The Phoenix and The Carpet
Author:
Edith NesbitPublisher:
FlyDreams PublicationsLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction0 Ratings
Price: ₹ 319.2
₹
399
Available
इस बार चारों बच्चों सिरिल, एंथिया, रॉबर्ट, जेन के हाथ अनजाने में लगता है एक जादुई कालीन जो उन्हें हर रोज़ तीन बार पूरे विश्व के किसी भी कोने की सैर करवा सकता है। उस जादुई कालीन के साथ ही उन्हें मिलता है एक विचित्र सुनहरा अंडा भी, जिसमें से निकलता है एक विलक्षण मायावी पंछी। चारों बच्चे उस जादुई कालीन पर चमत्कारी मायावी पंछी के साथ विलुप्त ख़ज़ाने की खोज से लेकर जंगली आदिवासियों के अनजान टापू की यात्रा जैसे ढेरों रोमांचक सफर पर निकल पड़ते हैं। लेकिन जादुई कालीन की एक छोटी सी गड़बड़ी के कारण उनके घर पर धावा बोलते हैं सैकड़ों बिन बुलाए ऐसे मेहमान, जिनके बारे में उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा। कैसे उनके नए दोस्त मायापंछी को बंधक बना लिया जाता है... कैसे उनका नन्हा सा भाई जादुई कालीन की वजह से अकेला ही ऐसी अनजान जगह पहुँच जाता है, जहाँ से उसे कोई भी वापस नहीं ला सकता... कैसे एक बार फिर से उनके ये नए रोमांच ही उनके लिए बन जाते है बड़ी मुसीबतें... जानने के लिए पढ़ें 'फाइव चिल्ड्रेन एंड इट’ के बाद एडिथ नेस्बिट द्वारा रचित ‘सैमिएड’ उपन्यास शृंखला का दूसरा भाग 'फीनिक्स एंड द कार्पेट'
ISBN: 9789392723285
Pages: 258
Avg Reading Time: 9 hrs
Age: 0-11
Country of Origin: India
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विश्व-दर्शन की मुख्य धारा में विभिन्न कालों के विभिन्न लोगों ने सकारात्मक या नकारात्मक, अपने-अपने तरीक़े से योगदान किया है। इस मुख्य धारा में अनेक धाराएँ मिली हुई हैं, जिनसे सामान्य पाठकों का परिचय कराने के लिए आठ पुस्तकों की यह शृंखला तैयार की गई है। प्रो. देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय की प्रस्तुत पुस्तक इसी शृंखला की पहली कड़ी है।
श्री चट्टोपाध्याय इस पुस्तकमाला के प्रधान सम्पादक हैं और साथ ही ‘दर्शनशास्त्र के स्रोत’ शीर्षक प्रस्तुत पुस्तक के लेखक भी। अत: उनकी यह पुस्तक एक प्रकार से पूरी शृंखला की पूर्व-पीठिका है। इस पुस्तक में उन्होंने, जैसा कि शीर्षक से स्पष्ट है, दर्शन के स्रोतों की खोज की है, और शृंखला की अगली पुस्तकों को पढ़ने-समझने का संस्कार पैदा करने की आधारशिला का निर्माण भी किया है। ‘दर्शनशास्त्र की आवश्यकता क्यों है’ से प्रारम्भ करके वे आदि-मानव के क्रमिक विकास पर विचार करते हैं और फिर समाज में कर्म-विभाजन की शुरुआत, नगर क्रान्ति, जीवन में धर्म की भूमिका आदि को रेखांकित करते हुए इस प्रश्न पर विचार करते हैं कि दर्शन का जन्म और विकास कैसे हुआ। इस समस्त विवेचन के क्रम में विश्व की प्राचीन चिन्तन-पद्धतियों का संक्षिप्त परिचय भी पाठकों को मिल जाता है।
प्रो. चट्टोपाध्याय ने यहाँ थेल्स के बारे में किए गए इस दावे पर प्रश्न-चिह्न लगाया है कि वह पहला वैज्ञानिक था। ऐसा उन्होंने ‘छान्दोग्य उपनिषद’ के उद्दालक आरुणि से सम्बन्धित अंश का विवेचन करते हुए किया है। उनके अनुसार, उद्दालक आरुणि के विज्ञान के प्रति सुस्पष्ट रुझान को देखते हुए विश्व विज्ञान के इतिहास का गम्भीर पुनरीक्षण आवश्यक है।
कहना न होगा कि प्रो. चट्टोपाध्याय की सामाजिक दृष्टि और बौद्धिक तटस्थता से अनुप्राणित यह पुस्तक दर्शन के अध्येताओं के साथ-साथ उन पाठकों के लिए भी रुचिकर होगी, जो दर्शन के अध्ययन की शुरुआत ही कर रहे हैं।
Bhasha Ki Sanjeevani
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description: कृष्ण कुमार अपने पाठकों को पहचानते हैं और उनसे आत्मीयता बढ़ाने के अन्दाज़ में लिखते हैं। पहली बार उनका गद्य पढ़ रहे नए पाठक इस आत्मीयता का स्पर्श पाकर चकित होते हैं। निबन्ध की विधा कृष्ण कुमार को विशेष प्रिय रही है यद्यपि वे कहानी और संस्मरण भी चाव से लिखते रहे हैं। ‘भाषा की संजीवनी’ की शुरुआत थोड़ा-बहुत भी बता पाने के संघर्ष और सुकून से होती है और अन्त भाषा के जीवनदायी चरित्र के अभिन्दन से। इन दो विचार-ध्रुवों के बीच इस संग्रह में अठ्ठारह निबन्ध, समीक्षा-लेख और संस्मरण शामिल हैं। विषयों की विविधता के बीच पाठकों को कृष्ण कुमार के स्थायी सरोकार मिलेंगे—प्रकृति, स्त्री, सरकार और पढ़ाई। इन सभी के भीतर और इर्द-गिर्द मची भगदड़ और हिंसा पर टिप्पणी भी मिलेगी। इस निबन्ध विविधा से गुज़रते हुए पाठक याद करेंगे कि कृष्ण कुमार के लिए अगर कोई चीज़ नागवार है तो वह ‘विचार का डर’ है जो उनके एक प्रसिद्ध संग्रह का शीर्षक भी है।
1000 Khagol Vigyan Prashnottari
- Author Name:
Dilip M. Salwi
- Book Type:

- Description: सूर्य, चंद्रमा, तारे, ग्रह. नक्षत्र आदि हमेशा से हमारे लिए कौतूहल का केंद्र रहे हैं ब्रह्मांड के रहस्य प्राचीनकाल से गए वेज्ञानिकों को अपनी ओर आकर्षित करते रहे हैं । कॉपरनिकस, टोलेमी, आर्यभट्ट, टाइको ब्राहे, गैलीलियो आदि आरंभिक दौर के ऐसे वैज्ञानिक हैं जिनकी ग्लैंगाहें इम खगोल को समझने के लिए आकाश पर लगी रहती थीं ।रात्रि में जब हम आकाश की ओर देखते हैं तो प्राय : अनेक छोटे -छोटे पिंड पृथ्वी की ओर गिरते हुए दृष्टिगोचर होते हैं और ऐसा प्रतीत होता है मानो तारों की वर्षा हो रही है । मगर यह खूबसूरत दृश्य तारों की वर्षा का नहीं बल्कि उल्कापिंडों की वर्षा का होता है ।जब चंद्रमा के धरातल पर मानव के कदम पड़े तो उसपर घर बनाने के सपने का जन्म हुआ, जिसको साकार करने के लिए कोशिशें जारी हैं । वैज्ञानिकों ने ऐसी अंतरिक्ष बस्तियों की कल्पना की है जिनमें खेत, मकान, फैक्टरी, अस्पताल, दफ्तर और मनोरंजन केंद्र होंगे- और यहाँ तक कि कृत्रिम जंगल और जलप्रपात भी । खगोल व अंतरिक्ष विज्ञान से संबंधित इसी प्रकार की रोचक और ज्ञानवर्द्धक जानकारियों को पाठकों तक पहुँचाना इस पुस्तक का उद्देश्य है ।
Harishankar Parsai : Vyangya Ki Vaicharik Prishthbhoom
- Author Name:
Radhe Mohan Sharma
- Book Type:

- Description: हरिशंकर परसाई सही मायनों में व्यंग्य-लेखन में ‘मास्टर माइंड’ हैं। एक ऐसे लौह-लेखक जिनके कारण ही व्यंग्य एक विधा के रूप में स्थापित हो सका । प्रो. राधेमोहन शर्मा ने अपने लघु शोध-प्रबन्ध में विस्तार से विवेचन-विश्लेषण कर हिंदी गद्य साहित्य में परसाई की शिखर-स्थिति को रेखांकित किया है। व्यंग्य के स्वरूप और प्रकार, युग की बात युग के लिए, व्यक्तित्व की पहचान जैसे विश्लेषणों में परसाई के व्यंग्य की समग्रता को समेटा गया है। हरिशंकर परसाई के पाठकों, छात्रों, अध्यापकों, शोधार्थियों के लिए यह पुस्तक उन्हें गहरे तक समझने के लिए श्रेष्ठ मार्गदर्शक है।
Beeswin Shatabdi Mein Darshanshastra
- Author Name:
Suman Gupta
- Book Type:

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Description:
‘दर्शनशास्त्र : पूर्व और पश्चिम’ शृंखला की इस सातवीं पुस्तक में डॉ. सुमन गुप्ता ने समकालीन दार्शनिक चिन्तन की दो मुख्य प्रवृत्तियों—भाषिक दर्शनशास्त्र और अस्तित्ववाद—का मार्क्सवादी दृष्टि से अध्ययन किया है। इन दोनों विचारधाराओं को उनके सही सामाजिक-ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में रखते हुए, डॉ. गुप्ता ने इनकी प्रचलित व्याख्याओं पर प्रश्नचिह्न लगाया है। उनका तर्क है कि गूढ़ पारिभाषिक शब्दावली के आवरण में इन विचारधाराओं की अमूर्त तत्त्वमीमांसी प्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगाया है, जो एक सही विश्व-दृष्टि प्रस्तुत करने के स्थान पर यथार्थ को विरूपित करती है। भाषिक दर्शनशास्त्रियों और अस्तित्ववादियों के दृष्टिकोण के विपरीत, डॉ. सुमन गुप्ता ने एक ऐसा दृष्टिकोण अपनाया है, जो न केवल इन चिन्तनधाराओं के विविध पक्षों का एकीकरण करता है बल्कि उनके सामाजिक यथार्थ की जड़ों में भी जाता है। सुमन गुप्ता ने स्पष्ट रूप से दर्शाया है कि भाषिक दर्शनशास्त्रियों और अस्तित्ववादियों द्वारा प्रतिपादित मनुष्य की संकल्पना मनुष्य को एक ऐसे अमूर्त रूप में चित्रित करती है जो अपने सामाजिक क्रियाकलाप से अपना या अपने चारों ओर की दुनिया का रूपान्तरण करने में असमर्थ है।
डॉ. गुप्ता ने समकालीन दर्शन की इन दोनों प्रवृत्तियों की न केवल समीक्षा प्रस्तुत की है, बल्कि वह विश्व-दृष्टि भी सामने रखी है जिसे वे सही मानती हैं।
सुमन गुप्ता ने भाषिक दर्शनशास्त्र और अस्तित्ववाद का विवेचन साधारण कुशलता से किया है लेकिन उनकी पद्धति निस्सन्देह विवादमूलक है, जिसके फलस्वरूप यह पुस्तक दर्शनशास्त्र के प्रति एक नई दृष्टि विकसित करने में सहायक होगी और जो पाठक दर्शनशास्त्र की सार्थकता को जीवन की यथार्थ समस्याओं से जोड़कर देखना चाहते हैं, उनके लिए यह निश्चय ही रोचक और पठनीय सिद्ध होगी।
Gandhijan Charitramala
- Author Name:
Sunanda Mohini +7
- Book Type:

- Description: आज आपण नवभारताची संकल्पना, ‘आयडिया ऑफ इंडिया’ हीच विसरलो आहोत. हा देश येथे राहणाऱ्या सर्वांचा आहे, त्यावर त्यांचा समान हक्क आहे, समता-न्याय-बंधुता ह्यांवर आधारित देश उभारणे, त्याला समृद्ध करणे ही ह्या सर्वांची सामायिक जबाबदारी आहे, ही झाली ‘आयडिया ऑफ इंडिया.’ द्वेष आणि उन्मादाने भारलेल्या आजच्या वातावरणातून बाहेर पडण्यासाठी आपल्याला ह्या संकल्पनेचे आणि तिची पायाभरणी करणाऱ्यांचे पुनर्स्मरण करावेच लागेल. याच भूमिकेतून घेऊन येत आहोत गांधीजन चरित्रमाला... अनुराधा मोहनी संपादित या चरित्रमालेत आपल्याला वाचायला मिळतील एकाहून एक सिद्धहस्त लेखकांच्या लेखणीतून साकारण्यात आलेली आठ दिग्गज व्यक्तिमत्वांची चरित्र म्हणजेच गांधीजनांची चरित्रमाला ! 1. सर्वांचे गांधीजी । रवीन्द्र रुक्मिणी पंढरीनाथ 2. सावली नव्हे, जीवनसंगिनी – कस्तुरबा गांधी । सुनन्दा मोहनी 3. क्रांतिकारक ऋषी विनोबा भावे । मीना श्रीकांत कारंजेकर 4. नियतीशी करार करणार महामानव- पंडित जवाहरलाल नेहरू । हेमंत कर्णिक 5. नवभारताचे पहिले शिक्षणमंत्री मौलाना आझाद । नंदू गुरव 6. दीपशिखा सरोजिनी नायडू । डॉ. सिसिलिया कार्व्हालो 7. अहिंसेचा उपासक खान अब्दुल गफ्फार खान । श्याम पाखरे 8. मातृहृदयी समतायोद्धा साने गुरूजी । सुचिता पडळकर गांधीजन चरित्रमाला – संपादन : अनुराधा मोहिनी Gandhijan Charitramala – sampadan : Anuradha Mohini Lekhak - Ravindra Rukmini Pandharinath , Sunanda Mohini , Meena Shrikan Karanjekar, Hemant Karnik, Nandu Gurav, Dr, sisilia karvhalo, Shyam Pakhare, Suchita Padalkar
Ikigai: इकिगाई
- Author Name:
Raj Goswami
- Book Type:

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