Karyakartaon Se…
Author:
Prabhat JhaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics0 Ratings
Price: ₹ 120
₹
150
Available
कार्यकर्ताओं से...' हमारी विचारधारा के कार्यकर्ताओं और आनेवाली पीढिय़ों के लिए एक पथ-प्रदर्शक साबित होगी। साथ ही, राजनीतिक क्षेत्र में जनसंघ से लेकर भाजपा की आज भारतीय समाज में महती आवश्यकता क्यों है—जैसे विषयों को भी समझने में सहायता मिलेगी। यह संयोग ही है कि सन् 1996 में भोपाल में आयोजित भारतीय जनता पार्टी के एक प्रशिक्षण वर्ग में भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुकर्जी के साथ रहे पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन सह-सरकार्यवाह माननीय सुदर्शनजी, जनसंघ के ही दिनों से कार्य कर रहे पूर्व उप-प्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी एवं तत्कालीन संगठन महामंत्री माननीय कुशाभाऊ ठाकरे एक साथ इस प्रशिक्षण वर्ग में रहे और अपने प्रेरक उद्बोधनों से कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया। पठनीय व संग्रहणीय यह पुस्तक अपनी विचारधारा के संवर्धन और व्यावहारिक निरूपण की दृष्टि से हम सबके लिए एक प्रकाशपुंज का कार्य करेगी।
ISBN: 9789390372294
Pages: 96
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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प्राचीन काल में कश्मीर प्रदेश गन्धार जनपद के अन्तर्गत आता था। सातवीं शताब्दी ई. के प्रारम्भ में यहाँ नाग जाति के कर्कोटक राजवंश का उदय हुआ; जिसके संस्थापक दुर्लभवर्द्धन के समय से कश्मीर का व्यवस्थित इतिहास मिलता है। उनके पौत्र ललितादित्य ने गुप्तोत्तर काल में एक साम्राज्य खड़ा किया; और प्रसिद्ध मार्तण्ड-मन्दिर का निर्माण भी कराया।
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Mohandas Karamchand Gandhi
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- Description: ग्राम स्वराज्य—महात्मा गांधी, यह सोचना गलत है कि गांधीजी आज के उद्योगीकरण के बारे में बहुत पुराने विचार रखते थे। सच पूछा जाए तो वे उद्योगों के यंत्रीकरण के विरुद्ध नहीं थे। गाँवों के लाखों कारीगरों को काम दे सकनेवाले छोटे यंत्रों में जो भी सुधार किया जाए, उसका वे स्वागत करते थे। गांधीजी बड़े-बड़े कारखानों में विपुल मात्रा में माल पैदा करने के बजाय देश के विशाल जन-समुदायों द्वारा अपने घरों और झोंपड़ों में माल का उत्पादन करने की हिमायत करते थे। वे भारत के प्रत्येक सबल व्यक्ति को पूरा काम देने के बारे में बहुत अधिक चिंतित रहते थे और मानते थे कि यह ध्येय तभी सिद्ध होगा जब गाँवों में सुचारु रूप से ग्रामोद्योगों तथा कुटीर उद्योगों का संगठन और संचालन किया जाएगा। महात्मा गांधी ग्राम-पंचायतों के संगठन द्वारा आर्थिक और राजनीतिक सत्ता के विकेंद्रीकरण का जोरदार समर्थन करते थे। दुर्भाग्य से आर्थिक जीवन के नैतिक और आध्यात्मिक पहलू की हमेशा उपेक्षा की गई है, जिसके फलस्वरूप सच्चे मानव-कल्याण को बड़ी हानि पहुँची है। आधुनिक अर्थशास्त्री अब इस महत्त्वपूर्ण आवश्यकता पर जोर देने लगे हैं कि यदि हमें विशाल पैमाने पर तीव्र गति से आर्थिक विकास साधना है तो ‘वस्तुओं की गुणवत्ता’ बढ़ाने के साथ ‘मनुष्यता की गुणवत्ता’ भी बढ़ानी चाहिए। अतः वर्तमान परिस्थिति में गांधीजी के ‘ग्राम स्वराज्य’ की अवधारणा के पठन-पाठन की महती आवश्यकता है।
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