Bharatiya Shiksha
Author:
Rajendra PrasadPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
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Price: ₹ 556
₹
695
Available
‘भारतीय शिक्षा’ डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के शिक्षा-सम्बन्धी भाषणों का संकलन है। समय-समय पर दिये गए इन भाषणों का अपना अलग महत्त्व है लेकिन इस पुस्तक में एक साथ उनकी प्रस्तुति से जानने में मदद मिलती है कि एक राष्ट्रनिर्माता के रूप में राजेन्द्र बाबू, देश की शिक्षा-व्यवस्था को किस रूप में देखने के आकांक्षी थे और शिक्षा मात्र के बारे में उनके विचार और अनुभव क्या थे। मसलन, भारत को अपने लिए कैसी शिक्षा-व्यवस्था बनानी चाहिए, शिक्षा का माध्यम क्या होना चाहिए, नारी शिक्षा कैसी होनी चाहिए और वह क्यों आवश्यक है, शिक्षा में विज्ञान का क्या महत्त्व है आदि-आदि। यही नहीं, वे विद्यार्थियों के अधिकारों और कर्तव्यों का तथा विद्यार्थी और राजनीति के पारस्परिक रिश्ते का जिक्र भी करते हैं।
कहना न होगा कि देश के प्रथम राष्ट्रपति की लेखनी से निकले ये शब्द किसी भी सुधी पाठक को प्रेरित करने वाले है।
ISBN: 9788119996872
Pages: 151
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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सन् 1932 में भगवती बाबू ने पाप और पुण्य की समस्या पर अपना प्रसिद्ध उपन्यास ‘चित्रलेखा’ लिखा जो हिन्दी साहित्य में एक क्लासिक के रूप में आज भी प्रख्यात है। ‘तीन वर्ष’ उनका प्रथम सामाजिक उपन्यास है जो एक प्रेमकथा है। सन् 1948 में उनका प्रथम वृहत उपन्यास ‘टेढे़-मेढ़े रास्ते’ आया जिसे हिन्दी साहित्य के प्रथम राजनीतिक उपन्यास का दर्जा मिला। इसी शृंखला में उन्होंने आगे चलकर वृहत राजनीतिक उपन्यासों की एक शृंखला लिखी जिनमें ‘भूले-बिसरे चित्र’, ‘सीधी-सच्ची बातें’, ‘प्रश्न और मरीचिका’, ‘सबहिं नचावत राम गोसाईं’ और ‘सामर्थ्य और सीमा’ प्रमुख हैं।
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