Tanashahi Se Lokshahi
Author:
Gene SharpPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
‘फ़्रॉम डिक्टेटरशिप टू डेमोक्रेसी’ को मूल रूप से 1993 में अहिंसक संघर्ष के मार्गदर्शन के लिए लिखा गया था। चोरी-चोरी, चुपके-चुपके यह पुस्तक दुनिया-भर के तमाम राजनीतिक असन्तुष्टों के हाथों में पहुँच गई। बाद में इसका तीस से अधिक भाषाओं में अनुवाद किया गया। यह छोटी-सी पुस्तिका इक्कीसवीं सदी के अहिंसावादी क्रान्तिकारियों के लिए ‘कैसे-करें’ की पथप्रदर्शक बन गई है। अहिंसक विरोध प्रदर्शन और रक्तहीन क्रान्ति के सुझाव और व्यावहारिक नियम बतानेवाली यह किताब क्रान्ति या बदलाव के झूठे सपने या कोई अकल्पनीय रास्ते नहीं बताती बल्कि लोगों को परिवर्तन के वास्तविक पहलू से परिचय कराती है।
ISBN: 9789389598711
Pages: 176
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Cyanide : Rajeev Hatyakand Ki kahani
- Author Name:
Praveen Kumar Jha
- Book Type:

- Description: मद्रास के निकट श्रीपेरम्बुदूर में एक बम विस्फोट द्वारा राजीव गांधी की हत्या एक रहस्यमय घटना है, जिसके कई तार अब तक सुलझे नहीं हैं। इस हत्याकांड की जाँच जहाँ एक मॉडल की तरह देखा गया, वहीं यह पूरा घटनाक्रम किसी थ्रिलर फ़िल्म की पटकथा की तरह है। भारत की ज़मीन से बाहर हो रहे षडयंत्र की तह तक पहुँचना और देश-विदेश के राजनीतिक मकड़जाल से बचते हुए कदम रखना आसान न था। लेखक प्रवीण कुमार झा ने अपनी क़िस्सागोई अंदाज़ में इस घटनाक्रम को संवादों और दृश्यों में पिरो दिया है। यह कोई नयी अकादमिक पड़ताल या रिपोर्ताज नहीं, बल्कि उपलब्ध दस्तावेज़ों पर आधारित एक रोमांचक कथा है।
Vishwa Patal Par Hindi
- Author Name:
Dr. Surya Prasad Dixit
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी भारत की एक राष्ट्रीय भाषा है, संघ की राजभाषा है और एक विश्वभाषा भी है। समस्त संसार में वह आज करोड़ों लोगों द्वारा समझी जाती है। उसकी व्याप्ति लगभग डेढ़ सौ देशों में है। वह लगभग एक दर्जन देशों में जनभाषा के रूप में प्रचलित है। इन देशों को तीन कोटियों में विभाजित करना तर्कसंगत होगा—(1) भारत के पड़ोसी राष्ट्र, (2) भारतवंशी राष्ट्र, (3) आप्रवासी-बहुल राष्ट्र।
‘विश्व पटल पर हिन्दी’ का दूसरा महत्त्वपूर्ण पक्ष है, विश्वबोध। हिन्दी का सम्बन्ध संस्कृत, पालि और भारतीय भाषाओं के अतिरिक्त अरबी, फ़ारसी, पस्तो, तुर्की, अंग्रेज़ी, फ़्रेंच, स्पेनिश, डच, पुर्तगाली, इटैलिक आदि कई भाषाओं से है। इस भाषा ने हज़ारों शब्दों का आदान-प्रदान किया है। हिन्दी-सेवियों ने सैकड़ों विश्वविख्यात ग्रन्थों के अनुवाद किए हैं। दर्जनों विश्व विभूतियों पर ग्रन्थ लिखे हैं। कई यात्रा-संस्मरण लिखे हैं तथा विश्व की घटनाओं पर अपनी प्रतिक्रियाएँ व्यक्त की हैं। हिन्दी ने अनेक विश्वस्तरीय विचारधाराओं को आत्मसात् किया है तथा देश-देशान्तर तक अपनी ‘भारत विद्या’ का निर्यात भी किया है। हिन्दी की रूप-रचना अर्थात् व्याकरण, शब्दकोश, पाठ्यक्रम, शोध, समीक्षा एवं सर्जनात्मक लेखन में सैकड़ों विदेशी विद्वानों की सहभागिता रही है।
इधर हिन्दी फ़िल्मों, धारावाहिकों, पत्र-पत्रिकाओं और मीडिया कार्यक्रमों ने उसे विश्व के कोने-कोने में पहुँचाया है। कम्प्यूटर, इंटरनेट से उसका काफ़ी परिविस्तार हुआ है। लेखक ने दो दशक पूर्व इस ‘विश्व पटल पर हिन्दी’ की दिशा में पहल की थी। इसे अभी और व्यवस्थित करने की आवश्यकता है। इस प्रयोजन पूर्ति में इस पुस्तक की अपनी एक विशिष्ट उपयोगिता है।
Baleshwar Agarwal Jeevan Yatra
- Author Name:
Ramashankar Kushwaha
- Book Type:

- Description: एक व्यक्ति जीवन में क्या और कितना कर सकता है, इसके लिए बालेश्वर अग्रवाल एक श्रेष्ठ उदाहरण हैं । पत्रकारिता में रहे तो एक पत्रकार की तरह सोचते और कार्य करते रहे। सक्रियता और सतर्कता में कोई कमी नहीं । हर चीज पर निगाह होती | हमेशा अपने को पृष्ठभूमि में रखते और साथियों को आगे बढ़ाते। इस पुस्तक में उनकी सुदीर्घ जीवन यात्रा में पत्रकारित और समाज-सेवा के उपलब्ध समस्त विवरण आ गए हैं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद् का जिम्मा मिला तो देश और प्रवासी समाज को जोड़ने में जुट गए। दुनिया में प्रवासियों को लेकर होनेवाली सभी तरह की गतिविधियों और जरूरतों पर उनकी नजर रहती | उनके सामने क्या कठिनाइयाँ आती हैं और उन्हें दूर करने में वे क्या कर सकते हैं, इसके लिए प्रयासरत रहे । प्रवासी-जगत् बहुत बड़ा है और आज वह भारतवर्ष का पूरी दुनिया में प्रतिनिधित्व करता है। उनके माध्यम से भारतीय संस्कृति और जीवन-शैली सर्वत्र पहुँचती है। बालेश्वर इसके लिए प्रवासी समाज की नई पीढ़ी को जोड़ने का भरपूर प्रयास करते रहे। बालेश्वर अग्रवाल राष्ट्र-साधक थे | वह कुछ भी करते तो भारत देश और उसको संस्कृति उनके ध्यान में रहती । उनका लेखन इसका उदहारण है। दुनिया में जो भी हो रहा था, उसमें भारतीय और भारत कहाँ है और उसे किस तरह अपने को स्थापित करना है, यह उनके विचार के केंद्र में था। पर उनकी निगाह में भारतीयता सदैव सर्वोच्च रही ।
Bahujan Sahitya Ki Saiddhantiki
- Author Name:
Pramod Ranjan
- Book Type:

-
Description:
सामाजिक आन्दोलनों और साहित्य में बहुजन अवधारणा को लेकर इधर के वर्षों में चर्चा तेज हुई है। देश भर में बहुजन साहित्य पर केन्द्रित आयोजन स्वत:स्फूर्त ढंग से हो रहे हैं जिनमें बड़ी संख्या में लोग भागीदारी कर रहे हैं। ये आयोजन हिन्दी पट्टी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दक्षिण भारत राज्यों में भी हो रहे हैं। बहुजन साहित्य की अवधारणा कई स्तरों पर विचरोत्तेजक है। लेकिन सही मायने में यह प्रगतिशील, जनवादी और दलित साहित्य का विस्तार है और उनका स्वाभाविक अगला मुकाम भी।
तीन खंडों में विभाजित यह किताब बहुजन साहित्य के इतिहास और दर्शन से परिचय करवाती है तथा इस पर आधारित व्यावहारिक आलोचना की एक बानगी भी प्रस्तुत करती है।
किताब का पहला खंड बहुजन साहित्य की अवधारणा पर केन्द्रित है, इसमें इसकी सैद्वान्तिकी के विविध पहलुओं पर विमर्श है। दूसरा खंड इसके इतिहास से परिचित करवाता है। तीसरे खंड में बहुजन आलोचना की बानगी प्रस्तुत की गई है।
Shiksha Ke Samajik Sarokar
- Author Name:
Kedarnath Pandey
- Book Type:

- Description: ‘शिक्षा के सामाजिक सरोकार’ शिक्षा, शिक्षक, छात्र और विद्यालय पर केन्द्रित वैयक्तिक निबन्धों का संग्रह है। केदारनाथ पाण्डेय की यह पुस्तक साहित्य की कई विधाओं का आस्वाद देती है। यह संस्मरण भी है, यात्रा-वृत्तान्त भी और शिक्षा के सामाजिक सरोकारों का आख्यान भी। शिक्षा के क्षेत्र में एक शिक्षक द्वारा किए गए अभिनव प्रयासों का यह ऐसा वृत्तान्त है, जिसे छात्र, शिक्षक और अभिभावक सभी के लिए पढ़ना ज़रूरी है। केदारनाथ पाण्डेय की इस पुस्तक का मूल स्वर है—सबको शिक्षा, सबको काम। लेखक न सिर्फ़ बच्चों को पढ़ा-लिखा देखना चाहता है बल्कि आम जन के लिए न्याय भी चाहता है। लेखक किसानों के लिए ज़मीन, ग़रीबों के लिए घर और सभी के लिए आशाएँ चाहता है। वह सुन्दर भविष्य का सपना देखता है जो परम्परा और संस्कृति के बिना अधूरा है। समाज की कई कल्पनाएँ, योजनाएँ पुस्तक में स्थान पाती हैं। स्मृतियों को सहेजकर रखने में लेखक माहिर है और उसका यथेष्ट इस्तेमाल इस पुस्तक में किया गया है।
Perspective
- Author Name:
Rajesh Aggarwal
- Book Type:

- Description: Only an awakened person can be a true leader. He will share his experiences rather than imposing them on others. A leader should have clarity and capacity to explain any situation before the others and give them freedom to choose according to their own understanding. That knowledge is a true knowledge which is able to eradicate completely the venomous diseases, like unrealistic desires, anger, laziness, greed, pride, tension and depression from its root. When the source of the problem has been identified and salvaged, the solution comes automatically because alertness is the only key and the final solution to any problem. A person can truly love only when from the core of his heart, he eradicates all negativities, jealousy, hatred, inferiority complex, false hopes and fills himself with immense love. If a person really desires to become strong, there should be a balance and synchronisation of all the three qualities — traditions, thoughts and behavior. —from this book These gems of thoughts will inspire you and transform your life, thus giving contentment, satisfaction, happiness and all the good virtues.
Meri Unesco Yatra
- Author Name:
Ramesh Pokhriyal 'Nishank'
- Book Type:

- Description: "यूनेस्को या संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन विभिन्न देशों, समुदायों, संस्कृतियों और नागरिकों के बीच मानवीय मूल्यों की स्थापना को संभव बनाने के लिए एक सशक्त एवं व्यापक मंच प्रदान करता है। यूनेस्को का प्रमुख उद्देश्य शांति स्थापना, गरीबी उन्मूलन, सतत विकास और शिक्षा के माध्यम से विज्ञान, संस्कृति, संचार और सूचना के क्षेत्र में योगदान करना है। यूनेस्को के लक्ष्यों के केंद्र में अब प्राकृतिक विज्ञान और पृथ्वी के संसाधनों का प्रबंधन भी आ चुके हैं। इसके अंतर्गत विकसित और विकासशील देशों में संसाधन प्रबंधन और आपदा स्थिरता में सतत विकास प्राप्त करने के लिए पानी और पानी की गुणवत्ता, महासागर की रक्षा और विज्ञान तथा इंजीनियरिंग प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना शामिल है। भारत में मानव कल्याण संदर्भित चिंतन हजारों वर्ष पुराना है। हमारे वेदों, शास्त्रों एवं अन्य ग्रंथों में शासन करनेवालों को धर्म के आधार पर आचरण करने का परामर्श दिया गया है। इस दृष्टि से देखें तो सामाजिक और मानव विज्ञान पर ध्यान केंद्रित करते हुए यूनेस्को भी बुनियादी मानव अधिकारों के संरक्षण और संवर्धन को न केवल बढ़ावा देता है, बल्कि भेदभाव और नस्लवाद से लड़ने के लिए पूरे विश्व को तैयार करता है। मानव कल्याण के लिए सतत सक्रिय यूनेस्को की भूमिका, उसके कार्य-क्षेत्र, प्रभाव और संभावनाओं के विषय में प्रामाणिक जानकारी देती रोचक एवं पठनीय कृति।
Prithvi Manthan : Vaishvik Bharat Banane Ki Kahani
- Author Name:
Aseem Shrivastava
- Book Type:

- Description: यह एक बेहतरीन किताब है...कक्षा में मैं इसका प्रयोग किसी और पुस्तक से ज़्यादा करता हूँ। —पी. साईनाथ; पत्रकार व लेखक प्रचार-हमला को चीरती हुई यह किताब बताती है कि आज क्या हो रहा है। —अमिताव घोष; लेखक यह आज के विरोधी-धाराओं का एक महत्त्वपूर्ण वृत्तान्त है...इस पक्ष को सुनना और समझना ज़रूरी है। —अरुणा रॉय; समाजकर्मी वैश्वीकरण के विशाल पुस्तक-संग्रह में यह किताब बौद्धिक साहस और ईमान का एक कीर्तिमान है जो बेहतर दुनिया के लिए रास्ता दिखाती है। —अमित भादुड़ी; अर्थशास्त्री आज अगर गाँधी जी ज़िन्दा होते और 'हिन्द स्वराज' की रचना करते, तो उन्हें लगभग उन्हीं सवालों से जूझना पड़ता जो इस किताब में हैं। —गणेश देवी; लेखक और भाषाविद् यह किताब दर्शाती है कि इस वैश्विक युग में हमारी तथाकथित स्वेच्छा वस्तुत: कितनी पराधीन है...आज की दुनिया से चिन्तित किसी भी इनसान के लिए यह पुस्तक अनिवार्य है। —मल्लिका साराभाई; नृत्यांगना और संस्कृतिकर्मी आज के वैश्विक युग की तमाम तब्दीलियों के परिप्रेक्ष्य में यह पुस्तक एक महत्त्वपूर्ण संश्लेषण है...साथ ही इस किताब में एक वैकल्पिक दुनिया की कल्पना की गई है जिस पर गम्भीरता से सोचने और बहस करने की ज़रूरत है। —माधव गाडगिल; पर्यावरणशास्त्री यह एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण और असरदार किताब है...लेखक जो व्यापक प्रमाण पेश करता है उसका हमें सामना करना होगा। —हर्ष मंदर; समाजकर्मी
Stree : Lamba Safar
- Author Name:
Mrinal Pande
- Book Type:

- Description: मैं इस बारे में ज़्यादा जिरह नहीं करना चाहती कि स्त्री-मुक्ति का विचार हमें किस दिशा में ले जाएगा, लेकिन मुझे हमेशा लगता रहा है, कि अपनी जिस संस्कृति के सन्दर्भ में मैं स्त्री-मुक्ति की चर्चा करना और उसके स्थायी आधारों को चीन्हना चाहती हूँ, उसमें पहला चिन्तन भाषा पर किया गया था। जब दो शब्दों का संस्कृत में समास होता है, तो अक्सर अर्थ में अन्तर आ जाता है। इसलिए स्त्री, जो हमारे मध्यकालीन समाज में प्रायः मुक्ति के उलट बन्धन, और बुद्धि के उलट कुटिल त्रिया-चरित्र का पर्याय मानी गई, मुक्ति से जुड़कर, उन कई पुराने सन्दर्भों से भी मुक्त होगी, यह दिखने लगता है। अब बन्धन बनकर महाठगिनी माया की तरह दुनिया को नचानेवाली स्त्री जब मुक्ति की बात करे, तो जिन जड़मतियों ने अभी तक उसे पिछले साठ वर्षों के लोकतांत्रिक राज-समाज की अनिवार्य अर्द्धांगिनी नहीं माना है, उनको ख़लिश महसूस होगी। उनके लिए स्त्री की पितृसत्ता राज-समाज परम्परा पर निर्भरता कोई समस्या नहीं, इसलिए इस परम्परा पर उठाए उसके सवाल भी सवाल नहीं, एक उद्धत अहंकार का ही प्रमाण हैं। इस पुस्तक के लेखों का मर्म और उनकी दिशा समझने के लिए पहले यह मानना होगा कि एक जीवित परम्परा को समझने के लिए सिर्फ़ मूल स्थापनाओं की नजीर नाकाफ़ी होती है, जब तक हमारी आँखों के आगे जो घट रहा है, उस पूरे कार्य-व्यापार पर हम ख़ुद तटस्थ निर्ममता से चिन्तन नहीं करते, तब तक वैचारिक शृंखला आगे नहीं बढ़ सकती।
Gopan Aur Ayan : Khand -1
- Author Name:
Sitanshu Yashashchandra
- Book Type:

- Description: गुजराती आदि भारतीय भाषाएँ एक विस्तृत सेमिओटिक नेटवर्क अर्थात संकेतन-अनुबन्ध-व्यवस्था का अन्य-समतुल्य हिस्सा हैं। मूल बात ये है कि विशेष को मिटाए बिना सामान्य अथवा साधारण की रचना करने की, और तुल्यमूल्य संकेतकों से बुनी हुई एक संकेतन-व्यवस्था रचने की जो भारतीय क्षमता है, उसका जतन होता रहे। राष्ट्रीय या अन्तरराष्ट्रीय राज्यसत्ता, उपभोक्तावाद को बढ़ावा देनेवाली, सम्मोहक वाग्मिता के छल पर टिकी हुई धनसत्ता एवं आत्ममुग्ध, असहिष्णु विविध विचारसरणियाँ/आइडियोलॉजीज़ की तंत्रात्मक सत्ता आदि परिबलों से शासित होने से भारतीय क्षमता को बचाते हुए उस का संवर्धन होता रहे। गुजराती से मेरे लेखों के हिन्दी अनुवाद करने का काम सरल तो था नहीं। गुजराती साहित्य की अपनी निरीक्षण परम्परा तथा सृजनात्मक लेखन की धारा बड़ी लम्बी है और उसी में से मेरी साहित्य तत्त्व-मीमांसा एवं कृतिनिष्ठ तथा तुलनात्मक आलोचना की परिभाषा निपजी है। उसी में मेरी सोच प्रतिष्ठित (एम्बेडेड) है। भारतीय साहित्य के गुजराती विवर्तों को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में जाने बिना मेरे लेखन का सही अनुवाद करना सम्भव नहीं है, मैं जानता हूँ। इसीलिए, इन लेखों का हिन्दी अनुवाद टिकाऊ स्नेह और बड़े कौशल्य से जिन्होंने किया है, उन अनुवादक सहृदयों का मैं गहरा ऋणी हूँ। ये पुस्तक पढ़नेवाले हिन्दीभाषी सहृदय पाठकों का सविनय धन्यवाद, जिनकी दृष्टि का जल मिलने से ही तो यह पन्ने पल्लवित होंगे। —सितांशु यशश्चन्द्र (प्रस्तावना से) ''हमारी परम्परा में गद्य को कवियों का निकष माना गया है। रज़ा पुस्तक माला के अन्तर्गत हम इधर सक्रिय भारतीय कवियों के गद्य के अनुवाद की एक सीरीज़ प्रस्तुत कर रहे हैं। इस सीरीज़ में बाङ्ला के मूर्धन्य कवि शंख घोष के गद्य का संचयन दो खंडों में प्रकाशित हो चुका है। अब गुजराती कवि सितांशु यशश्चन्द्र के गद्य का हिन्दी अनुवाद दो जिल्दों में पेश है। पाठक पाएँगे कि सितांशु के कवि-चिन्तन का वितान गद्य में कितना व्यापक है—उसमें परम्परा, आधुनिकता, साहित्य के कई पक्षों से लेकर कुछ स्थानीयताओं पर कुशाग्रता और ताज़ेपन से सोचा गया है। हमें भरोसा है कि यह गद्य हिन्दी की अपनी आलोचना में कुछ नया जोड़ेगा।" —अशोक वाजपेयी
Tyag, Tapasya Aur Balidan Ki Parampara Ke Vahak Shri Guru Tegabahadur
- Author Name:
Dr. Kuldip Chand Agnihotri
- Book Type:

- Description: सप्तसिंधु क्षेत्र की कुछ घटनाएँ ऐसी हैं, जिन्होंने संपूर्ण भारतवर्ष के इतिहास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इनमें सबसे पहली घटना तो मोहनजोदड़ो, हड़प्पा सभ्यता का उदय था, जिससे कालांतर में सिंधु सरस्वती सभ्यता का विकास हुआ। दरअसल वर्तमान भारतीय विश्वासों, आस्थाओं एवं पूजा-पद्धति का आधार सिंधु-सरस्वती घाटी में ही मिलता है। कुरुक्षेत्र में हुआ महाभारत का युद्ध इस क्षेत्र की ऐसा घटना है, जिसने पूरे हिंदुस्थान की सेनाओं को सप्तसिंधु के मैदानों में लाकर खड़ा कर दिया था। इन्हीं वैदिक परंपराओं का विकास श्रवण परंपराओं में हुआ, जिनके संश्लेषण की आधार भूमि भी सप्तसिंधु क्षेत्र ही बना। उसके सैकड़ों साल बाद यही सप्तसिंधु का क्षेत्र अरब से उठी सामी चिंतन की आँधी का शिकार हुआ। हमले क्योंकि सप्तसिंधु क्षेत्र से ही होते थे, इसलिए इसका सर्वाधिक दंश भी इसे ही झेलना पड़ा । लेकिन इस नई आफत का सामना कैसे किया जाए? यह उस युग की सबसे बड़ी चुनौती थी। इस मरहले पर दशगुरु परंपरा का उदय होना दैवी योजना ही कही जा सकती है। गुरु नानक देवजी इस परंपरा के संस्थापक थे। दशगुरु परंपरा का मूल्यांकन आध्यात्मिक क्षेत्र में तो हुआ है, लेकिन उसके ऐतिहासिक व सामाजिक क्षेत्र में योगदान को वरीयता नहीं दी गई। यह ऐसा क्षेत्र है, जिसमें कुदाल चलाने की आवश्यकता है। यह पुस्तक दशगुरु परंपरा के इसी क्षेत्र में किए गए योगदान को प्रकाश में लाने का स्तुत्य प्रयास है।
Jag Badalnare - Granth
- Author Name:
Deepa Deshmukh
- Book Type:

- Description: जग बदलणारे ग्रंथ माणसाची प्रगती होण्यासाठी अनेक गोष्टी कारणीभूत ठरल्या. चाकाचा शोध लागला आणि त्याच्या जगण्याला गती मिळाली. विज्ञान आणि शोधांनी माणसाला डोळस बनवलं. कलेनं त्याचं आयुष्य सुंदर केलं. औद्योगिक क्रांती झाली आणि त्याच्या आयुष्यानं वेगळी वाट पकडली. तंत्रज्ञानानं त्याच्या आयुष्यात खूप मोठी जागा व्यापली आणि त्याचं आयुष्य सुखकर केलं. माणसाच्या वाटचालीत स्त्रीवर लादलेलं दुय्यमत्व झुगारण्यासाठी तिनं संघर्ष केला आणि आपल्या स्वतंत्र अस्तित्वासाठी ठाम भूमिका घेतली. सृष्टीच्या या अफाट पसाऱ्यात माणसाची मग एक एक गोष्ट नीट समजून घेण्याची धडपड सुरू झाली, कधी त्यानं विज्ञानाची साथ घेतली, तर कधी तंत्रज्ञानाची मदत घेतली. कधी त्यानं स्वत:ला समजून घेण्यासाठी मानसशास्त्राची शाखा निर्माण केली. कधी त्यानं व्यवहार सुरळीत चालण्यासाठी अर्थशास्त्राची सोबत घेतली. कधी त्यानं आपली मूल्यं विकसित करताना त्यांना तत्त्वज्ञानाची जोड दिली. या सगळ्या गोष्टींचा दस्तावेज 'ग्रंथ' रुपात जतन करण्याची प्रक्रिया त्यानं सुरू ठेवली. त्यामुळेच जगभरात आज धर्म, कला, विज्ञान, तंत्रज्ञान, मानसशास्त्र अनुवंशशास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, राज्यशास्त्र, चरित्र अशा अनेक शाखांमधलं लिखाण ग्रंथांच्या रुपानं निर्माण झालं. यातल्या अनेक ग्रंथांनी जगावर प्रभाव टाकला. यातले निवडक ५0 ग्रंथ घेऊन त्यांची ओळख करून देण्याचा प्रयत्न 'ग्रंथ' मध्ये करण्यात आला आहे. कुतूहल, ज्ञानाची आस असणाऱ्या प्रत्येकानं आपलं जगणं अर्थपूर्ण आणि समृद्ध करण्यासाठी दीपा देशमुख लिखित 'ग्रंथ' वाचायलाच हवा. Jag Badalnare - Granth -Deepa Deshmukh जग बदलणारे ग्रंथ - दीपा देशमुख
Chetna Hero English
- Author Name:
Mission Chetna
- Book Type:

- Description: Chetna is a movement to recognise, appreciate and support goodness in the world. Living up to its mission of ‘Spreading Goodness’ and with the aim of inspiring many to follow goodness in life, the Chetna honours men and women across India, who are brave enough to go against the flow and reach out to help other individuals and families in need. These men and women are recognised as Chetna Heroes. Chetna Heroes are those people who have chosen to speak up through their deeds. None of them began their activities for social good as a broad-based, well-planned and well-funded programme. They simply responded to silent cries for help of people they came into contact with and they did not stop after answering the first cry. These Chetna Heroes continued to ask themselves—“What more can I do?”, “Who else needs this type of assistance?” The answers to these questions shaped their lives into the stories of inspiration that they are today. Chetna is presenting this Coffee Table Book—CHETNA HEROES—To appreciate applaud the dedication and selfless service of these great human beings. We believe that the stories of ‘Chetna Heroes’ will inspire many to follow suit, in embracing and supporting goodness. This very thought is the basis of publishing this Coffee Table Book.
Aahat Desh
- Author Name:
Arundhati Roy
- Book Type:

-
Description:
‘‘वह जंगल जो दण्डकारण्य के नाम से जाना जाता था और जो पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ से लेकर आन्ध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों को समेटता हुआ महाराष्ट्र तक फैला है, लाखों आदिवासियों का घर है। मीडिया ने इसे ‘लाल गलियारा’ या ‘माओवादी गलियारा’ कहना शुरू कर दिया है। लेकिन इसे उतने ही सटीक ढंग से ‘अनुबन्ध गलियारा’ कहा जा सकता है। इससे रत्ती-भर फ़र्क़ नहीं पड़ता कि संविधान की पाँचवीं सूची में आदिवासी लोगों के संरक्षण का प्रावधान है और उनकी भूमि के अधिग्रहण पर पाबन्दी लगाई गई है। लगता यही है कि वह धारा वहाँ महज़ संविधान की शोभा बढ़ाने के लिए रखी गई है—थोड़ा-सा मिस्सी-ग़ाज़ा, लिपस्टिक-काजल। अनगिनत निगम, छोटे अनजाने व्यापारी ही नहीं, दुनिया के दैत्याकार-से-दैत्याकार इस्पात और खनन निगम—मित्तल, जिन्दल, टाटा, एस्सार, पॉस्को, रिओ टिंटो, बीएचपी बिलिटन और हाँ, वेदान्त भी—आदिवासियों के घर-बार को हड़पने की फ़िराक़ में हैं।
हर पहाड़ी, हर नदी और हर जंगल के लिए समझौता हो गया है। हम अकल्पनीय स्तर पर व्यापक सामाजिक और पर्यावरणीय कायाकल्प की बात कर रहे हैं। और इसमें से ज़्यादातर गुप्त है। मुझे क़तई नहीं लगता कि दुनिया के सबसे पुराने और दिव्य जंगल, परिवेश और आदिम समुदाय को नष्ट करने के लिए जो परियोजनाएँ शुरू हुई हैं, उनकी चर्चा भी कोपेनहेगेन में होनेवाले ‘जलवायु परिवर्तन सम्मेलन’ में होगी। माओवादी हिंसा की भयावह कहानियाँ खोजनेवाले (और न मिलने पर उन्हें गढ़ लेनेवाले) ख़बरिया चैनल लगता है, क़िस्से के इस पक्ष में बिलकुल दिलचस्पी नहीं रखते। मुझे अचरज है, ऐसा क्यों?’’
युद्ध, भारत की सीमाओं से चलकर देश के हृदय-स्थल में मौजूद जंगलों तक फैल चुका है। भारत की सर्वाधिक प्रतिष्ठासम्पन्न लेखिका द्वारा लिखित यह पुस्तक ‘आहत देश’ कुशाग्र विश्लेषण और रिपोर्टों के संयोजन द्वारा उभरती हुई वैश्विक महाशक्तियों के समय में प्रगति और विकास का परीक्षण करती है और आधुनिक सभ्यता को लेकर कुछ मूलभूत सवाल उठाती है।
Manch Pravesh
- Author Name:
Feisal Alkazi
- Book Type:

- Description: अलक़ाज़ी और पद्मसी परिवारों की इस कहानी को समकालीन रंगमंच के संक्षिप्त इतिहास की तरह पढ़ा जा सकता है, लेकिन फ़ैसल अलक़ाज़ी इसमें कुछ ऐसे अफ़साने जोड़ते हैं जिन्हें कोई ‘इनसाइडर’ ही जान सकता है। मसलन—उनकी दादी, ‘कुलसुम टेरेस’ की कुलसुमबाई ने 20 वर्ष तक अपने पति से एक लफ़्ज़ भी क्यों नहीं बोला, एलेक और पर्ल पद्मसी की मुलाक़ात कैसे हुई, और फिर क्या हुआ; किस तरह अलक़ाज़ी और निस्सिम इज़ेकियल लंदन के एक फ़्लैट में एक ही बिस्तर साझा करने लगे; और वह नायाब रिश्ता जो इब्राहिम साहब और रोशन अलक़ाज़ी के बीच था और उनके जीवन की ‘दूसरी औरत’ भी। मुम्बई में शुरू हुए अंग्रेज़ी थिएटर को इब्राहिम अलक़ाज़ी उसे राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय ख्याति तक लेकर गए। इसमें 1950 के दशक में इडिपस रेक्स, मर्डर इन कैथेड्रल और मैकबेथ से लेकर 60 और 70 के दशक में आषाढ़ का एक दिन, अंधा युग और तुग़लक़ जैसे सौ से ज्यादा नाटकों का निर्देशन और अभिनय शामिल था। उनकी जीवन और कर्म-संगिनी, जिनका ताल्लुक़ पद्मसी परिवार से था, उनकी सभी प्रस्तुतियों की मुख्य वेश-भूषा परिकल्पक रहीं। पचास से ज़्यादा दुर्लभ तस्वीरों से सुसज्जित ‘मंच प्रवेश भारतीय रंगमंच की अनूठी दास्तान है’ जिसे इस तरह से पहले कभी नहीं लिखा गया। रंगप्रेमी इसे सँजो कर रखना चाहेंगे और अच्छी कहानी पसन्द करने वाले पाठक भी।
Samkaleen Antarashtriya Sambandh
- Author Name:
Vivek Ojha
- Book Type:

- Description: यह पुस्तक अन्तरराष्ट्रीय राजनीति और सम्बन्धों की गतिशील प्रकृति को ध्यान में रखकर समसामयिक सन्दर्भों और घटनाक्रम को अद्यतन रूप में प्रस्तुत करती है। पुस्तक में भारत की विदेश नीति की उभरती प्रवृत्तियों, विकसित-विकासशील देशों की राजनीति को प्रभावित करनेवाले कारकों और पोस्ट कोविड विश्व-व्यवस्था की सम्भावित प्रकृति को विस्तार से समाहित किया गया है। इसमें उन सभी पहलुओं को तथ्यात्मक और विश्लेषणात्मक तौर पर प्रस्तुत किया गया है जो सिविल सेवा और विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। इस पुस्तक को समावेशी बनाने का प्रयास करते हुए पाठ्यक्रम के सभी महत्त्वपूर्ण विषयों को प्रासंगिक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
Marm Mudra
- Author Name:
Mahavir Jondhale
- Book Type:

- Description: ज्येष्ठ पत्रकार महावीर जोंधळे यांनी ‘मर्म मुद्रा' या सार्थ शीर्षकाच्या नव्या ग्रंथाची भेट वाचकांपुढे ठेवली आहे. स्वातंत्र्योत्तर काळात राजकीय चळवळच नव्हे; तर वंचित, दलित, अल्पसंख्य, शेतमजूर, धरणग्रस्त, पीडित वर्गाच्या मागण्या आणि त्यासाठी त्यांनी उभारलेल्या लढ्यात प्रत्यक्ष स्वत: आणि लेखणीद्वारेही जोंधळे यांनी स्वत:चा सहभाग नोंदवला आहे. अंधश्रद्धा, जातिभेद आदी समस्यांनी अद्यापही पुरोगामी समजल्या जाणाऱ्या महाराष्ट्रात ठाण मांडले आहे. पत्रकारितेच्या क्षेत्रात लेखणीचा पराक्रम करणारे बहुसंख्य भाष्यकार निवृत्तीनंतर नि:संकोच मौनीबाबांचे धोरण अवलंबतात. म्हणूनच अपवादात्मक पत्रकार वगळता बहुसंख्य पत्रकारांनी सावधपणे पत्रकारितेच्या आद्य कर्तव्यपूर्तीच्या भूमिकेकडे पाठ फिरवली आहे. विचारवंतांना आणि साक्षेपी वाचकांना सभोवतालचे सार्वजनिक वास्तवाचे दर्शन खरेतर संवेदनशील आणि पत्रकारितेच्या नैतिक मूल्यांची जाण ठेवून घडवणे अपेक्षित असते. महावीर जोंधळे यांनी आदर्श पत्रकारितेचा धर्म सांभाळूनच स्वत:ची लेखणी आजवर झिजवली आहे. बॅ. नाथ पै, बाबा आढाव, कवयित्री शांता शेळके, प्रा. एम. एच. देसर्डा, नामदेव ढसाळ, शिल्पकार भाऊ साठे आदींची उद्बोधक शब्दचित्रे या पुस्तकात महावीर जोंधळे यांनी वाचकांपुढे ठेवली आहेत. ती निश्चितच सर्वांसाठी प्रेरणादायक ठरणारी आहेत, म्हणूनच ती वाचायला हवीत. एकनाथ बागूल Marm Mudra | Mahavir Jondhale मर्म मुद्रा । महावीर जोंधळे
Bhukamp
- Author Name:
Harinarayan Srivastava
- Book Type:

- Description: भूकम्प है क्या? यह किन परिस्थितियों में विध्वंसक हो जाता है? क्या इससे बचने का कोई उपाय है? इन और ऐसे ही अनेक प्रश्नों के माध्यम से इस पुस्तक में भूकम्प जैसे भौगोलिक और वैज्ञानिक विषय की शोध–खोज की गई है—यानी पृथ्वी के भीतरी, सर्वाधिक भयावह और रोमांचक घटना–क्षणों की विस्तृत और रोचक छानबीन। भूकम्पों के कारण, उनके पूर्वानुमान, भूकम्प–विज्ञान के विभिन्न उपयोगों—जैसे भूकम्प इंजीनियरिंग, नाभिकीय विस्फोटों का पता एवं चन्द्र–कम्पों आदि के बारे में आधुनिक अनुसन्धानों की विस्तृत चर्चा इस पुस्तक में की गई है। यद्यपि यह विषय भौतिकी और गणित के मूल सिद्धान्तों पर आधारित है, पर अपनी सहज भाषा–शैली और सार्थक प्रस्तुति के कारण दुरूह बिलकुल नहीं रह गया है। भूगोल के विद्यार्थियों, प्रोफ़ेसरों, भूगर्भशास्त्रियों, इंजीनियरों और धरती के गर्भ में पलते–पनपते, उमड़ते–घुमड़ते रहस्यों को जानने की इच्छा रखनेवाले सामान्य पाठकों के लिए भी यह सचित्र प्रकाशन समान रूप से उपयोगी और अनूठा है।
Art And Crafts Of Chhattisgarh
- Author Name:
Niranjan Mahawar
- Book Type:

- Description: Chhattisgrah has many archaeological sites of great historical importance. The archaeological history of this region starts from the early Gupta period. The vast sites of Malhar in Bilaspur district, Dipadiha in Surguja, Sirpur (Shreepur) in Raipur and Barsur in Dantewada (Old Bastar district) are very rich. The punch mark coins have been found from Tarapur, Udela and Arng. Coins of Mouriyan period, Satvahan, Kushan, Gupta kings and local dynasties-Sharabhpuria, Nal, Pandu, and Kalchury have also been found at several places. Besides this the metal work was practiced and beautiful bronzes were found from Sirpur site. These bronzes were casted in the sixth or seventh century A.D. Iron working was also prevalent in this region. Agaria tribe was mining iron ore and smelting it and making iron tools and agricultural equipments. There are several brick temples too in Chhattisgarh. This book talks in depth about chhattisgarh and its arts and crafts. The author, a distinguished expert on traditional arts and crafts and working on the subject since 1960s, has documented all major and minor craft forms in this book. We hope the readers will find it extremely useful as to acquainted them with the rich tradition of region.
Anuvad Ka Naya Vimarsh
- Author Name:
Shrinarayan Sameer
- Book Type:

-
Description:
प्रस्तुत पुस्तक अनुवाद को विशुद्ध भाषा संवाद मानने की प्रचलित मान्यता से प्रस्थान का विमर्श है। यह अनुवाद को दो भाषाभाषी समाजों और सभ्यताओं में भाषिक अपरिचय के बरअक्स परिचय एवं संवाद का सेतु मानने, विकास की दौड़ में पिछड़े समाजों की आवाज़ मानने और सभ्यता संवाद मानने का तार्किक घोषणापत्र है। इसमें अनुवाद को किसी भाषा रचना की दूसरी भाषा में पुनर्रचना मानने और इस तरह उसे रचना का अनश्वर उद्यम मानने की मुकम्मल तर्क-रचना भी है। इस विमर्श में अनुवाद को सृजन का अनुसृजन बनाने की संस्तुति और तर्क का ताप यत्र-तत्र-सर्वत्र है। इस पुस्तक को पढ़ना समय के संघात से रू-बरू होना और अनुवाद के वैभव को समग्रता में समझना है। साथ ही भूमंडलीकरण, सूचना विस्फोट और बाज़ारवाद के दौर में मानवीय आकांक्षा, भाषा एवं राजनीति के रिश्ते तथा सरोकार को समझना और अपनी पक्षधरता को बेबाक व तलस्पर्शी बनाना भी है।
प्रशासनिक तथा तकनीकी अनुवाद को सरल, सहज एवं सर्जनात्मक बनाने के लिए जिरह करती यह पुस्तक, अपने तर्क एवं विमर्श से अनुवादवेत्ताओं, विशेषज्ञों और सुधि अध्येताओं के बीच समान रूप से समादृत होगी।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book