Prayojanmoolak Hindi

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स्वतंत्र भारत में हिन्दी विविध रूपों में प्रयुक्त होती है। इस पहलू का अध्ययन ‘प्रयोजनमूलक अध्ययन’ कहलाता है! मुम्बइया बाज़ार में ग्राहक दुकानदार से कहता है—“हम को फ्रेश भाजी माँगता है।” यह भी हिन्दी है। स्वास्थ्य-विज्ञान का यह वाक्य भी हिन्दी है—“मानव का रक्तचाप सन्तुलित रखना स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।” हिन्दी भाषा के ऐसे विविध प्रयोजनों में अब प्रशासन सबसे महत्त्वपूर्ण हो गया है। स्वतंत्र भारत की सरकार ने हिन्दी को राजभाषा का पद दिया तो उसके प्रशासनिक स्वरूप का अध्ययन जोरों से होने लगा। इसी के फलस्वरूप अब प्रकाशन-क्षेत्र में प्रयोजनमूलक हिन्दी पर कई पुस्तकें मिलती हैं। डॉ. लता की यह पुस्तक इस दिशा की नवीनतम रचना है। लता वर्षों से प्रयोजनमूलक हिन्दी सिखाती रही हैं। अतएव उन्होंने बहुत से प्रामाणिक ग्रन्थों का मनन-मन्थन करके यह नवनीत निकाला है। अनुभवी प्राध्यापिका ने छात्रों की ज़रूरत पहचानकर उनसे न्याय किया है। पुस्तक की भाषा स्पष्ट व सरल है जो तकनीकी लेखन की पहली शर्त है।

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ISBN
9789352210411
Pages
280
Avg Reading Time
9 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

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स्वतंत्र भारत में हिन्दी विविध रूपों में प्रयुक्त होती है। इस पहलू का अध्ययन ‘प्रयोजनमूलक अध्ययन’ कहलाता है! मुम्बइया बाज़ार में ग्राहक दुकानदार से कहता है—“हम को फ्रेश भाजी माँगता है।” यह भी हिन्दी है। स्वास्थ्य-विज्ञान का यह वाक्य भी हिन्दी है—“मानव का रक्तचाप सन्तुलित रखना स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।”

हिन्दी भाषा के ऐसे विविध प्रयोजनों में अब प्रशासन सबसे महत्त्वपूर्ण हो गया है। स्वतंत्र भारत की सरकार ने हिन्दी को राजभाषा का पद दिया तो उसके प्रशासनिक स्वरूप का अध्ययन जोरों से होने लगा। इसी के फलस्वरूप अब प्रकाशन-क्षेत्र में प्रयोजनमूलक हिन्दी पर कई पुस्तकें मिलती हैं। डॉ. लता की यह पुस्तक इस दिशा की नवीनतम रचना है।

लता वर्षों से प्रयोजनमूलक हिन्दी सिखाती रही हैं। अतएव उन्होंने बहुत से प्रामाणिक ग्रन्थों का मनन-मन्थन करके यह नवनीत निकाला है। अनुभवी प्राध्यापिका ने छात्रों की ज़रूरत पहचानकर उनसे न्याय किया है। पुस्तक की भाषा स्पष्ट व सरल है जो तकनीकी लेखन की पहली शर्त है।

Book Details

  • ISBN
    9789352210411
  • Pages
    280
  • Avg Reading Time
    9 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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