Jal Sankat Aur Jal Sangrah
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पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। कहा जाने लगा है कि तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो बहुत ही सम्भव है कि वह पानी को लेकर ही हो। शहरी इलाक़ों में पानी की कमी और उसके लिए रोज़-रोज़ होनेवाले स्थानीय झगड़े शायद इसी की बानगी हैं। उधर ग्रामीण क्षेत्रों में जल-स्तर न सिर्फ़ नीचे जा रहा है, पेयजल के रूप में उसका उपयोग भी ख़तरनाक होता जा रहा है। जनसंख्या के साथ-साथ जहाँ पानी की आवश्यकता बड़े पैमाने पर बढ़ी है, वहीं जल-संग्रहण की पारम्परिक पद्धतियों को भी हमने भुला दिया है, जितना जल उपलब्ध है, वह बढ़ते शहरीकरण के परिणामस्वरूप प्रदूषण का शिकार है। आँकड़े बताते हैं कि इस समय देश में रोज़ छह हज़ार से ज़्यादा लोग दूषित जल से पैदा होनेवाली बीमारियों से मर जा रहे हैं। यह पुस्तक इस विकराल संकट से निबटने के लिए एक आरम्भिक ढाँचा सुझाती है जिसका उपयोग हम जल-संरक्षण, और सामान्यत: पानी के प्रति अपना आधारभूत दृष्टिकोण बदलने में कर सकते हैं। वर्षा जल के संग्रहण की पुरानी और नई प्रविधियों, इसके साथ भू-जल स्रोतों की सम्यक् सार-सँभाल, जल-अपव्यय को रोकने की ज़रूरत तथा तरकीबें, सूखे इलाक़ों में जल-संचयन की वैज्ञानिक पद्धति, विभिन्न क़िस्म के बाँधों, कुँओं, तालाबों के निर्माण सम्बन्धी जानकारी, स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, आपूर्ति और वितरण की समस्या और कृषि-उपयोग के लिहाज़ से जल-प्रबन्ध, इन तमाम विषयों पर यह पुस्तक अद्यतन और वैज्ञानिक सामग्री उपलब्ध कराती है।
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पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। कहा जाने लगा है कि तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो बहुत ही सम्भव है कि वह पानी को लेकर ही हो। शहरी इलाक़ों में पानी की कमी और उसके लिए रोज़-रोज़ होनेवाले स्थानीय झगड़े शायद इसी की बानगी हैं। उधर ग्रामीण क्षेत्रों में जल-स्तर न सिर्फ़ नीचे जा रहा है, पेयजल के रूप में उसका उपयोग भी ख़तरनाक होता जा रहा है।
जनसंख्या के साथ-साथ जहाँ पानी की आवश्यकता बड़े पैमाने पर बढ़ी है, वहीं जल-संग्रहण की पारम्परिक पद्धतियों को भी हमने भुला दिया है, जितना जल उपलब्ध है, वह बढ़ते शहरीकरण के परिणामस्वरूप प्रदूषण का शिकार है। आँकड़े बताते हैं कि इस समय देश में रोज़ छह हज़ार से ज़्यादा लोग दूषित जल से पैदा होनेवाली बीमारियों से मर जा रहे हैं।
यह पुस्तक इस विकराल संकट से निबटने के लिए एक आरम्भिक ढाँचा सुझाती है जिसका उपयोग हम जल-संरक्षण, और सामान्यत: पानी के प्रति अपना आधारभूत दृष्टिकोण बदलने में कर सकते हैं।
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Book Details
-
ISBN9788189444617
-
Pages108
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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‘‘क़ायदे से अनुपम मिश्र न लेखक थे, न पत्रकार। वे साफ़ माथे के एक आदमी थे जो हर हालत में माथा ऊँचा और साफ़ रखना चाहते थे। उनकी निराकांक्षा उनकी बुनियादी बेचैनियों को ढाँप नहीं पाती थी। ये बेचैनियाँ ही उन्हें कई बार ऐसे प्रसंगों, व्यक्तियों, घटनाओं, वृत्तियों को खुली नज़र देखने-समझने की ओर ले जाती थीं। उनकी संवेदना में ऐसी ऐन्द्रियता थी कि वे विचार का कपड़ा भी पहचान लेती थीं। कुल मिलाकर अनुपम मिश्र की अकाल मृत्यु के बाद शेष रह गई सामग्री में से किया गया यह संचयन हिन्दी में सहज, निर्मल और पारदर्शी, मानवीय गरमाहट से भरे गद्य का विरल उपहार है। हमें मरणोत्तर अनुपम मिश्र को उनकी भरी-पूरी जीवन्तता में प्रस्तुत करने में प्रसन्नता है।”
—अशोक वाजपेयी
Bhukamp
- Author Name:
Harinarayan Srivastava
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भूकम्प है क्या? यह किन परिस्थितियों में विध्वंसक हो जाता है? क्या इससे बचने का कोई उपाय है? इन और ऐसे ही अनेक प्रश्नों के माध्यम से इस पुस्तक में भूकम्प जैसे भौगोलिक और वैज्ञानिक विषय की शोध–खोज की गई है—यानी पृथ्वी के भीतरी, सर्वाधिक भयावह और रोमांचक घटना–क्षणों की विस्तृत और रोचक छानबीन। भूकम्पों के कारण, उनके पूर्वानुमान, भूकम्प–विज्ञान के विभिन्न उपयोगों—जैसे भूकम्प इंजीनियरिंग, नाभिकीय विस्फोटों का पता एवं चन्द्र–कम्पों आदि के बारे में आधुनिक अनुसन्धानों की विस्तृत चर्चा इस पुस्तक में की गई है। यद्यपि यह विषय भौतिकी और गणित के मूल सिद्धान्तों पर आधारित है, पर अपनी सहज भाषा–शैली और सार्थक प्रस्तुति के कारण दुरूह बिलकुल नहीं रह गया है। भूगोल के विद्यार्थियों, प्रोफ़ेसरों, भूगर्भशास्त्रियों, इंजीनियरों और धरती के गर्भ में पलते–पनपते, उमड़ते–घुमड़ते रहस्यों को जानने की इच्छा रखनेवाले सामान्य पाठकों के लिए भी यह सचित्र प्रकाशन समान रूप से उपयोगी और अनूठा है।
Sheron Se Meri Mulakatein
- Author Name:
Sherjung
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“अचानक जंगल में सन्नाटा गहरा गया। उस गहरे सन्नाटे को चीरती हाथियों के चिंघाड़ने की आवाज़ें, तभी एक अजीब–सी आवाज़ हाथियों की ओर से आई। मैं समझ गया कि यह वही आवाज़ है जो हाथी अपनी सूँड़ ज़मीन पर पटककर निकालते हैं लेकिन सिर्फ़ शेर के आसपास होने पर–––और फिर सारा जंगल शेर की दहाड़ से काँप उठा।’’ शेर से नज़दीकी का हैरतअंगेज़ रोमांच और एक शिकारी होने का एहसास आपके ज़ेहन को गुदगुदाए बिना नहीं रहेगा। हास्य और व्यंग्य से सँवारे ये लेखक के नितान्त अपने अनुभव हैं। शेरजंग की इस किताब में एक शिकारी का रोमांच भी है और शेरों के प्रति बाल सहज जिज्ञासा के जवाब भी। शुरू करते ही एक रोचकता पाठक को जकड़ते हुए, एक ऐसी दुनिया में ले जाती है जहाँ शेर ही नहीं जंगल के सारे जानवरों का एहसास होता है। जिसमें शामिल हैं—उनकी आदतें, व्यवहार और उनका जीवन–चक्र।
Janwar Aur Unka Bhojan
- Author Name:
Varen Nocks
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पेड़-पौधों को खाकर जीनेवाले जानवर कौन-से होते हैं कीड़े-मकोड़े हमारे लिए क्या करते हैं अलग-अलग जानवरों के दाँत पैर आदि किस तरह अलग-अलग होते हैं। मौसमों के अनुसार हमें कौन से पक्षी कीड़े आदि दिखाई देते हैं और इसी तरह के ढेरों प्रश्नों के जवाब बच्चे चित्रों की सहायता से इस पुस्तक में पाएँगे। पानी के प्राणियों के साथ पानी और उसके विभिन्न रूपों पर भी एक अध्याय है और पृथ्वी के विषय में जानकारी देनेवाली कुछ सामग्री भी इस पुस्तक में रखी गई है। इस पुस्तक का उद्देश्य स्कूली छात्रों को अपने आसपास के परिवेश के विषय में वैज्ञानिक जानकारी देना है। सरल प्रयोगों प्रश्न-अभ्यासों और ‘स्वयं करके देखो’ जैसी प्रविधियों से प्रयास किया गया है कि यह ज्ञान बच्चों की सोच का हिस्सा बन जाए और वे आगे चलकर विज्ञान सम्मत सोच को अपने जीवन का हिस्सा बना सकें।
Ped-Paudhe Aur Jeev-Jantu
- Author Name:
Varen Nocks
- Book Type:

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छोटे स्कूली बच्चों के लिए तैयार की गई यह पुस्तक उन्हें प्रकृति,पेड़-पौधों जीव-जन्तुओं और वर्षा आँधी जैसी घटनाओं के बारे में आरम्भिक जानकारी देती है। चित्रों की सहायता से कहीं कहानी की तरह तो कहीं घर में किए जा सकनेवाले प्रयोगों के माध्यम से यह बच्चों को उनके आसपास के परिवेश का वैज्ञानिक बोध कराती है। दिशाएँ क्या हैं, उन्हें कैसे पहचानें, आकाश में ध्रुवतारे, सूरज, चाँद आदि के बारे में सरल शब्दों में बताया गया है जिससे बालक अपनी आरम्भिक जिज्ञासाओं को भविष्य के लिए वैज्ञानिक सोच की तरफ़ मोड़ सकें। आभास के लिए सरल प्रश्नोत्तरी के माध्यम से बच्चे अकेले या अपने साथियों के साथ दिलचस्प खेल भी खेल सकते हैं।
Social Concepts in Rural India
- Author Name:
Dr. Abhishek Chauhan +2
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This book on Rural Development in India comprises of eight units which focus to reconstruct the importance of villages in India since time immemorial. The authors have very well tried their level best to provide a historical and conceptual clarity on various aspects of Indian villages. The authors have discussed about the types and characteristics of Indian villages with focus on theoretical concepts like—Sanskritisation, Westernisation, Globalisation, Tribe-Caste-Continum. Focus has also been made on the practice of Jajmani System within the Indian villages. Above all the well-defined and chronological sequence of Indian village studies has been explained in this book.
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