MAHARSHI VITHTHAL RAMJI SHINDE : JIVAN VA KARYA
Author:
G. M. PawarPublisher:
Manovikas Prakashan LLPLanguage:
MarathiCategory:
General-non-fiction0 Ratings
Price: ₹ 1200
₹
1500
Available
“स्वार्थावर लाथ मारून गळ्यात झोळी अडकवून संस्थेकरता - अर्थात आमच्या
लोकांकरिता - संस्थेचे जे चालक भिक्षांदेही करीत दारोदार फिरतात व त्यांना त्यात
कितीही अल्प यश आले तरी ते पर्वा न करता चंदनासारखे स्वत: झिजू दुसर्यांना-
आम्हांला - सुख देण्याकरिता, आमची स्थिती सुधारण्याकरिता आपला प्रयत्न चालू
ठेवतात, त्या संतांची किंमत आजपर्यंत झालेल्या कोणत्याही संतापेक्षा आम्हांला यत्किं
चितही कमी वाटत नाही. कित्येकांना ती जास्त वाटेल.’’
श्री. गणेश आकाजी गवई
डी. सी. मिशनच्या महाराष्ट्र परिषदेत केलेले भाषण, पुणे, 1912
“इतिहास असे सांगतो की, ज्यापासून राष्ट्राचा विकास होतो, अशा सर्व प्रकारच्या
चळवळींचा उगम थोड्याशा व्यक्तींच्या कार्यात सापडतो. प्रस्तुतच्या बाबतीत त्या
व्यक्ती म्हणजे, ज्यांची प्रथम प्रथम हेटाळणी झाली ते डिप्रेस्ड क्लासेस मिशनचे
गृहस्थ होत. त्यांच्या कार्याने प्रचंड अशा हिंदू समाजाची सदसद्विवेकबुद्धी जागृत
झाली.’’
न्यायमूर्ती सर नारायणराव चंदावरकर
डी. सी. मिशनची अस्पृश्यतानिवारक परिषद , मुंबई, 1918
“मराठ्यांतील कार्यशक्ती काय करू शकते, असा जर कोणी आपल्याला प्रश्न
विचारला, तर अण्णासाहेब शिंद्यांच्या कार्याकडे बोट करा. मराठ्यांतील
स्वार्थत्यागाचे उदाहरण दाखविण्याचा प्रसंग आला, तर आपण अण्णासाहेब शिंद्यांचे
नाव घ्या. परकीय सत्तेचा विध्वंस शिवाजीमहाराजांनी केला; वर्णवर्चस्वाचा विध्वंस
शाहूमहाराजांनी केला व अस्पृश्यतेच्या विध्वंसनाचे कार्य करण्याकरिता तितक्याच
धडाडीने अण्णासाहेबांनी आपले आयुष्य वेचले.’’
श्री. बाबुराव जेधे
मुंबई इलाखा शेतकरी परिषद, पुणे, 1928
“शिंद्यांचा जिला भरीव हातभार लागला नाही, अशी लोकसेवेची व समाजोन्नतीची
चळवळ दाखवून देणे कठीण आहे. राजकारण, समाजकारण, धर्मकार्य, शिक्षणकार्य;
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प्रश्न सुटणे दुरापास्त होते, अशा त्या घनदाट धर्मवेडाच्या काळात अस्पृश्योद्धाराची
चळवळ सुरू करणे, त्यासाठी डिप्रेस्ड क्लासेस मिशन ही संस्था काढणे; इतकेच नव्हे,
तर अस्पृश्यांत जाऊन त्यांच्यापैकी एक झाल्याप्रमाणे त्यांच्यात वागणे, या गोष्टींसाठी
अतुल स्वमतधैर्याची; एवढेच नव्हे, तर मूलमार्गी बुद्धीची व समाजाविषयी खर्या
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सबंध देशाइतकी विशाल विस्तृत असावी लागते. म्हणूनच श्री. शिंदे सामाजिक
चळवळींप्रमाणेच अनेक राजकीय चळवळींतही भाग घेताना दिसत.’’ न्यायमूर्ती
भवानीशंकर नियोगी
महाराष्ट्र साहित्य संमेलन
नागपूर, 1933
Maharshi Vitthal Ramaji Shinde : Jeevan Va Karya / G. M. Pawar
महर्षी विठ्ठल रामजी शिंदे : जीवन व कार्य । गो. मा. पवार
ISBN: 9789387667945
Pages: 574
Avg Reading Time: 19 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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