Cheelwali Kothi
Author:
Sara RaiPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 320
₹
400
Available
अपने कथ्य के लिए भाषा और शिल्प की भी रचना करनेवाली लेखिका हैं सारा राय। सारा राय की यह कृति एक उपन्यास होते हुए भी अपने कथ्य के वितान में एक महाकाव्य जैसी विशिष्टता समेटे हुए है जिसमें अतीत और भविष्य साथ-साथ वर्तमान में घटित हो रहे होते हैं। यह घटित होना भारतीय सामन्तवादी ढूह पर एक लड़की यानी एक स्त्री का वह सच है जिसके प्रकृति और मनुष्य दोनों गवाह हैं, फिर भी सच ऐसा रंग बदलता रहता है कि झूठ भी अपनी भूमिका में हर बार एक संजाल बन जाता है।</p>
<p>उपन्यास में मीनाक्षी और विक्रम के बीच की ज़मीन प्रेम की वह ज़मीन है जहाँ ‘प्रवृत्ति’ हारती है और चेतना में वह युग हावी रहता है जो न ठीक से जीने देता है और न मरने; बस रिश्ते रिसते हैं और रिसते रिश्ते वह निर्माण नहीं कर पाते, जिसे निर्माण कहा जा सके। अपने अनिर्णय-द्वन्द्व में सनद ढूँढ़ते दृश्य परम्परा, संस्कृति, सभ्यता और ज्ञान, विज्ञान, दर्शन की इस दुनिया में नाकाम प्रतीत होते हैं। इन्हीं नाकामियों में चेतना-धार की तलाश है यह उपन्यास जिसकी ज़िम्मेवारी अपने विखंडन में एक स्त्री लेती है।</p>
<p>इस उपन्यास की नायिका अपने अनाथ होने, गोद लिए जाने के बाद ‘आरम्भ’ और ‘युग-दर-युग’ के जिन व्यतीत-अनव्यतीत क्षणों में सृजन का सत्त्व रचती है, उससे स्त्री-विमर्श हो या दलित-विमर्श—समय एक क़दम आगे घटित होता है—और मिथक ध्वस्त होते हैं, सत्ताएँ हिलती हैं। ‘चीलवाली कोठी’ क़लम के ‘विजन’ और ‘मिशन’ का उदाहरणों में एक उदाहरण है।
ISBN: 9788126727650
Pages: 184
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: पिनोकियो के कारनामेद एडवेंचर्स ऑफ पिनोकियो (इतालवी : ले एडवेंचर डि पिनोकियो; जिसे अक्सर अंग्रेजी में पिनोकियो के रूप में संदर्भित किया जाता है) इतालवी लेखक कार्लो कोलोडी द्वारा छत्तीस अध्यायों का एक बच्चों का कॉमेडी फंतासी उपन्यास है। पहले पंद्रह अध्याय मूल रूप से बच्चों की साप्ताहिक पत्रिका जिओर्नेल प्रति बम्बिनी में 7 जुलाई, 1881 और 18 फरवरी, 1882 के बीच स्टोरिया डि उन बुराटिनो (‘एक कठपुतली की कहानी’) शीर्षक के तहत क्रमबद्ध किए गए थे। उन अध्यायों को 1883 में, इक्कीस अतिरिक्त अध्यायों के साथ, पुस्तक के रूप में फिर से प्रकाशित किया गया। उपन्यास का शीर्षक चरित्र और नायक एक जीवित लकड़ी की कठपुतली है, जिसे गेपेटो नामक एक खिलौना निर्माता ने बनाया है जो उसे अपने दत्तक पुत्र के रूप में लेता है। पिनोकियो प्रारंभ में अवज्ञाकारी और शरारती है। वह अपने पिता को त्याग देता है और रोमांच की तलाश में निकल जाता है। पिनोकियो को उसके कई दुष्कर्मों के लिए फाँसी दिए जाने के साथ ही मूल समाचार पत्र क्रमांकन समाप्त हो गया। विस्तारित उपन्यास संस्करण में, पिनोकियो को सोलहवें अध्याय में एक परी द्वारा बचाया जाता है। परी पिनोकियो को शिक्षित करती है और उसे अपने तरीके बदलने के लिए प्रेरित करती है। अपने अच्छे व्यवहार के पुरस्कार के रूप में, पिनोकियो अंततः एक वास्तविक लड़के में बदल जाता है। उपन्यास का लगभग दो सौ पचास विभिन्न भाषाओं में अनुवाद किया गया है। द एडवेंचर्स ऑफ पिनोकियो के विभिन्न संगीत, मंच, टेलीविजन और फिल्म रूपांतरण हुए हैं, जिनमें से सबसे प्रसिद्ध वॉल्ट डिज़्नी की 1940 की एनिमेटेड फिल्म पिनोकियो है। झूठ बोलने पर किसी की नाक बढ़ने का विचार, जिसे द एडवेंचर्स ऑफ पिनोकियो में पेश किया गया था, लोकप्रिय पौराणिक कथाओं में शामिल हो गया है।
Khalistan Shadyantra Ki Inside Story
- Author Name:
G.B.S. Sidhu
- Book Type:

- Description: आखिर 1 अकबर रोड ग्रुप पंजाब/खालिस्तान समस्या का क्या अंतिम समाधान चाहता था? अकाली दल के उदार नेताओं से बातचीत कर समझौते तक पहुँचने की संभावना को मई 1984 के आखिर तक क्यों अधर में रखा गया, जब ऑपरेशन ब्लू स्टार में कुछ ही दिन रह गए थे? आखिर कैसे, जिस रॉ के लिए सिख उग्रवाद और खालिस्तान 1979 के आखिर तक कोई मुद्दा नहीं था, वही 1980 के अंत में अचानक उससे निपटने में शामिल हो गया? आखिर क्यों स्वर्ण मंदिर परिसर से भिंडरावाले को पकड़ने के लिए सुझाए गए कम नुकसानदेह उपायों को ठुकरा दिया गया? लेखक भारत की बाह्य खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व स्पेशल सेक्रेटरी हैं, जो आपस में जुड़ी कई घटनाओं की समीक्षा करते हैं—खालिस्तान आंदोलन, ऑपरेशन ब्लू स्टार, 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या और उसके बाद हुई सिख-विरोधी हिंसा। 1984 से सात साल पहले से लेकर उसके एक दशक बाद के घटनाक्रम का जिक्र करती यह पुस्तक उन महत्त्वपूर्ण सवालों के जवाब देने का प्रयास करती है जो आज भी बरकरार हैं। कहानी पंजाब से कनाडा, अमेरिका, यूरोप और दिल्ली तक घूमती है तथा राजनीतिक भ्रमजालों एवं अवसरवाद के बीच से सच को बाहर लाने की कोशिश करती है। हजारों बेकसूर लोगों की जिंदगी को निगल जानेवाली हृदय-विदारक हिंसा और सत्ताधारी दल की ओर से कथित तौर पर निभाई गई भूमिका की छानबीन करती है।
Vishva Dharma Sammelan
- Author Name:
Laxminiwas Jhunjhunwala
- Book Type:

- Description: इसके बाद यह प्रस्ताव पारित किया गया। यहाँ बहुधा यह कहा गया और मैं भी यह कहता रहा हूँ कि हम लोगों ने विगत सत्रह दिनों में जैसा आयोजन देखा है ऐसा अब इस पीढ़ी को तो उनके जीवनकाल में पुन: देखने का अवसर नहीं प्राप्त होगा; पर जिस प्रकार के उत्साह व शक्ति का संचार इस सम्मेलन ने किया है, लोग दूसरे धर्म सम्मेलन के स्वप्न देखने लगे हैं, जो इससे भी अधिक भव्य व लोकप्रिय होगा। मैंने अपनी बुद्घि लगाई है कि अगले धर्म सम्मेलन के लिए उचित स्थान कौन सा हो। जब मैं अपने अत्यंत नम्र जापानी भाइयों को देखता हूँ तो मेरा मन कहता है कि पैसिफिक महासागर की शांति में स्थित टोकियो शहर में अगला धर्म सम्मेलन किया जाए, पर मैं यह सोचता हूँ कि अंग्रेजी शासन के अधीन भारतवर्ष में यह सम्मेलन हो। पहले मैंने बंबई शहर के बारे में सोचा, फिर सोचा कि कलकत्ता अधिक उपयुक्त रहेगा, पर फिर मेरा मन गंगा के तट की प्राचीन नगरी वाराणसी पर जाकर स्थिर हो गया, ताकि भारत के सबसे ओंधक पवित्र स्थल पर ही हम मिलें। अब यह भव्य सम्मेलन कब होगा? हम आज यह निश्चय कर विदा ले रहे हैं कि बीसवीं सदी में अगला भव्य सम्मेलन वाराणसी में होगा तथा इसकी भी अपयक्षता जॉन हेनरी बरोज ही करेंगे।
Premasharam
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

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Description:
‘प्रेमाश्रम’ प्रेमचन्द का सर्वप्रथम उपन्यास है, जिसमें उन्होंने नागरिक जीवन और ग्रामीण जीवन का सम्पर्क स्थापित किया है और परिवार के सीमित क्षेत्र से बाहर सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में पदार्पण करते हैं।
भारतीय स्वतंत्रता-संग्राम की प्रथम झाँकी और भावनागत रामराज्य की स्थापना का स्वप्न ‘प्रेमाश्रम’ की अपनी विशेषता है। इसका उद्देश्य है—‘साम्य सिद्धान्त’। ‘प्रेमाश्रम’ में जीवन-मरण के गूढ़, जटिल प्रश्नों की मीमांसा है। सभी लोग पक्षपात और अहंकार से मुक्त हैं। आश्रम सारल्य, सन्तोष और सुविचार की तपोभूमि है। यहाँ न ईर्ष्या का सन्ताप है न लोभ और उन्माद, न तृष्णा का प्रकोप। यहाँ न धन की पूजा होती है और न दीनता पैरों-तले कुचली जाती है। आश्रम में सब एक-दूसरे के मित्र और हितैषी हैं। मानव-कल्याण ही सभी का चरम लक्ष्य है। इस बात का व्यावहारिक रूप हमें उपन्यास के ‘उपसंहार’ शीर्षक अंश में मिलता है।
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