Sanskriti Se Nikalati Rahen
(0)
Author:
Ramnaresh KushwahaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction₹
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हमारा देश अनेक धर्मों एवं जातियों में विभक्त है और सैकड़ों पंथ अपने-अपने दृष्टिकोण से समाज को सुदृढ़ बनाने में प्रयासरत हैं। पर आज भी हमारा समाज अनेक कुरीतियों से ग्रस्त है और आएदिन मनुष्य लालचवश तंत्र-मंत्र एवं तांत्रिकों के चक्कर में फँसकर धन-हानि क्या, प्राण-हानि तक कर डालता है। बाह्य सुख-सुविधाएँ अधिक-से-अधिक प्राप्त करने की जैसे होड़ लगी हुई है। इन सबके बीच व्यक्ति अपने आपको, अपनी अंतश्चेतना को बिलकुल भुला बैठा है। वह एक यांत्रिक प्राणी बनकर केवल भौतिक साधनों की अंधी दौड़ में दौड़ लगा रहा है। संस्कृति से निकलती राहेंहमारे प्राचीन वाङ्मय और धर्म-दर्शन से नि:सृत ज्ञान की अजस्र धारा में हमारा प्रवेश कराती है। यह हमारे मनीषियों, संत-महात्माओं और महापुरुषों के वचनों में उच्चारित हमारी गौरवपूर्ण संस्कृति से हमारा परिचय कराती हुई आत्मिक चेतना, जीवन-मूल्य और सामाजिक-सांस्कृतिक सरोकारों का मार्ग प्रशस्त करती है। भारतीय धर्म-दर्शन-संस्कृति की गौरवशाली परंपरा के आधार पर जीवन का सन्मार्ग प्रशस्त करनेवाली रोचक व ज्ञानवर्धक पुस्तक।
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हमारा देश अनेक धर्मों एवं जातियों में विभक्त है और सैकड़ों पंथ अपने-अपने दृष्टिकोण से समाज को सुदृढ़ बनाने में प्रयासरत हैं। पर आज भी हमारा समाज अनेक कुरीतियों से ग्रस्त है और आएदिन मनुष्य लालचवश तंत्र-मंत्र एवं तांत्रिकों के चक्कर में फँसकर धन-हानि क्या, प्राण-हानि तक कर डालता है। बाह्य सुख-सुविधाएँ अधिक-से-अधिक प्राप्त करने की जैसे होड़ लगी हुई है। इन सबके बीच व्यक्ति अपने आपको, अपनी अंतश्चेतना को बिलकुल भुला बैठा है। वह एक यांत्रिक प्राणी बनकर केवल भौतिक साधनों की अंधी दौड़ में दौड़ लगा रहा है।
संस्कृति से निकलती राहेंहमारे प्राचीन वाङ्मय और धर्म-दर्शन से नि:सृत ज्ञान की अजस्र धारा में हमारा प्रवेश कराती है। यह हमारे मनीषियों, संत-महात्माओं और महापुरुषों के वचनों में उच्चारित हमारी गौरवपूर्ण संस्कृति से हमारा परिचय कराती हुई आत्मिक चेतना, जीवन-मूल्य और सामाजिक-सांस्कृतिक सरोकारों का मार्ग प्रशस्त करती है।
भारतीय धर्म-दर्शन-संस्कृति की गौरवशाली परंपरा के आधार पर जीवन का सन्मार्ग प्रशस्त करनेवाली रोचक व ज्ञानवर्धक पुस्तक।
Book Details
-
ISBN9789380183220
-
Pages120
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: कोकण म्हणजे कर्तृत्ववान रत्नांची खाण आहे, असं म्हटलं तर ते वावगं ठरू नये. याचं कारण भारताचा सर्वोच्च सन्मान असलेला भारतरत्न हा किताब देऊन या भूमितल्या सहा व्यक्तींचा आजवर गौरव करण्यात आलेला आहे. शिवाय कर्तृत्वाचा असा उत्तुंग डोंगर उभारणाऱ्या व्यक्तींची संख्या इतर प्रदेशांच्या तुलनेत कोकणभूमीत सर्वाधिक आहे. त्या अर्थाने कोकणसारखा कर्तृत्वसुपीक प्रदेश केवळ महाराष्ट्रातच नव्हे, तर भारतात दुसरा नाही. अशा या भूमितल्या काही मोजक्या कोकणरत्नांची त्यांच्या कार्यकर्तृत्वासह ओळख करून देणारं हे पुस्तक म्हणजे भारताच्या सामाजिक, राजकीय, शैक्षणिक आणि सांस्कृतिक इतिहासाची एक झलक आहे. आचार्य बाळशास्त्री जांभेकर, प्राच्यविद्यापंडित रामकृष्ण गोपाळ भांडारकर, लोकमान्य बाळ गंगाधर टिळक, महर्षी धोंडो केशव कर्वे, रियासतकार गोविंद सखाराम सरदेसाई, नामदार गोपाळ कृष्ण गोखले, महामहोपाध्याय पांडुरंग वामन काणे, डॉ. भीमराव रामजी तथा बाबासाहेब आंबेडकर, संगीतकार वसंत देसाई आणि बॅरिस्टर नाथ पै अशा दहा कोकणरत्नांच्या प्रेरक कार्याचा वेध घेणारं हे पुस्तक प्रत्येकाने वाचावं असं आहे. भारताच्या इतिहासात घेऊन जाणारं हे पुस्तक नव्या पिढीसाठी दिशादर्शक असं आहे. त्यामुळे शाळा-महाविद्यालयातील विद्यार्थी, शिक्षक, पालक तसेच सामाजिक इतिहासाचे अभ्यासक, कोकणात जन्मलेल्या, कोकणचा अभिमान असलेल्या आणि कोकणच्या सुपुत्रांबद्दल कुतूहल असलेल्या प्रत्येकाने संग्रही ठेवावं असं हे पुस्तक आहे. कोकणरत्ने | डॉ.नीलम प्र. नाईक | डॉ.प्रमोद वा. नाईक Kokanratne | Dr. Neelam P. Naik | Dr. Pramod V. Naik
kothigalu
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Vasudhendra
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- Description: ವಸುಧೇಂದ್ರರ ಆರಂಭದ ಸುಲಲಿತ ಪ್ರಬಂಧಗಳ ಗುಚ್ಛ.
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