Uttar Taimoorkaleen Bharat : Vol. 2
Author:
Saiyad Athar Abbas RizviPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics0 Ratings
Price: ₹ 1000
₹
1250
Available
इस पुस्तक में 1399 से 1526 ई. तक के देहली के सुल्तानों के इतिहास से सम्बन्धित समस्त प्रमुख समकालीन एवं बाद के फ़ारसी के ऐतिहासिक ग्रन्थों का हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया गया है। पहला भाग देहली के सुल्तानों के राज्य से सम्बन्धित है और दूसरा भाग उन प्रान्तीय राज्यों से जिनका प्रादुर्भाव फ़ीरोज़ तुग़लक़ की मृत्यु के उपरान्त ही धीरे-धीरे होने लगा था और जो तैमूर के आक्रमण के उपरान्त पूर्णतः स्वतंत्र हो गए।</p>
<p>सैयद वंश के इतिहास से सम्बन्धित यहया बिन अहमद बिन अब्दुल्लाह सिहरिन्दी की ‘तारीख़े मुबारकशाही’ एवं ख़्वाजा निज़ामुद्दीन अहमद की ‘तबक़ाते अक़बरी’ भाग-1 के उद्धरणों का अनुवाद किया गया है। दूसरे भाग में अफ़ग़ानों के सुल्तानों के इतिहास के अनुवाद सम्मिलित किए गए हैं। इनमें शेख़ रिज़्कुल्लाह मुश्ताक़ी की ‘वाक़ेआते मुश्ताक़ी’, ख़्वाजा निज़ामुद्दीन अहमद की ‘तबक़ाते अकबरी’, अब्दुल्लाह की ‘तारीख़े दाऊदी’, अहमद यादगार की ‘तारीख़े शाही’ एवं मुहम्मद कबीर बिन शेख़ इस्माइल की ‘अफ़सानए-शाहाने हिन्द’ के उद्धरण शामिल हैं।</p>
<p>भाग-2 के इतिहासकारों में ख़्वाजा निज़ामुद्दीन अहमद के अतिरिक्त सभी अफ़ग़ान इतिहासकार हैं। अहमद यादगार का इतिहास 1930 ई. में प्रकाशित हुआ था और ‘तारीख़े दाऊदी’ 1954 ई. में। इनके अतिरिक्त ‘वाक़ेआते मुश्ताक़ी’ और ‘अफ़सानए-शाहाने हिन्द’ अभी तक प्रकाशित नहीं हुए हैं और इनकी हस्तलिखित प्रतियाँ भी भारतवर्ष में उपलब्ध नहीं हैं, अतः आवश्यक अंशों का अनुवाद करते समय तत्सम्बन्धी पूरे-पूरे इतिहासों का अनुवाद कर दिया गया है। इस कारण एक ही घटना की कई बार पुनरावृत्ति अनुपेक्षणीय हो गई है। इतिहासकारों तथा उनकी कृतियों का परिचय अनुवाद के प्रारम्भ में प्रस्तुत किया गया है।
ISBN: 9788126718412
Pages: 624
Avg Reading Time: 21 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: श्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के अनुरूप गुजरात को आदर्श राज्य बनाने के लिए काम किया तथा सफलता हासिल की, और वह भी मात्र बारह-तेरह साल की अवधि में। शासन के विभिन्न मोरचों पर आधुनिक एवं नवीन प्रयास तथा रणनीतियाँ शुरू करके उन्होंने गुजरात राज्य का चेहरा ही बदल दिया और उसे भारत के सभी राज्यों में शीर्ष स्थान पर ला दिया। नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों को कसौटी पर कसने के दौरान लेखक को कुछ प्रश्नों ने उद्वेलित किया— —क्या भारत विकसित देश बन सकता है? —हमारी मातृभूमि प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है, फिर हम क्यों लड़खड़ा रहे हैं? —हम भ्रष्टाचार में क्यों डूबे हैं? —बड़ी संख्या में भारतीय गरीबी में क्यों फँसे हैं? लेखक को उपर्युक्त सब प्रश्नों के उत्तर अपनी तलाश के दौरान मिल गए। मोदी के प्रयास न केवल हमें भविष्य के प्रति आश्वस्त करते हैं, बल्कि यह भी विश्वास दिलाते हैं कि भारत विश्व के देशों के बीच पूर्ण विकसित राष्ट्र बन सकता है। प्रतिबद्ध नेतृत्व यदि निश्चित भविष्यगामी सोच के साथ योजनाएँ और परियोजनाएँ बनाएगा, तो इन प्रश्नों का समाधान मिलेगा, उनका निदान होगा। ‘मोदी का विकासनामा’ पुस्तक न तो नरेंद्र मोदी की जीवनी है, न कोई चुनाव घोषणा-पत्र और न ही प्रायोजित लेखन। आँकड़ों की बाजीगरी से ऊपर उठकर ठोस और यथार्थ पर आधारित नरेंद्र मोदी के विकासक्रम की प्रेरक कहानी।
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