Inteha
Author:
Ramendra KumarPublisher:
Author'S Ink PublicationsLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 106.25
₹
125
Available
टूटी फूटी इक ख्वाइश है मेरी। इक हल्की सी गुज़ारिश है मेरी । बेइंतेहा चाहतों में लिपटी, इक सहमी सी सिफ़ारिश है मेरी ... रमेन्द्र कुमार (रमेन) राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित लेखक हैं। इन्होंने लेखन की प्रायः हर विधा जैसे फ़िक्शन, व्यंग, यात्रा संस्मरण एवं कविताओं के लेखन का कार्य किया है। इन्होंने अब तक कुल 28 पुस्तकें लिखी हैं जिनका अनुवाद कई भारतीय और विदेशी भाषाओं मे किया जा चुका है। इनकी रचनाएँ अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कर चुकी हैं एवं संग्रहीत हैं। 2014 में प्रकाशित इनके उपन्यास 'मोहिनी' का प्रथम संस्करण मात्र एक हफ्ते में ही पूर्ण रूप से बिक गया। इनकी प्रथम नॉन-फ़िक्शन रचना 'इफेक्टिव पेरेंटिंग' भी काफी सराही जा रही है। रमेन अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कथा वाचक और प्रेरणात्मक वक्ता हैं जो श्रोताओं के बीच अपनी अमिट छाप छोड़ने की क्षमता रखते हैं। इन्होंने 'जगन्नाथ संस्कृति' पर देश-विदेश में अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया है। 'इंतेहा' इनके गीत एवं ग़ज़ल का प्रथम संग्रह है।
ISBN: 9789385137327
Pages: 67
Avg Reading Time: 1 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Description:
‘यह शरीफ़ लोग’ की लेखिका रज़िया सज्जाद ज़हीर उर्दू की लब्धप्रतिष्ठ कथाकारों में हैं। उनकी अनेक कहानियाँ और उपन्यास साहित्य-जगत में अपना विशिष्ट स्थान रखते हैं। रज़िया सज्जाद ज़हीर अपनी स्पष्ट एवं स्वतंत्र विचारधारा के लिए विख्यात थीं। उन्होंने उर्दू-हिन्दी भाषिक समस्या के समाधान के लिए उर्दू को नागरी लिपि धारण करने की सलाह दी थी, जिसे सिद्धान्त रूप में स्वीकारने के बावजूद रूढ़िवादियों ने विवाद का विषय बना लिया था, किन्तु प्रस्तुत यथार्थ के खंडन के लिए तर्क न दे सके।
‘यह शरीफ़ लोग’ में उन्हें निर्भीक, स्वतंत्र, समाजवादी, मानववादी रज़िया सज्जाद ज़हीर का परिचय मिलता है, जो समाज के विभिन्न वर्गों के जीवन एवं मान्यताओं का विश्लेषण करके उसे अपनी अनुभूति के आधार पर प्रस्तुत करती हैं। आर्थिक असमानताएँ उत्पन्न विषमताओं का पर्दाफ़ाश करती हैं, और मानव-जीवन की मूल समस्याओं की ओर सहज ही ध्यान आकृष्ट करती हैं।
‘यह शरीफ़ लोग’ का परिवेश मध्यवर्गीय एवं निम्नवर्गीय मुस्लिम परिवारों से सम्बन्धित है जिनकी मान्यताओं में परस्पर द्वन्द्व हैं, परन्तु उनमें एक-दूसरे को अस्वीकारने का साहस नहीं। दोनों पूरक के रूप में एक-दूसरे को योग देते हैं तथा साथ-साथ जीवन-यापन करते हैं, किन्तु जब अत्याचारों का प्याला भर जाता है, तो छलक उठता है और शोषित वर्ग कठोर अन्याय के विरुद्ध संघर्षशील हो उठता है।
‘यह शरीफ़ लोग’ की भाषा सीधे व्यवहार की भाषा है। मुस्लिम परिवारों, विशेषकर महिलाओं की बातचीत अत्यन्त स्वाभाविक रूप में प्रस्तुत हुई है। जीवन्त पात्रों एवं कथानक की रोचकता ने प्रस्तुत उपन्यास को नैसर्गिक बना दिया है।
Kargil Ki Ankahi Kahani
- Author Name:
Harinder Baweja
- Book Type:

- Description: कारगिल, 1999 पाकिस्तानी सैनिकों की पूरी-की-पूरी दो ब्रिगेड भारतीय इलाके में घुस आई और भारतीय सेना को कानो-कान खबर मिलने तक अपनी मोर्चाबंदी कर ली। भारतीय सेना के आला अफसरों ने चेतावनियों की अनदेखी की और खतरे के साथ ही घुसपैठियों की संख्या को तब तक कम बताते रहे जब तक कि बहुत देर नहीं हो गई। पैदल सैनिकों को आधे-अधूरे नक्शों, कपड़ों, हथियारों के साथ आगे धकेल दिया गया, जबकि उन्हें न तो यह जानकारी थी कि दुश्मनों की संख्या कितनी है या उनके हथियार कितनी ताकत रखते हैं! वीरता के सर्वोच्च पुरस्कार, परमवीर चक्र विजेता, कैप्टन विक्रम बत्रा के पिता श्री जी.एल. बत्रा के लिखे पूर्वकथन के साथ, यह कारगिल की सच्ची कहानी है। डायरी के प्रारूप में लिखी यह पुस्तक, पहली बार उन घटनाओं का सच्चा, विस्तृत तथा विशिष्ट वर्णन करती है, जिनके कारण आक्रमण किया गया; साथ ही घुसपैठियों के कब्जे से चोटियों को छुड़ाने के लिए लड़ी गई लड़ाई में भारतीय वीरों की शूरवीरता को भी रेखांकित करती है। मातृभूमि की रक्षा हेतु अपने प्राणों की आहुति देनेवाले जाँबाज भारतीय सैनिकों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है यह पुस्तक।
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