Khayalon Ke Munder Se
(0)
Author:
Akhilesh BakshiPublisher:
Author'S Ink PublicationsLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
113
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Hindi Poetry Book written By Akhilesh Bakshi . This book consist of poetry related to love and life.
Read moreAbout the Book
Hindi Poetry Book written By Akhilesh Bakshi . This book consist of poetry related to love and life.
Book Details
-
ISBN9789385137341
-
Pages80
-
Avg Reading Time1 hrs
-
Age18+ yrs
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Country of OriginN/A
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‘सती मैया का चौरा’ में भैरवप्रसाद गुप्त गाँवों की मुक्ति का सवाल उठाते हैं। वे साम्प्रदायिक सद्भाव के लिए किए जानेवाले संघर्ष को भी विस्तारपूर्वक अंकित करते हैं। उपन्यास की कहानी दो सम्प्रदायों के किशोरों—मुन्नी और मन्ने को केन्द्र में रखकर विकसित होती है। मन्ने गाँव के ज़मींदार का लड़का है, जबकि मुन्नी एक साधारण हैसियत वाले वैश्य परिवार से है। उनके किशोर जीवन के चित्र साम्प्रदायिक कट्टरता के विरुद्ध एक आत्मीय और अन्तरंग हस्तक्षेप के रूप में अंकित हैं। भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन में ही उत्पन्न साम्प्रदायिक राजनीति की शक्तियाँ गाँव को भी प्रभावित करती हैं। सती मैया के चौरा के लिए शुरू हुआ संघर्ष उन निहित स्वार्थों को निर्ममतापूर्वक उद्घाटित करता है जो धर्म और सम्प्रदाय के नाम पर लोक-चेतना और लोक-संस्कृति के प्रतीकों को नष्ट करते हैं। ‘हिन्दू-मुसलमान की बात कभी अपने दिमाग़ में उठने ही न दो, यह समस्या धार्मिक नहीं राजनीतिक है और सही राजनीति ही साम्प्रदायिकता का अन्त कर सकती है।’ यह सही राजनीति क्या है? ‘मैं कभी भी महत्त्वाकांक्षी नहीं रहा। धन, यश, प्रशंसा को कभी भी मैंने कोई महत्त्व नहीं दिया। पढ़ाई ख़त्म होने के बाद जो तकलीफ़ मैंने झेली, उसमें और आश्रम के जीवन में जो भी ग्रहण किया है, सच्चाई से किया है। आश्रम, जेल जीवन और पार्टी जीवन ने मुझे बिलकुल सफ़ेद कर दिया, सारी रंगीनियों को जला दिया...मैंने जीवन में जो भी ग्रहण किया है, सच्चाई से किया है। आश्रम में, जेल जीवन में, पार्टी जीवन में और अब पत्रकारिता और लेखक के जीवन में...।’ ‘सती मैया का चौरा’ भैरवप्रसाद गुप्त का ही नहीं, समूचे हिन्दी उपन्यास में एक उल्लेखनीय रचना के रूप में समादृत रहा है।
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Book
Khayalon Ke Munder Se by Akhilesh Bakshi is a Hindi poetry collection that treats thought itself as a dwelling — a threshold between what we experience and what we carry. The title translates to From the Parapet of Thoughts, suggesting a vantage point both intimate and removed, where the poet observes love and life without surrendering to sentimentality. Bakshi's work is rooted in the everyday: relationships, fleeting moments, the weight of absence. His poems do not announce themselves; they reveal slowly, rewarding readers who linger. The language is conversational yet carefully composed, making this collection accessible to newer readers of Hindi poetry while offering depth to those seeking emotional precision. Unlike anthologies that categorise emotion into neat sections, this book allows love and life to bleed into one another, as they do in lived experience. It speaks to a generation balancing tradition with personal voice, making it quietly contemporary without rejecting classical resonance.
यह किताब पढ़ते समय मुझे कैसा अनुभव होगा?
यह संग्रह आपको धीमी, चिंतनशील यात्रा पर ले जाता है। कविताएं जल्दबाज़ी में नहीं खुलतीं — वे आपसे ठहरने, महसूस करने और अपने अनुभवों को कवि के शब्दों में पहचानने की मांग करती हैं। प्रेम और जीवन के बीच की सीमाएं धुंधली हैं, जैसे वास्तविकता में होती हैं। यह भावनात्मक सटीकता का संग्रह है, नाटकीयता का नहीं, और पढ़ने के बाद एक शांत, गहरा प्रभाव छोड़ता है।
यह किताब किस तरह के पाठकों के लिए सबसे उपयुक्त है?
- वे पाठक जो हिंदी कविता में नए हैं और सुलभ लेकिन गहरी भाषा चाहते हैं
- प्रेम और अनुपस्थिति की सूक्ष्म अभिव्यक्ति खोजने वाले
- समकालीन स्वर में परंपरा की गूंज सुनने के इच्छुक
- जो रोज़मर्रा के क्षणों में काव्यात्मक सच्चाई पहचानते हैं
इस किताब का विषय आज के भारतीय पाठकों के लिए सांस्कृतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
आज के भारत में, जहां व्यक्तिगत भावनाओं को व्यक्त करना और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाना एक जीवंत बातचीत है, यह संग्रह दोनों को सम्मान देता है। यह प्रेम को निजी अनुभव के रूप में देखता है, न कि केवल सामाजिक संस्था के रूप में। युवा पीढ़ी के लिए जो अपनी भावनात्मक भाषा खोज रही है, बख्शी का काम दिखाता है कि हिंदी कविता आधुनिक और गहराई से व्यक्तिगत दोनों हो सकती है।
अखिलेश बख्शी का इस विषय पर दृष्टिकोण क्या विशिष्ट बनाता है?
बख्शी प्रेम और जीवन को अलग श्रेणियों में नहीं बांटते। उनकी कविताओं में विचार स्वयं एक स्थान बन जाता है — एक मुंडेर, एक दहलीज़ — जहां से वे भावनाओं को दूरी और अंतरंगता दोनों के साथ देखते हैं। उनकी भाषा सरल है लेकिन सतही नहीं, और वे पाठक की बुद्धि पर भरोसा करते हैं। यह दृष्टिकोण उन्हें अति-भावुक या अमूर्त कवियों से अलग करता है।
यह किताब पाठक को भावनात्मक और बौद्धिक रूप से क्या देती है?
- अपनी छोटी भावनाओं को मान्यता — वे भी कविता के योग्य हैं
- यह समझ कि प्रेम और स्मृति अक्सर एक ही हैं
- भाषा के प्रति सम्मान जो शांत लेकिन शक्तिशाली है
- विचार और अनुभव के बीच की दूरी की स्वीकृति