Kahi Ankahi
(0)
₹
500
₹ 400 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
भारत उत्सवों का देश है। यहाँ प्रत्येक महत्वपूर्ण अवसर को उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जैसे जन्म होने पर उत्सव, और एक साल पूरी होने पर फिर से जन्मोत्सव। अब तो जन्मदिन मनाने का चलन बहुत लोकप्रिय हो गया है। पहले बच्चे जब पाठशाला जाते थे, तो कई परिवार अक्षरोत्सव भी मनाते थे। वसंतोत्सव भी मनती है। होली, दीवाली, दशहरा जैसी परंपरागत त्योहारों को तो छोड़ ही दीजिए; वे तो बड़े-बड़े उत्सव हैं। इन वर्षों में इश्कोत्सव भी प्रचलित हो रहा है। ‘वेलेंटाइन-डे’ के अवसर पर शहरों के बाजारों में खूब उत्साह दिखता है। विवाहोत्सव का तो ही बात छोड़ दीजिए। यह उत्सव व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक सभी स्तरों का है, और उससे भी अधिक यह एक आर्थिक उत्सव बन गया है, जिसमें सैकड़ों उद्योग फलते-फूलते हैं। परन्तु, एक उत्सव है जो अभी भी उपेक्षित है—मरणोत्सव। मैं सोचता हूँ, क्यों अभी तक यह उत्सव नहीं बन पाया? बाजार ने इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया? कुछ पश्चिमी और पूर्वी देशों में बाजार इस ओर ध्यान दे रहा है। ज्ञात है कि यदि बाजार लगा लिया जाए तो क्या-क्या संभव है? जीवन बीमा भी इसी पर आधारित एक अरबों-खरबों रुपए का व्यवसाय है, जो मृत्यु की आशंका पर टिका है। मृत्यु से जुड़े अन्य उद्योग भी विकसित हो सकते हैं। शादी से कुछ लोग बच तो जाते हैं, लेकिन मरने से कोई नहीं बच सकता, इसलिए यह सबसे बड़ा बाजार है। यहाँ से हमें प्रसिद्ध व्यंग्यकार श्री दीनानाथ मिश्र का स्मरण होता है, जिनके व्यंग्यपूर्ण लेखों ने समाज में व्याप्त कुरीतियों और समस्याओं पर तीखा प्रहार किया। यह संग्रह उन्हीं का धारदार व्यंग्यों का संकलन है।
Read moreAbout the Book
भारत उत्सवों का देश है। यहाँ प्रत्येक महत्वपूर्ण अवसर को उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जैसे जन्म होने पर उत्सव, और एक साल पूरी होने पर फिर से जन्मोत्सव। अब तो जन्मदिन मनाने का चलन बहुत लोकप्रिय हो गया है। पहले बच्चे जब पाठशाला जाते थे, तो कई परिवार अक्षरोत्सव भी मनाते थे। वसंतोत्सव भी मनती है। होली, दीवाली, दशहरा जैसी परंपरागत त्योहारों को तो छोड़ ही दीजिए; वे तो बड़े-बड़े उत्सव हैं। इन वर्षों में इश्कोत्सव भी प्रचलित हो रहा है। ‘वेलेंटाइन-डे’ के अवसर पर शहरों के बाजारों में खूब उत्साह दिखता है। विवाहोत्सव का तो ही बात छोड़ दीजिए। यह उत्सव व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक सभी स्तरों का है, और उससे भी अधिक यह एक आर्थिक उत्सव बन गया है, जिसमें सैकड़ों उद्योग फलते-फूलते हैं। परन्तु, एक उत्सव है जो अभी भी उपेक्षित है—मरणोत्सव। मैं सोचता हूँ, क्यों अभी तक यह उत्सव नहीं बन पाया? बाजार ने इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया? कुछ पश्चिमी और पूर्वी देशों में बाजार इस ओर ध्यान दे रहा है। ज्ञात है कि यदि बाजार लगा लिया जाए तो क्या-क्या संभव है? जीवन बीमा भी इसी पर आधारित एक अरबों-खरबों रुपए का व्यवसाय है, जो मृत्यु की आशंका पर टिका है। मृत्यु से जुड़े अन्य उद्योग भी विकसित हो सकते हैं। शादी से कुछ लोग बच तो जाते हैं, लेकिन मरने से कोई नहीं बच सकता, इसलिए यह सबसे बड़ा बाजार है। यहाँ से हमें प्रसिद्ध व्यंग्यकार श्री दीनानाथ मिश्र का स्मरण होता है, जिनके व्यंग्यपूर्ण लेखों ने समाज में व्याप्त कुरीतियों और समस्याओं पर तीखा प्रहार किया। यह संग्रह उन्हीं का धारदार व्यंग्यों का संकलन है।
Book Details
-
ISBN9788177213072
-
Pages200
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Chaploosi Rekha
- Author Name:
Dinanath Mishra
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Papi Vote Ke Liye
- Author Name:
Dinanath Mishra
- Book Type:

- Description:
दिल्ली भारत का टिकट धाम है। टिकटार्थी चुनावों के पावन पर्व पर यहाँ तीर्थयात्रा को आते हैं। झुंड-के-झुंड घूमते रहते हैं। टिकट मंदिरों में माथा टेकने जाते हैं। सुबह से शाम तक दर्जनों नेताओं के पास, नेताओं के चमचों के पास दस्तक देते हैं। एक ही पुकार होती है—‘टिकटं देहि, टिकटं देहि।’ उनके विन्यास में सांस्कृतिक झलक होती है। ‘चाणक्य’ धारावाहिक में आपने ब्रह्मचारियों को सुबह-सुबह ही ‘भिक्षां देहि, भिक्षां देहि’ कहते सुना होगा। एक-एक सीट के लिए दस-दस, बीस-बीस टिकटार्थी आते हैं। हर एक के साथ उनका समर्थक मंडल होता है। सभी उम्मीदवारों के पास अपने जीतने के समीकरण होते हैं। लोकसभा चुनाव-क्षेत्र में उनकी जाति के कम-से-कम दो लाख वोट तो होते ही हैं। और किस-किस जाति में कितना समर्थन मिल जाएगा, इसका पूरा हिसाब होता है। जीतने का विश्वास उनमें लबालब भरा होता है। उनके और उनकी जीत के बीच में सिर्फ टिकट बाधा होती है। हफ्तों टिकट साधना करते हैं। मैं ‘साधना’ जानबूझकर कह रहा हूँ। उन्हें न भोजन की याद आती है, न नाश्ते की। न उन्हें नींद आती है, न चैन आता है। साधना में वे टिकटलीन हो जाते हैं। उन्हें देखकर लगता है कि भारत सचमुच ही एक आध्यात्मिक देश है। जो टिकटलीन हो सकता है, वह ईश्वर में भी ओत-प्रोत हो सकता है। —इसी पुस्तक से ये व्यंग्य अपनी पठनीयता के दावेदार तब भी थे, जब अखबार के माध्यम से लाखों मन को छू रहे थे और अब भी हैं, जब पुस्तक के कलेवर में आपके हाथों में हैं।
Singh Senapati
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Book Type:

- Description:
राहुल सांकृत्यायन के ऐतिहासिक उपन्यासों में ‘सिंह सेनापति’ का विशेष स्थान है। इसमें उस वैशाली की ढाई हजार साल पूर्व की ऐतिहासिक गाथा को लिपिबद्ध किया गया है, जिसे गणतंत्र की जननी माना जाता है। इस उपन्यास में राहुल दिखलाते है कि गणतांत्रिक अथवा प्रजातांत्रिक शासन व्यवस्था से भारत का परिचय हजारों साल पहले हो चुका था। वैशाली के निवासियों ने, आज से ढाई हजार वर्ष पूर्व अपने लिए गणतांत्रिक व्यवस्था का आविष्कार कर लिया था और उसको सफलतापूर्वक संचालित किया था। ऐतिहासिक तथ्यों के जरिये वे इस कथा को न सिर्फ जीवन्तता बल्कि प्रामाणिकता भी प्रदान करते हैं। उपन्यास की कथा युद्ध और प्रेम का आधार लेकर आगे बढ़ती है, जिसमें तत्कालीन युग और जीवन को सूक्ष्मता से चित्रित किया गया है। साथ ही उस समय के सामाजिक-सांस्कृतिक-नैतिक मूल्यबोधों के बीच स्त्रियों की आजादी, बराबरी, भाई-चारा आदि को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। परिणामत: यह कृति अपने ऐतिहासिक परिधि को लाँघकर सार्वकालिक प्रासंगिकता प्राप्त कर लेती है।
Suraj Mere Saath Mein
- Author Name:
Smt. Kamna Singh
- Book Type:

- Description:
सूरज मेरे साथ में’ चार उपन्यासों का संकलन है। बाल एवं किशोर मन की दैनंदिन समस्याओं से जुड़े ये चारों उपन्यास सचमुच सूरज की ऐसी उजली किरण हैं, जो बच्चों के पथ को प्रकाशित करने में समर्थ हैं। ‘परीक्षा के बाद’ गौरव का स्कूली परीक्षा के साथ-साथ जीवन के इम्तिहान में भी ऊँचे अंक लेकर सफलता पाने का किस्सा है। बच्चों के लिए पल-पल जिन रोचक-रोमांचक घटनाओं की पिटारी खुलती है, वे उन्हें चमत्कृत किए बिना नहीं रहतीं। ‘खट्टी-मीठी गोलियाँ’ में बाल-मजदूरी उन्मूलन की बात कही गई है। ‘मुझे तो पढ़ना है’ में शिक्षा के बाल अधिकार को एक निर्धन तदपि पढ़ने की ललक रखनेवाले बालक के माध्यम से दरशाया गया है। ‘सूरज मेरे साथ में’ भी कथानायक रोशन के हौसलों की उड़ान है, जो उसे सफलता दिलाती है। कुल मिलाकर चारों उपन्यास बच्चों को सद्गुणों से तो जोड़ते ही हैं, जीवन के प्रति समझ भी जगाते हैं। कदाचित् यही आज के समय की माँग भी है।
Poorva Sandhya
- Author Name:
Dinesh Kapoor
- Book Type:

- Description:
अमित बोला, ‘‘कुछ खास नहीं। अभी तक तो रजाई में ही था। अब सोच रहा था, क्या करूँ!’’ विधू ने पूछा, ‘‘कॉलेज नहीं आना?’’ अमित बोला, ‘‘मन नहीं कर रहा।’’ विधू ने पूछा, ‘‘क्यों?’’ अमित बोला, ‘‘यूँ ही।’’ विधू ने पूछा, ‘‘मन क्या कर रहा है?’’ अमित बोला, ‘‘कुछ नहीं। पता नहीं क्या करने को मन कर रहा है! लगता है, आई नीड एन आऊटिंग बैडली।’’ विधू ने कहा, ‘‘दैन व्हाई डोंट यू गो?’’ अमित बोला, ‘‘आई थिंक, आई विल...।’’ फिर सहसा बोला, ‘‘तुम्हारी क्लासिस कब तक हैं?’’ विधू ने कहा, ‘‘क्लासिस का क्या है, खत्म हो जाएँगी।’’ अमित ने जिद की, ‘‘बताओ न!’’ विधू ने कहा, ‘‘एक बजे तक।’’ अमित बोला, ‘‘अभी 11.30 बजे हैं। डेढ़ घंटा है।’’ फिर कुछ सोचकर बोला, ‘‘क्लासिज के बाद चलो चलते हैं।’’ विधू ने पूछा, ‘‘कहाँ?’’ अमित बोला, ‘‘पता नहीं। आई रियली डोंट नो। लैट अस सी। अभी तैयार होने में एक-डेढ़ घंटा लगेगा, फिर देखते हैं। लेकिन मैं कॉलेज नहीं आऊँगा।’’ इसी उपन्यास से वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों तथा आज के परिवेश पर दृष्टि डालना पठनीय उपन्यास, जो पुरानी पीढ़ी और नई पीढ़ी के बीच एक तादात्म्य स्थापित करने की पहल करेगा। "
Paapoo
- Author Name:
Rita Indiana
- Book Type:

- Description:
आठ साल की एक लड़की सांतो दोमिंगो में अपने पिता–पापू–का इन्तज़ार करती है। यह इन्तज़ार उसे एक लम्बी और दर्दनाक मौत जैसा लगता है लेकिन वह राह देखती है कि पापू अमेरिका से आएँगे और अपनी दौलत और शोहरत की शानदार उपलब्धियों—चमचमाती नई कारों, पोलो शर्टों, सोने की चेन और सुन्दर जूतों से उसे अभिभूत कर देंगे। जब पापू आते हैं तो वह उसे फ़िल्म ‘फ़्राइडे द थर्टींथ’ के जेसन जैसे मालूम पड़ते हैं—स्मार्ट, चतुर और निर्मम। वे एक डोमिनिकन माफ़िया बॉस हैं, एक ड्रग डीलर, एक ऐसा शख़्स जो अविश्वसनीय रूप से ख़तरनाक है, लेकिन इससे उसकी बेटी ख़ुद को बेहद ताक़तवर और जीवन्त महसूस करती है। लड़की के जीवन में पापू आते हैं, ग़ायब हो जाते हैं और फिर एक बार और प्रकट होते हैं पैसे, गाड़ियों और मार-तमाम तोहफ़ों से लदे हुए, प्रेमिकाओं से घिरे हुए। सांतो दोमिंगो और अपने पिता के साथ की गई अमेरिका की जगर-मगर यात्राओं के बीच विभाजित, एक लड़की की बचपन की यादों को समेटे यह उपन्यास एक बेटी के प्यार के अलावा अपराध और मर्दानगी के आकर्षण और बड़ों की दुनिया की हिंसा का कभी न भूलने वाला चित्र पेश करता है। एक बच्ची की कल्पना के साथ व्यंग्य और विज्ञान-कथा के साथ ख़ौफ़ का कुशल मिश्रण, कैरेबियाई संस्कृति की पृष्ठभूमि में बुनी गई इस कहानी को अत्यन्त प्रभावी बना देता है।
1984 by George Orwell
- Author Name:
George Orwell
- Book Type:

- Description:
"जॉर्ज ऑरवेल की '1984' एक कालजयी साहित्यिक कृति है, जो निगरानी प्रचार और पूर्ण सत्तावादी नियंत्रण से घिरी एक भयावह दुनिया का चित्रण करती है। 'बिग ब्रदर' की सतत निगरानी में अपनी पहचान और मानवता को बचाने के लिए संघर्ष करते विंस्टन स्मिथ की कहानी के माध्यम से ऑरवेल ने स्वतंत्रता, सत्य और छाक्तिगत अस्तित्व के दमन की गहन पड़ताल की है। यह ऐतिहासिक उपन्यास सत्ता के मनोवैज्ञानिक और सामाजिक प्रभाठों पर तीखा विचार प्रस्तुत करता है, साथ ही मानव अधिकारों की नाजुकता और वास्तविकता के नियंत्रण की गहरी समझ प्रदान करता है। प्रतिरोध, सामंजस्य और प्रामाणिकता की सार्वभौमिक खोज पर आधारित इसके विषय आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने इसके पहली बार प्रकाशित होने पर थे। '1984' की प्रासंगिकता समय और संस्कृतियों की सीमाओं से परे जाती है और यह भारत की समकालीन सामाजिक-राजनीतिक वास्तविकताओं से भी गहराई से जुड़ती है।"
Qyamat
- Author Name:
Rahi Masoom Raza
- Book Type:

- Description:
‘क़यामत’ राही मासूम रज़ा का बेहद दिलचस्प उपन्यास है। राही मासूम रज़ा के कथा साहित्य का विश्लेषण करते समय प्रायः उनकी एक-आध कृति को छोड़कर बाक़ी की चर्चा न के बराबर की जाती है। एक कारण तो यह कि वे उपन्यास हिन्दी में उपलब्ध नहीं हैं अर्थात् वे मूल रूप से उर्दू में लिखे गए हैं। दूसरा यह कि कई बार विभिन्न वजहों से कुछ रचनाओं को ‘पॉपुलर’ के खाते में डाल दिया जाता है। गोया पॉपुलर होने और स्तरीय होने में कोई अनिवार्य अन्तर्विरोध हो! और तो और, कई बार पठनीयता को भी श्रेष्ठता के विपक्ष में खड़ा कर दिया जाता है। कहना चाहिए कि ‘क़यामत’ राही मासूम रज़ा का पठनीय और लोकप्रिय होने के साथ स्तरीय उपन्यास है। भाषा में वही शक्ति है जो राही की पहचान है। उदाहरण के लिए\ “जो हिन्दुस्तान से पाकिस्तान चले गए हैं या पाकिस्तान से हिन्दुस्तान आ गए हैं, घर की याद तो उन्हें भी आती होगी। और रात को घर के ख़्वाब आते होंगे। और वो ख़्वाब ही में उदास हो जाते होंगे। और शायद रो भी देते हों।...” डॉ. एम. फ़ीरोज़ ख़ान और डॉ. शगुफ़्ता नियाज़ ने हिन्दी में ‘क़यामत’ का प्रवाहपूर्ण अनुवाद किया है।
Peer Nawaz
- Author Name:
Raju Sharma
- Book Type:

- Description:
राजू शर्मा मन:स्थितियों की महीन डिटेल्स से अपने कथा-पात्रों का व्यक्तित्व रचते हैं। कहानी को सरपट इतिसिद्धम तक ले आनेवाले कथाकारों से अलग उनकी कहानी एक पूरा वातावरण बुनती हुई चलती है, असंख्य सच्चाइयों का एक विस्तृत ताना-बाना जिसका हर रेशा किसी साधारण कथाकार के लिए एक अलग कहानी या उपन्यास का विषय बन जाए। इसी गझिन बुनावट में उनका कथा-रस निवास करता है जिसमें पाठक उनके पात्रों के साथ अपने ख़ुद के मन की कई परतों को भी आकार लेते महसूस करता है। यह कथा जतिन की है जिसके साथ कथावाचक राघव का रिश्ता कुछ इस तरह से जटिल है: 'एक क्षण के लिए कल्पना कीजिए कि अचानक एक अजनबी सामने प्रकट होता है, जो तीस साल पहले तुम्हारा कॉलेज का सहपाठी था, आम दोस्ती थी...स्वाभाविक था तुम उसे भूल गए। अब वह सामने खड़ा है और एक निरीह नग्नता से अपना नाम, पता बतला रहा है। जैसे ही तुमने उसे पहचाना, एक स्मरण ने तुम्हें बाँध लिया : एक तस्वीर, अधखुले दरवाज़े का एक फ्रेम, जिसके पीछे यही शख़्स तुम्हारी प्रेमिका को बाँहों में बाँधे चूम रहा था।’ सालों बाद हुई इस मुलाक़ात के बाद धीरे-धीरे उसका एक नया रूप सामने आता है। वह बताता है कि उसे कहानी लिखने का वायरस लग गया। वह कहानियाँ लिखता है जो सच हो जाती हैं। वह उसे अपनी कहानियाँ सुनाता है और फिर कहता है... ‘डॉ. राघव रे, प्लीज़ सेव मी, आई एम सिंकिंग।’ ‘उसकी मनोदशा सामान्य नहीं थी, वह बीमार था और नहीं भी था। पर उसका स्वास्थ्य बिगड़ता चला गया...अन्त में एक वक़्त आया जब जतिन गम्भीर हालत में अस्पताल में भरती हुआ।’ लेकिन फिर एक दिन वह अस्पताल से ग़ायब हो गया...
Bina Muradonwala Diya
- Author Name:
Rekha Jha
- Book Type:

- Description:
‘बिना मुरादों वाला दीया’ रेखा झा का लघु उपन्यास है जिसमें समस्तीपुर जिले के पूसा के साथ उन्होंने अपने बचपन के उन दिनों को याद किया है जिन्हें हम सब अपने जीवन में हमेशा अपनी यादों में जीते रहते हैं। छुम छुम बस में छुम-छुम ड्रेस पहनकर मुन्नी का पूसा जाना, वहाँ अपनी झुंड-भर मासियों की नन्ही बिल्ली बन जाना, और उनके साथ उस बड़ी दुनिया से परिचित होना जो उसके लिए अभी बिलकुल नई है। उसे बताया जाता है कि ‘मजार भी एक तरह का मन्दिर ही होता है। जिस तरह मन्दिर में भगवान होते हैं, मजार में पीर बाबा होते हैं।’ सिर्फ यही नहीं, पूसा में आम और लीची के बाग भी हैं जहाँ इतने किस्म के आम और इतनी किस्म की लीचियां हैं कि मुन्नी को स्कूल जाना भी नहीं अखरता। और फिर गुल्लू मासी तो हैं ही! एक मीठे बचपन की यह मीठी कहानी एक रौ में अपने-आपको पढ़वा लेती है; जिस माधुर्य और जीवन्तता के बारे में यह उपन्यासिका बताती है, वह मिठास और जीवन इसकी अपनी बुनावट का भी हिस्सा है।
Asato Ma Sadgamay
- Author Name:
Smt. Renu Gupta
- Book Type:

- Description:
जिस प्रकार नदी का पानी बहते-बहते मिलता भी है तो बिछुड़ता भी है, पुराने तटों को छोड़ता है तो नए तट पकड़ता भी है, उसी प्रकार हम संसार के प्राणी जीवन से जीवन, स्थान से स्थान और काल से काल तक की यात्राओं में मिलते-बिछुड़ते रहते हैं। असतो मा सद्गमय में जीवन के सनातन पहलुओं से गुजरती हुई कथा आधुनिक राजतांत्रिक और अफसरशाही तक भारत में व्याप्त भ्रष्टाचार की कथा भी है तो हमारी पुरातन, परंतु नित नवीन आध्यात्मिक भारत की कथा भी है। इस कथा में भक्ति, ज्ञान, अहंकार, उच्चाकांक्षा, संतोष, भाग्य, पदलिप्सा, लोभ, कर्म, स्नेह, औदार्य—सभी भाव समाहित हैं। यह कथा जीवन की सभी कलाओं से परिचय कराती है तथा चेतावनी देती है कि बुरे कर्मों का परिणाम बुरा ही होता है। प्रस्तुत उपन्यास की कथा यथार्थ की भूमि से निकली है, जिसे प्रसिद्ध लेखिका रेणु ‘राजवंशी’ गुप्ता ने अपने विद्यार्थी जीवन में निकट से देखा था। इस उपन्यास को पढ़कर पाठक एक ओर भारतीय पुलिस तंत्र की पदलिप्सा, भ्रष्टता, उच्चाकांक्षा तो दूसरी ओर ईमानदारी, स्नेह और औदार्य से परिचित होंगे।
Bhootgaon
- Author Name:
Naveen Joshi
- Book Type:

- Description:
हिन्दी के वरिष्ठ कवि-गद्यकार लीलाधर मंडलोई की यह आत्मकथा ‘जब से आँख खुली हैं’ केवल उनकी नहीं बल्कि सतपुड़ा के जंगलों में विस्थापित होकर पहुँचे खान-मज़दूरों, दलित-अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्गों की भी कथा है। कोरकू, गोंड़ और भारिया आदिवासियों के जीवन के स्याह चित्र भी इसमें आपको मिलेंगे। वेस्टर्न कोल्ड फ़ील्ड के छिन्दवाड़ा और दमुआ जिलों में कोयला-खानों की एक बड़ी शृंखला है। एक में कोयला ख़त्म हुआ तो दूसरी, तीसरी, चौथी और यह प्रक्रिया चलती रहती है जिसमें मज़दूरों को बार-बार उजड़ना पड़ता है। न पक्की नौकरी, न अस्पताल, न स्कूल, न मकान; बस भूख, ग़रीबी, अकाल मृत्यु, दुर्घटनाएँ और दुखों का असीम संसार। ओपनकास्ट और अंडर ग्राऊंड खदानों में बाल-मज़दूर का जीवन जीते हुए लेखक ने यह सब बचपन में ही देख-जी लिया था। आस-पास का जीवन त्रासद था लेकिन जीवन की प्रतिकूलताओं में बनी सामुदायिकता ने वहाँ संघर्ष, जिजीविषा और आनन्द की एक पारिस्थितिकी भी निर्मित की थी जिसमें गोंडवाना, बुन्देलखंड और बाहर से आए लोगों की बोली-बानी, भाषा, खानपान, रहन-सहन और संगीत की समावेशी संस्कृति दिखाई देती थी। इस आत्मकथा को पढ़ते हुए हम जान पाते हैं कि खदानों की गहराइयों ने खदानों को कैसे खोखला कर दिया, कैसे जल-स्तर हज़ारों फ़ीट नीचे चला गया, पानी का संकट गहराया और जंगल उजड़ने लगा। जंगल का जीव-जगत समाप्त होने लगा। कई प्रजातियाँ खो गईं। आदिवासियों का विस्थापन शुरु हुआ। उनकी संस्कृति लुप्त होने लगी। सके अलावा प्राइवेट कम्पनी के कार्यकाल में शोषण, अनाचार, उपेक्षा, शोषण आदि के आख्यान भी इस पुस्तक का हिस्सा हैं।
Rajasthani Ranivas
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Book Type:

- Description:
‘राजस्थानी रनिवास’ राहुल सांकृत्यायन की एक बहुचर्चित कृति है। भारतीय समाज से जुड़ा एक अत्यन्त प्रासंगिक प्रश्न इसके केन्द्र में है—पुरुष प्रधान सामन्ती समाज में स्त्रियों की परवशता। राहुल उन लेखकों में से थे जो लेखन को सामाजिक परिष्कार की संगति में देखते थे। इसलिए उन्होंने चुन-चुनकर उन विषयों पर लिखा जिनकी ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करना वे आवश्यक समझते थे। ऐसे विषयों में एक तरफ इतिहास और संस्कृति की गौरवशाली चीजें थीं तो दूसरी तरफ वे चीजें जो हमारी उन्नति की राह में बाधा। प्रस्तुत पुस्तक में राहुल ने जो विषय उठाया है वह दूसरे प्रकार का है। पुस्तक की नायिका गौरी के मुख से वे राजस्थानी रनिवासों के सात पर्दों में रहने वाली रानियों-ठकुरानियों की दुःख भरी कहानी और वहां के पुरुषों की स्वेच्छाचारिता को वे पूरी साफगोई से उजागर करते हैं। स्त्रियों पर पुरुषों के नियंत्रण को सामन्ती समाज अपने वैभव और गौरव के रूप में पेश करता रहा है, लेकिन उसकी अमानवीय वास्तविकता किसी भी सहृदय व्यक्ति को बेचैन कर देगी। ‘राजस्थानी रनिवास’ इसी बेचैनी को बढ़ाने के उद्देश्य से रची गयी कृति है जिसका सन्देश आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
Gayab Hota Desh
- Author Name:
Ranendra
- Book Type:

- Description:
जादुई यथार्थवाद...यह उपन्यास हिन्दी को समृद्ध करता है। संजीव आधुनिक विकास की तमीज़ के हिसाब से रातोंरात गुम हो जाती बस्तियों के बाशिन्दों की दर्दनाक दास्तान...जिन पर काग़ज़ी ख़ज़ाना तो बरसाया गया लेकिन पाँव तले की धरती छीन ली...यह उपन्यास साहित्य में अपनी मुकम्मल जगह बनाएगा, ऐसी मुझे उम्मीद है। —मैत्रेयी पुष्पा यह एक प्रेम-कथा भी है और थ्रिलर भी... लगभग कोई पात्र एकआयामी नहीं है, सभी पात्रों के अपने-अपने ग्रे-शेड्स हैं। —प्रसन्न कुमार चौधरी
Microscope
- Author Name:
Rajendra Kumar Kanojiya
- Book Type:

- Description:
The book titled MIcroscope is a Hindi novel based on a doctor living in a small town, works hard to become a doctor, gets a white coat, but later during working in the fields he finds different shades. How he struggles and ... Book is being written by a doctor himself with experience of the surroundings... He has written several books including few on medical subjects, he has books on poems, stories and articles on radio television too.
Arsalan aur Bahzad
- Author Name:
Khalid Javed
- Book Type:

- Description:
ख़ालिद जावेद का नाम समकालीन उर्दू उपन्यास की पहचान भी है और शान भी। ‘अरसलान और बहज़ाद’ जादुई कहानियों के इस रचयिता का तीसरा उपन्यास है। जिसमें यथार्थ तल में है और सतह पर ऐसी ना-मुमकिन और अमूर्त घटनाएँ कि पढ़ने वाला हैरतज़दा रह जाए। प्रेम, करुणा, अपमान, क्रोध और महरूमी को इस दास्तान में जिस आवर्धक लेंस से देखा गया है, वह जीवन के प्रति हमें कभी बेज़ार करता है तो कभी उसकी निरर्थकता को हम पर और रोशन करता है। अगर आप ख़ालिद जावेद की लेखनी से परिचित हैं तो इसमें आपको महीन और गहरे ख़यालात की विस्तृत दुनिया से शनासाई होगी और अगर आप उन्हें इसी उपन्यास से पहली दफ़ा जान रहे हैं तो आप उनकी पिछली कृतियों के अध्ययन के लिए ख़ुद को विवश पाएँगे। ख़ालिद जावेद अपने पिछले दो उपन्यासों, ‘मौत की किताब’ और ‘नेमतख़ाना’ से हिन्दी पाठकों तक पहुँच कर पहले भी, कथ्य और क्राफ्ट की नई लहरों से परिचित करवा चुके हैं। ‘अरसलान और बहज़ाद’ इसी सिलसिले में एक ज़बरदस्त इज़ाफ़ा है, जिसे मौजूदा उर्दू फ़िक्शन के एक बड़े कारनामे के तौर पर तस्लीम किया जा चुका है।
Mrityunjayi Udham Singh
- Author Name:
Jiyalal Arya
- Book Type:

- Description:
‘मृत्युंजयी ऊधम सिंह’ अपने ढंग के अनूठे रचनाकार जियालाल आर्य का उपन्यास है, जिसे शहीद ऊधम सिंह का ज़िन्दगीनामा कहा जा सकता है। ऊधम सिंह के बचपन से लेकर उनकी शहादत तक की कहानी यहाँ क़िस्सागोई शैली में बयान की गई है। शहीद ऊधम सिंह का जन्म 26 दिसम्बर, 1899 को पंजाब के संगरूर जनपद के सुनाम गाँव में हुआ था। उनकी ज़िन्दगी काफ़ी जद्दोजहद-भरी रही। बचपन में ही अन्याय, अनीति और शोषण के प्रति उनके मन में तीव्र प्रतिकार-भाव था, जो आगे चलकर उन्हें देशभक्त क्रान्तिकारी बनाने में सहायक हुआ। सर्वधर्म-समभाव की वह ज़िन्दा मिसाल थे। उन्होंने अपना नाम ‘राम मुहम्मद सिंह आज़ाद’ रख लिया था। यही कारण रहा कि वह हर भारतीय के अपने थे—चाहे वो हिन्दू हो, मुसलमान हो या सिख। उन्हें 31 जुलाई, 1940 को फाँसी दे दी गई थी। उनकी शहादत के बाद हिन्दुओं ने अस्थि विसर्जन हरिद्वार में किया तो मुसलमानों ने फ़तेहगढ़ मस्जिद और सिखों ने करंत साहब में अपने-अपने रीति अनुसार उनकी अन्त्येष्टि सम्पन्न की थी। भाषा इतनी सहज कि बस्स पढ़ते चले जाएँ उपन्यास वर्क़-दर-वर्क़। इतिहास को पठनीय कैसे बनाया जाए—यह उपन्यास इसका जीवन्त साक्ष्य है।
Tapas
- Author Name:
Varun Kumar Pandey
- Book Type:

- Description:
तापस' केवल एक उपन्यास नहीं है; यह व्यक्ति के अंतःकरण के समूल परिवर्तन की एक यात्रा है। यह सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास के गहरे संगम की खोज करता है, यह दरशाते हुए कि कैसे ये तत्त्व आपस में मिलकर युवाओं के बीच एक गहरे उद्देश्य और जुड़ाव की भावना को बढ़ावा दे सकते हैं। यह उपन्यास वर्तमान समय की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जहाँ परंपरा नवाचार से मिलती है और प्राचीन ज्ञान समकालीन चुनौतियों का सामना करता है। कहानी रवि और सीमा पर केंद्रित है, जो युवा और अत्यधिक सफल व्यवसायी हैं। उनकी यात्रा के माध्यम से पाठकों को यह देखने का अवसर मिलता है कि कैसे सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक खोज और सामाजिक सहभागिता व्यक्तियों को अपने जीवन और समुदायों को बदलने की शक्ति दे सकती हैं। रवि के अनुभव एक सार्वभौमिक पहचान और संतोष की खोज को दरशाते हैं, जो इस विश्वास पर आधारित हैं कि सच्ची वृद्धि तब होती है, जब किसी की व्यक्तिगत आकांक्षाएँ बड़े हितों के साथ मेल खाती हैं। यह उपन्यास आपस में जुड़े उत्थान के सार को पकड़ने का प्रयास करता है, यह दिखाते हुए कि व्यक्तिगत विकास को उन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयामों से अलग नहीं किया जा सकता, जो हमारे जीवन को आकार देते हैं।
Beticket Muzrim Se Arabpati Banne Ki Kahani
- Author Name:
Rajiv Singh
- Book Type:

- Description:
एक वास्तविक समयकाल के समांतर राजनीतिक और आर्थिक-सामाजिक परिदृश्य में स्थित यह उपन्यास, सपने की शक्ति, विश्वास की शक्ति और प्यार की शक्ति की असाधारण कहानी है। यह कहानी है गाँव के एक वंचित लड़के की, जिससे उसके सपने पूरे करने का प्रत्येक अवसर छीन लिया जाता है, लेकिन जीवन में अनेक मुश्किलों का सामना करते हुए भी वह अपने सपने का पीछा करना नहीं छोड़ता। वर्ष 1978 में उत्तर प्रदेश के एक पिछड़े गाँव में जिला कलेक्टर का दौरा गरीब, श्रमिक परिवार के ग्यारह वर्षीय गोदना को आई.ए.एस. अफसर बनने के लिए प्रेरित करता है। क्या वह अपना सपना पूरा कर पाता है या परिस्थितियों के आगे हार मान लेता है? या फिर वह और अधिक ऊँचाइयाँ प्राप्त कर लेता है? क्या जाति आधारित आरक्षण नीतियों से उसे मदद मिलती है? क्या जाति आधारित राजनीति उसे आकर्षित कर पाती है? क्या वह अपने खिलाफ चली गईं चतुर कॉरपोरेट चालों और साजिशों का सामना कर पाता है?
Sidhi-Sachchi Baaten
- Author Name:
Bhagwaticharan Verma
- Book Type:

- Description:
हिन्दी के श्रेष्ठ उपन्यासों में शामिल उपन्यास ‘भूले-बिसरे चित्र’ के विषय में आलोचकों ने कहा था–‘‘एक महान कृति–भारतीय समाज और परिवार के विकास की विविध दिशाओं और रूपों का एक विराट एवं प्रभावोत्पादक चित्र...’’ ‘टेढ़े-मेढ़े रास्ते’ और ‘भूले-बिसरे चित्र’ की परम्परा में‘सीधी-सच्ची बातें’ भगवतीचरण वर्मा की तीसरी महत्त्वपूर्ण कृति है जिसमें 1939 से 1948 तक के काल की एक सशक्त कहानी है, और जिसमें मानसिक संघर्ष और राजनीतिक संघर्ष का अभूतपूर्व सम्मिश्रण हुआ है। मध्यवर्गीय परिवार का एक युवक, कुशाग्र बुद्धि और तेजस्वी, अपनी नैतिकता, आस्था और विश्वास के साथ अनायास ही उस नवीन हलचल में आ पड़ता है, द्वितीय महायुद्ध, देश की स्वतंत्रता, देश का बँटवारा जिसके भाग थे। और अन्त में उसके सामने थी अन्दर की घुटन, आदर्शों के पीछे वैयक्तिक स्वार्थों और कमज़ोरियों का विकृत चित्र और निराशा। ‘सीधी-सच्ची बातें’ एक सशक्त कहानी है, और साथ ही सीधी-सच्ची बातें भी।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book