Hindi Ki Janpadiya Kavita
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Author:
Vidhyaniwas Mishra, Vidyaniwas MishraPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Poetry₹
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जनपदीय कविताओं के इस संकलन को प्रस्तुत करने का एक उद्देश्य यह भी समझा जा सके कि सहज होना कठिन तो है और कृत्रिम होकर सहज होना तो और कठिन है, पर हिन्दी में सहजता उसके भीतर ही अनेक रूपों में पुरइन-पात की तरह पसरी हुई है। उससे अपरिचित होना हिन्दी के लिए गौरव की बात नहीं है। हिन्दी पाठ्यक्रम में लोग तर्क देते हैं कि हिन्दीतर भाषियों के लिए हिन्दी के इतने रूप देना उचित नहीं। यह तर्क लचर है। साहित्य, कोश रखकर नहीं लिखा जाता, न कोई निर्धारित साँचा रखकर लिखा जाता है। साहित्य की भाषा साँचों को तोड़ती है, नए साँचे बनाती है। साहित्य की भाषा ही जीवन्त मानकों का नक़्शा देती है। यह तभी सम्भव होता है जब साहित्य की भाषा में आदान-प्रदान भीतर-बाहर से हो। यदि हिन्दी अपनी अभ्यन्तर शक्ति से अपरिचित रह जाए तो केवल बाहरी प्रभाव को लेकर वह चल नहीं सकती, चलेगी भी तो एक छोटे से वर्ग की भाषा रह जाएगी। हिन्दी की इस अभ्यन्तर शक्ति के विस्तार का निदर्शन इस संकलन में है। इसके संकलनकर्त्ता इन भाषाओं के रचनाकार भी हैं और इनके सुप्रसिद्ध अध्येता भी हैं। प्रत्येक ने अपने-अपने ढंग से भूमिका भी लिखी है।...</p> <p>हर संग्रह की अपनी सीमा होती है, इसकी भी है, पर यह एक शुरुआत है। मुझे विश्वास है कि महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय का यह आरम्भ शुभ होगा।</p> <p>—विद्यानिवास मिश्र
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जनपदीय कविताओं के इस संकलन को प्रस्तुत करने का एक उद्देश्य यह भी समझा जा सके कि सहज होना कठिन तो है और कृत्रिम होकर सहज होना तो और कठिन है, पर हिन्दी में सहजता उसके भीतर ही अनेक रूपों में पुरइन-पात की तरह पसरी हुई है। उससे अपरिचित होना हिन्दी के लिए गौरव की बात नहीं है। हिन्दी पाठ्यक्रम में लोग तर्क देते हैं कि हिन्दीतर भाषियों के लिए हिन्दी के इतने रूप देना उचित नहीं। यह तर्क लचर है। साहित्य, कोश रखकर नहीं लिखा जाता, न कोई निर्धारित साँचा रखकर लिखा जाता है। साहित्य की भाषा साँचों को तोड़ती है, नए साँचे बनाती है। साहित्य की भाषा ही जीवन्त मानकों का नक़्शा देती है। यह तभी सम्भव होता है जब साहित्य की भाषा में आदान-प्रदान भीतर-बाहर से हो। यदि हिन्दी अपनी अभ्यन्तर शक्ति से अपरिचित रह जाए तो केवल बाहरी प्रभाव को लेकर वह चल नहीं सकती, चलेगी भी तो एक छोटे से वर्ग की भाषा रह जाएगी। हिन्दी की इस अभ्यन्तर शक्ति के विस्तार का निदर्शन इस संकलन में है। इसके संकलनकर्त्ता इन भाषाओं के रचनाकार भी हैं और इनके सुप्रसिद्ध अध्येता भी हैं। प्रत्येक ने अपने-अपने ढंग से भूमिका भी लिखी है।...</p>
<p>हर संग्रह की अपनी सीमा होती है, इसकी भी है, पर यह एक शुरुआत है। मुझे विश्वास है कि महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय का यह आरम्भ शुभ होगा।</p>
<p>—विद्यानिवास मिश्र
Book Details
-
ISBN9789386863898
-
Pages727
-
Avg Reading Time24 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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मनुष्य की स्थूल पार्थिव सत्ता उसकी रंग-रूपमयी आकृति में व्यक्त होती है। उसके बौद्धिक संगठन से जीवन और जगत सम्बन्धी अनेक जिज्ञासाओं, उनके तत्त्व के शोध और समाधान के प्रयास, चिन्तन की दिशा आदि संचालित और संयमित होते हैं! उसकी रागात्मक वृत्तियों का संघात उसके सौन्दर्य-संवेदन, जीवन और जगत के प्रति आकर्षण-विकर्षण, उन्हें अनुकूल और मधुर बनाने की इच्छा, उसे अन्य मानवों की इच्छा से सम्पृक्त कर अधिक विस्तार देने की कामना और उसकी कर्म-परिणति आदि का सर्जक है।
Hazaar Daastaan-e-Ishq
- Author Name:
Sanjiv Saraf
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The exquisite journey of love passes through numerous twists and turns, bringing different experiences to each individual. In Urdu poetry, poets have penned down these diverse experiences in rhyme with a sheer eloquence that aptly expresses the exceptional bond between the lover and the beloved. Meer, Ghalib, Momin, Dagh, Faiz, and hundreds of Urdu poets have given voice to the emotions of lovers going through stages such as longing, interplay, loving, possessiveness, rivalry, separation, breaking up, and frenzy. This eloquence makes every reader share this thought, as was inimitably expressed by Mirza Ghalib: Dekhna taqreer ki lazzat ki jo us ne kahaa Maine ye jaanaa ki goyaa ye bhi mere dil men hai ‘Love Longing Loss in Urdu Poetry’ narrates the enchanting tale of this journey that includes the subtle nuances and the beauty of Urdu poetry with all its grace. Also, this book is available in Hindi and Urdu languages with the title "Hazaar Daastaan-e-Ishq".
Hari Patang Par Hara Patanga
- Author Name:
Varun Grover +1
- Book Type:

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Age group 9-12 years कथा शुरू ऐसे होती है ……….एक है घोड़ा दो सवार हैं ….तीन लोक के चार द्वार हैं। यह अपनी हरियाली के लिये अपना बादल आप बनाने के सफर का किस्सा है। भटक भटक के किस्से किस्से जमा किए बादल के हिस्से वरुण ग्रोवर ने इस लम्बी कविता में ऐसी भाषा, बिम्ब और लय अपनाये हैं कि पुराने समय की खोजी यात्राएँ साकार होने लगती हैं। और वह यात्रा भी जो यात्रियों में अपने समय को समझने के लिए चलती है। इसमें एलन शॉ के चित्रों का वैविध्य बेमिसाल है। चित्रों में माया सभ्यता से लेकर अब तक के आम इंसान हैं। सब अपने-अपने तरीकों से अपने बादलों की खोज में दिखाई देते हैं। जैसे यह इंसानी सभ्यता की अनवरत खोज है। इस तरह किताब में दो कविताएँ हैं। दूसरी कहें कि पहलीॽ कि पहले के भी पहले की कविता, एलन शॉ की है।
Main Jab Tak Aayi Bahar
- Author Name:
Gagan Gill
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‘मैं क्यों कहूँगी तुम से/अब और नहीं/सहा जाता/मेरे ईश्वर’—गगन गिल की ये काव्य-पंक्तियाँ किसी निजी पीड़ा की ही अभिव्यक्ति हैं या हमारे समय के दर्द का अहसास भी? और जब यह पीड़ा अपने पाठक को संवेदित करने लगती है तो क्या वह अभिव्यक्ति प्रकारान्तर से प्रतिरोध की ऐसी कविता नहीं हो जाती, जिसमें ‘दर्दे-तनहा’ और ‘ग़मे-ज़माना’ का कथित भेद मिटकर ‘दर्दे-इनसान’ हो जाता है? कविता इसी तरह इतिहास अर्थात समय का काव्यान्तरण सम्भव करने की ओर उन्मुख होती है।
गगन गिल की इन आत्मपरक-सी लगती कविताओं के वैशिष्ट्य को पहचानने के लिए मुक्तिबोध के इस कथन का स्मरण करना उपयोगी हो सकता है कि कविता के सन्दर्भ ‘काव्य में व्यक्त भाव या भावना के भीतर से भी दीपित और ज्योतित’ होते हैं, उनका स्थूल संकेत या भाव-प्रसंगों अथवा वस्तु-तथ्यों का विवरण आवश्यक नहीं है। इन कविताओं का अनूठापन इस बात में है कि वे एक ऐसी भाषा की खोज करती हैं, जिसमें सतह पर दिखता हल्का-सा स्पन्दन अपने भीतर के सारे तनावों-दबावों को समेटे होता है—बाँध पर एकत्रित जलराशि की तरह।
यह भी कह सकते हैं कि ये कविताएँ प्रार्थना के नये-से शिल्प में प्रतिरोध की कविताएँ हैं—प्रतिरोध उस हर सत्ता-रूप के सम्मुख जो मानवत्व मात्र पर, स्त्रीत्व पर भी, आघात करता है। इन आघातों का दर्द अपने एकान्त में सहने पर ही कवि-मन पहचान पाता है कि ‘मैं जब तक आयी बाहर एकान्त से अपने/बदल चुका था मर्म भाषा का’। ये कविताएँ काव्य-भाषा को उसकी मार्मिकता लौटाने की कोशिश कही जा सकती हैं।
—नन्दकिशोर आचार्य
Aakash Dharti Ko Khatkhataata Hai
- Author Name:
Vinod Kumar Shukla +1
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विनोद कुमार शुक्ल समकालीन कविता के संसार में उन थोड़े से ऐसे कवियों में शुमार हैं जिन्होंने समकालीन कविता की दिशा और दृष्टि को काफ़ी हद तक नियंत्रित किया है। उनकी इस हैसियत को हिन्दी में लगभग सभी कवियों ने स्वीकार किया है।
काव्याभिव्यक्ति में मित कथनों का जितना सार्थक प्रयोग वे करते हैं, उतना शमशेर ही कर पाते थे। शब्दों को कम से कम ख़र्च करके कैसे अर्थ के भंडार को समेटा जाए इसे सीखने के लिए विनोद कुमार शुक्ल की कविता काम की चीज़ है।
उनकी कविता नितांत समसामयिक होकर भी समयातीत लगती है। वह पीछे भी देखती है और आगे भी, पर उल्लेखनीय बात यह है कि वह अपने समय में धँसी होने के बावजूद अपने समय में फँसती नहीं है। उनके काव्यबोध में जो अचूक क़िस्म की पारदर्शी सूक्ष्मता है, वह कई लोगों को जटिलता, रूपवाद, कलावाद का अवतार लगती है लेकिन रूपवादी कविता है नहीं। काव्य-प्रयोगों के लिए उनसे बड़ा कवि आज कम से कम हिन्दी में दिखाई नहीं देता
वे विचारधारा के पुल से होकर रास्ता तय करने वाले कवि नहीं हैं, बल्कि वे कविता की नदी को ख़ुद तैर कर पार करने वाले कवि हैं। कम से कम उनके लम्बे कवि-कर्म का संघर्ष यही प्रतिमान हमारे सामने रखता है। वे हिन्दी कविता के संसार में उन थोड़े से कवियों में हैं जिन्होंने चालू मुहावरे को तोड़कर अपनी कविता में संवेदना और काव्य-शिल्प के लिए अनोखा आयाम चुना है। अपनी काव्यभाषा के चुनाव में वे जितने विरल, संयमी और जागरूक कवि हैं, उतने कम ही कवि रहे हैं। यह उनकी चुनिन्दा कविताओं का संकलन है।
Sarkti Parchhaiyan
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
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Book
Dhoop Ka Tukda
- Author Name:
Amrita Preetam +1
- Book Type:

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अमृता प्रीतम की कविताओं में रमना, हृदय में कसकती व्यथा का घाव लेकर, प्रेम और सौन्दर्य की धूपछाँह-वीथी में विचरने के समान है, जहाँ वियोग तथा अतृप्ति के तीखे नुकीले काँटे भावना के सुकुमार चरणों को क्षत-विक्षत करते रहते हैं । ऐसी गहरी, दर्द में डूबी, प्राणिक संवेदनाओं के गीत कम ही देखने को मिलते हैं। अमृताजी धरती के जीवन के गीत भी गाती हैं । वह युग-संघर्ष के प्रति प्रबुद्ध होने के कारण प्रगतिशील भावधारा से प्रेरित हैं, किन्तु प्रेम के प्रति एकाग्र समर्पण ही उनकी जीवन-साधना तथा आत्म-विकास का एकान्त पथ है।
अमृताजी की कविताओं के अनुवाद से हिन्दी काव्य भाव-धनी, स्वप्न-संस्कृत तथा शिल्प-समृद्ध बनेगा। इन कविताओं से यह सहज ही प्रमाणित हो जाता है कि अमृताजी का स्थान पंजाबी ही नहीं, समस्त भारतीय भाषाओं में भी प्रथम श्रेणी के योग्य है । इस संग्रह से हिन्दी के नये कवियों को विशेष प्रेरणा मिलेगी। जिस गहरी भाव-संवेदना, सामाजिक यथार्थ तथा युग मानव की व्यथा का सच्चा चित्रण अमृताजी ने अपनी नारी-हृदय की जादू-तूली से इन कविताओं में किया है, वह उनकी कृति को एक अत्यन्त उच्च तथा व्यापक स्तर पर उठा देती है।
—सुमित्रानन्दन पंत
Ujle Paron Ki Dhoop
- Author Name:
Shakeb Jalali
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ये किताब आधुनिक उर्दू ग़ज़ल के बेमिसाल शायर शकेब जलाली की ग़ज़लों और नज़्मों का संग्रह है। उनकी शायरी एक मुसलसल सफ़र की तरह है जिसमें कुछ मंज़र ख़ुशनुमा हैं तो कुछ हैरत-कुन और कुछ बे-इन्तिहा अफ़सुर्दा। उनके इज़हार की शैली बेहद अनोखी और नायाब है जिसमें क़ुदरत, रात-दिन, जंगल-सेहरा, बहार-ख़िज़ाँ सहित सारे नुमाइन्दा इस्तियारे जलवा-नुमा नज़र आते हैं। ये किताब उर्दू ग़ज़ल के नौजवान पाठकों को काफ़ी पसन्द आएगी।
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