Kahte Hain Jisko Pyar

(0)

₹ 395

316 (20% off)

Available

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


कृष्ण बलदेव वैद के कथा साहित्य से जिन पाठकों का परिचय है, वे जानते हैं कि उन्हें मनुष्य-जीवन के नाटकीय सन्दर्भों की गहरी पहचान है। यहाँ भी वैद जीवनगत घटनाओं को सायास नाटकीय बनाने के बजाय जीवन में निहित नाटक को पकड़ते हैं। यहाँ तक कि सामान्य लगते रंग-संकेतों को भी नाटकीय प्रसंग के रूप में विन्यस्त करने का सामर्थ्य उन्होंने प्रदर्शित किया है।</p> <p>वैद बख़ूबी समझते हैं कि नाटक की सम्पूर्णता उसके मंचन में है। इस नाटक को पढ़ते ही पाठक को नाटक अपने सामने घटित होते दिखता है। हालाँकि इसकी विषयवस्तु जटिल है लेकिन सरल-सहज प्रस्तुति के कारण ऐसा मुमकिन हुआ है। गीता, अखिल, सुजाता जैसे चिर-परिचित चरित्रों के माध्यम से लेखक ने स्त्री-पुरुष सम्बन्धों का ऐसा रचनात्मक विमर्श इस रचना में सम्भव किया कि ये थोड़े से पात्र, अपने मित कथनों में ही बड़े मानवीय मूल्यों को पुनर्परिभाषित कर देते हैं। अपनी बात रखने का दार्शनिक लहज़ा पात्रों के चरित्र रचने के साथ ही अर्थ के धरातल पर जिस ‘वर्बल आइरनी’ का निर्माण करता है, वह अद्भुत है।

Read more

ISBN
N/A
Pages
N/A
Avg Reading Time
3 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Don’t Miss Out

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format:

Piracy Free

Express Delivery

Secure Payment

About the Book

कृष्ण बलदेव वैद के कथा साहित्य से जिन पाठकों का परिचय है, वे जानते हैं कि उन्हें मनुष्य-जीवन के नाटकीय सन्दर्भों की गहरी पहचान है। यहाँ भी वैद जीवनगत घटनाओं को सायास नाटकीय बनाने के बजाय जीवन में निहित नाटक को पकड़ते हैं। यहाँ तक कि सामान्य लगते रंग-संकेतों को भी नाटकीय प्रसंग के रूप में विन्यस्त करने का सामर्थ्य उन्होंने प्रदर्शित किया है।</p>
<p>वैद बख़ूबी समझते हैं कि नाटक की सम्पूर्णता उसके मंचन में है। इस नाटक को पढ़ते ही पाठक को नाटक अपने सामने घटित होते दिखता है। हालाँकि इसकी विषयवस्तु जटिल है लेकिन सरल-सहज प्रस्तुति के कारण ऐसा मुमकिन हुआ है। गीता, अखिल, सुजाता जैसे चिर-परिचित चरित्रों के माध्यम से लेखक ने स्त्री-पुरुष सम्बन्धों का ऐसा रचनात्मक विमर्श इस रचना में सम्भव किया कि ये थोड़े से पात्र, अपने मित कथनों में ही बड़े मानवीय मूल्यों को पुनर्परिभाषित कर देते हैं। अपनी बात रखने का दार्शनिक लहज़ा पात्रों के चरित्र रचने के साथ ही अर्थ के धरातल पर जिस ‘वर्बल आइरनी’ का निर्माण करता है, वह अद्भुत है।

Book Details

  • ISBN
    9788126708277
  • Pages
    79
  • Avg Reading Time
    3 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

Recommended For You

Customer Reviews

Be the first to write a review...

(0)

0 out of 5

Book

Hurry! Limited-Time Coupon Code

WORDPOWER
* Terms and Conditions applied.

Offers

Best Deal

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua. Ut enim ad minim veniam, quis nostrud exercitation ullamco laboris nisi ut aliquip ex ea commodo consequat.

whatsapp