Bharatiya Kala Darshan
Author:
Shashiprabha TiwariPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction0 Ratings
Price: ₹ 240
₹
300
Available
भारत की कला बहुत गहराइयों में ले जाती है। आदमी गहराइयों में उतरता चला जाता है, यह भारतीय कला की विशेषता है। भारत की कला भारतीय संस्कृति की वाहिका है। कला संस्कृति को लेकर चलती है। हमारे सामने सबसे बड़ा प्रश्न यही खड़ा हो जाता है कि कला जिस संस्कृति को लेकर चलती है, वह संस्कृति क्या है? अंग्रेजी में हम लोग उसको कल्चर कहते हैं। कल्चर और संस्कृति दोनों समानार्थी नहीं हैं।
संस्कृति अलग चीज है। संस्कृति का केंद्रबिंदु अलग है। संस्कृति का केंद्रबिंदु जो है, वह भारत में अध्यात्म है। भारत की संस्कृति अध्यात्म को लेकर चलती है।
ISBN: 9789352665556
Pages: 160
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: व्यक्ती किंवा राष्ट्राच्या जीवनप्रवासात जशी उमेद देणारी आदर्श उदाहरणे आवश्यक असतात, तसेच काय करू नये हे सांगणारे, धोक्याची सूचना देणारे दाखलेही गरजेचे असतात. दुर्दैवाने आज अफगाणिस्तान हा देश धोक्याची सूचना देणाऱ्या दाखल्याच्या रूपात जगासमोर उभा आहे. भौगोलिक साधनसंपत्ती, पूर्वापार जागतिक व्यापारी मार्गांवर असलेले मोक्याचे स्थान, स्वाभिमानी आणि लढाऊ लोक अशा अनेक जमेच्या बाजू असूनही अफगाणिस्तान आज ओळखला जातो तो एक ‘फेल्ड स्टेट' म्हणून. पराकोटीचा आणि विधीनिषेधशून्य धर्माभिमान, त्याला मिळालेली हिंसेची जोड, आधुनिक जगाकडे फिरवलेली पाठ आणि परकीय शक्तींचा हस्तक्षेप यातून हा प्राचीन देश आणि समाज देशोधडीला लागला आहे. ही आपल्यासह अन्य देशांसाठीही धोक्याची घंटा ठरू शकते. त्यासाठीच अफगाणिस्तानची वाटचाल समजून घेणे निकडीचे ठरते.हा प्रवास संघर्षमय असला तरी रंजक आणि उद्बोधक आहे. साम्राज्यवादाच्या सुरुवातीच्या काळात महाशक्तींमध्ये खेळल्या गेलेल्या ‘द ग्रेट गेम'पासून अगदी आतापर्यंतच्या भू-राजकीय संघर्षाची किनार त्याला आहे. जग जिंकायला निघालेल्या अलेक्झांडरपासून सातासमुद्रांवर हुकूमत गाजवणाऱ्या ब्रिटनपर्यंत आणि सोविएत युनियनपासून अमेरिकेपर्यंत सर्व महासत्तांनी आजवर या भूमीत मारच खाल्ला आहे. त्यासाठीच अफगाणिस्तान ‘साम्राज्यांची दफनभूमी' म्हणून ओळखले जाते. अनेक रोमहर्षक प्रसंग आणि पात्रांनी ही कहाणी सजली आहे. त्यात भारताचेही हितसंबंध गुंतले असल्याने या कहाणीला वेगळे महत्त्व लाभले आहे. कवी इक्बाल यांनी शतकभरापूर्वी अफगाणिस्तानचे वर्णन ‘आशिया खंडाचे हृदय' असे केले होते. तेथे शांतता असेल तर आशियात शांतता असेल, तेथे संघर्ष असेल तर संपूर्ण आशियात संघर्ष असेल, असे इक्बाल यांनी म्हटले होते. आजही ते वर्णन अफगाणिस्तानला लागू पडते. त्या भळभळत्या हृदयाची स्पंदने टिपण्याचा प्रयत्न म्हणजे हा ग्रंथ होय! Afganistan : Samrajyanchi Dafanbhumi |Sachin Diwan अफगाणिस्तान : ‘साम्राज्यांची दफनभूमी'! | सचिन दिवाण
Cyanide : Rajeev Hatyakand Ki kahani
- Author Name:
Praveen Kumar Jha
- Book Type:

- Description: मद्रास के निकट श्रीपेरम्बुदूर में एक बम विस्फोट द्वारा राजीव गांधी की हत्या एक रहस्यमय घटना है, जिसके कई तार अब तक सुलझे नहीं हैं। इस हत्याकांड की जाँच जहाँ एक मॉडल की तरह देखा गया, वहीं यह पूरा घटनाक्रम किसी थ्रिलर फ़िल्म की पटकथा की तरह है। भारत की ज़मीन से बाहर हो रहे षडयंत्र की तह तक पहुँचना और देश-विदेश के राजनीतिक मकड़जाल से बचते हुए कदम रखना आसान न था। लेखक प्रवीण कुमार झा ने अपनी क़िस्सागोई अंदाज़ में इस घटनाक्रम को संवादों और दृश्यों में पिरो दिया है। यह कोई नयी अकादमिक पड़ताल या रिपोर्ताज नहीं, बल्कि उपलब्ध दस्तावेज़ों पर आधारित एक रोमांचक कथा है।
Bhartiya Sikkon Ka Itihas
- Author Name:
Gunakar Muley
- Book Type:

- Description: 'विश्व संस्कृति को भारत की एक महानतम देन है–दस अंक-संकेतों पर आधारित स्थानमान अंक-पद्धति। आज सारे सभ्य संसार में इसी दशमिक स्थानमान अंक-पद्धति का इस्तेमाल होता है। न केवल यह अंक-पद्धति बल्कि इसके साथ संसार के अनेक देशों में प्रयुक्त होने वाले 1, 2, 3, 9...और शून्य संकेत भी, जिन्हें आज हम ‘भारतीय अन्तरराष्ट्रीय अंक’ कहते हैं, भारतीय उत्पत्ति के हैं। देवनागरी अंकों की तरह इनकी व्युत्पत्ति भी पुराने ब्राह्मी अंकों से हुई है। भारतीय अंक-पद्धति की कहानी में भारतीय प्रतिभा की इस महान उपलब्धि के उद्गम और देश-विदेश में इसके प्रचार-प्रसार का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया है। साथ ही, अपने तथा दूसरे देशों में प्रचलित पुरानी अंक-पद्धतियों का भी संक्षिप्त परिचय दिया गया है। अन्त में, आजकल के इलेक्ट्रॉनिक गणक-यंत्रों में प्रयुक्त होनेवाली द्वि-आधारी अंक-पद्धति को भी समझाया गया है। इस प्रकार, इस पुस्तक में आदिम समाज से लेकर आधुनिक काल तक की सभी प्रमुख गणना-पद्धतियों की जानकारी मिल जाती है। विभिन्न अंक-पद्धतियों के स्वरूप को भली-भाँति समझने के लिए पुस्तक में लगभग चालीस चित्र हैं। न केवल विज्ञान के, विशेषतः गणित के विद्यार्थी, बल्कि भारतीय संस्कृति के अध्येता भी इस पुस्तक को उपयोगी पाएँगे। हमारे शासन ने ‘भारतीय अन्तरराष्ट्रीय अंकों’ को ‘राष्ट्रीय अंकों’ के रूप में स्वीकार किया है। फिर भी, कइयों के दिमाग़ में इन ‘अन्तरराष्ट्रीय अंकों’ के बारे में आज भी काफ़ी भ्रम है–विशेषतः हिन्दी-जगत में। इस भ्रम को सही ढंग से दूर करने के लिए हमारे शासन की ओर से अभी तक कोई पुस्तक प्रकाशित नहीं हुई है। ‘भारतीय अन्तरराष्ट्रीय अंकों’ की उत्पत्ति एवं विकास को वैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुत करनेवाली यह हिन्दी में, सम्भवतः भारतीय भाषाओं में, पहली पुस्तक है। भारतीय अंक-पद्धति की कहानी एक प्रकार से लेखक की इस माला में प्रकाशित भारतीय लिपियों की कहानी की परिपूरक कृति है। अतः इसे भारतीय इतिहास और पुरालिपि-शास्त्र के पाठक भी उपयोगी पाएँगे।
Amir Khusro : Vyaktittva, Chintan Aur Sampoorna Hindavi Kalam
- Author Name:
Zakir Hussain Zakir
- Book Type:

- Description: अमीर ख़ुसरो जिन्हें दो बड़ी सभ्यताओं के सम्मिलन का प्रतिनिधि व्यक्तित्व कहा जाता है; और चौदहवीं सदी में रचा गया जिनका कलाम आज भी अपनी जगह कायम है, वे एक बड़े कवि तो थे ही, राजनीतिज्ञ, संगीतकार और भाषाविद भी थे। ‘अमीर ख़ुसरो : व्यक्तित्व, चिन्तन और सम्पूर्ण हिन्दवी कलाम’ पुस्तक उनके व्यक्तित्व और कृतित्व की लगभग सम्पूर्ण प्रस्तुति है। पुस्तक दो खंडों में विभक्त है। पहले खंड में खुसरो की भाषा और उनकी हिन्दवी रचनाओं पर शोधपरक विवेचना के साथ उनकी रचना ‘ख़ालिक़ बारी’ और उससे जुड़े विवादों पर विचार, तसव्वुफ़ की उनकी धारणा और उनके व्यक्तित्व में तसव्वुफ़ की भूमिका पर केन्द्रित शोध के अलावा जिन सुल्तानों और सूबेदारों के आश्रय में वे रहे उनकी जानकारी भी विस्तारपूर्वक दी गई है। अमीर ख़ुसरों ने अपने जीवनकाल में बारह युद्ध-अभियानों में भाग लिया था, इस खंड में उनकी चर्चा भी ऐतिहासिक संदर्भों के साथ की गई है। एक संगीत-सृजक के रूप में उन्होंने जहाँ नए रागों की रचना की, वहीं नए संगीत वाद्यों का भी आविष्कार किया। एक विस्तृत आलेख इस विषय पर भी इसी खंड में शामिल है। किताब के दूसरे हिस्से में उनके अब तक उपलब्ध हिन्दवी काव्य को प्रस्तुत किया गया है। उनकी पहेलियों, कहमुकरियों, दोहों, कविताओं, गीतों, कव्वालियों, ग़ज़लों और ‘ख़ालिक़ बारी’ को यहाँ आप एक साथ देख सकते हैं। कहने की जरूरत नहीं कि अमीर खुसरो के साथ यह पुस्तक उनके समय, तत्कालीन इतिहास और उस दौर की सांस्कृतिक विशेषताओं पर भी प्रकाश डालती है।
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