Teen Talaq
Author:
Ziya Us SalamPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics0 Ratings
Price: ₹ 280
₹
350
Unavailable
Awating description for this book
ISBN: 9789353226527
Pages: 168
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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गांधी के नाम के आगे और बाद में लगे तमाम विशेषण—महात्मा, महामानव, अतिमानव इत्यादि उनके विराट व्यक्तित्व और कृतित्व के सामने अधूरे और अपर्याप्त हैं। उन्होंने भारत जैसे महादेश ही नहीं, समूची दुनिया को अपने जीवनकाल में गहरे प्रभावित किया और जीते-जी निजंधरी नायक बन गए। गांधी को हुए डेढ़ सदी बीत गई और कई सदियाँ बीत जाएँगी—गांधी का गांधीत्व बरकरार रहेगा और लगातार विकसित होता रहेगा। गांधी ने विधिवत् कुछ नहीं लिखा लेकिन भारत की राजनीति, अर्थनीति, संस्कृति, स्त्री और दलित-विमर्श, शिक्षा-नीति, दर्शन—कहना न होगा, जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को गहरे प्रभावित किया है। आज उनके कहे और लिखे शब्दों के माध्यम से गांधी-दर्शन आकार ले चुका है। दुनिया-भर में उनके काम की प्रासंगिकता की पड़ताल हो रही है। ऐसा ही कुछ काम इस किताब में हेमंत कुकरेती ने किया है। वे प्रसिद्ध कवि हैं। हिन्दी साहित्य के इतिहासकार हैं। सुधी आलोचक हैं। साहित्य के मर्मज्ञ अध्यापक हैं। उन्होंने एक पाठक के नज़रिए से गांधी को समझने और समझाने की कोशिश की है। यह हमारे समय के एक सुकवि का सुललित, सुगठित और सुचिन्तित गद्य है। इसलिए वैचारिक विश्लेषण होने के बावजूद इसमें अद्भुत पठनीयता है।
हेमंत कुकरेती ने गांधी-दर्शन की आलोचनात्मक कमेंट्री करते हुए गांधी की राष्ट्र-परिकल्पना, स्वराज, स्वदेशी, सत्याग्रह, अहिंसा, ग्रामोद्योग, रामराज्य जैसी अवधारणाओं के आधार पर गांधी के अर्थदर्शन, राजनीतिक सोच, उनकी दलित चिन्ता, शिक्षा का वर्तमान परिदृश्य, वर्ण-व्यवस्था, स्त्री-जीवन के सवाल यानी गांधीवाद को जिस बौद्धिक संवेदनशीलता के साथ परखा है, वह गांधी और उनके दर्शन को आसानी से समझा देता है। इस नज़रिए से यह किताब आकार में दीर्घकाय न होने के बाद भी साधारण पाठ्य-पुस्तक से आगे बढ़कर गांधी विषयक सन्दर्भ-ग्रन्थ बन गई है। —प्रताप सहगल
Narendra Modi Ke Panch Prana
- Author Name:
Himanshu Kumar C.A.
- Book Type:

- Description: 15 अगस्त, 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को विकास की चतुर्दिक ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए देशवासियों के बीच ‘पाँच प्रण’ का बिगुल फूँका। ये पाँच प्रण हैं—बड़े संकल्प के साथ आगे बढऩा है और वह बड़ा संकल्प एक ‘विकसित भारत’ का है। दूसरा प्रण है, हमारे अस्तित्व के किसी भी हिस्से में, हमारे मन या आदतों के किसी कोने में ‘गुलामी का कोई अंश नहीं होना चाहिए।’ तीसरा प्रण है, हमें अपनी ‘विरासत’ पर गर्व अनुभव करना चाहिए, क्योंकि यह वही विरासत है, जिसने भारत को अतीत में स्वर्णिम काल दिया था। चौथा प्रण है—‘एकता और एकजुटता’। 135 करोड़ देशवासियों के बीच जब सद्भाव और सौहार्द होता है तो एकता उसका सबसे मजबूत गुण बन जाती है। पाँचवाँ प्रण ‘नागरिकों का कर्तव्य’ है, जिससे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री भी विमुख नहीं हो सकते, क्योंकि वे भी जिम्मेदार नागरिक हैं और राष्ट्र के प्रति उनका कर्तव्य है। यदि हम अगले 25 वर्षों के लिए अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं तो यह गुण महत्त्वपूर्ण जीवन-शक्ति बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इन्हीं पाँच प्रणों को विस्तार देती एक रोचक, प्रेरक और संग्रहणीय पुस्तक। इसके अध्ययन से हम भारतवर्ष के अमृतकाल में यशस्विता प्राप्ïत कर पाएँगे और पुन: विश्वगुरु बनकर पूरे विश्व का मार्गदर्शन कर सकेंगे।
Bhartiya Jelon Men Panch Saal
- Author Name:
Mary Tyler
- Book Type:

- Description: मेरी इस पुस्तक का उद्देश्य न तो कोई राजनीतिक या सामाजिक शोध प्रस्तुत करना है और न मैं इसे अपना अधिकार या कर्तव्य समझती हूँ कि भारतीय जनता के लिए कोई ऐसे क़ानून अथवा विधि-उल्लेखों द्वारा मार्ग-प्रदर्शन करूँ जिसके आधार पर वे अपने देश की समस्याएँ हल करें। मैं किसी तरह की विशेषज्ञ होने का दावा नहीं करती और ख़ुद को इस लायक़ नहीं समझती कि भारतीय समाज का गहराई से विश्लेषण प्रस्तुत करूँ। मैंने जो कुछ लिखा है वह आपबीती घटनाओं का ब्योरा है तथा उन लोगों द्वारा बताई गई बातें हैं जिनके साथ भारत में मुझे रहने का तथा जिनसे मिलने का अवसर मिला। यह सोचकर मैं गर्व का अनुभव कर रही हूँ कि राधाकृष्ण प्रकाशन ने मेरी इस पुस्तक को हिन्दी में प्रकाशित करने और इस प्रकार भारत के व्यापकतर जनसमुदाय तक पहुँचाने के योग्य समझा। इस पुस्तक में मैंने जो कुछ लिखा है, वह भारतीय पाठकों को काफ़ी हद तक जाना-पहचाना लगेगा क्योंकि इसमें मैंने महज़ अपने अनुभवों का लेखा-जोखा पेश किया है और वह भी ख़ासतौर से ब्रिटिश पाठकों के लिए जिन्हें भारतीय समाज के वास्तविक स्वरूप की जो भी जानकारी है, वह ना के बराबर है।
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