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Bhakta Prahlad

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भारत के पौराणिक साहित्य में अनेक ऐसे किशोर चरित्र हैं जो मनुष्य के अडिग विश्वास, आस्था और संकल्प बल के प्रतीक हैं। ‘भक्त प्रह्लाद’ हमारे पौराणिक आख्यानों का ऐसा ही चरित्र है। इस चरित्र की कथा के माध्यम से निराला ने प्रह्लाद के उस अटूट विश्वास को उजागर किया है जो किसी भी आततायी के सामने पराजित नहीं होता। साथ ही, मानव-प्रकृति के वर्णन पर भी निराला ने अपना ध्यान केन्द्रित किया है। भक्त प्रह्लाद जब शिक्षा के लिए गुरुकुल में पहुँचा तो गुरु ने आरम्भ में जो तीन बातें बतलाईं, उनमें तीसरी थी, “तुम यहाँ कभी यह घमंड न कर सकोगे कि तुम राजा के लड़के हो। यहाँ जितने लड़के हैं, सबका बराबर आसन है। सम्मान की दृष्टि से बड़ा वह है जिसने अध्ययन अधिक किया है। तुम्हें सदा ही उसका अदब करना चाहिए।” इसके बाद निराला लिखते हैं, “प्रह्लाद मौन धारण किए इन अनुशासनों को सुन रहे थे। तीसरी आज्ञा उन्हें भायी। राजा और रंक एक ही आसन पर बैठकर ज्ञानार्जन करते हैं, समता के इस भाव से समदर्शी बालक का मुख प्रफुल्ल हो उठा।” उपरोक्त उद्धरण से स्पष्ट है कि ‘भक्त प्रह्लाद’ एक पौराणिक चरित्र का पुनराख्यान-मात्र नहीं है, बल्कि उसके माध्यम से निराला ने किशोर पीढ़ी के लिए समता और मनुष्यता का सन्देश भी दिया है।

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भारत के पौराणिक साहित्य में अनेक ऐसे किशोर चरित्र हैं जो मनुष्य के अडिग विश्वास, आस्था और संकल्प बल के प्रतीक हैं। ‘भक्त प्रह्लाद’ हमारे पौराणिक आख्यानों का ऐसा ही चरित्र है। इस चरित्र की कथा के माध्यम से निराला ने प्रह्लाद के उस अटूट विश्वास को उजागर किया है जो किसी भी आततायी के सामने पराजित नहीं होता। साथ ही, मानव-प्रकृति के वर्णन पर भी निराला ने अपना ध्यान केन्द्रित किया है। भक्त प्रह्लाद जब शिक्षा के लिए गुरुकुल में पहुँचा तो गुरु ने आरम्भ में जो तीन बातें बतलाईं, उनमें तीसरी थी, “तुम यहाँ कभी यह घमंड न कर सकोगे कि तुम राजा के लड़के हो। यहाँ जितने लड़के हैं, सबका बराबर आसन है। सम्मान की दृष्टि से बड़ा वह है जिसने अध्ययन अधिक किया है। तुम्हें सदा ही उसका अदब करना चाहिए।” इसके बाद निराला लिखते हैं, “प्रह्लाद मौन धारण किए इन अनुशासनों को सुन रहे थे। तीसरी आज्ञा उन्हें भायी। राजा और रंक एक ही आसन पर बैठकर ज्ञानार्जन करते हैं, समता के इस भाव से समदर्शी बालक का मुख प्रफुल्ल हो उठा।”

उपरोक्त उद्धरण से स्पष्ट है कि ‘भक्त प्रह्लाद’ एक पौराणिक चरित्र का पुनराख्यान-मात्र नहीं है, बल्कि उसके माध्यम से निराला ने किशोर पीढ़ी के लिए समता और मनुष्यता का सन्देश भी दिया है।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
7th
Publication year
1986
Weight
190 grams
ISBN-13
9788171788965
Pages
96
Reading time
~3 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
12.5 × 19 cm
Language
Hindi

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