Neel Chhavi
(0)
Author:
Mahashweta DeviPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
299
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आधुनिक नागर समाज एक तरफ सुख-सुविधा के नाना संसाधनों से सम्पन्न हुआ है तो दूसरी तरफ बौद्धिक-सांस्कृतिक रूप से अपने लिए उसने अनेक संकट भी खड़े किए हैं। साधनों तक पहुँच की बदौलत नैतिक और मानवीय स्तर पर बेहतर बनने के बजाय वह विलासिता को ही अपना चरम लक्ष्य मानने लगा है।</p> <p>ड्रग्स हो या कि ब्लू फिल्म उपभोग की निर्बन्ध आकांक्षा ने इस समाज के लोगों को निरा उपभोक्ता बनाकर छोड़ दिया है। ऊपर से चाक-चौबन्द और जगर-मगर नजर आता यह समाज वस्तुत: आन्तरिक खोखलेपन का शिकार बन चुका है। सबकुछ नियंत्रित करने वाली सियासत हो याकि स्वप्न देखने के लिए प्रेरित करने वाली कला, कोई भी इस संकट से अछूता नहीं है।</p> <p>‘नील छवि’ निरन्तर पतन की इसी त्रासद सचाई का बेचैन करने वाला आख्यान है, जिसमें कथित उच्च वर्गीय जीवन का आपराधिक दोहरापन और नैतिकता व मानवीयता के घोषित मान्यताओं के निरुपाय होते जाने का चित्रण, ठहरकर सोचने के लिए विवश करता है।
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आधुनिक नागर समाज एक तरफ सुख-सुविधा के नाना संसाधनों से सम्पन्न हुआ है तो दूसरी तरफ बौद्धिक-सांस्कृतिक रूप से अपने लिए उसने अनेक संकट भी खड़े किए हैं। साधनों तक पहुँच की बदौलत नैतिक और मानवीय स्तर पर बेहतर बनने के बजाय वह विलासिता को ही अपना चरम लक्ष्य मानने लगा है।</p>
<p>ड्रग्स हो या कि ब्लू फिल्म उपभोग की निर्बन्ध आकांक्षा ने इस समाज के लोगों को निरा उपभोक्ता बनाकर छोड़ दिया है। ऊपर से चाक-चौबन्द और जगर-मगर नजर आता यह समाज वस्तुत: आन्तरिक खोखलेपन का शिकार बन चुका है। सबकुछ नियंत्रित करने वाली सियासत हो याकि स्वप्न देखने के लिए प्रेरित करने वाली कला, कोई भी इस संकट से अछूता नहीं है।</p>
<p>‘नील छवि’ निरन्तर पतन की इसी त्रासद सचाई का बेचैन करने वाला आख्यान है, जिसमें कथित उच्च वर्गीय जीवन का आपराधिक दोहरापन और नैतिकता व मानवीयता के घोषित मान्यताओं के निरुपाय होते जाने का चित्रण, ठहरकर सोचने के लिए विवश करता है।
Book Details
-
ISBN9788183611862
-
Pages198
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: बीहड़ सर्दियों की एक रात के आहिस्ता-आहिस्ता ढलते पहर। फ़ज़ा को इमरज़ेंसी के नाख़ूनों ने जकड़ रखा है। शहर की आम बस्तियों से दूर एक आलीशान कोठी के अँधेरे-उजाले में हरकत करते कुछ किरदार, लेखन में उन्हें, रात के अँधेरे में, एक शातिर जासूस की महारत के साथ, ऐसे पकड़ा गया है कि वे कभी यथार्थ लगते हैं कभी फ़ैन्टेसी। इन्हें देखकर सहसा मुक्तिबोध की लम्बी कविता ‘अँधेरे में’ के चरित्र याद आते हैं। इन चरित्रों में नवाब, बेगम, अफ़सर, मंत्री, व्यापारी, क़व्वाल, औरतें, ख़ादिम, शोहदे, सब हैं। अपनी-अपनी ज़िम्मेदारियों से बच निकलने का पार्ट अदा करते हुए। इस भुतहा नाटक में पाखंड, गुरूर, नफ़रत, ईर्ष्या, सूफ़ियाना क़लाम, इश्क, पछतावा, आँसू, फ़रेब, मक्कारी सभी के रक़्स हैं। रात के एक हिस्से की कहानी के बाहर जाने कितनी और रातें और दिन हैं जहाँ लेखक हमें ले जाता है, और फिर वापस ले आता है, वर्तमान में सक्रिय भूतों की बारात के बीचोबीच।
Balgandharva : Aadhunik Marathi Rangmach Ke Ek Mithak Ki Talash
- Author Name:
Abhiram Bhadkamkar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
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