Asankalit Kavitayen
Author:
Suryakant Tripathi 'Nirala'Publisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 76
₹
95
Unavailable
हिन्दी कविता में युगान्तर उपस्थित करनेवाले कवि महाप्राण निराला के उस काव्य-संसार से गुज़रना जो अब तक अजाना और प्राय: अपठित रहा है, पाठकों के लिए कुछ कम महत्त्वपूर्ण और मुग्धकारी नहीं है—कहीं-कहीं विस्मय की हद तक। अपनी कविताओं के जो संग्रह उन्होंने तैयार किए, अनेक कविताएँ उनमें इसलिए शामिल नहीं कीं कि या तो वे प्रारम्भिक थीं या फिर कमज़ोर। कुछ कविताएँ पत्र-पत्रिकाओं में छपने के बावबूद गुम गईं और कुछ उनके ही काग़ज़ों के ढेर में गुमनाम बनी रहीं। पर अब ऐसी सभी कविताएँ इस संग्रह में हैं।
इनके अतिरिक्त इस संकलन में जहाँ निराला की पहली प्रकाशित कविता ‘जन्मभूमि’ है, वहीं आचार्य रामचन्द शुक्ल और बापू के प्रति लिखी गई व्यंग्य रचनाएँ भी हैं। परिशिष्ट में उनकी बहुचर्चित कविता ‘जुही की कली’ का आदि-रूप सुरक्षित किया गया है, जिससे उनकी रचना-प्रक्रिया को समझने में भी मदद मिलती है।
इसलिए निराला की कविताओं का यह संकलन कई दृष्टियों से महत्त्वपूर्ण है—ख़ासकर, संकलनकर्ता डॉ. नन्दकिशोर नवल के शब्दों में कहें तो, ‘इसमें संकलित कविताएँ निराला के कवि-जीवन के आरम्भ और विकास दोनों को ही समझने की दृष्टि से अत्यन्त उपयोगी हैं’ और ‘इन कविताओं में से अनेक में हमें उनकी उत्कृष्ट काव्य-कला के दर्शन होते हैं।’
ISBN: AsankalitKavitayenHardCover
Pages: 94
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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यह उनके वचनों का हिन्दी रूपांतरण है।
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