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कविता अनेक विधियों से अभिव्यक्त होती है। कभी उसे अनुभव के उत्स की आवश्यकता होती है और कभी किसी सामाजिक सत्य के प्रोत्साहन की। राजेश माहेश्वरी ने कविता के लिए उन व्यापक अनुभवों को चुना है जिनके प्रमाण समाज में प्राय: दिखते रहते हैं।</p> <p>इस संग्रह की रचनाएँ सुस्पष्ट रूप से विभिन्न विषयों पर अपना संवेदनात्मक अभिमत व्यक्त करती हैं! ‘विवेक’ कविता का निष्कर्ष है, ‘विवेकशील पाता है/गंगा सा प्रेम और ममता/यमुना-सी हृदय की कोमलता/और सरस्वती के समान बंधुआता।’ वस्तुत: राजेश माहेश्वरी ऐसे प्रश्नों से साक्षात्कार करते हैं जिनके उत्तर अभी उत्तर-आधुनिकता तलाश रही है।</p> <p>इन कविताओं में प्रेरणा और उत्साह के स्वर सर्वोपरि हैं। वर्तमान समय में बिसरती आदर्शवादिता भी यहाँ देखी जा सकती है। यह इसलिए है क्योंकि कवि विसंगतियों व विषमताओं से मुक्ति चाहता है। यथार्थ के विश्लेषण से उत्पन्न ये रचनाएँ सचमुच पाठक के मन में ऊर्जा का संचार करती हैं।</p> <p>सुगम व स्पष्ट अभिव्यक्ति इन कविताओं की उपलब्धि है। ‘नैतिकता’ कविता की इन पंक्तियों से यह तथ्य रेखांकित होता है—‘नैतिकता/बाज़ार में नहीं मिलती/यह एक आध्यात्मिक गुण है/जो करती है/सभ्यता का विकास/और संस्कृति का निर्माण।’</p> <p>अपने उद्देश्य में प्रभावी और एक महत्त्वपूर्ण कविता-संग्रह।
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कविता अनेक विधियों से अभिव्यक्त होती है। कभी उसे अनुभव के उत्स की आवश्यकता होती है और कभी किसी सामाजिक सत्य के प्रोत्साहन की। राजेश माहेश्वरी ने कविता के लिए उन व्यापक अनुभवों को चुना है जिनके प्रमाण समाज में प्राय: दिखते रहते हैं।</p>
<p>इस संग्रह की रचनाएँ सुस्पष्ट रूप से विभिन्न विषयों पर अपना संवेदनात्मक अभिमत व्यक्त करती हैं! ‘विवेक’ कविता का निष्कर्ष है, ‘विवेकशील पाता है/गंगा सा प्रेम और ममता/यमुना-सी हृदय की कोमलता/और सरस्वती के समान बंधुआता।’ वस्तुत: राजेश माहेश्वरी ऐसे प्रश्नों से साक्षात्कार करते हैं जिनके उत्तर अभी उत्तर-आधुनिकता तलाश रही है।</p>
<p>इन कविताओं में प्रेरणा और उत्साह के स्वर सर्वोपरि हैं। वर्तमान समय में बिसरती आदर्शवादिता भी यहाँ देखी जा सकती है। यह इसलिए है क्योंकि कवि विसंगतियों व विषमताओं से मुक्ति चाहता है। यथार्थ के विश्लेषण से उत्पन्न ये रचनाएँ सचमुच पाठक के मन में ऊर्जा का संचार करती हैं।</p>
<p>सुगम व स्पष्ट अभिव्यक्ति इन कविताओं की उपलब्धि है। ‘नैतिकता’ कविता की इन पंक्तियों से यह तथ्य रेखांकित होता है—‘नैतिकता/बाज़ार में नहीं मिलती/यह एक आध्यात्मिक गुण है/जो करती है/सभ्यता का विकास/और संस्कृति का निर्माण।’</p>
<p>अपने उद्देश्य में प्रभावी और एक महत्त्वपूर्ण कविता-संग्रह।
Book Details
-
ISBN9788183616201
-
Pages120
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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अपने समय से संवाद करती ये कविताएँ कवि महेन्द्र मिश्र के लम्बे प्रशासकीय मौन के बाद सामने आ रही हैं। आज से कोई चौबीस वर्ष पहले उनका पहला काव्य-संकलन आया था—‘अनायास वर्षा’। तब से बहुत कुछ घटित हो चुका है दुनिया में और काव्य का परिदृश्य भी वही नहीं है, जो उस समय था। इन कविताओं से गुज़रते हुए मैंने अनुभव किया कि इस संग्रह के रचयिता ने इस बीच के लगभग सारे सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तनों को अपनी चेतना में जज़्ब करने के बाद वह वस्तु-फ़लक तैयार किया है, जिससे इस कृति को आकार मिलता है। यह बौद्धिक रूप से एक अत्यन्त सजग रचनाकार की रचना है—जिसे अपने से की गई एक लम्बी बहस भी कहा जा सकता है। वस्तुतः इस किताब का नाम ‘बग़दाद से एक ख़त’ वह संकेतक है, जो इन कविताओं के ‘टोन’ का निर्धारण करता है। मुझे अच्छा लगा कि वैचारिक आवेग वाली लम्बी कविताओं के साथ-साथ यहाँ कुछ अपेक्षाकृत छोटी कविताएँ भी हैं—जैसे ‘वह लड़का’ और ‘नदी’ जो अलग ढंग की कविताएँ हैं और पाठक से सीधे संवाद करती हैं। यह भरा-पूरा संग्रह प्रमाण है कि अपनी प्रशासकीय उलझनों में चाहे इस कवि ने कविता का साथ—अस्थायी रूप से—छोड़ दिया हो, पर कविता ने अपने इस ‘पुराने प्रेमी’ का साथ कभी नहीं छोड़ा। — केदारनाथ सिंह
Yama
- Author Name:
Mahadevi Verma
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प्रस्तुत पुस्तक ‘यामा’ में महादेवी की काव्य-यात्रा के चार आयाम संगृहीत हैं—‘नीहार’, ‘रश्मि’, ‘नीरजा’ तथा ‘सांध्यगीत’ जो भाव और चिन्तन-जगत् की क्रमबद्धता के कारण महत्त्वपूर्ण हैं। प्रत्येक आयाम में नवीनता तथा विशिष्टता का परिचय दिया गया है, फिर भी अपेक्षाकृत मानवीकरण एवं प्रतीकात्मकता पर बल दिया गया है। प्रकृति के स्थूल सौन्दर्य में भी प्रायः महादेवी ने मानवीय भावनाओं व क्रिया-कलापों का साक्षात्कार किया।
Ye Kohre Mere Hain
- Author Name:
Bhawani Prasad Mishra
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‘ये कोहरे मेरे हैं’ में संकलित भवानी भाई की, 1954-55 से लेकर 1970-71 की डायरियों में लिखी, वे प्रेम-कविताएँ हैं, जो पहली बार यहाँ एक साथ प्रकाशित हो रही हैं। ये ठेठ प्रेम-कविताएँ हैं और कवि ने इनके माध्यम से अपने जीवनानुभवों और काव्य-बोध को निरन्तर विकसित, विस्तृत और सुसम्पन्न किया है। मानव-स्वभाव की सरलता और जटिलता, रंगीनी और सादगी का जैसा जोड़-तोड़ यहाँ प्रतिफलित है, उससे यह भी सूचित होता है कि भावों के सुसंस्कार में विचारों की भूमिका किस कोटि का योगदान करती है और कविता कैसे-कैसे झड़े-तिरछे रास्तों और उतार-चढ़ावों से होकर अपना साज-सँवार पाती है।
निश्चय ही इन कविताओं में कवि ने अपने व्यक्तित्व के उस पक्ष को दर्ज किया है, जो न तो स्वतंत्रताप्रेमी आन्दोलनकारी का है, न ही जोशो-खरोश से लबालब भरे आदर्शवादी का। इनमें मानवीय रिश्तों का एक ख़ूबसूरत सपना देखने की कोशिश है जो किसी भी श्रेष्ठ कविता से सहज अपेक्षित है। कहने को ये सपने बहुत आमफहम और मामूली हैं, किन्तु वास्तविक जीवन में इनकी परिणति इन दिनों लगभग असम्भव हो उठी है। इनमें एक आदमी का दूसरे आदमी के पास तनिक देर बैठकर अपना दु:ख-दर्द कह डालने की इच्छा, परस्पर के नेह-बन्धन में बँधकर आकाश-भर विस्तार पाने की आकांक्षा, जीवन की भागम-भाग और निरन्तर मशीनी और औपचारिक होते सम्बन्धों के विरोध में सघन परिचय और आत्मीयता की बारादरी सजाने का सपना झिलमिला रहा है।
Ghar Ke Bahar Ghar
- Author Name:
Vishnu Nagar
- Book Type:

- Description:
Poems
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