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Author:
Dr. D.D. Ojha, Anil Kumar GuptaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
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हमारे जीवन में हम अनेक वैज्ञानिक उत्पादों का उपयोग प्रातःकाल से रात्रि-पर्यंत एवं जीवन-पर्यंत तक करते हैं। इसके अतिरिक्त चाहे मानव शरीर हो, पशु-पक्षियों के व्यवहार एवं विशेषताएँ हों, प्राकृतिक क्रियाएँ हों, समुद्र, अंतरिक्ष, पृथ्वी, रसायन, भौतिकि, नैनो, बायोटेक्नोलॉजी, चिकित्सा विज्ञान के रोचक वैज्ञानिक प्रसंग तथा सामाजिक एवं धार्मिक परंपराएँ भी क्यों न हों, उनके बारे में जानने की जिज्ञासा रहती ही है। प्रायः यह समझा जाता है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में होनेवाले अनुसंधान और उनके अनुप्रयोगों को समझना सामान्य जनसाधारण की बुद्धि के परे होता है, परंतु उनके उद्देश्य अंततः मानव की जीवन-शैली में अद्भुत परिवर्तन लाकर उसे प्रगति की राह पर निरंतर आगे बढ़ाने के ही होते हैं। आज के प्ररिप्रेक्ष्य में सभी वर्ग के सुधी पाठकों को दैनिक जीवन, प्राकृतिक घटनाओं, अनेक जीवधारियों से संबंधित घटनाओं, सामाजिक एवं वैदिक परंपराओं में निहित विज्ञान के अनेकानेक विषयों पर जानकारी उनकी बोल-चाल की भाषा में होना बहुत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से इस पुस्तक ‘रोचक वैज्ञानिक रहस्य’ का प्रणयन सरल-सुबोध भाषा में यथोचित चित्रों सहित किया है। विज्ञान में अभिरुचि रखनेवाले तथा सामान्य व्यक्ति के लिए भी समान रूप से पठनीय रोचक-ज्ञानवर्धक पुस्तक।
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हमारे जीवन में हम अनेक वैज्ञानिक उत्पादों का उपयोग प्रातःकाल से रात्रि-पर्यंत एवं जीवन-पर्यंत तक करते हैं। इसके अतिरिक्त चाहे मानव शरीर हो, पशु-पक्षियों के व्यवहार एवं विशेषताएँ हों, प्राकृतिक क्रियाएँ हों, समुद्र, अंतरिक्ष, पृथ्वी, रसायन, भौतिकि, नैनो, बायोटेक्नोलॉजी, चिकित्सा विज्ञान के रोचक वैज्ञानिक प्रसंग तथा सामाजिक एवं धार्मिक परंपराएँ भी क्यों न हों, उनके बारे में जानने की जिज्ञासा रहती ही है। प्रायः यह समझा जाता है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में होनेवाले अनुसंधान और उनके अनुप्रयोगों को समझना सामान्य जनसाधारण की बुद्धि के परे होता है, परंतु उनके उद्देश्य अंततः मानव की जीवन-शैली में अद्भुत परिवर्तन लाकर उसे प्रगति की राह पर निरंतर आगे बढ़ाने के ही होते हैं।
आज के प्ररिप्रेक्ष्य में सभी वर्ग के सुधी पाठकों को दैनिक जीवन, प्राकृतिक घटनाओं, अनेक जीवधारियों से संबंधित घटनाओं, सामाजिक एवं वैदिक परंपराओं में निहित विज्ञान के अनेकानेक विषयों पर जानकारी उनकी बोल-चाल की भाषा में होना बहुत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से इस पुस्तक ‘रोचक वैज्ञानिक रहस्य’ का प्रणयन सरल-सुबोध भाषा में यथोचित चित्रों सहित किया है।
विज्ञान में अभिरुचि रखनेवाले तथा सामान्य व्यक्ति के लिए भी समान रूप से पठनीय रोचक-ज्ञानवर्धक पुस्तक।
Book Details
-
ISBN9788177213942
-
Pages248
-
Avg Reading Time8 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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फ्रांस के अमर लेखक, नोबेल पुरस्कार-विजेता अल्बैर कामू मानव-अन्तर्मन के संवेगों और कुंठाओं को अनावृत करने में पटु हैं। नियति में उनका विश्वास है और कृत्य की स्वतंत्रता एक निर्दिष्ट परिधि में ही वह मानते हैं। आरम्भ से अन्त तक पाठक की रुचि को साधे रखनेवाले इस उपन्यास में नायक के समस्त क्रिया-कलाप और उसके साथ घटी घटनाओं में उनका यही जीवन-दर्शन व्यक्त हुआ है। विश्व के विशिष्ट उपन्यास-साहित्य में स्थान पानेवाले उपन्यास ‘अजनबी’ की कथा-वस्तु न केवल हमारे मर्म को मथ देने में सफल होती है, वरन् हमें जीवन और कर्म, और इन दोनों के उद्देश्यों के सम्बन्ध में भी सोचने पर विवश करती है। सन् 1942 में प्रकाशित इस उपन्यास को द्वितीय विश्वयुद्ध से उत्पन्न हताशा और विसंगतियों को अभिव्यक्त करनेवाली कृति माना जाता है। उपन्यास के नायक से कामू यहाँ जीवन की निरुद्देश्यता और मृत्यु की अनिवार्यता को रेखांकित करते हैं; नायक की समाज से विरक्ति और उदासीनता का जैसा मार्मिक चित्रण कामू ने इस उपन्यास में किया है, वह आज भी स्तब्ध कर देता है।
Naukar Ki Kameez
- Author Name:
Vinod Kumar Shukla
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‘नौकर की कमीज़’ भारतीय जीवन के यथार्थ और आदमी की कशमकश को प्रस्तुत करनेवाला उपन्यास है। इस उपन्यास की सबसे बड़े ख़ासियत यह है कि इसके पात्र मायावी नहीं बल्कि दुनियावी हैं, जिनमें कल्पना और यथार्थ के स्वर एक साथ पिरोए हुए हैं। कहीं भी ऐसा नहीं लगता कि किसी पात्र को अनावश्यक रूप से महत्त्व दिया गया हो। हर पैरे और हर पात्र की अपनी महत्ता है। केन्द्रीय पात्र संतू बाबू एक ऐसा दुनियावी पात्र है जो घटनाओं को रचता नहीं, बल्कि उनसे जूझने के लिए विवश, है और साथ ही इस सोसाइटी के हाथों इस्तेमाल होने के लिए भी। आज की ‘ब्यूरोक्रेसी’ और अहसानफ़रामोश लोगों पर यह उपन्यास सीधा प्रहार ही नहीं करता, बल्कि छोटे-छोटे वाक्यों के सहारे व्यंग्यात्मक शैली में एक माहौल भी तैयार करता चलता है। विनोद कुमार शुक्ल की सूक्ष्म निरीक्षण शक्ति का ही कमाल है कि पूरे उपन्यास को पढ़ने के बाद ज़िन्दगी के अनगिनत मार्मिक तथ्य दिमाग़ में तारीख़वार दर्ज होते चले जाते हैं। उनके छोटे-छोटे वाक्यों में अनुभव और यथार्थ का पैनापन है, जिसकी मारक शक्ति केवल मिलमिलाहट ही पैदा नहीं करती बल्कि बहुत अन्दर तक भेदती चली जाती है।
Naqqashidar Cabinet
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
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सुधा ओम ढींगरा का उपन्यास नक़्क़ाशीदार केबिनेट वर्ष 2016 का अत्यंत सफल उपन्यास है। यह उपन्यास पेपरबैक और ऑडियोबुक में भी उपलब्ध है।
Gawah Gairhazir
- Author Name:
Chandrakishore Jaiswal
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किसुन साह ने जब बिना किसी सिर-फुड़ौव्वल के बेटों के बीच बाँट-बखरा कर दिया तो लोगों ने उन्हें इस बात पर खुश होने को कहा कि अब उनके बुढ़ापे के दिन मौज-मस्ती में कटते रहेंगे। किसुन साह ने भी निर्णय ले लिया कि मौज-मस्ती में दिन काटने के लिए उन्हें अब बूढ़ा भी हो ही जाना चाहिए। लेकिन...। परिवार नामक सुख के टापू की यह कहानी यहीं से शुरू होती है। लोक और ग्रामीण जीवन के मर्मज्ञ कथाकार चन्द्रकिशोर जायसवाल का उपन्यास ‘गवाह गैरहाजिर’ अपनी बहुस्तरीय भाषा-सामर्थ्य के लिए खासतौर पर जाना जाता है। पात्रों की कहानी कहने के साथ ही कथाकार इसमें भारतीय ग्राम्य समाज और उसकी संरचना पर भी टिप्पणियाँ करते चलते हैं जिससे एक तरफ सूक्ष्म पर्यवेक्षण की उनकी क्षमता रेखांकित होती है, तो दूसरी तरफ़ गाँव की गझिन सामाजिक-मानसिक बनावट को समझने में भी मदद मिलती है। उपन्यास की कथा के केन्द्र में किसुन साह हैं—एक स्वाभिमानी और समझदार बुजुर्ग। घर की सम्पत्ति इत्यादि का बँटवारा अपने परिवार में शान्तिपूर्वक करने के बाद वे सबसे छोटे बेटे के साथ रहने का फैसला करते हैं। कुछ दिन वहाँ रहने के बाद जब उन्हें लगता है कि बेटा-बहू का व्यवहार उनके प्रति ठीक नहीं है तो वे घर छोड़कर बाकी जीवन एक मन्दिर में बिताने का फैसला करते हैं, लेकिन परिवार से मोह के चलते यह भी नहीं कर पाते। पारिवारिक सम्बन्धों की महीन अक्कासी के अलावा यह उपन्यास पीढ़ियों के बीच बढ़ती दूरी और सम्बन्धों की ऊष्मा के छीजते जाने की मनोवैज्ञानिक पड़ताल भी करता है। समर्थ शिल्प, जीवन्त भाषा और बेधक कथ्य वाला अत्यन्त पठनीय उपन्यास !
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