Ekta-Akhandata Ki Kahaniyan
(0)
Author:
Acharya Mayaram 'Patang'Publisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction₹
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"‘एकता-अखंडता’ की कहानियाँ आपके समक्ष प्रस्तुत हैं। टी.वी. चैनलों के हास्य और मनोरंजन के कार्यक्रम, जो कुछ जनता के समक्ष परोस रहे हैं, उसके परिणामस्वरूप समाज का युवा वर्ग दिशाहीन होता जा रहा है। चोरी, डकैती और छेड़छाड़ की घटनाएँ निरंतर बढ़ती जा रही हैं। एक-दो नहीं, अनेक रेप कांड सभ्य नागरिकों, देशभक्तों के लिए घोर चिंता का विषय हैं। आम लोग न समाचार सुनते हैं, न सत्साहित्य पढ़ते हैं। प्रायः घरों में सीरियल ही देखते हैं। चरित्र-निर्माण तथा राष्ट्रभक्ति सिखाने की कोई व्यवस्था दिखाई नहीं देती। छोटी-छोटी बातों पर युवक गोली चला देते हैं। चाकूबाजी की घटनाएँ तो सामान्य हैं। राजनीति के खिलाड़ी सामान्य घटनाओं को राजनीतिक रंग देकर सांप्रदायिक झगड़े खड़े कर देते हैं। कोई जातीय रंग देते हैं, उच्च वर्ग और दलित वर्ग का संघर्ष खड़ा कर देते हैं, कारण वही है कि राष्ट्रीयता की भावना का पोषण करनेवाला साहित्य भी सीमित ही उपलब्ध है। हर समुदाय अपने जातीय हित के लिए आंदोलन के लिए तैयार है। कहीं जाट अपनी जाति को आरक्षण दिलवाने के लिए कटिबद्ध हैं तो कहीं पटेल विद्रोह पर उतर आए हैं। उनके सामने न सरकार और न्यायालय की विवशता है, न राष्ट्र की साख का प्रश्न है। युवाओं को देश की एकता-अखंडता की प्रेरणा देने का यह एक प्रयास है। आशा है, युवा वर्ग इन नई-पुरानी कहानियों से कुछ सीखेगा। "
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"‘एकता-अखंडता’ की कहानियाँ आपके समक्ष प्रस्तुत हैं। टी.वी. चैनलों के हास्य और मनोरंजन के कार्यक्रम, जो कुछ जनता के समक्ष परोस रहे हैं, उसके परिणामस्वरूप समाज का युवा वर्ग दिशाहीन होता जा रहा है। चोरी, डकैती और छेड़छाड़ की घटनाएँ निरंतर बढ़ती जा रही हैं। एक-दो नहीं, अनेक रेप कांड सभ्य नागरिकों, देशभक्तों के लिए घोर चिंता का विषय हैं। आम लोग न समाचार सुनते हैं, न सत्साहित्य पढ़ते हैं। प्रायः घरों में सीरियल ही देखते हैं। चरित्र-निर्माण तथा राष्ट्रभक्ति सिखाने की कोई व्यवस्था दिखाई नहीं देती।
छोटी-छोटी बातों पर युवक गोली चला देते हैं। चाकूबाजी की घटनाएँ तो सामान्य हैं। राजनीति के खिलाड़ी सामान्य घटनाओं को राजनीतिक रंग देकर सांप्रदायिक झगड़े खड़े कर देते हैं। कोई जातीय रंग देते हैं, उच्च वर्ग और दलित वर्ग का संघर्ष खड़ा कर देते हैं, कारण वही है कि राष्ट्रीयता की भावना का पोषण करनेवाला साहित्य भी सीमित ही उपलब्ध है। हर समुदाय अपने जातीय हित के लिए आंदोलन के लिए तैयार है। कहीं जाट अपनी जाति को आरक्षण दिलवाने के लिए कटिबद्ध हैं तो कहीं पटेल विद्रोह पर उतर आए हैं। उनके सामने न सरकार और न्यायालय की विवशता है, न राष्ट्र की साख का प्रश्न है। युवाओं को देश की एकता-अखंडता की प्रेरणा देने का यह एक प्रयास है।
आशा है, युवा वर्ग इन नई-पुरानी कहानियों से कुछ सीखेगा।
"
Book Details
-
ISBN9789384343712
-
Pages152
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जिस 'न्यू इंडिया' की कल्पना की है, उसकी आधारशिला के रूप में भारत को एक ऐसी शिक्षा नीति की आवश्यकता थी, जो तेजी से बदलते समाज और गतिशील दुनिया की चुनौतियों को अवसरों में बदल सके और खुशहाल भारत का निर्माण कर सके। गहन अध्ययन-मनन और चिंतन के उपरांत तैयार की गई नई शिक्षा नीति-2020 पूर्णतया भारत-केंद्रित होने के साथ गुणवत्तापरक, नवाचारयुक्त, व्यावहारिक, प्रौद्योगिकीयुक्त, अंतरराष्ट्रीय, वैज्ञानिक और कौशलयुक्त है । कुल मिलाकर नई शिक्षा नीति NEP-2020 130 करोड़ से अधिक भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। नई शिक्षा नीति-2020 ने भारतीय परंपरागत ज्ञान, संस्कृति, भाषाओं, परंपराओं और मानवीय मूल्यों के विकास पर विशेष जोर दिया है और इस नीति में स्पष्ट है कि शिक्षा केवल शिक्षकों और पुस्तकों से प्राप्त ज्ञान एवं जानकारी के बारे में नहीं है। यह उन मूल्यों, क्षमताओं और व्यवहार को विकसित करने के बारे में है, जो एक स्थिर समाज बनाने के लिए शांति, न्याय और समावेशिता के गुण विकसित करते हैं। निश्चित रूप से भारत को शिक्षा के आकर्षक केंद्र के रूप में स्थापित कर नई शिक्षा नीति भारत के विश्वगुरु बनने का मार्ग प्रशस्त करेगी।
Gandhi Ke Desh Mein
- Author Name:
Sudhir Chandra
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Description:
विवेक, सन्मति और सदाशयता के धनी चिन्तक, विख्यात इतिहासकार सुधीर चन्द्र की निबन्ध पुस्तक।
‘‘सत्य, अहिंसा, प्रेम, अस्तेयादि एक झटके में और कायमी तौर पर लोगों की ज़िन्दगी में परिवर्तन ला देनेवाले गुण नहीं हैं। ख़ुद गांधी सारी ज़िन्दगी अपने को गांधी बनाने में लगे रहे थे। पर गांधी के नाम पर सब कुछ निछावर करनेवालों ने क़ुर्बानियाँ जो भी की हों, उन लोगों ने अपने को वैसा बनाने की कोशिश नहीं की जैसा बनकर ही गांधी का स्वराज हासिल हो सकता था।’’
‘‘गांधी की हमारी समझ गम्भीर रूप से अपूर्ण रहेगी जब तक हम अहिंसा के परिप्रेक्ष्य में उस हिंसा के स्वरूप और परिस्थितियों को समझने की शुरुआत नहीं करते, जिसे नैतिक हिंसा कहा जा सके।’’
‘‘समलैंगिकता को अप्राकृतिक या अस्वाभाविक मान लेने का आधार क्या है? इसी से जुड़ा एक बुनियादी सवाल भी उठता है : क्या किसी कर्म का अप्राकृतिक होना काफ़ी है उसे दंडनीय अपराध बनाए जाने के लिए? किसी कर्म का प्राकृतिक या अप्राकृतिक होना—जिस हद तक इस तरह का निर्धारण सम्भव है—उसे अपराध की श्रेणी में न तो लाता है और न ही उससे बाहर रखता है। हिंसा और वासना से जुड़े तमाम अपराधों को प्राकृतिक कृत्यों के रूप में देखा जा सकता है। दूसरी तरफ़ सभ्यता और संस्कृति का विकास उत्तरोत्तर हमें प्रकृति से दूर लाता आया है।’’
‘‘जो मैं नहीं समझ पाता वह है बहुत सारे लोगों का विश्वास, देरीदा की मिसाल देते हुए कि, ‘डीकंस्ट्रक्शन’ और परिणामस्वरूप उत्तर-आधुनिकतावाद ‘एमॉरल’—नैतिक-अनैतिक से परे—है। देरीदा को, न कि देरीदा के बारे में, थोड़ा ही सही, पढ़े बगै़र कुछ प्रचलित भ्रान्तियों को मान लेना बौद्धिक आलस है।’’
देश के गतिशील समकालीन यथार्थ को समझने के लिए एक ज़रूरी पाठ।
Toofano Ke Beech
- Author Name:
Rangeya Raghav
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- Description: ‘तूफानों के बीच’ रांगेय राघव का मार्मिक रिपोर्ताज है। अपनी विशिष्ट वर्णन शैली और व्यापक मानवीय सरोकारों के चलते यह रचना अत्यन्त हृदयग्राही सिद्ध हुई है। रांगेय राघव ने पुस्तक की भूमिका में लिखा है, ‘बंगाल का अकाल मानवता के इतिहास का बहुत बड़ा कलंक है। शायद क्लियोपेट्रा भी धन के वैभव और साम्राज्य की लिप्सा में अपने ग़ुलामों को इतना भीषण दुख नहीं दे सकीं, जितना आज एक साम्राज्य और अपने ही देश के पूँजीवाद ने बंगाल के करोड़ों आदमी, औरतों और बच्चों को भूखा मारकर दिया है। आगरे के सैकड़ों मनुष्यों ने दान नहीं, अपना कर्तव्य समझकर एक मेडिकल जत्था बंगाल भेजा था। जनता के इन प्रतिनिधियों को बंगाल की जनता ने ही नहीं, वरन् मंत्रिमंडल के सदस्यों तक ने धन्यवाद दिया था। किन्तु मैं जनता से स्फूर्ति पाकर यह सब लिख सका हूँ। मैंने यह सब आँखों-देखा लिखा है।’ एक पठनीय और संग्रहणीय पुस्तक।
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