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Sahsra Netradhari Nayak

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अंग्रेज़ी के इस पहले भूटानी उपन्यास ‘सहस्र नेत्रधारी नायक’ (द हीरो विद ए थाउजैंड आइज़) की कहानी दूसरे भूटान नरेश के राज्यकाल के समय की है, जिसके केन्द्र में लामा से राजदरबारी बने व्यक्ति का जीवन है। साथ ही साथ लुप्तप्राय होती संस्कृति का चित्रण है, जो अब इतिहास है। उपन्यास में कई घटनाक्रम हूबहू हैं, कहीं-कहीं लेखक कर्मा ऊरा ने कल्पनाशक्ति का इस्तेमाल किया है, जिससे उपन्यास की रोचकता और पठनीयता बढ़ गई है। उपन्यास के नायक का जन्म भूटान के एक ग्रामीण शिंखार लामा परिवार में हुआ था किन्तु स्थितियाँ ऐसी बदलीं कि यह लामा द्वितीय भूटान नरेश के राजदरबार में परिचर नियुक्त हो गया। राजपरिवार और शासन-व्यवस्था के साथ यह साधारण नायक भूटान के बहुआयामी जीवन से पाठक का परिचय कराता है। नायक के चालीस वर्षों के जीवनकाल की अवधि भूटान के इतिहास में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। कर-प्रणाली में सुधार, राष्ट्रीय असेम्बली की स्थापना, भूटान के संयुक्त राष्ट्र में प्रवेश के अलावा आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक जीवन में विकास—इस काल की महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ हैं। लेखक ने तत्कालीन राजदरबार के एक परिचर की दिनचर्या, दरबारी गतिविधियों, परम्पराओं, मूल्यों, धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ व्यक्तिगत प्रेम-सम्बन्धों और षड्यंत्रों का भी संवेदनशीलता के साथ चित्रण किया है। अत्यन्त महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक उपन्यास।

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अंग्रेज़ी के इस पहले भूटानी उपन्यास ‘सहस्र नेत्रधारी नायक’ (द हीरो विद ए थाउजैंड आइज़) की कहानी दूसरे भूटान नरेश के राज्यकाल के समय की है, जिसके केन्द्र में लामा से राजदरबारी बने व्यक्ति का जीवन है। साथ ही साथ लुप्तप्राय होती संस्कृति का चित्रण है, जो अब इतिहास है।

उपन्यास में कई घटनाक्रम हूबहू हैं, कहीं-कहीं लेखक कर्मा ऊरा ने कल्पनाशक्ति का इस्तेमाल किया है, जिससे उपन्यास की रोचकता और पठनीयता बढ़ गई है।

उपन्यास के नायक का जन्म भूटान के एक ग्रामीण शिंखार लामा परिवार में हुआ था किन्तु स्थितियाँ ऐसी बदलीं कि यह लामा द्वितीय भूटान नरेश के राजदरबार में परिचर नियुक्त हो गया। राजपरिवार और शासन-व्यवस्था के साथ यह साधारण नायक भूटान के बहुआयामी जीवन से पाठक का परिचय कराता है।

नायक के चालीस वर्षों के जीवनकाल की अवधि भूटान के इतिहास में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। कर-प्रणाली में सुधार, राष्ट्रीय असेम्बली की स्थापना, भूटान के संयुक्त राष्ट्र में प्रवेश के अलावा आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक जीवन में विकास—इस काल की महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ हैं। लेखक ने तत्कालीन राजदरबार के एक परिचर की दिनचर्या, दरबारी गतिविधियों, परम्पराओं, मूल्यों, धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ व्यक्तिगत प्रेम-सम्बन्धों और षड्यंत्रों का भी संवेदनशीलता के साथ चित्रण किया है। अत्यन्त महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक उपन्यास।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2009
Weight
386 grams
ISBN-13
9788126716005
Pages
224
Reading time
~7 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 22 cm
Language
Hindi

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