Agnipurush
(0)
Author:
Shyam Bihari 'Shyamal'Publisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
125
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इस कठिन समय में बर्बर भ्रष्टतंत्र के भीतर तपते हुए, झुलसते हुए जो अपने ईमान, अस्मिता और स्वत्वबोध को बचाकर रख पाया, वही कुन्दन बनकर मूल्यों की स्थापना कर पाता है। ‘अग्निपुरुष’ इसी मायने में हमारे समय में ईमानदार आदमी की मौजूदगी का जीवन्त दस्तावेज़ है। बिहार की पृष्ठभूमि पर पलामू और डाल्टनगंज को चित्रित करते हुए यह उपन्यास नौकरशाही के सच को उघाड़कर सामने तो लाता ही है, साथ ही साथ लेखक की सहज–सरल, भाषायी आडम्बर से मुक्त गद्य-संरचना अपनी कथावस्तु की सुगढ़ता के साथ प्रकट होती है। लेखक की आत्मकथात्मक शैली सतुआ पाण्डे के जीवन का चित्र ऐसे प्रस्तुत करती है, जैसे वह उनका कोई अपना ही आँखों देखा हो
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इस कठिन समय में बर्बर भ्रष्टतंत्र के भीतर तपते हुए, झुलसते हुए जो अपने ईमान, अस्मिता और स्वत्वबोध को बचाकर रख पाया, वही कुन्दन बनकर मूल्यों की स्थापना कर पाता है। ‘अग्निपुरुष’ इसी मायने में हमारे समय में ईमानदार आदमी की मौजूदगी का जीवन्त दस्तावेज़ है। बिहार की पृष्ठभूमि पर पलामू और डाल्टनगंज को चित्रित करते हुए यह उपन्यास नौकरशाही के सच को उघाड़कर सामने तो लाता ही है, साथ ही साथ लेखक की सहज–सरल, भाषायी आडम्बर से मुक्त गद्य-संरचना अपनी कथावस्तु की सुगढ़ता के साथ प्रकट होती है। लेखक की आत्मकथात्मक शैली सतुआ पाण्डे के जीवन का चित्र ऐसे प्रस्तुत करती है, जैसे वह उनका कोई अपना ही आँखों देखा हो
Book Details
-
ISBN9788126702893
-
Pages275
-
Avg Reading Time9 hrs
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Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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महत्त्वपूर्ण कथाकार अवधेश प्रीत का यह उपन्यास बिहार के कॉलेज और विश्वविद्यालय के शिक्षण-परिवेश को उजागर करता है कि किस तरह प्राध्यापक अपनी अतिरिक्त आय के लिए कोचिंग का व्यवसाय कर रहे हैं। इसके पार्श्व में छात्र-राजनीति का भी खुलासा होता है—छात्रों की उच्छृंखलता, अनुशासनहीनता और भ्रष्टता से उपजे सवाल पाठक के अन्तर्मन में लगातार विचलन भरते हैं। गाँवों, क़स्बों से अपना भविष्य सँवारने आए छात्र विद्या और अनीता जैसी लड़कियों के रोमांस में उलझकर वायावी वैचारिकता की बहसें ही नहीं करते, अपितु शराब और आवारगी में अपने को पूरी तरह झोंक देते हैं। वे कोचिंग के विरोध में आन्दोलन करते हैं, जिससे अशोक राजपथ का जनजीवन अस्त-व्यस्त और दुकानें बन्द हो जाती हैं, पुलिस प्रशासन इस विरोध की समाप्ति में अ-सक्षम सिद्ध होता है। और एक खिसियाहट हवा में तारी हो जाती है।
दिवाकर, राजकिशोर, जीवकान्त जैसे किरदार अपने कार्य-कलापों से अन्त तक कौतुक, आशंकाएँ और रोमांच के भावों-विभावों का सृजन करते हैं। कमलेश की मृत्यु को छात्र शहीद की सरणि में दर्ज कराते हैं जो कि परिस्थितिजन्य बेचारगी है। उपन्यास में जिज्ञासा के समानान्तर एक सहम महसूस होती रहती है—यहाँ प्रतिवाद का परिणाम अज्ञात नहीं रहता। वहीं अंशुमान की उदास आँखों में अपने आदर्श को बचाने की बेचैनी गहरे तक झकझोर जाती है। सड़कों पर जीवन की हलचल और भागमभाग है—जैसे सभी एक नए लोक की खोज में हों, यानी वे सभी अशोक राजपथ से पीछा छुड़ाने की हड़बड़ी में हों। अन्तत: जीवकान्त स्वयं से प्रश्न करता है—हमें किधर जाना है?
Aatmadan
- Author Name:
Narendra Kohli
- Book Type:

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Description:
‘आत्मदान’ सुप्रसिद्ध उपन्यासकार नरेन्द्र कोहली का ऐतिहासिक घटनाक्रम पर आधारित उपन्यास है। कथानायक राज्यवर्द्धन स्थाणीश्वर का राजकुमार है जो अपनी भावप्रवण संवेदनशीलता के कारण न तो युद्ध को सही मानता है और न ही राज्य के विस्तार में उसकी रुचि है। मगर पिता की निरन्तर प्रेरणा और प्रजा की रक्षा के लिए वह हूणों के संहार के लिए युद्धक्षेत्र की तरफ़ प्रयाण करता है और दो वर्षों तक निरन्तर अत्याचारी हूण शासकों का संहार करता है। तभी अचानक उसे पिता के निधन और माता के सती होने का शोक समाचार मिलता है। इस दुखद घटनाक्रम से वह काफ़ी व्यथित हो जाता है और उसे विरक्ति हो जाती है। वह संन्यास लेना चाहता है तथा राज्य व प्रजा का भार अपने अनुज हर्ष पर सौंप देना चाहता है। उसी समय उसे मालवा शासक देवगुप्त द्वारा उसके बहनोई की हत्या और बहन की पीड़ा का दुखद संवाद मिलता है। क्रोध के मारे वह संन्यास का विचार छोड़ देवगुप्त को मज़ा चखाने और अपनी बंदिनी बहन को आततायियों से मुक्त कराने निकल पड़ता है।
उपन्यासकार ने इस पूरे घटनाक्रम को इतनी जीवन्तता से चित्रित किया है कि पढ़ते हुए सब कुछ अपनी आँखों के सामने घटित होते देखने का आभास होता है।
संवेदनशील भाषा और प्रवाहपूर्ण शिल्प के कारण यह उपन्यास बेहद पठनीय है और एक नैतिक आख्यान से पाठकों को रू-ब-रू कराता है।
Tukdon Tukdon Mein Aurat
- Author Name:
Mamta Mehrotra
- Book Type:

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