ, पर आपके द्वारा दिए गए भरोसे के आधार पर ही कहना चाहती हूँ कि सोच-समझ कर किया गया कोई भी काम ‘गलती’ की श्रेणी में नहीं आ सकता। किसी काम के नतीजे अच्छे नहीं निकले, तो अपने निर्णय को क्यों कोसना। इमर्सन ने कहा है कि सभी निर्णय सीमित जानकारी के आधार पर किए जाते हैं और यह संसार असीम है। ग़लती तब है, जब अस्वीकार्य नतीजे आने के बाद भी आदमी अपने निर्णय से चिपका रहे। पापा मुझे आशीर्वाद दो कि अपना ही फ़ैसला जब मेरी त्वचा में चुभने लगे, तो मैं उससे फ्री हो सकूँ।
—आपकी बेटी राधा
(पवन करण की ‘एक ख़ूबसूरत बेटी का पिता’ कविता के सन्दर्भ में राजकिशोर के एक लेख से)
Thithak Gai Boondein
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अरविन्द कुमार सिंह की कविताओं से गुज़रते हुए हमें एक दुर्लभ संयोग दिखाई पड़ता है। एक तरफ़ उनकी भाषा में दिनकर का ओज है और दूसरी तरफ़ नागार्जुन के यहाँ दिखाई पड़ने वाली रोज़मर्रा जीवन की हलचलें। ये हजारीबाग की पहाड़ियों का सौन्दर्य है, हरिद्वार का कुम्भ स्नान है, गाँव के मेले की बिसरी हुई यादें हैं, नदियाँ हैं, शाम हैं। प्रकृति इन कविताओं में बार-बार आती है—इसके बहुत सारे रंग उनकी कविताओं में दिखाई पड़ते हैं। दूसरी तरफ़ मज़लूमों, किसानों, मज़दूरों की पीड़ा भी उनकी कविताओं में मुखर हुई है। ये कविताएँ हमारे समय, समाज, धरती और हमारे आसपास के लोगों की आकांक्षाओं, पीड़ाओं, भावनाओं का आईना बनती हैं। इनमें हम अपने समय की धड़कन को सुन सकते हैं। इनमें सौन्दर्य है, प्रकृति है, धूमिल गाँव हैं, नदियाँ हैं और उनके बीच मनुष्य का श्रम भी है और उसका समूचा सौन्दर्य भी है—जो इस धरती को सुन्दर बनाता है।
Tum Hi Main Hoon
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Kivaar
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कुमार अंबुज की कविताओं में एक तरह की ऐसी ताज़गी, सहजता और ओढ़ी हुई वैचारिक मुद्रा की अनुपस्थिति है जो उन्हें बहुत से समकालीन युवा कवियों से अलग करती है। 'किवाड़' में सामान्य परिचित वस्तुएँ और स्थितियाँ ऐसे गहरे लगाव और अभिव्यक्ति के संयम के साथ प्रस्तुत हुई हैं कि उनसे मानवीय सम्बन्धों और सच्चाइयों की सूक्ष्म अनुगूँज सुनाई पड़ती है।
—नेमिचन्द्र जैन
कुमार अंबुज के पास दृष्टि की तलाश और बोध का धरातल है और यही बात उनकी कविताओं में व्यक्त अनुभव लोक को मूर्त और सार्थक बनाती है। कवि की चिन्ताएँ ज़्यादा बड़ी हैं, उनकी जड़ें दूर तक फैली हुई हैं—अपने आसन्न परिवेश से मनुष्य के सुदूर इतिहास तक। यहाँ अपने समय के अतुकान्त जीवन के लिए तुकें ढूँढ़ने की यह रचनात्मक लड़ाई पाठक को ऐसे बिन्दु तक ले जाती है जहाँ जीवन और काव्य के बीच का पार्थक्य समाप्त हो जाता है।
—केदारनाथ सिंह
GahzaliyaateZamin
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Ghazaliyat-e-Zamin (Ghazals by Zamin) consists of works by her father, Professor S.M. Zamin Ali, that she published after his death. Professor Ali was the founder and head of the urduDepartment at Allahabad University and an illustrious poet, author, thought leader and educator. "An accomplished author, Begum Fatima Hasan (1940-1998), published six books in addition to numerous works broadcast as urduprogramming by All India Radio, Lucknow and published in popular urdumagazines. These collected works include three books of short stories: Chauthaa Shauhar (The Fourth Husband), Awaraa Bagule (Wanderer Egrets), and Gul-o-Khar (Flowers & Thorns) as well as a book of stories for children, Qabaili Kahaniyan (Tribal Tales). Two of her books, Ghazaliyat-e-Zamin (Ghazals by Zamin) and Majmua-e-Qasaid-o-Salaam (Anthology of Odes and Blessings) consist of works by her father, Professor S.M. Zamin Ali, that she published after his death. "
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Dukh Naye Kapde Badal Kar
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