Makan # 706
(0)
Author:
Renu ‘Rajvanshi’ GuptaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction₹
300
240 (20% off)
Available
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मकान # 706 ' आपकी-हमारी, सबको अपनी कहानी है। प्रत्येक उन माता-पिता की कहानी है, जिनकी संतान N.R.I. हैं। N.R.I. का अर्थ Non resident Indian -अर्थात् वो बच्चे जो विदेश में रहते हैं एवं माता-पिता भारत में रहते हैं । परंतु यदि माता-पिता दिल्ली में रहते हों एवं उनकी संतान चेन्नई या कोलकाता में रहती है उन्हें क्या कहेंगे ? चाहे संतान N.R.I.. हो या माता-पिता N.R.I. हों""' संतान के माता-पिता के प्रति नैसर्गिक कर्तव्यों को कोई नकार नहीं सकता है। “मकान # 706 ' में मातृ-ऋण एवं पितृ-ऋण से उऋण होने के अनेक साधन सुझाए हैं । माता-पिता और संतति के संबंधों की अत्यंत मर्मस्पर्शी एवं भावुक कर देनेवाली पठनीय सामाजिक कृति है|
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मकान # 706 ' आपकी-हमारी, सबको अपनी कहानी है। प्रत्येक उन माता-पिता की कहानी है, जिनकी संतान N.R.I. हैं। N.R.I. का अर्थ Non resident Indian -अर्थात् वो बच्चे जो विदेश में रहते हैं एवं माता-पिता भारत में रहते हैं । परंतु यदि माता-पिता दिल्ली में रहते हों एवं उनकी संतान चेन्नई या कोलकाता में रहती है उन्हें क्या कहेंगे ?
चाहे संतान N.R.I.. हो या माता-पिता N.R.I. हों""'
संतान के माता-पिता के प्रति नैसर्गिक कर्तव्यों को कोई नकार नहीं सकता है। “मकान # 706 ' में मातृ-ऋण एवं पितृ-ऋण से उऋण होने के अनेक साधन सुझाए हैं । माता-पिता और संतति के संबंधों की अत्यंत मर्मस्पर्शी एवं भावुक कर देनेवाली पठनीय सामाजिक कृति है|
Book Details
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ISBN9789393111432
-
Pages144
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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‘तत्त्वदर्शी निशंक’ दक्षिण की ओर से हिमालय-पुत्र श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की साहित्य-साधना का अभूतपूर्व संपूर्ण भावाभिनंदन है। इस ग्रंथ में आज चर्चित राजनेता के रूप में प्रतिष्ठित केंद्रीय शिक्षा मंत्री निशंकजी की साहित्य-साधना का दक्षिण भारत की हिंदी-सेवी प्रतिभाओं द्वारा पहली बार समग्र मूल्यांकन किया गया है। बहुआयामी साहित्य-साधक निशंकजी के संपूर्ण रचना-कर्म का कुल छह खंडों में विन्यस्त यह गहन मूल्यांकन अपने आप में एक विलक्षण कार्य है। आपदा को अवसर में बदलने का संकल्प इस कृति के नायक निशंकजी को ‘तत्त्वदर्शी निशंक’ बनाता है। मनोबल को तोड़ने पर आमादा समेकित दुःखों से विचलित न होते हुए उन्हें ही तोड़नेवाला संघर्षी मन निशंकजी के साहित्यिक व्यक्तित्व का केंद्रबिंदु है। दुःखों को झेल जानेवाला यह मन उन्हें व्यक्तिगत दुःखों से आगे निकलने और समष्टिगत दुःखों को महसूसने की वह शक्ति प्रदान करता है, जिसके बल पर ही कोई व्यक्ति साहित्यकार बनता है। आत्म का यह विस्तार संवेदनशीलता को सृजनात्मकता के पंख देता है। इस ग्रंथ में उनकी इसी संवेदना और सर्जना का संधान किया गया है। कुल मिलाकर, सार्वजनिक जीवन, समाज सेवा और राजनीति में सक्रिय रहते हुए निरंतर और अबाध साहित्य-सृजन के माध्यम से राष्ट्रभाषा हिंदी को समृद्ध करनेवाले विद्या-व्यसनी रचनाकार निशंकजी के साहित्यिक प्रदेय को समझने के लिए एक अनिवार्य और परिपूर्ण ग्रंथ।
Charles Darwin
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Vinod Kumar Mishra
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Stri Vimarsh Ki Jameen
- Author Name:
Shriprakash Mishra
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स्त्री-विमर्श यूरोप के लिए चाहे जितना पुराना हो, अध्ययन के स्तर पर भारत के लिए अभी नया क्षेत्र है। इसने पिछली सदी के अन्तिम दो दशकों में जोर पकड़ा है। इस विषय पर जहाँ अंग्रेजी में अच्छी पुस्तकों की भरमार है, हिन्दी में प्रचुर सामग्री उपलब्ध होने के बावजूद एक व्यवस्थित रूप से लिखी पुस्तक शायद ही मिलती हो। उम्मीद है इस कमी को यह पुस्तक 'स्त्री-विमर्श की ज़मीन' पूरी करेगी। पुस्तक का प्रत्येक अध्याय इसका प्रमाण है। वहाँ पश्चिम में हुए चिन्तन और आन्दोलन के साथ-साथ भारत में हुए चिन्तन, अध्ययन और प्रयास का खुलासा है। इस पुस्तक का पाठक-समाज में भरपूर स्वागत होगा, ऐसी उम्मीद है।
Aadivasi : Shaurya Evam Vidroh
- Author Name:
Ramanika Gupta
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सर्वप्रथम हमें पूर्वोत्तर के इतिहास में जाना ज़रूरी है, जिससे यह पता चलता है कि वे अंग्रेज़ों, ज़ुल्मी राजाओं या किसी भी अन्याय के ख़िलाफ़ लड़े। इस पुस्तक में हमने अलग-अलग भाषा व राज्यों के वीर नायकों व नायिकाओं की कथाओं के अतिरिक्त पूर्वोत्तर के भिन्न राज्यों में हुए विद्रोहों, प्रतिरोधात्मक आन्दोलनों पर शोधपरक गाथाएँ व सामग्री प्रस्तुत की है। ये सभी गाथाएँ—लिजिन्द्रियाँ, लोककथाएँ या लोकगीत व टिप्पणियाँ पूर्वोत्तर के ही लेखकों द्वारा लिखी गई हैं। हमने इनका चयन कर हिन्दी में अनूदित कर प्रस्तुत किया है। इनके चयन और सम्पादन में काफ़ी समय लगा। चूँकि अनूदित सामग्री की भाषा को परिष्कृत भी करना पड़ा। हमने हिन्दी में कुछ गाथाएँ पूर्वोत्तर में उपलब्ध भिन्न ग्रन्थों व दस्तावेज़ों में दर्ज टिप्पणियों के आधार पर तैयार करके भी प्रस्तुत की गई हैं। एक ही नायक पर भिन्न-भिन्न लेखकों ने अपने-अपने क्षेत्र में उपलब्ध सामग्री (लोकगीत, किंवदंतियों, लोककथाएँ, ऐतिहासिक दस्तावेज आदि) से लेकर अपने-अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत की है। हमने सभी को सम्मानित करने का प्रयास किया है, ताकि पूर्वोत्तर में घटित इस इतिहास को गहराई तक समझा और जाना जा सके और शेष भारत उनसे अपना दर्द का रिश्ता जोड़ कर संवाद क़ायम करे। —‘सम्पादकीय’ से
Prithvi Manthan : Vaishvik Bharat Banane Ki Kahani
- Author Name:
Aseem Shrivastava
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यह एक बेहतरीन किताब है...कक्षा में मैं इसका प्रयोग किसी और पुस्तक से ज़्यादा करता हूँ। —पी. साईनाथ; पत्रकार व लेखक प्रचार-हमला को चीरती हुई यह किताब बताती है कि आज क्या हो रहा है। —अमिताव घोष; लेखक यह आज के विरोधी-धाराओं का एक महत्त्वपूर्ण वृत्तान्त है...इस पक्ष को सुनना और समझना ज़रूरी है। —अरुणा रॉय; समाजकर्मी वैश्वीकरण के विशाल पुस्तक-संग्रह में यह किताब बौद्धिक साहस और ईमान का एक कीर्तिमान है जो बेहतर दुनिया के लिए रास्ता दिखाती है। —अमित भादुड़ी; अर्थशास्त्री आज अगर गाँधी जी ज़िन्दा होते और 'हिन्द स्वराज' की रचना करते, तो उन्हें लगभग उन्हीं सवालों से जूझना पड़ता जो इस किताब में हैं। —गणेश देवी; लेखक और भाषाविद् यह किताब दर्शाती है कि इस वैश्विक युग में हमारी तथाकथित स्वेच्छा वस्तुत: कितनी पराधीन है...आज की दुनिया से चिन्तित किसी भी इनसान के लिए यह पुस्तक अनिवार्य है। —मल्लिका साराभाई; नृत्यांगना और संस्कृतिकर्मी आज के वैश्विक युग की तमाम तब्दीलियों के परिप्रेक्ष्य में यह पुस्तक एक महत्त्वपूर्ण संश्लेषण है...साथ ही इस किताब में एक वैकल्पिक दुनिया की कल्पना की गई है जिस पर गम्भीरता से सोचने और बहस करने की ज़रूरत है। —माधव गाडगिल; पर्यावरणशास्त्री यह एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण और असरदार किताब है...लेखक जो व्यापक प्रमाण पेश करता है उसका हमें सामना करना होगा। —हर्ष मंदर; समाजकर्मी
Prithvi Manthan : Vaishvik Bharat Banane Ki Kahani
Aseem Shrivastava
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