Samay Se Aage
(0)
Author:
Sitaram Jha ShyamPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
250
200 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
डॉ. सीताराम झा ‘श्याम’ विरचित ‘समय से आगे’ शीर्षक उपन्यास जितना ही रोचक है, उतना ही प्रेरक और प्रभावक भी। इसमें विशाल एवं विस्तृत सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक तथा बौद्धिक-सांस्कृतिक पट-भूमि पर समग्र मानव जीवन का अभूतपूर्व चित्रण किया गया है। वस्तुतः, जीवन के सभी पक्ष अपनी परिपूर्णता में व्यंजित हैं। मानव प्रेम एवं प्रकृति-प्रेम में समवाय सम्बन्ध दिखाते हुए प्रेम को नया विस्तार प्रदान किया गया है, जो जीवन में आशा का संचार करता है, विकास की नई दिशाओं की तलाश के लिए नई दृष्टि प्रदान करता है—शोषण, उत्पीड़न, प्रपीड़न से मुक्त होने तथा समस्त प्राणियों को निर्भर रहने का अमर सन्देश देता है।</p> <p>इस उपन्यास के कुछ पात्र—विभाकर, रंचना, नन्दिता, निदेश, चलित्तर, सुराजीदास, अनुपम आदि ऐसे हैं, जो धैर्य, साहस, आत्मबल, उत्साह, दूरदृष्टि, कर्मठता, दक्षता, ईमानदारी आदि मानवीय गुणों का उत्कृष्ट परिचय देकर जीवन को सफल-सार्थक बनाते हैं। इसके विपरीत, वल्लरी, सौदामिनी, पुरन्दर जैसे पात्र वर्तमान जीवन के संघर्षपूर्ण दौर में आगे बढ़ने के लिए छटपटाते तो हैं ज़रूर, पर उन्हें न तो आधार भूमि की परख है और न ही मंज़िल का पता। इसी से आगे बढ़ने की अमर्यादित इच्छा उनके वर्तमान को तो विनष्ट कर ही देती है, गौरवपूर्ण अतीत से भी प्रेरणा लेने के योग्य नहीं रहने देती। ऐसी स्थिति में प्रोज्ज्वल भविष्य के दर्शन का सुयोग कैसे मिल सकता है? उपन्यास का पहला ही वाक्य अद्भुत प्रकाश फैला देता है अतीत से भविष्य तक ‘व्यक्ति बहुत कुछ बन जाने की भाग-दौड़ में मनुष्य बनना ही भूल जाता है।’</p> <p>डॉ. श्याम के इस उपन्यास में मानवीय संवेदना की अप्रतिम अभिव्यंजना है—निश्चल संवेदना की वह मार्मिक व्यंजना, जो मनुष्यता की अनिवार्य शर्त है, जिसके बिना जीवन नीरस और निरर्थक बन जाता है। सम्पूर्ण उपन्यास पढ़ जाने पर किसी को भी यह कहने में संकोच का अनुभव नहीं होगा कि ‘समय से आगे’ उपन्यास लेखन के क्षेत्र में नया प्रतिमान है।</p> <p><strong> </strong>
Read moreAbout the Book
डॉ. सीताराम झा ‘श्याम’ विरचित ‘समय से आगे’ शीर्षक उपन्यास जितना ही रोचक है, उतना ही प्रेरक और प्रभावक भी। इसमें विशाल एवं विस्तृत सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक तथा बौद्धिक-सांस्कृतिक पट-भूमि पर समग्र मानव जीवन का अभूतपूर्व चित्रण किया गया है। वस्तुतः, जीवन के सभी पक्ष अपनी परिपूर्णता में व्यंजित हैं। मानव प्रेम एवं प्रकृति-प्रेम में समवाय सम्बन्ध दिखाते हुए प्रेम को नया विस्तार प्रदान किया गया है, जो जीवन में आशा का संचार करता है, विकास की नई दिशाओं की तलाश के लिए नई दृष्टि प्रदान करता है—शोषण, उत्पीड़न, प्रपीड़न से मुक्त होने तथा समस्त प्राणियों को निर्भर रहने का अमर सन्देश देता है।</p>
<p>इस उपन्यास के कुछ पात्र—विभाकर, रंचना, नन्दिता, निदेश, चलित्तर, सुराजीदास, अनुपम आदि ऐसे हैं, जो धैर्य, साहस, आत्मबल, उत्साह, दूरदृष्टि, कर्मठता, दक्षता, ईमानदारी आदि मानवीय गुणों का उत्कृष्ट परिचय देकर जीवन को सफल-सार्थक बनाते हैं। इसके विपरीत, वल्लरी, सौदामिनी, पुरन्दर जैसे पात्र वर्तमान जीवन के संघर्षपूर्ण दौर में आगे बढ़ने के लिए छटपटाते तो हैं ज़रूर, पर उन्हें न तो आधार भूमि की परख है और न ही मंज़िल का पता। इसी से आगे बढ़ने की अमर्यादित इच्छा उनके वर्तमान को तो विनष्ट कर ही देती है, गौरवपूर्ण अतीत से भी प्रेरणा लेने के योग्य नहीं रहने देती। ऐसी स्थिति में प्रोज्ज्वल भविष्य के दर्शन का सुयोग कैसे मिल सकता है? उपन्यास का पहला ही वाक्य अद्भुत प्रकाश फैला देता है अतीत से भविष्य तक ‘व्यक्ति बहुत कुछ बन जाने की भाग-दौड़ में मनुष्य बनना ही भूल जाता है।’</p>
<p>डॉ. श्याम के इस उपन्यास में मानवीय संवेदना की अप्रतिम अभिव्यंजना है—निश्चल संवेदना की वह मार्मिक व्यंजना, जो मनुष्यता की अनिवार्य शर्त है, जिसके बिना जीवन नीरस और निरर्थक बन जाता है। सम्पूर्ण उपन्यास पढ़ जाने पर किसी को भी यह कहने में संकोच का अनुभव नहीं होगा कि ‘समय से आगे’ उपन्यास लेखन के क्षेत्र में नया प्रतिमान है।</p>
<p><strong> </strong>
Book Details
-
ISBN9788126709328
-
Pages207
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
ANAND LAHAR
- Author Name:
Ramchandra Dwivedi
- Book Type:

- Description: "यह सृष्टि द्वंद्वमय है। जीवन के प्रत्येक क्रिया-कलाप के साथ सम-विषम भाव जुडे़ हुए हैं। लेखनी या वाणी तो सीमित साधनमात्र है। पद्यमय रचना पाठकों को अच्छी लगती है, अतः तुकांत पदों में रचना होने लगी। हर्ष, आनंद, खुशी, उल्लास, आमोद-प्रमोद, प्रसन्नता के ही पर्याय हैं। आनंद की अनुभूति केवल ठहाके लगाने या मुसकराने से ही नहीं होती। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में खुशी की खोज की जा सकती है। प्रस्तुत पुस्तक में हम व्यावहारिक जगत् के कुछ विषयों का संक्षेप में उल्लेख कर रहे हैं, जो आनंद-प्राप्ति में साधनरूप हैं—हास्य के स्रोत, हँसी का महत्त्व, काल और स्थान, मानव-स्वभाव, श्रम का महत्त्व, सांसारिक संबंध, प्राचीन साधन, सुख की खोज, आशा का बंधन, मन की पहचान, सज्जन-दुर्जन, जड़-चेतन में हास्य, वाणी का महत्त्व, परसेवा, परिश्रम तथा भाग्य, सुख-साधन, जगत्-धर्म, प्रकृति के वरदान, कृत्रिमता, कंप्यूटर-युग आदि। व्यक्ति के उत्थान-पतन से जुड़े ये विचार पठनीय तो हैं ही, संग्रहणीय भी हैं। हर आयु-वर्ग के पाठकों के लिए यह पुस्तक रोचक, ज्ञानवर्धक और आनंददायक है।"
Hum Na Marab
- Author Name:
Gyan Chaturvedi
- Book Type:

- Description: हर बड़ा लेखक, अपने ‘सृजनात्मक जीवन’ में, जिन तीन सच्चाइयों से अनिवार्यतः भिड़न्त लेता है, वे हैं—‘ईश्वर’, ‘काल’ तथा ‘मृत्यु’। अलबत्ता, कहा जाना चाहिए कि इनमें भिड़े बग़ैर कोई लेखक बड़ा भी हो सकता है, इस बात में सन्देह है। कहने की ज़रूरत नहीं कि ज्ञान चतुर्वेदी ने अपने रचनात्मक जीवन के तीस से अधिक वर्षों में, ‘उत्कृष्टता की निरन्तरता’ को जिस तरह अपने लेखन में एकमात्र अभीष्ट बनाकर रखा, कदाचित् इसी प्रतिज्ञा ने उन्हें, हमारे समय के बड़े लेखकों की श्रेणी में स्थापित कर दिया है। ‘हम न मरब’ में उन्होंने ‘मृत्यु’ को रचना के ‘प्रतिपाद्य’ के रूप में रखकर, उससे भिड़ंत ली है। ‘नश्वर’ और ‘अनश्वर’ के द्वैत ने दर्शन और अध्यात्म में, अपने ढंग से चुनौतियों का सामना किया; लेकिन ‘रचनात्मक साहित्य’ में इससे जूझने की प्रविधि नितान्त भिन्न होती है और वही लेखक के सृजन-सामर्थ्य का प्रमाणीकरण भी बनती है। ज्ञान चतुर्वेदी के सन्दर्भ में, यह इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है कि वे अपने गल्प-युक्ति से ‘मृत्युबोध’ के ‘केआस’ को जिस आत्म-सजग शिल्प-दक्षता के साथ ‘एस्थेटिक’ में बदलते हैं, यही विशिष्टता उन्हें हमारे समय के अन्यतम लेखकों के बीच ले जाकर खड़ा कर देती है।
Us Chiriya Ka Naam
- Author Name:
Pankaj Bisht
- Book Type:

-
Description:
सुपरिचित कथाकार पंकज बिष्ट का यह उपन्यास एक रिटायर्ड पिता की बीमारी और फिर उनके अन्तिम संस्कारों के लिए शहर से गाँव पहुँचे भाई-बहन की कथा है। लेकिन एक ओर यदि वे दोनों अपनी-अपनी धुरी पर घूमते हुए माता-पिता के ‘प्रेतों’ से उबरने के लिए छटपटाते दिखाई देते हैं तो दूसरी ओर अपने विगत से ही नहीं, वर्तमान और भविष्य से भी जा टकराते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो कुमाऊँ के एक छोटे-से गाँव और परिवार से शुरू होकर यह कथा एक समूचे समाज और उसकी मानसिकता को समझने के रचनात्मक प्रयत्न में बदल जाती है और साथ ही एक व्यक्ति की अस्वाभाविक जीवनेच्छा की विकृतियों को भी उजागर करती है।
उपन्यास का केन्द्रीय कथाक्षेत्र अपने इतिहास में अनेक विशिष्टताएँ छुपाए होने और उत्तर भारत के इतना निकट होने के बावजूद उसकी मुख्य सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धारा से पूरी तरह अलग रहा है। फलस्वरूप यहाँ के लोगों का रहन-सहन और सोच-विचार किस तरह और किस हद तक प्रभावित हुआ, इसे भी यहाँ पर्यटनवादी रोमांटिकता से मुक्त होकर संकेतित किया गया है।
वस्तुत: पंकज बिष्ट की यह महत्त्वपूर्ण कथाकृति पारिवारिक सम्बन्धों के ताने-बाने के बावजूद विभिन्न ऐतिहासिक तथ्यों, लोककथाओं और किंवदंतियों के माध्यम से आधुनिकता और परम्परा के जटिल टकराव को तो दर्शाती ही है, उससे उपजे जीवन-मृत्यु और स्वर्ग-नरक सम्बन्धी बुनियादी सवालों पर भी विचार करती है।
Hamka Diyo Pardes
- Author Name:
Mrinal Pande
- Book Type:

-
Description:
घर की बेटी, और फिर उसकी भी बेटी—करेला और नीमचढ़ा की इस स्थिति से गुज़रती अकाल–प्रौढ़ लेकिन संवेदनशील बच्ची की आँखों से देखे संसार के इस चित्रण में हम सभी ख़ुद को कहीं न कहीं पा लेंगे।
ख़ास बतरसिया अन्दाज़ में कहे गए इन क़िस्सों में कहीं कड़वाहट या विद्वेष नहीं है। बेवजह की चाशनी और वर्क़ भी नहीं चढ़ाए गए हैं। चीज़ें जैसी हैं वैसी हाज़िर हैं।
इनकी शैली ऐसी ही है जैसे घर के काम निपटाकर आँगन की धूप में कमर सीधी करती माँ शैतान धूल–भरी बेटी को चपतियाती, धमोके देती, उसकी जूएँ बीनती है। मृणाल पाण्डे की क़लम की संधानी नज़र से कुछ नहीं बच पाता—न कोई प्रसंग, न सम्बन्धों के छद्म। घर के आँगन से क़स्बे के जीवन पर रनिंग कमेंटरी करती बच्ची के साथ–साथ उसके देखने का क्षेत्र भी बढ़ता रहता है और उसके साथ ही सम्बन्धों की परतें भी। अन्त तक मृत्यु की आहट भी सुनाई देती है।
बच्चों की दुनिया में ऐसा नहीं होना चाहिए लेकिन होता है—इसीलिए यह किताब...
Dhamam Sharanam
- Author Name:
Suresh Kant
- Book Type:

-
Description:
धर्म यदि राजनीति को नियंत्रित-निर्देशित करने लगे अथवा राजनीति ही धर्म की आड़ में अपना खेल खेलने लगे तो हिंसा निश्चय ही उसका अनिवार्य परिणाम होगी। सुपरिचित कथाकार सुरेश कांत ने इस उपन्यास के माध्यम से इसी सत्य को रेखांकित किया है।
इसके लिए लेखक ने प्रियदर्शी अशोक की मृत्यु (ई.पू. 236) के क़रीब सौ वर्ष बाद का समय चुना है, जबकि सम्पूर्ण उत्तर-पश्चिमी भारत यूनानी आक्रमणों का शिकार था और मगध साम्राज्य का महान सेनानी पुष्यमित्र मौर्यवंश के अस्तप्राय गौरव की पुनर्स्थापना में लगा हुआ था, जैन धर्म का अभी प्रादुर्भाव ही हुआ था और पतनशीलता के गर्त में पड़ा हुआ बौद्ध धर्म अहिंसा के नाम पर अपनी सर्वाधिक हिंसक एवं राष्ट्रविरोधी भूमिका में था। इस पृष्ठभूमि में लेखक ने धर्म और राजनीति के अन्तर्सम्बन्धों का गम्भीर विवेचन किया है और राष्ट्रीय स्वाभिमान के सन्दर्भ में हिंसा तथा अहिंसा की सार्थकता का सवाल उठाया है। उसके पास इतिहास को देखने की एक लोकोन्मुख दृष्टि है और उसे एक रोचक कथा-फलक प्रदान करने की रचनात्मक क्षमता भी।
वस्तुतः लेखक की यह ऐतिहासिक कथाकृति तथाकथित ‘धर्म’ के उस भयावह चेहरे को उघाड़ती है, जो प्रायः अनदेखा रह जाता है और यह कार्य उसने कुछ इस कुशलता से किया है कि वर्तमान भारत में राजनीति करनेवाली धर्मोन्मादी शक्तियाँ—मठ और मन्दिर—अनायास हमारे सामने नग्न हो उठती हैं। हम उन धर्म-स्थानों और धर्म-गुरुओं को पहचान जाते हैं, जो जेतवन-विहार के विशाल चैत्य और संघ-स्थविर मोग्गलान-जैसे लोगों की शक्ल में यहाँ आज भी सक्रिय हैं। कहना न होगा कि इस कृति में रूपायित अतीत हमारे वर्तमान का ही एक चिन्तनीय अध्याय है।
Potpakshi
- Author Name:
Shivshankari
- Book Type:

-
Description:
सुजश। आधुनिक, आत्मनिर्भर, स्वतंत्र और अपने में बेहद सुलझी हुई लड़की। आर्किटेक्चर की दुनिया में एक रचनात्मक मेधा। सुजश। जिसने अपनी माँ के रूढ़िग्रस्त और उत्पीड़क व्यवहार का सामना करते हुए अपनी राह ख़ुद बनाई और नौ साल तक घर की तरफ़ मुड़कर नहीं देखा। वही सुजश अपने से उम्र में काफ़ी बड़े और विवाहित वासुदेव के प्रेम में घिरती हुई धीरे-धीरे पूरी तरह डूबने-डूबने को हो जाती है, लेकिन हठात् एक लहर उसे पुनः किनारे की तरफ़ खींच ले जाती है। वासुदेव को अचानक पता चलता है कि अपनी जिस पत्नी को वे सुजश के लिए तलाक़ देने जा रहे हैं, वह गर्भवती है। फ़ैसला सुजश करती है और लम्बी छुट्टी लेकर सुकून की तलाश में निकल जाती है।
इस उपन्यास में लेखिका किसी पात्र या परिस्थिति पर कोई वेल्यू जजमेंट नहीं देतीं, न यह कहती हैं कि सुजश और वासुदेव का प्रेम ठीक है अथवा ग़लत। वह बस एक कहानी को अपने पूरे प्रवाह के साथ हमारे सामने रख देती हैं। रोचक और पठनीय उपन्यास।
Ek Parivartan Aisa Bhi
- Author Name:
Arunimaa
- Book Type:

- Description: Arunima is an 18-year-old teenager who wrote all these poems that many people might relate with. It is not about her life. It is about what she thinks that people feel but can’t express.
Jhool
- Author Name:
Bhalchandra Nemade
- Book Type:

-
Description:
झूल उस दारुण परिणति का वृत्तान्त है जहाँ स्वातंत्र्योत्तर भारत की युवा पीढ़ी अपने व्यक्तिगत सपनों तथा जातीय आदर्शों और आकांक्षाओं के बीच के अन्तर को पाटने की कोशिश में पहुँची है। उपन्यास का नायक चांगदेव पाटील अपने अस्तित्व के उद्देश्य और नैतिक आदर्शों को समाज में व्याप्त संकीर्णताओं के बीच एकदम असंगत पाता है। यह अनुभव उस समय और प्रगाढ़ हो जाते हैं जब वह एक नए कॉलेज में प्रोफेसर बनकर आता है। पिछले कॉलेज के कटु अनुभव अभी भी उसके साथ हैं लेकिन जिस भावात्मक औदात्य को उसने अपनी जीवन-दृष्टि का आधार बनाया है, उसे भी उसने छोड़ा नहीं है। अपने एकाकी मन को वह समाज की बड़ी संरचना में विलय कर देना चाहता है लेकिन आसपास के जीवन और लोगों में कोई ऐसी मूल्य-चेतना उसे नहीं दिखती जो उन्हें उनकी तुच्छताओं से ऊपर उठा सके। समाज की यह असफलता उसके व्यक्ति को घोर निराशा से भर देती है। लगातार जगह बदलते हुए उसने जो पाया है, वह यही कि जीवन अन्ततः अर्थहीन ही है।
तीक्ष्ण दृष्टि और उतनी ही तीक्ष्ण शब्दावली के साथ भारतीय समाज की पड़ताल करने वाले नेमाड़े इस उपन्यास में ‘होने’ और ‘नहीं होने’ के द्वन्द्व को इतनी गहराई से अंकित करते हैं कि इस शृंखला के अन्य उपन्यासों की तरह यह उपन्यास भी कथा से अधिक एक अध्ययन हो जाता है।
झूल स्वतंत्र रूप से भी उतना ही दिलचस्प और पूर्ण पाठ है, जितना कि शृंखला की एक कड़ी के रूप में। यह एक बड़ी विशेषता है।
Magical Note
- Author Name:
Aviral Adeeb
- Book Type:

- Description: बचपन में खरीदे गए एक नकली नोट में चमकती हरी रौशनी से शुरू होती है- आरव की कहानी। एक ऐसा सफर जो उसे स्कूल से लेकर IIT (ISM) धनबाद तक ले जाता है। जहाँ हर मोड़ पर उसे अपने “मैजिकल नोट" की ताकत और उसके परिणामों का सामना करना पड़ता है। “मैजिकल नोट” जादू और मानवीय फैसलों की कहानी है। ऐसी कहानी जिसमे अंततः यह साबित होता है कि नियत ही नियति तय करती है।
Khule Gagan Ke Lal Sitare
- Author Name:
Madhu Kankariya
- Book Type:

-
Description:
‘भंगी और कम्युनिस्ट पैदा नहीं होते, बना दिए जाते हैं,’ इन्द्र ने बताया था मणि को, जब नक्सलबाड़ी गाँव से उठे एक सशस्त्र आन्दोलन ने कॉलेजों के भीतर घुसकर ’70 की युवा पीढ़ी को छूना शुरू किया था। और, जब तक मणि ने इस वास्तविकता को समझकर आत्मसात् किया, इन्द्र ग़ायब हो चुका था।
तीस साल तक लगातार प्रतीक्षारत मणि को आभास शुरू से ही था कि इन्द्र का क्या हुआ, लेकिन उस हक़ीक़त को उसने माना नहीं। वह उन हज़ारों युवाओं के साथ पुलिस की क्रूरता की भेंट चढ़ चुका था जिसे राज्य-तंत्र की ओर से नक्सलियों का आमूल सफाया करने का काम सौंपा गया था। मणि की भोली आशा के विपरीत वह उन लगभग 20 हज़ार क़ैदियों में भी शामिल नहीं था जिन्हें पाँच-पाँच साल तक बिना ट्रायल के ही बन्दी रखा गया और जिन्हें आपातकाल के बाद केन्द्र व प्रान्तीय सरकारों ने छोड़ा। मणि को विश्वास तब हुआ जब गोविन्द दा उस विकलांग कवि से मिलकर आए जिसके सामने, पुलिस-यंत्रणा के बीच इन्द्र ने दम तोड़ा था। इस बीच एक मध्य-वित्त परिवार में जन्मी मणि ने अपने घर में, और बाहर भी जीवन व भाग्य की अनेक विरूपताओं को ठीक अपने सीने पर झेला; लेकिन अपनी उम्मीद और जिजीविषा को टूटने नहीं दिया।
भावनाओं और विचारों, दुख और आक्रोश, भय और साहस के अत्यन्त महीन धागों से बुनी यह औपन्यासिक संरचना हमें नक्सलवादी आन्दोलन के वे दहला देनेवाले विवरण देती है जो इतिहास में सामान्यत: नहीं लिखे जाते। साथ ही कलकत्ता के एक मध्यवर्गीय परिवार की उन गलघोंटू परिस्थितियों का विवरण भी इसमें है जिनका मुकाबला विचार और विद्रोह के हथियार ही करें तो करें, वैसे सम्भव नहीं; जैसा कि इस उपन्यास में मणि और कुछ साहसी आत्माएँ अपने जीवन में करती हैं।
इस उपन्यास को पढ़ना इसकी भाषा में निहित आवेग के कारण भी एक अविस्मरणीय अनुभव है। यह भाषा बताती है कि सत्य और संवेद का कोई शास्त्रसम्मत आकार नहीं होता।
Leo Tolstoy
- Author Name:
Leo Tolstoy
- Book Type:

- Description: Classic Stories - Leo Tolstoy" is a collection of short stories written by the renowned Russian author, Leo Tolstoy. The book includes some of his most famous works, such as "The Death of Ivan Ilyich," "The Kreutzer Sonata," and "Master and Man." Tolstoy is known for his masterful storytelling and his ability to capture the complexities of human experience. His stories often explore themes such as love, morality, and the struggle between the individual and society. The stories in "Classic Stories - Leo Tolstoy" are beautifully written and offer a vivid portrayal of 19th-century Russia. They showcase Tolstoy's keen observation and his ability to create unforgettable characters and situations. "Classic Stories - Leo Tolstoy" is a must-read for fans of classic literature and short stories. It provides a fascinating glimpse into the world of one of the greatest Russian writers of all time, and offers a rich and rewarding reading experience for anyone looking to explore the depths of the human psyche.
Gujrat Pakistan Se Gujrat Hindustan
- Author Name:
Krishna Sobti
- Book Type:

-
Description:
रक्तरंजित इतिहास के उस हिंस्र और क्रूर अध्याय को क्यों तो याद करें और कैसे उसे भूल जाएँ! सदियों-सदियों के बाद देश में अवतरित होनेवाली आज़ादी हर हिन्दुस्तानी दिल में धड़कती रही थी। इस उमगती विरासत को राजनीतिक शक्तियों ने विभाजित कर देश का नया भूगोल और इतिहास बना दिया। नई सरहदें खींच दीं। सरहदों के आर-पार दौड़ती लाशों से भरी रेलगाडिय़ाँ स्टेशनों के बाहर अँधेरों में खड़ी कर दी जाती रहीं। हज़ारों-हज़ारों की भीड़ वाले क़ाफ़िले अपने ही क़दमों में गुम हो बेनाम ख़ामोशियों की धूल में जा मिले। फिर भी हर हिन्दुस्तानी के दिल में धड़कता यह अहसास था कि विभाजन के अँधेरों में उपजी 'आज़ादी' एक पवित्र शब्द है—हमारी राष्ट्रीय अस्मिता और बरकतों का प्रतीक।
बँटवारे के बाद बना पाकिस्तान उस त्रासदी से पहले जिनके लिए अपना प्यारा हिन्दुस्तान था; वे लोग, अपने ही आज़ाद मुल्क में जिनके क़दम विस्थापित शरणार्थियों के भेस में पड़े, यह उपन्यास उन उखड़े और दर-ब-दर लोगों की रूहों का अक्स है।
यही वह समय था जब भारत की आज़ादी ने एक और कहानी लिखना शुरू की, जिसका मक़सद अपने औपनिवेशिक अतीत को धोना था। ‘रियासतों का विलय’ शुरू हो रहा था। इस उपन्यास का ताल्लुक़ इतिहास के इस अध्याय से भी है।
और सबसे नज़दीकी सम्बन्ध इस कृति का उस शख़्सियत से है जिसे हम कृष्णा सोबती के नाम से जानते हैं। बँटवारे के दौरान अपने जन्म-स्थान गुजरात और लाहौर को यह कहकर कि 'याद रखना, हम यहाँ रह गए हैं', वे दिल्ली पहुँची ही थीं कि यहाँ के गुजरात ने उन्हें आवाज़ दी और अपनी स्मृतियों को सहेजते-सँभालते वे अपनी पहली नौकरी करने सिरोही पहुँच गईं, जहाँ उनमें अपने स्वतंत्र देश का नागरिक होने का अहसास जगा; व्यक्ति की ख़ुद्दारी और आत्मसम्मान को जाँचने-परखने के लिए सामन्ती ताम-झाम का एक बड़ा फलक मिला। और मिले सिरोही रियासत के दत्तक पुत्र महाराज तेज सिंह— एक बच्चा, जो भारत के अतीत, वर्तमान और भविष्य के बीच सहमा खड़ा अपनी शिक्षिका से पूछ रहा था, 'मैम, बेदख़ल का मतलब क्या होता है?’
उल्लेखनीय है कि इस उपन्यास में लगभग सभी घटनाएँ और पात्र वास्तविक हैं।
Sookha Bargad
- Author Name:
Manzoor Ehtesham
- Book Type:

-
Description:
सुपरिचित कथाकार मंज़ूर एहतेशाम का यह महत्त्वपूर्ण उपन्यास वर्तमान भारतीय मुस्लिम समाज के अन्तर्विरोधों की गम्भीर, प्रामाणिक और मूल्यवान पड़ताल का नतीजा है और यही कारण है कि इस उपन्यास को हिन्दी की कालजयी रचनाओं में गिना जाता है।
सामाजिक विकास के जिन अत्यन्त संवेदनशील गतिरोधों पर क़लम उठाने और उन्हें छूने-भर का साहस भी बहुत कम लोग कर पाते हैं, उन्हें इस उपन्यास में न सिर्फ़ छुआ गया है, बल्कि सबसे बड़े ख़ुदा—इंसान की ज़रूरतों, आशा-आकांक्षाओं और अस्तित्व के सन्दर्भ में उनकी गहरी छानबीन की गई है। धर्म, जातीयता, क्षेत्रीयता, भाषा और साम्प्रदायिकता के जो सवाल आज़ादी के बाद हमारे समाज में यथार्थ के विभिन्न चेहरों में उभरे हैं, उनकी असहनीय आँच इस समूची कथाकृति में मौजूद है।
यही सारे सवाल आज भी हमारे आसपास एक ऐसे बरगद की झूलती जड़ें बनकर फैले हुए हैं, जिसके नीचे किसी भी कौम की तरक़्क़ी और ख़ुशहाली असम्भव है। लेकिन सबसे महत्त्वपूर्ण है यह जानना कि इस त्रासदी के पीछे किसका हाथ है और इसका हल क्या है? कहना न होगा कि इस प्रश्न का उत्तर देते हैं वे तमाम लोग जो इस समाज में शोषित, पीड़ित, अपमानित और लांछित हैं, लेकिन आज भी टूटे नहीं हैं।
Alfa-Bita-Gama
- Author Name:
Nasera Sharma
- Book Type:

-
Description:
‘अल्फ़ा-बीटा-गामा’ एक ऐसे विषय को लेकर सभ्य, महानगरीय समाज की निर्दयताओं और अक्षम्य अमानवीयताओं को उजागर करता है जिसकी तरफ़ लिखित शब्दों का ध्यान अकसर नहीं जाता, वह भी इतने बड़े पैमाने पर कि उपन्यास हो जाए।
यह उपन्यास मनुष्य की आत्मग्रस्तता को कभी कुत्तों की आँखों से दिखाता है, कभी उन कुछ जनों की आँखों से जो अपने सीमित साधनों के साथ, और अपने आस-पड़ोस का विरोध झेलकर उन असहाय जीवों के लिए कुछ करना चाहते हैं। आख़िर यह कैसे होता है कि संस्कृति और धर्म के धनी जिस भारतीय समाज में पत्थरों के साथ भी जीवित की तरह बर्ताव कर लिया जाता है, इन सजीवों के लिए सहानुभूति का संस्कार हम ख़ुद को और अपनी सन्तानों को नहीं दे पाते!
भारतीय कुत्तों की अनेक प्रजातियों के गहरे अध्ययन, उनके व्यवहार की गहरी जानकारी के साथ नासिरा जी इस उपन्यास में नागर क्रूरताओं की दैनिक और शाश्वत कथा कहते हुए हमारे मौजूदा समय तक आती हैं जहाँ कोरोना है, और लॉकडाउन है। लॉकडाउन जिसके शिकार अनेक लोग हुए और उसी अनुपात में वे कुत्ते भी जो सार्वजनिक स्थलों, दुकानों, होटलों आदि के बन्द हो जाने के बाद न सिर्फ़ भूखे, बल्कि अकेले भी पड़ गए। लाखों मज़दूरों के पलायन और उससे पहले हुए दिल्ली दंगों की विभीषिका के मद्देनजर उपन्यास कुत्तों की पीड़ा को मानवीय भाषा में समझाने का प्रयास करता है, और चाहता है कि हमारी संवेदना की पहुँच हमारे बन्द दरवाज़ों के बाहर तक हो।
Mukhara Kya Dekhe
- Author Name:
Abdul Bismillah
- Book Type:

-
Description:
‘झीनी-झीनी बीनी चदरिया’ (1986) के प्रकाशन के ठीक दस वर्षों बाद आनेवाला अब्दुल बिस्मिल्लाह का यह उपन्यास अपनी महाकाव्यात्मक गरिमा के साथ एक ऐसे मुखड़े का रहस्योद्घाटन कर रहा है जो बाहर से बहुत भव्य है, पर भीतर से अत्यन्त कुरूप। ‘मुखड़ा क्या देखे’ की कथा भारतीय स्वाधीनता के कुछ बाद से लेकर इमरजेंसी तक फैली हुई है। इस पूरे दौर में देश के भीतर घटित सारी घटनाओं की छाप ग्रामीण जीवन पर किस रूप में पड़ी, उपन्यास की नींव इसी प्रश्न पर डाली गई है। लेखक यह स्पष्ट करता है कि देश-दुनिया में घटनेवाली बड़ी-बड़ी घटनाओं को बुद्धिजीवी और इतिहासकार जिस रूप में देखते हैं, गाँव के सामान्य लोग उसी रूप में नहीं देखते। उनके विचार और निष्कर्ष भले ही ग़लत होते हों, पर होते हैं ठोस। निस्सन्देह ‘मुखड़ा क्या देखे’ ऐतिहासिक उपन्यास नहीं है, लेकिन इसमें भारतीय इतिहास के अनेक बिन्दुओं की ऐसी व्याख्या है, जो इतिहास की पुस्तकों में नहीं मिलेगी।
‘मुखड़ा क्या देखे’ उपन्यास किसी विशेष गाँव या विशेष पात्रों की कथा न होकर सामान्य भारतीय जनमानस की कथा है। इस उपन्यास को बहुसंख्यक अथवा अल्पसंख्यक समाज की दृष्टि से भी नहीं देखा जा सकता। भारतवर्ष बहुजातीय, बहुधार्मिक और बहुभाषायी देश है। हिन्दी में ऐसे अनेक उपन्यास आए हैं, जो या तो बहुसंख्यक समाज की कहानी कहते हैं या फिर अल्पसंख्यक समाज की, लेकिन ‘मुखड़ा क्या देखे’ समग्र भारतीय समाज की कहानी कहता है, जिसमें सम्पन्न वर्ग के हिन्दू और मुसलमान दोनों मिलकर हिन्दू ‘परजा’ और मुसलमान ‘परजा’ का शोषण करते हैं।
अब्दुल बिस्मिल्लाह के लेखन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे जिस विषय पर लिखते हैं, उसमें आकंठ डूब जाते हैं। यही कारण है कि इस उपन्यास में जिस प्रामाणिकता के साथ उन्होंने मुसलमान रीति-रिवाज़ों का चित्रण किया है, उसी प्रामाणिकता के साथ हिन्दू और ईसाई समुदाय के रीति-रिवाज़ों का भी। अर्थात् पिछले बीस वर्षों में आए हिन्दी उपन्यासों में शायद पहली बार ऐसा हुआ है कि हिन्दी में लिखा गया यह उपन्यास समूचे भारतीय समाज का प्रतिनिधित्व करता है। इसकी अन्तर्वस्तु और शिल्प पर ठेठ देसी रंगों एवं संस्कारों की गहरी छाप है।
Khalistan Shadyantra Ki Inside Story
- Author Name:
G.B.S. Sidhu
- Book Type:

- Description: आखिर 1 अकबर रोड ग्रुप पंजाब/खालिस्तान समस्या का क्या अंतिम समाधान चाहता था? अकाली दल के उदार नेताओं से बातचीत कर समझौते तक पहुँचने की संभावना को मई 1984 के आखिर तक क्यों अधर में रखा गया, जब ऑपरेशन ब्लू स्टार में कुछ ही दिन रह गए थे? आखिर कैसे, जिस रॉ के लिए सिख उग्रवाद और खालिस्तान 1979 के आखिर तक कोई मुद्दा नहीं था, वही 1980 के अंत में अचानक उससे निपटने में शामिल हो गया? आखिर क्यों स्वर्ण मंदिर परिसर से भिंडरावाले को पकड़ने के लिए सुझाए गए कम नुकसानदेह उपायों को ठुकरा दिया गया? लेखक भारत की बाह्य खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व स्पेशल सेक्रेटरी हैं, जो आपस में जुड़ी कई घटनाओं की समीक्षा करते हैं—खालिस्तान आंदोलन, ऑपरेशन ब्लू स्टार, 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या और उसके बाद हुई सिख-विरोधी हिंसा। 1984 से सात साल पहले से लेकर उसके एक दशक बाद के घटनाक्रम का जिक्र करती यह पुस्तक उन महत्त्वपूर्ण सवालों के जवाब देने का प्रयास करती है जो आज भी बरकरार हैं। कहानी पंजाब से कनाडा, अमेरिका, यूरोप और दिल्ली तक घूमती है तथा राजनीतिक भ्रमजालों एवं अवसरवाद के बीच से सच को बाहर लाने की कोशिश करती है। हजारों बेकसूर लोगों की जिंदगी को निगल जानेवाली हृदय-विदारक हिंसा और सत्ताधारी दल की ओर से कथित तौर पर निभाई गई भूमिका की छानबीन करती है।
Log
- Author Name:
Giriraj Kishore
- Book Type:

-
Description:
‘लोग’ सुप्रसिद्ध कथाकार गिरिराज किशोर का चर्चित उपन्यास है। इसमें एक संक्रमणशील समय का अत्यन्त प्रभावी व रोचक चित्रण है। लेखक के शब्दों में, “देश का स्वतंत्र होना लगभग निश्चित हो गया था। नई सामाजिक प्रवृत्तियाँ और शक्तियाँ अपना स्थान बना रही थीं। उस समय का अभिजात वर्ग अपने-आपको डूबता हुआ महसूस करने लगा, आर्थिक स्तर पर ही नहीं, सामाजिक एवं मान्यताओं के स्तर पर भी। उस वर्ग से सम्बद्ध हर एक वर्ग के ‘लोग’ अपने-आपको ‘छूट-गया’ हुआ-सा महसूस कर रहे थे। उन लोगों के मन में इस नए परिवर्तन के प्रति अरक्षा, मूल्यहीनता, संस्कार-हीनता, उच्छृंखलता, विघटन आदि सब प्रकार की आशंकाएँ थीं। अंग्रेज़ों का जाना उस ‘पूरे' वर्ग के व्यक्तिहीन हो जाने की सूचना थी। उनमें से कुछ बदलते हुए सन्दर्भों के अनुरूप अपने को ढाल पाने में असमर्थ रहे। वे ही ‘लोग’ यहाँ
हैं।”यह उपन्यास वस्तुत: आत्ममूल्यांकन और सामाजिक विश्लेषण की समेकित प्रक्रिया को रेखांकित करता है। कथारस और पठनीयता के गुणों से ओत-प्रोत एक महत्त्वपूर्ण उपन्यास।
<
Channa
- Author Name:
Krishna Sobti
- Book Type:

-
Description:
कृष्णा जी का सबसे पहला उपन्यास है ‘चन्ना’ जिसे पिछली सदी के पाँचवें दशक में ही पाठकों तक पहुँच जाना था, लेकिन यह नहीं हो सका। प्रकाशक ने एक नए लेखक की भाषा में बदलाव करने की कोशिश की तो लेखक ने अपने पाठ के शील-सौन्दर्य की रक्षा हेतु उसे वापस ले लिया। तब से अब तक विभाजन-पूर्व भारत के खेतिहर समाज और उस परिवेश में जन्म लेकर पलती-बढ़ती-लड़ती चन्ना की यह गाथा लेखक के तहखाने में खामोशी से इन्तज़ार करती रही।
अब ‘चन्ना’ पाठकों के सामने है और अपनी चेतना के रूप-स्वरूप से आपको हैरान करने जा रही है। चन्ना का पारिवारिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य भारत के उस समय का है जब दुनिया के अग्रणी मुल्कों में भी स्त्री-स्वतंत्रता की बहुत सुगबुगाहट नहीं थी। लेकिन चन्ना ठीक उन्ही अर्थों में आधुनिक है जिन्हें हम आज जानते हैं। पैदाइश के वक़्त ही माँ की छाया से वंचित, पिता के स्नेह से दूर, नाना-नानी के प्यार-तले पली-बढ़ी चन्ना आज़ाद ख़याल है, शिक्षित है, और सबसे ज़्यादा ध्यान देने लायक़ यह कि अपने अधिकार को लेकर सजग है । और यह अधिकार उसके व्यक्तित्व की हदों तक सीमित नहीं, उन ज़मीनों और खेतों तक फैला है जिन्हें वह अपने पुरखों की ओर से मिला दायित्व भी मानती है।
कृष्णा सोबती कभी भी उन स्त्रीवादी लेखकों में नहीं रहीं जो हिन्दी में अक्सर फ़ैशन में रहे। उन्होंने स्त्रीत्व और पुरुषत्व को दो अलग खाने कभी नहीं माना। उनका ज़ोर व्यक्ति के उस आत्मबोध को जगाने पर रहा है जो किसी भी देह में प्रकट होकर प्रकाश देता है—वह देह स्त्री की हो या पुरुष की। ‘चन्ना’ इसी आत्मबोध का साकार रूप है जिसे कृष्णा जी ने आज से लगभग सात दशक पहले गढ़ा था। यह अपनी ज़मीन, अपनी विरासत से निकलती स्त्री है जिसे हम चन्ना की व्यक्ति-सत्ता में देखते हैं।
Apni Zamin
- Author Name:
Shantinath Desai
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Nirmala
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

-
Description:
‘निर्मला’ प्रेमचन्द का एक मार्मिक उपन्यास है जिसमें उन्होंने बेमेल विवाह की विसंगतियों को बेहद संवेदनशील और नाटकीय कथा-तत्त्व के साथ उजागर किया है। उनके कई उपन्यासों के मुक़ाबले आकार में छोटा होने के बावजूद इसे उनकी महत्त्वपूर्ण रचनाओं में गिना जाता है और आज भी पाठकों में इसकी लोकप्रियता बरकरार है। एक टीवी धारावाहिक के अलावा दृश्य तथा श्रव्य माध्यमों में और भी कई तरह से इसका रूपान्तरण होता रहा है।
कहानी के केन्द्र में निर्मला नामक एक युवती है, जिसका विवाह उसके परिवार की विपरीत परिस्थितियों के चलते उससे उम्र में कई साल बड़े, विधुर और तीन लड़कों के पिता तोताराम से हो जाता है। निर्मला इस विवाह को स्वीकार करके तोताराम की पत्नी और उसके बच्चों की माँ के रूप में स्वयं को ढाल लेती है, लेकिन तोताराम स्वाभाविक नहीं रह पाता। यहाँ तक कि वह अपने बड़े बेटे के साथ उसके ग़लत रिश्तों तक का शक करने लगता है जिसके दूरगामी नतीजे होते हैं।
निर्मला के साथ अन्य पात्रों को भी उपन्यास में सन्तुलित ढंग से उभारा गया है जिसके कारण लगातार अवसाद और दुर्भाग्य के अँधेरे में चलते पाठक की रुचि कहीं भी भंग नहीं होती। बेमेल विवाह, दहेज-प्रथा और आज़ादी से पहले पारम्परिक भारतीय समाज में स्त्री की दारुण स्थिति के इर्द-गिर्द बुनी गई इस कथा की प्रासंगिकता आज भी है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book