Sakharam Binder
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<span style="font-weight: 400;">सरोजिनी वर्मा द्वारा मराठी के प्रसिद्ध नाटककार विजय तेंदुलकर की अत्यन्त विवादास्पद और बहुचर्चित कृति ‘सखाराम बाइंडर’ का सशक्त और प्राणवान अनुवाद, जिसने रंगमंच पर दाम्पत्य जीवन की गोपनीय नैतिकता का साहसपूर्ण ढंग से पर्दाफ़ाश किया है। सरकारी नियंत्रण को चुनौती देकर उच्चतम न्यायालय से लेखकीय अभिव्यक्ति के आधार पर मान्यता पानेवाला यह अपने ढंग का अकेला और अनूठा नाटक है।</span></p> <p><span style="font-weight: 400;">‘सखाराम बाइंडर’ को इस तरह प्रस्तुत किया गया है कि वह ग़लाज़त से भरी दिखावटी सम्भ्रान्तता को पहली बार इतने सक्षम ढंग से चुनौती देता है। रटे-रटाए मूल्यों को सखाराम ही नहीं, इस नाटक के सारे पात्र अपनी पात्रता की खोज में ध्वस्त करते चले जाते हैं। जिन नक़ली मूल्यों को हम अपने ऊपर आडम्बर की तरह थोपकर चिकने-चुपड़े बने रहना चाहते हैं, उसे सही-सही इस आईने में निर्ममता से उघड़ता हुआ देखते हैं। ‘सखाराम बाइंडर’ वही आईना है। </span></p> <p><span style="font-weight: 400;">भाषा के स्तर पर सारे पात्र बड़ी खुली और ऐसी बाज़ारूपन से संयुक्त भाषा का प्रयोग करते हैं जिन्हें हमने अकेले-दुकेले कभी सुना ज़रूर होगा, किन्तु उसे अपने संस्कारिता का अंश मानने में सदैव कतराते रहे हैं।</span></p> <p><span style="font-weight: 400;">पूरे नाटक में कथावस्तु की विलक्षणता न होते हुए भी पात्रों का आपसी संयोजन भाषा के जिस स्तर पर नाटककार ने किया है, वही नाटकीयता को उभारने में अद्भुत रूप से सफल हुआ है।</span>
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<span style="font-weight: 400;">सरोजिनी वर्मा द्वारा मराठी के प्रसिद्ध नाटककार विजय तेंदुलकर की अत्यन्त विवादास्पद और बहुचर्चित कृति ‘सखाराम बाइंडर’ का सशक्त और प्राणवान अनुवाद, जिसने रंगमंच पर दाम्पत्य जीवन की गोपनीय नैतिकता का साहसपूर्ण ढंग से पर्दाफ़ाश किया है। सरकारी नियंत्रण को चुनौती देकर उच्चतम न्यायालय से लेखकीय अभिव्यक्ति के आधार पर मान्यता पानेवाला यह अपने ढंग का अकेला और अनूठा नाटक है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">‘सखाराम बाइंडर’ को इस तरह प्रस्तुत किया गया है कि वह ग़लाज़त से भरी दिखावटी सम्भ्रान्तता को पहली बार इतने सक्षम ढंग से चुनौती देता है। रटे-रटाए मूल्यों को सखाराम ही नहीं, इस नाटक के सारे पात्र अपनी पात्रता की खोज में ध्वस्त करते चले जाते हैं। जिन नक़ली मूल्यों को हम अपने ऊपर आडम्बर की तरह थोपकर चिकने-चुपड़े बने रहना चाहते हैं, उसे सही-सही इस आईने में निर्ममता से उघड़ता हुआ देखते हैं। ‘सखाराम बाइंडर’ वही आईना है। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">भाषा के स्तर पर सारे पात्र बड़ी खुली और ऐसी बाज़ारूपन से संयुक्त भाषा का प्रयोग करते हैं जिन्हें हमने अकेले-दुकेले कभी सुना ज़रूर होगा, किन्तु उसे अपने संस्कारिता का अंश मानने में सदैव कतराते रहे हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">पूरे नाटक में कथावस्तु की विलक्षणता न होते हुए भी पात्रों का आपसी संयोजन भाषा के जिस स्तर पर नाटककार ने किया है, वही नाटकीयता को उभारने में अद्भुत रूप से सफल हुआ है।</span>
Book Details
-
ISBN9788180315725
-
Pages158
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: हिन्दी में व्यापक लोकप्रियता और स्तरीय रचनात्मकता का अद्भुत उदाहरण है मुद्राराक्षस का यह नाटक ‘आला अफ़सर’। हिन्दी में ‘आला अफ़सर’ की लोकप्रियता लगभग अभूतपूर्व है जिसने भारत के हर कोने के रंगकर्मियों और दर्शकों को आकर्षित किया। इसके भारत की अन्य भाषाओं में अनुवाद भी हुए और उन्होंने भी दर्शकों को आकर्षित किया। सबसे लम्बी अवधि तक इस नाटक की प्रस्तुतियाँ मुम्बई जैसी व्यावसायिक रंगमंच की नगरी में हुईं। भारतीय रंगमंच के विदेशी अध्येताओं ने इसे एक गहरे आश्चर्य से देखा और विदेशी पुस्तकों में विस्तार से इस नाटक की चर्चा हुई। सरकार बदलने के बाद भी शासकों का न बदलना, नौकरशाही और राजनीतिज्ञों का रिश्ता एक यथार्थ बन जाना और मजलूमों का न्याय और दया के व्यापार द्वारा शोषण होना, इसके गानों में बताया गया है। मुद्राराक्षस के गानों की भाषा का प्रवाह बेदाग़ और उनका मज़ाहियापन नफ़ीस है। चाहिए कि इसके गाने हर खेल के साथ बेचे जाएँ या बँटें। इसके गाने प्रकाशित हों और रिकार्ड बनें, यह आज की नौटंकी का साहित्य से तक़ाज़ा है—आलोचकों का यह गम्भीर बयान इस बात का प्रमाण है कि रचनात्मक स्तर बनाए रखते हुए भी यह नाटक ‘आला अफ़सर’ हिन्दी नाट्य-जगत की एक बड़ी और लोकरंजक घटना है। इस नाटक में नौटंकी के मूल छन्दों को बनाए रखते हुए हिन्दी की वर्तमान कविता की क्षमताओं का संवेदनशील प्रयोग हुआ है।
Chaar Natak
- Author Name:
Shyam Manohar
- Book Type:

- Description: “मराठी की रंगपरम्परा बहुत समृद्ध और सजीव रही है और उसका प्रभाव हिन्दी पर भी पड़ा है। मराठी और हिन्दी के बीच रंगमंच और नाटक के क्षेत्र में लगातार आदान-प्रदान होता रहा है। मराठी के प्राय: सभी बड़े आधुनिक नाटककारों के नाटक हिन्दी में अनूदित हुए और अनेक निर्देशकों द्वारा कई शहरों में खेले जाते रहे हैं। श्याम मनोहर के ‘चार नाटक’ मराठी-हिन्दी के विद्वान् निशिकान्त ठकार द्वारा अनूदित होकर यहाँ पहली बार हिन्दी में प्रकाशित हो रहे हैं। रज़ा पुस्तक माला के अन्तर्गत अन्य भारतीय भाषाओं से अच्छी और प्रासंगिक सामग्री हिन्दी में लाने के हमारे प्रयत्न का यह हिस्सा है।”
Aap Na Badlenge
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

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Description:
मैंने तुम्हारा नाटक पढ़ लिया था। सबसे पहली बात तो यह कि इसमें एक बहुत ही सामयिक और महत्त्वपूर्ण थीम को उठाया गया है। दहेज के सवाल पर हर स्तर पर कुछ न कुछ लिखा जाना चाहिए और मुझे ख़ुशी है कि तुमने इस समस्या पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए नाटक का सहारा लिया। दूसरे तुम्हारी भाषा में बहुत कसावट है और नाटकीयता भी है। प्रारम्भिक दृश्य बड़े सघन लगते हैं और कार्य-व्यापार में भी एक तरह की नाटकीय क्रूरता का अहसास होता है जो ज़रूरी है।
—नेमिचन्द्र जैन, प्रख्यात रंग-आलोचक
इधर मैंने अपने विद्यार्थियों को 'यहाँ रोना मना है' एकांकी पढ़ाया। एकांकी सबको बहुत अच्छा लगा।
—के.एम. मालती; अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, गवर्नमेंट आर्ट्स एवं साइंस कॉलेज, कालीकट, केरल
Khamosh ! Adalat Jari Hai
- Author Name:
Vijay Tendulkar
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Description:
प्रसिद्ध मराठी नाटककार विजय तेन्दुलकर ने भारतीय रंगमंच को नाटकों के माध्यम से समकालीन समाज की उन उलझी हुई सच्चाइयों से अवगत कराया जो आधुनिक जीवन की उपज हैं और जिनको काले और सफ़ेद के नैतिक खानों में बाँटकर नहीं समझा जा सकता, बल्कि उनको समझने के लिए हमें आधुनिक व्यक्ति की उन तमाम सीमाओं और उत्कंठाओं को समझना होता है जिनसे वह बरबस बँधा होता है।
अपने अनूठे रचनात्मक साहस के साथ विजय तेन्दुलकर ने रंगमंच जैसी सार्वजनिक विधा के माध्यम से ऐसी अनेक विचलित करनेवाली सच्चाइयों की तरफ़ इशारा किया, जिनको छूने का साहस अक्सर रंगमंच में नहीं हुआ था।
‘ख़ामोश! अदालत जारी है’ उनका सबसे प्रसिद्ध नाटक है। असंख्य मंचनों, चर्चाओं और फ़िल्मांकनों के चलते अधिकांश लोग इस नाटक से परिचित हैं। नाटक के भीतर चलते इस नाटक की मुख्य पात्र लीला बेनारे की जीवन-कथा जैसे-जैसे खुलती है हमें हमारे आसपास के समाज, उसकी सफ़ेद सतह के नीचे सक्रिय स्याह मर्दाना यौन-कुंठाओं और स्त्री के दमन की कई तहें उजागर होती जाती हैं।
नाटक का सर्वाधिक आकर्षक पहलू इसका फ़ॉर्म माना गया है। एक अदालत के दृश्य में मानव-नियति की विडम्बनाओं के उद्घाटन को जिस प्रकार नाटककार ने साधा है, वह अद्भुत है। यही कारण है कि रंगकर्मी हों, नाट्यालोचक हों या दर्शक—हर किसी के लिए यह नाटक भारतीय रंगमंच के इतिहास में मील का एक पत्थर है।
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