Chocolate Ki Vaishvik Rajdhani Belgium
(0)
Author:
Ramesh Pokhriyal 'Nishank'Publisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics₹
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"बेल्जियम की एक समृद्ध ऐतिहासिक विरासत और संस्कृति रही है, जिसका चित्रों, संगीत, साहित्य, नक्शानवीसी और वास्तुकला में साक्षात् दर्शन कर सकते हैं। बेल्जियम भले ही सबसे छोटे यूरोपीय देशों में से एक है, फिर भी इसके पर्यटन स्थल पर्यटकों से भरे रहते हैं। ये पर्यटन स्थल इस देश के समृद्ध इतिहास और परंपराओं की कहानियाँ बयाँ करते हैं। बेल्जियम के बारे में कई अनूठी, बेजोड़ बातें हैं, जो अनायास ही सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं। बेल्जियम में दुनिया की सबसे बड़ी संख्या में प्रति वर्गमीटर महल हैं। कुछ क्षेत्रों में प्रति गाँव दो महल भी हैं। इनमें से कुछ को यूनेस्को द्वारा धरोहर घोषित किया गया है। बेल्जियम में विश्व के श्रेष्ठ संस्थानों के कॉर्पोरेट मुख्यालयों की बड़ी संख्या है। बेल्जियम में समृद्ध विरासत एवं परपंराएँ, विश्वविद्यालय, स्थापत्य कला को समेटे भवन, शिक्षा के उत्कृष्ट केंद्र, युद्ध स्मारक, मनमोहक प्राकृतिक छटा के अतिरिक्त अत्यंत दोस्ताना संबंध वाले लोग हैं। प्रस्तुत पुस्तक बेल्जियम के विषय में एक हैंडबुक है जो वहाँ की संपूर्ण जानकारी कम शब्दों में, रोचक शैली में देती है। "
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"बेल्जियम की एक समृद्ध ऐतिहासिक विरासत और संस्कृति रही है, जिसका चित्रों, संगीत, साहित्य, नक्शानवीसी और वास्तुकला में साक्षात् दर्शन कर सकते हैं। बेल्जियम भले ही सबसे छोटे यूरोपीय देशों में से एक है, फिर भी इसके पर्यटन स्थल पर्यटकों से भरे रहते हैं। ये पर्यटन स्थल इस देश के समृद्ध इतिहास और परंपराओं की कहानियाँ बयाँ करते हैं। बेल्जियम के बारे में कई अनूठी, बेजोड़ बातें हैं, जो अनायास ही सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं।
बेल्जियम में दुनिया की सबसे बड़ी संख्या में प्रति वर्गमीटर महल हैं। कुछ क्षेत्रों में प्रति गाँव दो महल भी हैं। इनमें से कुछ को यूनेस्को द्वारा धरोहर घोषित किया गया है। बेल्जियम में विश्व के श्रेष्ठ संस्थानों के कॉर्पोरेट मुख्यालयों की बड़ी संख्या है। बेल्जियम में समृद्ध विरासत एवं परपंराएँ, विश्वविद्यालय, स्थापत्य कला को समेटे भवन, शिक्षा के उत्कृष्ट केंद्र, युद्ध स्मारक, मनमोहक प्राकृतिक छटा के अतिरिक्त अत्यंत दोस्ताना संबंध वाले लोग हैं।
प्रस्तुत पुस्तक बेल्जियम के विषय में एक हैंडबुक है जो वहाँ की संपूर्ण जानकारी कम शब्दों में, रोचक शैली में देती है।
"
Book Details
-
ISBN9789390366668
-
Pages104
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Avg Reading Time3 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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‘सन्ताल : परम्पराएँ एवं संस्थान’ आदिवासी अध्ययन और मानवविज्ञान विषयक मानक पुस्तकों में शुमार है। मिशनरी-विद्वान पी.ओ. बोडिंग की इस कृति को भारतीय आदिवासी समाज और संस्कृति, विशेषकर सन्ताल सम्बन्धी अध्ययन में एक अनिवार्य पाठ माना जाता है।
भारत में नॉर्वेजियन सन्ताल मिशन के संस्थापक रेवरेंड एल.ओ. स्क्रेफ्स्रड (1840-1910) ने 1887 में सन्तालों के लिए एक मार्गदर्शिका प्रकाशित की थी, जिसका शीर्षक था, 'होरकारेन मारे हापराम्को रेक कथा’ (Horkaren Mare Hapramko reak Katha)। सन्ताल समाज में प्रचलित तमाम मान्यताओं, परम्पराओं और संस्थानों के बारे में जानकारी देने वाली इस पुस्तक को, इस समाज के कुछ प्रतिष्ठित सदस्यों के अनुरोध पर बोडिंग ने 1916 और 1929 में पुनः सम्पादित किया। इस क्रम में बोडिंग ने कुछ नई सामग्री भी जोड़ी। लेकिन उनके जीवित रहते यह अनुवाद प्रकाशित नहीं हो सका और पांडुलिपि प्रो.ओ. सोलबर्ग के पास सुरक्षित रही। अन्ततः स्टेन नो द्वारा सम्पादित किए जाने के बाद इसका प्रकाशन हुआ।
इस पुस्तक में जन्म से लेकर मृत्यु तक सन्ताल जीवन के हरेक संस्कार, आचार, व्यवहार, विश्वास, विधान, संस्थान आदि का प्रामाणिक ब्योरा दिया गया है। इसमें सन्ताल जीवन और संस्कृति से लेखक का गहरा लगाव स्पष्ट है जिसके बिना ऐसा मूलगामी अध्ययन और दस्तावेजीकरण सम्भव नहीं हो सकता था।
सन्ताली विरासत को समग्रता में जानने-समझने के इच्छुक हरेक व्यक्ति के लिए, एक पठनीय ग्रन्थ है।
Bharat Mein Digital Kranti
- Author Name:
Pradeep Thakur
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- Description: Awating description for this book
Swadheenta Sangharsh Aur Police
- Author Name:
Ajay Shankar Pandey
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Description:
इस पुस्तक में अत्यन्त विरोधाभासपूर्ण मनःस्थिति से गुज़र रहे समाज में क़ानून-व्यवस्था स्थापित करनेवाले तंत्र की सफलता या असफलता का मूल्यांकन करने का प्रयास किया गया है। एक ऐसे समाज में शान्ति-व्यवस्था बनाए रखना, अपराध स्थिति पर नियंत्रण रखना उतना दुष्कर कार्य नहीं है, जो प्रशासनिक एवं पुलिस ढाँचे को अपना ही सृजन एवं अंग स्वीकृत करता हो; परन्तु जिस समाज की मनोदशा यह रही हो कि प्रशासनिक तंत्र उसके लक्ष्यों के मार्ग में बाधक है, उनका दुश्मन है, उसमें शान्ति-व्यवस्था स्थापित करना, अपराध स्थिति पर नियंत्रण रखना अत्यन्त कठिन एवं दुष्कर कार्य अवश्य होता है।
जिस समाज में शान्ति छोड़कर या प्रशासनिक तंत्र को चुनौती देकर अपना लक्ष्य हासिल होने की उम्मीद हो, ऐसे मनोभावों वाले समाज में क़ानून-व्यवस्था स्थापित करना, अपराध स्थिति पर नियंत्रण रखना किस प्रकार, कितनी सफलता के साथ सम्भव हो सका?—निष्कर्षात्मक रूप में ऐसे मूल प्रत्ययों को विश्लेषणात्मक रूप से स्थापित करने का प्रयास इस पुस्तक में किया गया है।
पुस्तक में राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे स्वतंत्रता आन्दोलन एवं विचारधारा को चरणबद्ध तरीक़े से विवेचित किया गया है। राष्ट्रीय आन्दोलन के प्रत्येक चरण की विवेचना के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में अपराध स्थिति एवं पुलिस तंत्र के गठन एवं उनमें होनेवाले परिवर्तनों को भी विवेचना का विषय बनाया गया है। यह देखने एवं मूल्यांकित करने का प्रयास किया गया है कि राष्ट्रीय आन्दोलन की विचारधारा एवं राष्ट्रीय आन्दोलन की घटनाओं ने अपराध स्थिति को कहाँ तक प्रभावित किया है। पुलिस तंत्र के ढाँचे में होनेवाले परिवर्तनों को भी राष्ट्रीय आन्दोलन की घटनाओं, अपराध स्थिति पर उसके अनुवर्ती प्रभाव के दृष्टिकोण से विवेचित करने का प्रयास किया गया है।
Ummid Hogi Koi
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Sarup Dhruv
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- Description: गुजराती अस्मिता और गौरव को मैं हिन्दू गुजराती मानस से जोड़ रहा हूँ। यह उस तरह की क्षेत्रीय चेतना या राष्ट्रवाद नहीं है जिससे हम देश के विभिन्न हिस्सों में परिचित हैं। यह विशुद्ध हिन्दू चेतना है। गुजराती हिन्दू चेतना। इसमें गुजरात के मुसलमान या ईसाई गुजराती होकर भी अपने नहीं हैं, पराए हैं। इसी गुजरात में रचना जैसे भी लोग हैं। रचना माने सरूप ध्रुव। प्रख्यात कवि, रंगकर्मी, एक्टिविस्ट। हिन्दू, गुजराती औरत और इनसान! सभी रूपों में गुजरात 2002 से आहत। कुछ वैसी ही मन:स्थिति में, जिसमें बँटवारे से पहले ही फूट पड़ी साम्प्रदायिक हिंसा से बौराए गांधी ने क्षुब्ध होकर कहा था—“बिहार में हमने औरतों के साथ क्या नहीं किया। हिन्दुओं ने किया यानी मैंने किया। यह शर्मिन्दा होने की बात है।” लगभग 40-45 गाँवों–क़स्बों और शहरों में जाकर सरूप बहन ने विभिन्न वर्गों के पीड़ित मुसलमानों से उनकी आपबीती सुनी। वह राहत शिविरों में गईं, नई बसाहटों में गईं और उन इलाक़ों में भी गईं जहाँ मुसलमान अपने पुराने घरों में या वहीं आस-पास बना दिए गए घरों में लौट आए हैं। हर उम्र के आदमियों और औरतों से मिलने के साथ-साथ वह बच्चों से भी मिलीं। ऐसे हिन्दू और सवर्ण हिन्दू आदमी-औरतों से भी उन्होंने बातें कीं, जिन्होंने जोखिम उठाकर मुसलमानों को पनाह दी और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने की भरसक कोशिश की। आँख-कान कितने ही सतर्क हों, बग़ैर खुले दिमाग़ के ऐसी जटिल स्थिति समझना क़तई मुमकिन नहीं। एक एक्टिविस्ट के रूप में सरूप ध्रुव के जो भी सैद्धान्तिक आग्रह हों, उम्मीद की इन कहानियों में उन्होंने असामान्य वैचारिक-भावनात्मक खुलापन दिखाया है। —सुधीर चन्द्र
Bhajpa Hinduttva Aur Musalman
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Vedpratap Vaidik
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Description:
‘भाजपा, हिन्दुत्व और मुसलमान’ अपने ढंग की अनूठी कृति है। इस विषय का यह पहला मौलिक और विचारोत्तेजक ग्रन्थ है। उक्त तीनों मुद्दों और उनके आपसी सम्बन्धों पर जितनी गहराई और जितने कोणों से विद्वान लेखक ने विचार किया है, अब तक किसी भी ग्रन्थ में नहीं किया गया है। भाजपा का असली संकट क्या है, उसका समाधान क्या है, उसका भविष्य कैसा है, वह कहीं कांग्रेस की कार्बन-कॉपी तो नहीं बन गई है, संघ और भाजपा के बीच अन्तर्द्वन्द्व के मुद्दे कौन-कौन से हैं, आदि अनेक प्रश्नों पर डॉ. वेदप्रताप वैदिक ने गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया है।
सावरकर का हिन्दुत्व अब कितना प्रासंगिक रह गया है? उसमें से क्या घटाया और क्या जोड़ा जाए, इस जटिल और विवादास्पद विषय पर डॉ. वैदिक ने जो मौलिक विचार प्रस्तुत किए हैं, वे भाजपा ही नहीं, 21वीं सदी के भारत के लिए भी ध्यातव्य हैं। हिन्दुत्व और इस्लाम के नाम पर चले अभियानों पर लेखक के जिन बेबाक निबन्धों ने देश की तत्कालीन राजनीति पर सीधा असर डाला था, वे भी इस ग्रन्थ में संकलित किए गए हैं। इस ग्रन्थ में कुछ निबन्ध ऐसे भी हैं, जिनके बारे में आपको लगेगा कि वे अपने आप में एक-एक ग्रन्थ के बराबर हैं। मुस्लिम राजनीति और मुसलमानों के प्रति भाजपा के रवैए पर भी लेखक ने अपनी दो-टूक राय ज़ाहिर की है। मुसलमान भारतीय इतिहास को कैसे देखें और शेष भारत मुसलमानों को कैसे देखे, आदि अत्यन्त पेचीदा और नाजुक मुद्दों पर भी लेखक ने अपने निर्भीक विचार प्रस्तुत किए हैं। डॉ. वैदिक के ये निबन्ध राजनेताओं, विद्वानों, पत्रकारों और प्रबुद्ध पाठकों के लिए दिशा-बोधक और उपयोगी हैं।
Aaj Ka Hind Swaraj
- Author Name:
Sandeep Joshi
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Description:
महात्मा गाँधी को सिरे से ख़ारिज करने या उनका अवमूल्यन करने की मुहिम, इन दिनों, सुनियोजित ढंग से चलायी जा रही है। हमारा समय, कम से कम इस समय सत्तारूढ़ शक्तियों के किये-लेखे, गाँधी के अस्वीकार का, गाँधी-विरोध का समय है। यह विरोध या अस्वीकार गाँधी को एक नयी और तीक्ष्ण प्रासंगिकता देता है। उस प्रासंगिकता का ही हिस्सा है प्रश्नवाचकता जबकि प्रश्न पूछना लगभग गुनाह क़रार दिया जा रहा है। गाँधी ने अपने समय में निर्भयता से प्रश्न उठाये और उनके समुचित उत्तर देने की कोशिश की। युवा चिन्तक और कर्मशील संदीप जोशी हमारे समय के कुछ ज़रूरी प्रश्न और उसके बेचैन उत्तर खोजने की 'गुस्ताख़ी' कर रहे हैं। यह गाँधी की दृष्टि का हमारे कठिन समय के लिए पुनराविष्कार है।
—अशोक वाजपेयी
2014 CHUNAV : JISNE BHARAT KO BADAL DIYA
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- Description: भारत के 2014 के आम चुनावों को 1977 के बाद भारतीय इतिहास का सबसे महत्त्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इस चुनाव में देश ने सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी को समेटते हुए, भारतीय जनता पार्टी को शानदार जीत दिलाई। साथ ही, चुनाव प्रचार की एकदम नई तरह की शैली देखी गई, जिसने राजनीतिक खेल के सारे नियम तोड़ डाले। लेकिन यह कैसे और क्यों मुमकिन हुआ? इस दिलचस्प पुस्तक में प्रसिद्ध पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने राजनीति के सभी प्रमुख खिलाडि़यों और बड़ी खबरों के जरिए चुनावी कहानी पर नजर रखने का प्रयास किया है। इसकी शुरुआत 2012 से होती है, जब नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार गुजरात में राज्य विधानसभा के चुनाव में विजय हासिल की, लेकिन साथ ही एक बड़े मिशन पर अपनी निगाहें गड़ाईं। मनमोहन सिंह और संप्रग-दो के घोटालों, टीम मोदी की परदे के पीछे की रणनीतियों, राहुल गांधी की अभूतपूर्व चूकों और चुनाव वर्ष के राजनीतिक ड्रामे से होते हुए वे साल 2014 की उस शानदार जीत को रेखांकित कर रहे हैं, जिसने भारत को बदल दिया।
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