I..The Loser
Author:
Sumit Kumar SambhavPublisher:
Author'S Ink PublicationsLanguage:
EnglishCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 167.45
₹
197
Available
What are the ingredients of the recipe for a looser? What are the circumstances which make a person looser? Zandu Singh, who lives in Dharamshala city of Himalayan Pradesh, dips his life into hard work to make himself perfect in his penance. But a single lie he speaks to his love, jyotsna, one day becomes so big that he becomes a loser for her and throws him to the ultimate darkness of confusion. Will zandu Singh ever be able to come out of this dilemma? Will he ever succeed in making his banwari Lal master Ji's dream true? Come and know about the thousands of athletes burning themselves in the fire of hard work, devotion and sacrifice but still living unidentified lives. Come to peep into their life through India’s first sports fiction.
ISBN: 9789385137464
Pages: 172
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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‘नरकयात्रा’ और ‘बारामासी’ के बाद ‘मरीचिका’ हमें नितांत नए ज्ञान चतुर्वेदी से परिचित कराता है।
इस पौराणिक फैंटेसी में वे भाषा, शैली, कथन तथा कहन के स्तर पर एकदम निराली तथा नई ज़मीन पर खड़े दीखते हैं। यहाँ वे व्यंग्य को एक सार्वभौमिक चिंता में तब्दील करते हुए ‘पादुकाराज’ के मेटाफर के माध्यम से समकालीन भारतीय आमजन और दरिद्र समाज की व्यथा-कथा को अपने बेजोड़ व्यंग्यात्मक लहजे में कुछ इस प्रकार कहते हैं कि पाठक के समक्ष निरंकुश सत्ता का भ्रष्ट तथा जनविरोधी तंत्र, राजकवि तथा राज्याश्रयी आश्रमों के रूप में सत्ता से जुड़े भोगवादी बुद्धिजीवी और पादुकामंत्री, सेनापति-पादुका राजसभा आदि के ज़रिए तथाकथित श्रेष्ठिजनों के बीच जारी सत्ता-संघर्ष का मायावी परंतु भयानक सत्य–सब कुछ अपनी संपूर्ण नग्नता में निरावृत हो जाता है। ‘पादुकाराज’, ‘अयोध्या’ तथा ‘रामराज’ के बहाने ज्ञान चतुर्वेदी मात्र सत्ता के खेल और उसके चालाक कारकों का ही व्यंग्यात्मक विश्लेषण नहीं करते हैं, वे मूलतः इस क्रूर खेल में फँसे भारतीय दरिद्र प्रजा के मन में रचे-बसे उस यूटोपिया की भी बेहद निर्मम पड़ताल करते हैं, जो उस ‘रामराज’ के स्थापित होने के भ्रम में ‘पादुका-राज’ को सहन करती रहती है, जो सदैव ही मरीचिका बनकर उसके सपनों को छलता रहा है।
स्वर्ग तथा देवता की एक समांतर कथा भी उपन्यास में चलती रहती है, जो भारत के आला अफ़सरों की समांतर परन्तु मानो धरती से अलग ही बसी दुनिया पर बेजोड़ टिप्पणी बन गई है। आधुनिक भारत के इन ‘देवताओं’ का यह स्वर्ग ज्ञान के चुस्त फिकरों, अद्भुत विट और निर्मल हास्य के प्रसंगों के जरिए पाठकों के समक्ष ऐसा अवतरित होता है कि वह एक साथ ही वितृष्णा भी उत्पन्न करता है और करुणा भी। और शायद क्रोध भी।
हिन्दी में फैंटेसी गिनी-चुनी ही है। विशेष तौर पर हिन्दी व्यंग्य में पौराणिक फैंटेसी जो लिखी भी गई है, वे प्रायः फूहड़ तथा सतही निर्वाह में भटक गई हैं। इस लिहाज से भी ‘मरीचिका’ एक महत्त्वपूर्ण उपन्यास है।
Para Para
- Author Name:
Pratyaksha
- Book Type:

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Description:
समाज की, प्रेम की, और देह की एक-दूसरे को काटती नैतिकताओं के द्वन्द्व में उलझा एक मन है जो फ़ौरी राहत के लिए अपने अतीत के सफ़र पर निकल पड़ता है। अतीत की नीम रौशन गलियों में जहाँ अपने-अपने वक़्तों को जीते पुरखे हैं, पुरखिनें हैं, उनके रिश्ते हैं, सुख-दुख हैं, उनका वैभव है, एक बड़ी दुनिया जो अब तुड़ी-मुड़ी पुरानी तस्वीरों और पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आती स्मृतियों में जीवित है।
अपने विवाहित जीवन में आई प्रेम की ताज़ा और जीवन्त हिलोर में बँधी हीरा सिर्फ़ प्रेम की सम्पूर्णता को जानती है, और उसे उसी निष्पाप भाव से जीना चाहती है; लेकिन जीवन की सुपरिभाषित सरणियों में न उसकी कामना अँट पाती है, न उसका प्रेम। नतीजा ख़ुद की और अपने सुकून की तलाश में भीतर और बाहर का सफ़र जो अपने साथ हमें भी एक दूसरी ही दुनिया में ले जाता है; जो परिवार अब दुनिया के अलग-अलग शहरों में फैला हुआ है, उसकी गहरी जड़ों को छूने की कोशिश ताकि कहीं से अपने आज के खंड-खंड सच को समझने का कोई सूत्र मिल जाए। वह सुकून मिल जाए जो किसी भी साँस लेती देह को चाहिए।
प्रत्यक्षा का यह नया उपन्यास स्मृति और इच्छा की इसी बुनत में एक सघन पाठ की रचना करता है।
Maa: Ek Beti Ke Ehsaas Ki Kahani
- Author Name:
Naazrin Ansari
- Book Type:

- Description: मैं नाज़रीन अंसारी एक लेखिका के रूप में आप सबके समक्ष फिर से पहली पुस्तक ‘माँ’ एक बेटी के अहसास की कहानी, माँ से मेरे रिश्ते के अनुभव की कुछ और कड़ी आपसे जोडऩे आई हूँ। माँ के निश्छल प्रेम को, अथाह परिश्रम को, माँ के त्याग और बलिदान का थोड़ा और बखान करने की खातिर मैं इस पुस्तक में अपने दिल की कुछ और मर्मस्पर्शी यादों को जोडक़र आप सबसे बाँटने आई हूँ। माँ के लिए जितना भी लिखूँ, कम ही है। इस पुस्तक में मैंने पिछले सारे अहसासों के साथ कुछ और जज़्बातों को जोड़ा है। यह मेरी पहली पुस्तक से ही जुड़ा हुआ भाग है। माँ के लिए बहुत-कुछ कहना है, माँ के लिए और क्या-क्या महसूस करती हूँ, आप सबसे साझा करना है। मेरे दिल की बातें, मेरे जज़्बातों के बहाव की रवानी आपको जरूर प्रसन्नचित्त करेगी। मेरे अहसास आपकी आँखों को पुरनम कर जाएँगे। माँ की ममता की गरिमा का अहसास दिलाएँगे और आपके हृदय को एक मार्मिक स्पर्श का अनुभव कराएँगे। आप सब पाठकों को मेरी पुस्तक पसंद आएगी, बस यही कामना करती हूँ। बहुत सारी कविताओं और यादों के कुछ और पन्ने अपनी इस पुस्तक में जोड़ रही हूँ। आपसे अनुरोध है कि आप इस पुस्तक को पढ़ें, यह पुस्तक आप सबको अपने माता-पिता के और करीब ले जाएगी, क्योंकि माता-पिता के प्रेम से सुंदर अनुभूति इस दुनिया में और कुछ नहीं है। आप सब लोग यह मत सोचिएगा कि फिर से इस पुस्तक को क्यों पढ़ा जाए, क्योंकि इस पुस्तक में आपको बहुत-कुछ अलग पढऩे को मिलेगा। माँ से जुड़े अपने कुछ और विचारों से मैं आप सबको अवगत कराना चाहती हूँ। कृपया इस पुस्तक को अपना प्यार ज़रूर दीजिएगा। माँ हम सबकी जहान, माँ खुशियों का मकाम। माँ हौसलों का गुमान, माँ हमारे वजूद की पहचान। माँ हमारे गमों की निदान, माँ हर घर की शान। माँ हमारे घर की बागबान, माँ का हमेशा रहे मान।
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