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Aadhunik Kavya Shastra : Kavi Sena Manifesto

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भारतीय भाषाओं के संभवतः सर्वाधिक ख्यात और चर्चित कवि तथा विचारक ने यहाँ अपने उस स्वप्न को पूरा किया है जिस में साहित्य-चितन की चार धाराओं का एक साथ विचार होना है, अर्थात् प्राचीन भारतीय काव्यशास्त्र, प्राचीन पाश्चात्त्य काव्यशास्त्र, आधुनिक पाश्चात्त्य काव्यशास्त्र तथा मार्क्सवादी काव्यशास्त्र। यह मैनिफेस्टो, जैसा कि इसे कहा गया है, शेषेन्द्र की शीर्षस्थ उपलब्धियों का द्योतक है। इस के माध्यम से पूर्व, पश्चिम और मार्सीय काव्य-दर्शन का समग्र तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत होता है, जिसने शेषेन्द्र को यशस्वी बनाया है। मैनिफेस्टो विचक्षण है, साहित्य के विद्यार्थियों के लिए आयामहीन अध्ययन, और काव्यशास्त्र के अध्यापकों के लिए मूल्यवान निर्देशिका, एक अग्रणी विचारक द्वारा काव्यशास्त्रीय विज्ञान का तुलनात्मक मूल्यांकन देनेवाला है। कवि सेना एक नया बौद्धिक आंदोलन है जिस का उद्देश्य है नयी मनीषा को विकसित करना, युवा विकसनशील पीढ़ियों को सत्य की क्षमता प्रदान करना। मैनिफेस्टो उन्हें सिखाता है कैसे कविता की चुंबकीय शक्ति से सामान्य शब्दों को संपन्न किया जा सकता है, और साहित्य को परिवर्त्तन तथा प्रगति का एक अस्त्र बनाया जा सकता है। यह संभवतः भारत में पहला अवसर है जब एक कवि ने अपने समय का काव्यशास्त्र रचने के लिए लेखनी उठाई है, और अपनी मेधा का उपयोग अपने देश के सामान्य जीवन और समस्याओं के निदान के लिए किया है।

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भारतीय भाषाओं के संभवतः सर्वाधिक ख्यात और चर्चित कवि तथा विचारक ने यहाँ अपने उस स्वप्न को पूरा किया है जिस में साहित्य-चितन की चार धाराओं का एक साथ विचार होना है, अर्थात् प्राचीन भारतीय काव्यशास्त्र, प्राचीन पाश्चात्त्य काव्यशास्त्र, आधुनिक पाश्चात्त्य काव्यशास्त्र तथा मार्क्सवादी काव्यशास्त्र। यह मैनिफेस्टो, जैसा कि इसे कहा गया है, शेषेन्द्र की शीर्षस्थ उपलब्धियों का द्योतक है। इस के माध्यम से पूर्व, पश्चिम और मार्सीय काव्य-दर्शन का समग्र तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत होता है, जिसने शेषेन्द्र को यशस्वी बनाया है।

मैनिफेस्टो विचक्षण है, साहित्य के विद्यार्थियों के लिए आयामहीन अध्ययन, और काव्यशास्त्र के अध्यापकों के लिए मूल्यवान निर्देशिका, एक अग्रणी विचारक द्वारा काव्यशास्त्रीय विज्ञान का तुलनात्मक मूल्यांकन देनेवाला है।

कवि सेना एक नया बौद्धिक आंदोलन है जिस का उद्देश्य है नयी मनीषा को विकसित करना, युवा विकसनशील पीढ़ियों को सत्य की क्षमता प्रदान करना। मैनिफेस्टो उन्हें सिखाता है कैसे कविता की चुंबकीय शक्ति से सामान्य शब्दों को संपन्न किया जा सकता है, और साहित्य को परिवर्त्तन तथा प्रगति का एक अस्त्र बनाया जा सकता है। यह संभवतः भारत में पहला अवसर है जब एक कवि ने अपने समय का काव्यशास्त्र रचने के लिए लेखनी उठाई है, और अपनी मेधा का उपयोग अपने देश के सामान्य जीवन और समस्याओं के निदान के लिए किया है।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
2nd
Publication year
1998
Weight
754 grams
ISBN-13
9788119996568
Pages
242
Reading time
~8 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14.5 × 22.5 cm
Language
Hindi

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