The Stranger
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अल्बेयर कामू कामू का जन्म 7 नवंबर, 1913 को फ्रांस के तत्कालीन उपनिवेश अल्जी़रिया के मांडोवी नामक नगर में हुआ था। आधुनिक फ्रेंच साहित्य के वे प्रमुख हस्ताक्षर और चिन्तक थे। उनके और ज्याँ-पाल सार्त्र के बीच हुई बहस को बीसवीं शताब्दी की सबसे महत्त्वपूर्ण साहित्यिक-वैचारिक बहसों में शुमार किया जाता है। उन्हें 1957 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था। उपन्यास: प्लेग, सुखी मृत्यु, वह पहला आदमी निर्वासन और आधिपत्य। कहानी-संग्रह: कालिगुला, न्यायप्रिय, अर्थदोष (नाटक) उनकी चर्चित कृतियाँ हैं। कामू के तर्क बिखरे हुए ज़रूर थे लेकिन व्यवहारिक थे इसीलिए किसी सैद्धांतिक पार्टीबद्धता में उनका मन नहीं लगा। दरअसल वे स्वभाव से पार्टीबद्ध व्यक्ति थे ही नहीं। संभवतः इसी कारण वे अल्जीरिया के श्रमिकों और आदिवासी-मुसलमानों के साथ दिली रिश्ता क़ायम कर सके। 1960 को कार दुर्घटना में उनकी 47 साल की आयु में मृत्यु हो गई।
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अल्बेयर कामू कामू का जन्म 7 नवंबर, 1913 को फ्रांस के तत्कालीन उपनिवेश अल्जी़रिया के मांडोवी नामक नगर में हुआ था। आधुनिक फ्रेंच साहित्य के वे प्रमुख हस्ताक्षर और चिन्तक थे। उनके और ज्याँ-पाल सार्त्र के बीच हुई बहस को बीसवीं शताब्दी की सबसे महत्त्वपूर्ण साहित्यिक-वैचारिक बहसों में शुमार किया जाता है। उन्हें 1957 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था। उपन्यास: प्लेग, सुखी मृत्यु, वह पहला आदमी निर्वासन और आधिपत्य। कहानी-संग्रह: कालिगुला, न्यायप्रिय, अर्थदोष (नाटक) उनकी चर्चित कृतियाँ हैं। कामू के तर्क बिखरे हुए ज़रूर थे लेकिन व्यवहारिक थे इसीलिए किसी सैद्धांतिक पार्टीबद्धता में उनका मन नहीं लगा। दरअसल वे स्वभाव से पार्टीबद्ध व्यक्ति थे ही नहीं। संभवतः इसी कारण वे अल्जीरिया के श्रमिकों और आदिवासी-मुसलमानों के साथ दिली रिश्ता क़ायम कर सके। 1960 को कार दुर्घटना में उनकी 47 साल की आयु में मृत्यु हो गई।
Book Details
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ISBN9789390540358
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Pages158
-
Avg Reading Time5 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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1960 में हुई एक कार दुर्घटना में जब कामू की मृत्यु हुई तो उनके हाथ में थमे ब्रीफकेस में इस उपन्यास की पांडुलिपि थी; काफी कुछ अधूरी और असंशोधित।
कामू की पत्नी ने इसे प्रकाशित नहीं होने दिया था। कई वर्ष बाद 1993 में अपनी माँ के निधन के बाद कामू की पुत्री कैथरीन ने ‘पहला आदमी’ बिना किसी संशोधन के प्रकाशित करने का निर्णय लिया। चूँकि लिखने के दौरान कामू द्वारा पांडुलिपि पर अंकित टिप्पणियाँ और परिवर्तन के लिए स्वयं को दी गई हिदायतें भी प्रकाशित की गईं इसलिए यह उपन्यास कामू के शोधार्थियों के लिए अमूल्य दस्तावेज़ और विश्व साहित्य की एक महत्त्वपूर्ण घटना साबित हुआ। ‘पहला आदमी’ ने कामू के उन आलोचकों को भी शान्त कर दिया जो कहते थे कि ‘प्लेग’ के बाद कामू की सर्जनात्मक क्षमता चुक गई थी। ‘पहला आदमी’ में अपने पिता की खोज करता हुआ चालीस वर्षीय नायक जाक कारमॅरी अपने अतीत पर एक गहरी निगाह डालता है और अपनी अभाव से भरी ज़िन्दगी में भी जीवित रहने की गहरी इच्छा का परिचय देता है। कामू इस कृति में आत्मकथ्य के ज़रिए ग़रीबी का सामाजिक इतिहास रचते चले जाते हैं।
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इस उपन्यास का शीर्षक ‘पहला आदमी’—चर्चा का विषय रहा है। कौन है यह पहला आदमी—पिता, पुत्र या वह अल्जीरिया निवासी, फ्रांसीसी या अरब या कोई भी वह निर्धन आदमी जिसकी मृत्यु के साथ उसका नाम-निशान तक मिट जाता है, कुछ शेष नहीं रहता? यह उपन्यास आपको भी यह उत्तर ढूँढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।
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"1000 भारत ज्ञान प्रश्नोत्तरी—संजय कुमार द्विवेदी किसी भी विषय की बढ़िया-से-बढ़िया पठन-सामग्री को उसके विस्तृत कलेवर के साथ पढ़ना और उसे याद करना कठिन होता है, परंतु यदि उसी सामग्री को प्रश्नोत्तर रूप में प्रस्तुत किया जाए तो वह अत्यंत रुचिकर हो जाती है और उसे सहजता से याद भी किया जा सकता है। भारत जैसे विशाल एवं विविधतापूर्ण देश को 1000 प्रश्नों में समेट पाना निश्चय ही जोखिम भरा काम है। वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का अपना एक दायरा होता है। इस स्थिति का आकलन करते हुए इस पुस्तक में प्रश्नों का चयन एवं प्रस्तुतीकरण इस तरह किया गया है कि पाठकों के समक्ष अधिक-से-अधिक जानकारी पहुँचाई जा सके। पुस्तक में शामिल किए गए अधिकतर प्रश्न ऐसे हैं, जिनमें कई उप-प्रश्न और उनके उत्तर छिपे हुए हैं। प्रस्तुत पुस्तक को यथासंभव ज्ञानवर्धक एवं रोचक बनाने की कोशिश की गई है। प्रश्नों का चयन करते समय प्रत्येक विषय के हर पहलू को छूने की कोशिश की गई है। पुस्तक संतुलित हो, इसका भी हर संभव प्रयास किया गया है। आशा है, भारत को भलीभाँति समझने में पुस्तक पाठकों की भरपूर मदद तो करेगी ही, भरपूर ज्ञानवर्द्धन भी करेगी। "
Padchihna Bulate Hain
- Author Name:
Devendra Swarup
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प्रो. देवेंद्र स्वरूप—इतिहासकार, पत्रकार, अध्यापक, चिंतक, लेखक—72 वर्ष के सार्वजनिक जीवन में हजारों लोगों से संपर्क; सभी से आत्मीय संबंध पर उनमें से कुछ से अधिक प्रभावित। उनके द्वारा लिखे गए कुछ संस्मरणों में किसी व्यक्ति पर ही नहीं, वरन् तात्कालिक परिस्थितियों एवं कालखंड पर भी टिप्पणी होती हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की व्यक्तित्व-निर्माण की पद्धति की झलक और इस निर्माणशाला से निकले लोगों द्वारा खड़े किए गए कुछ प्रकल्पों की जानकारी। सामाजिक एवं राष्ट्रीय कार्यों में जीवन खपाने वाली कुछ विभूतियों का परिचय। पठनीय ग्रंथ।
Prabhat Khabar : Prayog Ki Kahani
- Author Name:
Anuj Kumar Sinha
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इस पुस्तक के जरिए यह बताने का प्रयास किया गया है कि दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है। अगर टीमवर्क हो, वर्क कल्चर हो, विजन हो, बेहतर लीडरशिप हो और लोगों में काम करने का जज्बा हो तो मृतप्राय संस्था को भी पुनर्जीवित किया जा सकता है, उसे एक बेहतरीन संस्था बनाया जा सकता है। ‘प्रभातखबर’अखबार की 30 वर्षों की यात्रा के संदर्भ में लिखी इस पुस्तक में इसी बात का उल्लेख है कि वे कौन से कारण हैं, जिनके बल पर एक समय बंद होता प्रभात खबर (स्थानीय/क्षेत्रीय अखबार) देश के शीर्ष हिंदी अखबारों में शामिल हो गया। पुस्तक में इस बात का जिक्र है कि कैसे एक संस्था को खड़ा किया जा सकता है। इसके लिए प्रभात खबर में क्या-क्या प्रयोग किए गए। चाहे वह संपादकीय प्रयोग हो या गैर-संपादकीय प्रयोग। प्रभात खबर की यात्रा में साधन के अभाव में अनेक मौके आए, जब लगा कि अखबार आज बंद हो गया कल, लेकिन ये सभी आशंकाएँ गलत निकलीं। पूरी किताब में उदाहरणों के बल पर यह बताने का प्रयास किया गया है कि एक स्थानीय और क्षेत्रीय अखबार भी अपने कंटेंट और अनूठे प्रयोग केबल पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हो सकता है।
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