Once Lost Found Forever
Author:
Jitender Rishi ParmarPublisher:
Author'S Ink PublicationsLanguage:
EnglishCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 144.5
₹
170
Available
When you chase love, love chases someone else. The moment you realise you are in love, only love remains; you disappear, and so is the chase forever. Read about shagun, Girija and Rishi, who once lost what was most important to them and then found something that made them essential eternally. Firmly glued to reality, this engaging tale of love, longing and fulfilment will inspire you to heal the corner of your heart that someone ever breaks. Jitender Rishi Parmar works as Assistant Professor at Hindu college, Sonipat. A gold Medallist in M.Phil, a doctorate in English and a seeker, he has been published widely by National and international Publishers. This book is his second novel. His interests in human relationships and spirituality are key writing inspirations.
ISBN: 9788193827116
Pages: 130
Avg Reading Time: 2 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: शिकरमों और ऊँट-गाड़ियों के एक सदी पुराने ज़माने से लेकर आज तक के तेज़ी से बदलते हुए रोचक मार्मिक और सहज जन-जीवन के अन्तरंग जीवन्त चित्रों का वर्णन पढ़ते-पढ़ते आप यह भूल जाएँगे कि उपन्यास पढ़ रहे हैं, बल्कि यह अनुभव करेंगे कि आप स्वयं भी इस वातावरण के ही एक अभिन्न अंग हैं। इसकी रचना-शैली का अनूठापन औसत और प्रबुद्ध दोनों प्रकार के पाठकों को अपने-अपने ढंग से किन्तु समान रूप से प्रभावित करने की क्षमता रखता है। लेखक ने सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक, समाजशास्त्रीय और दार्शनिक दृष्टि से जिस तन्मयता और गहराई से व्यक्ति और समाज का मनोरूप दर्शन यहाँ प्रस्तुत किया है, वह पाठकों के लिए आमतौर से अन्यत्र दुर्लभ है। पुस्तक एक बार हाथ में उठा लेने पर पूरा पढ़े बिना आप रह नहीं सकते। यही नहीं, आप इसे बार-बार पढेंगे और हर बार एक नई दृष्टि और नए रस-बोध की ताज़गी पाएँगे।
Chhaila Sandu
- Author Name:
Mangal Singh Munda
- Book Type:

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Description:
छैला सन्दु आदिवासी समाज का एक अप्रतिम नायक है। इतिहास उसके बारे में मौन है लेकिन सन्दु और बुन्दी की प्रेमकथा मुण्डा समाज की सर्वाधिक लोकप्रिय जनश्रुतियों में से एक है। उसको सुनते-सुनाते हुए मुण्डा जन आज भी रोमांचित हो उठते हैं।
प्रकृति का अन्यतम प्रेमी छैला संगीत का असाधारण साधक भी था। उसका बाँसुरीवादन किसी को भी अवश करने में सक्षम था। बाँसुरी से उसका लगाव लोक स्मृति में इतना गहरे रचा-बसा है कि मुण्डाजन साँवले रंग, छरहरे शरीर और मानवीय गुणों से भरपूर व्यक्तित्व वाले छैला को कृष्ण का अवतार मानते हैं।
इसी छैला सन्दु की कथा इस उपन्यास में कही गई है। बुन्दी के प्रेम में पड़ना, उसके जीवन में निर्णायक साबित होता है। बुन्दी भी उसे प्रेम करने लगती है। उस पर बुन्दी को भगाने का आरोप लगता ळै। बुन्दी के पिता अपनी पुत्री की तलाश करते हुए छैला की बस्ती को उजाड़ देते हैं। अपने प्रेम के लिए छैला कोई भी कष्ट उठाने से पीछे नहीं हटता। वह बुन्दी के भविष्य के लिए अपने जीवन का उत्सर्ग करने से भी नहीं हिचकिचाता।
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