Sindhu
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‘सिंधु’ एक उपन्यास है, जो सिंधु घाटी की प्राचीन सभ्यता का एक काल्पनिक वर्णन प्रस्तुत करता है। 'सिंधु' की कहानी का तानाबाना लेखक ने बहुत क़ायल करने वाले अन्दाज़ में सहज ढंग से ऐतिहासिक तथ्यों के इर्द-गिर्द बुना है। मोअनजो-दड़ो (या लोकप्रिय मोहन जोदड़ो) के उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्यों से अवांछित आज़ादी नहीं ली गई है। सिंधु के साहिली इलाक़े में पनपने वाले सामाजिक जीवन (परंपराएँँ, रहन-सहन) और रोज़गार (खेती-बाड़ी, ईंट-भट्टे) का आपस में तार्किक संबंध है। खुदाई में मिलने वाली मोहरों, बर्तनों, मूर्तियों आदि की बुनियााद पर इस इलाक़े की मान्यताएँँ , रीति-रिवाज और सामाजिक और प्रारंभिक राजनैतिक व्यवस्थाओं की एक दिलकश और मोहक दुनिया इस उपन्याास में उकेरी गई है।
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‘सिंधु’ एक उपन्यास है, जो सिंधु घाटी की प्राचीन सभ्यता का एक काल्पनिक वर्णन प्रस्तुत करता है। 'सिंधु' की कहानी का तानाबाना लेखक ने बहुत क़ायल करने वाले अन्दाज़ में सहज ढंग से ऐतिहासिक तथ्यों के इर्द-गिर्द बुना है। मोअनजो-दड़ो (या लोकप्रिय मोहन जोदड़ो) के उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्यों से अवांछित आज़ादी नहीं ली गई है। सिंधु के साहिली इलाक़े में पनपने वाले सामाजिक जीवन (परंपराएँँ, रहन-सहन) और रोज़गार (खेती-बाड़ी, ईंट-भट्टे) का आपस में तार्किक संबंध है। खुदाई में मिलने वाली मोहरों, बर्तनों, मूर्तियों आदि की बुनियााद पर इस इलाक़े की मान्यताएँँ , रीति-रिवाज और सामाजिक और प्रारंभिक राजनैतिक व्यवस्थाओं की एक दिलकश और मोहक दुनिया इस उपन्याास में उकेरी गई है।
Book Details
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ISBN9788197855702
-
Pages137
-
Avg Reading Time5 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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