Reporting India (Hindi Translation of Reporting India)
Author:
Prem PrakashPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction0 Ratings
Price: ₹ 400
₹
500
Unavailable
रिपोर्टिंग इंडिया' भारतीय पत्रकारिता जगत् में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानेवाले, प्रेम प्रकाश के जीवन और समय का एक रोचक वर्णन है। एक फोटोग्राफर, फिल्म कैमरामैन और स्तंभकार के रूप में प्रकाश ने अपने लंबे और शानदार कैरियर के दौरान देश-विदेश की प्रमुख घटनाओं को कवर किया और इस दौरान प्राकृतिक आपदाओं, युद्धों, सैन्य तख्तापलट और उग्रवाद के गवाह भी बने।
यह पुस्तक प्रकाश के बेमिसाल काम की सराहना करती है, जिसमें उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन की विस्तृत जानकारी दी गई है। साथ ही उनकी ओर से कवर की गई सबसे प्रभावशाली खबरों की यादें भी ताजा करती है, जिनमें 1962 के भारत-चीन युद्ध से लेकर पाकिस्तान के खिलाफ 1965 और 1971 के युद्ध और आपातकाल से लेकर इंदिरा गांधी की हत्या तक शामिल हैं । साथ ही, लाल बहादुर शास्त्री की दुर्भाग्यपूर्ण ताशकंद यात्रा से लेकर बॉग्लादेश की मुक्ति और जवाहरलाल नेहरू के निधन से लेकर नरेंद्र मोदी के उत्थान तक की खबरें शामिल हैं।
पढ़ने में बेहद दिलचस्प यह पुस्तक भारतीय इतिहास के कुछ निर्णायक क्षणों को जीवंत बना देती है।
ISBN: 9789394534568
Pages: 248
Avg Reading Time: 8 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Nanda Khare +1
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- Description: उत्क्रांतीचा सिद्धान्त ही मानवी इतिहासातील सर्वांत महत्त्वपूर्ण संकल्पना आहे. जीवनाच्या जवळपास प्रत्येक क्षेत्रात मूलभूत परिवर्तन घडवून आणणारा हा सिद्धान्त डार्विनने मांडला, त्याला आता दीडशे वर्षे झाली आहेत. आजच्या गतिमान जगात ह्या सिद्धान्ताचं स्थान काय? आज तो कालबाह्य ठरला आहे का? त्याची पुनर्मांडणी करायला हवी का? माणसाच्या विकासात अधिक महत्त्वाचे काय, नैसर्गिक प्रकृती, की पालनपोषण? मार्क्सवाद आणि स्त्रीवाद या विसाव्या शतकातल्या महत्त्वाच्या विचारप्रणालींवर या सिद्धान्ताने काय प्रभाव पाडला? भारतीय विचारपरंपरेवर डार्विनचा काही परिणाम झाला का? जातिव्यवस्था आणि शेतीवरील अरिष्ट या भारताच्या दृष्टीनं कळीच्या मुद्यांबाबत हा सिद्धान्त काय सांगतो? रंगभेद आणि जातिभेद यांचं तो समर्थन करतो का? वैज्ञानिक शेती ही उत्क्रांतीविरोधी आणि पर्यायानं निसर्गविरोधी आहे का? गेल्या वीस-पंचवीस वर्षांत उदयाला आलेल्या मेंदूजैवविज्ञानाच्या अनेक अंगांना हा सिद्धान्त कसा काय लागू पडू शकतो ? अशा अनेक प्रश्नांची उत्तरं शोधणारा ग्रंथ. महाराष्ट्रातल्या नव्या पिढीतल्या बारा विद्वान आणि व्यासंगी लेखकांनी सिद्ध केलेला. - सुबोध जावडेकर Darvin Aani Jivsrushtiche Rahasya : Nanda Khare,Ravindra Rukmini Pandharinath डार्विन आणि जीवसृष्टीचे रहस्य : संपादक : रवीन्द्र रुक्मिणी पंढरीनाथ । नंदा खरे
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