AAJ KI BAAT KAREN
Author:
Helle HellePublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction0 Ratings
Price: ₹ 320
₹
400
Available
हेल्ले हेल्ले का जन्म 1965 में डेनमार्क के चौथे सबसे बड़े द्वीप लोलैंड के नगर नाकस्कॉव में हुआ था। उनका पालन-पोषण द्वीप लोलैंड के ही फेरी शहर रॉड्बी (Rødby) में हुआ था, जहाँ से नौकाएँ पुटगार्डन (जर्मनी) जाती हैं। साहित्य के प्रभाव में हेल्ले हेल्ले बचपन से थीं और अधिकांश समय पुस्तकालय में बिताती थीं। यह आभास उन्हें बहुत जल्दी ही हो गया था कि वह खुद भी एक लेखिका बनेंगी। रॉड्बी में करने के लिए बहुत कुछ नहीं था, इसलिए वे वयस्क होने पर कोपनहेगन शिफ्ट हो गईं। 1985 में उन्होंने कोपनहेगन विश्वविद्यालय में साहित्य अध्ययन में दाखिला लिया और एक लेखिका के रूप में उभरने लगीं।
साहित्य में स्नातक करने के पश्चात् उन्होंने 1991 में राइटर्स स्कूल, कोपनहेगन से स्नातक किया। उनकी पहली पुस्तक वर्ष 1993 में प्रकाशित हुई और तब से ही उनका लोकप्रिय लेखन प्रशंसा और आलोचना दोनों का एक चर्चित विषय रहा है। उन्होंने अभी तक कई कहानियों के अलावा वयस्क साहित्य पर 10 उपन्यास और बाल साहित्य पर एक पुस्तक लिखी है।
हेल्ले हेल्ले अनेक साहित्यिक पुरस्कारों से सम्मानित हुई हैं डेनिश क्रिटिक्स पुरस्कार, डेनिश अकादमी का बीट्राइस पुरस्कार, पी.ओ. एनक्विस्ट अवार्ड और डेनिश कला परिषद् का प्रतिष्ठित लाइफटाइम अवार्ड। उनकी कहानियों और उपन्यासों का 22 भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। उपन्यास Dette Burde Skrives I Nutid (...आज की बात करें) के लिए उनको प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कार गोल्डन लौरेल से नवाजा गया है।
ISBN: 9789390923021
Pages: 184
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Thakur Jagmohan Singh
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- Description: आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने ठाकुर जगमोहन सिंह के साहित्य के वैशिष्ट्य को लक्ष्य करते हुए उचित ही लिखा था कि भारतेन्दु और अन्य कवियों-लेखकों की ‘दृष्टि और हृदय की पहुँच मानव-क्षेत्र तक ही थी,’ लेकिन ‘ठाकुर जगमोहन सिंह ने नरक्षेत्र के सौन्दर्य को प्रकृति के और क्षेत्रों के सौन्दर्य के मेल में देखा है।’ ठाकुर जगमोहन सिंह की रचनाओं के इस संकलन से गुज़रते हुए यह अनुभव किया जा सकता है कि उन्नीसवीं सदी के पुनर्जागरण का मानवतावाद कोरे यथार्थवादी मुहावरे में ही आकार नहीं ले रहा था, बल्कि किंचित् रोमैंटिक स्वर में भी ध्वनित हो रहा था। भारतीय आधुनिकता का यह भी एक उल्लेखनीय पहलू है, जिसकी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। महत्त्वपूर्ण यह भी है कि रोमैंटिक स्वर सिर्फ़ काव्य तक सीमित न रहकर ठाकुर जगमोहन सिंह की ‘श्यामास्वप्न’ जैसी गद्य-कृति से भी प्रकट हो रहा था। दरअसल उनकी संवेदनात्मक बनावट में रोमैंटिक भावबोध की मौजूदगी ऐसी अतिक्रामक है कि उनका गद्य भी, उपन्यास के कलेवर में गठित होने की जद्दोजहद के बावजूद, ख़ास काव्यात्मक मालूम पड़ता है। सच पूछा जाए तो वे हिन्दी में काव्यात्मक गद्य और रोमांसवाद के प्रणेता हैं। ठाकुर जगमोहन सिंह की रचनात्मक संवेदना में प्रकृति के साथ ही प्रेम की उपस्थिति का केन्द्र स्थानीय है। यह प्रेम और उदग्र ऐन्द्रिकता, जिसकी अभिव्यक्ति रीतिकाव्य में रूढ़िवादी तरीक़े से मिलती है, ठाकुर जगमोहन सिंह के यहाँ अकुंठ और उन्मुक्त सहजता में उन्मोचित है। यहाँ रीति-चेतना का समाहार और प्रकृति-चेतना का समारम्भ घटित होता है। इस तरह ठाकुर जगमोहन सिंह का साहित्य भारतेन्दु-युगीन सृजनशीलता के अनखुले आयामों की ओर इंगित करता है। रमेश अनुपम ने बहुत जतन और परिश्रम से ठाकुर जगमोहन सिंह की लगभग गुम हो चुकी रचनाओं को सहेज-सकेलकर यह संचयन तैयार किया है। निस्सन्देह, इसके प्रकाशन से हिन्दी में आधुनिक साहित्य के आरम्भिक दौर को जानने-समझने में अध्येताओं को मदद मिलेगी। साथ ही इससे अपनी परम्परा की पहचान अपेक्षाकृत समावेशी और अनेकाग्र रूप में स्थापित करने की दृष्टि विकसित हो सकेगी। —जय प्रकाश
Ekta-Akhandata Ki Kahaniyan
- Author Name:
Acharya Mayaram 'Patang'
- Book Type:

- Description: "‘एकता-अखंडता’ की कहानियाँ आपके समक्ष प्रस्तुत हैं। टी.वी. चैनलों के हास्य और मनोरंजन के कार्यक्रम, जो कुछ जनता के समक्ष परोस रहे हैं, उसके परिणामस्वरूप समाज का युवा वर्ग दिशाहीन होता जा रहा है। चोरी, डकैती और छेड़छाड़ की घटनाएँ निरंतर बढ़ती जा रही हैं। एक-दो नहीं, अनेक रेप कांड सभ्य नागरिकों, देशभक्तों के लिए घोर चिंता का विषय हैं। आम लोग न समाचार सुनते हैं, न सत्साहित्य पढ़ते हैं। प्रायः घरों में सीरियल ही देखते हैं। चरित्र-निर्माण तथा राष्ट्रभक्ति सिखाने की कोई व्यवस्था दिखाई नहीं देती। छोटी-छोटी बातों पर युवक गोली चला देते हैं। चाकूबाजी की घटनाएँ तो सामान्य हैं। राजनीति के खिलाड़ी सामान्य घटनाओं को राजनीतिक रंग देकर सांप्रदायिक झगड़े खड़े कर देते हैं। कोई जातीय रंग देते हैं, उच्च वर्ग और दलित वर्ग का संघर्ष खड़ा कर देते हैं, कारण वही है कि राष्ट्रीयता की भावना का पोषण करनेवाला साहित्य भी सीमित ही उपलब्ध है। हर समुदाय अपने जातीय हित के लिए आंदोलन के लिए तैयार है। कहीं जाट अपनी जाति को आरक्षण दिलवाने के लिए कटिबद्ध हैं तो कहीं पटेल विद्रोह पर उतर आए हैं। उनके सामने न सरकार और न्यायालय की विवशता है, न राष्ट्र की साख का प्रश्न है। युवाओं को देश की एकता-अखंडता की प्रेरणा देने का यह एक प्रयास है। आशा है, युवा वर्ग इन नई-पुरानी कहानियों से कुछ सीखेगा। "
Bahas Ke Muddey
- Author Name:
Shriprakash Mishra
- Book Type:

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Description:
इस पुस्तक में आजकल चल रहे बहस के मुद्दों पर लेख संकलित है। ये मुद्दे लम्बे समय से बने रहे हैं, किन्तु केन्द्र में अभी आए हैं। 2014 से पहले राजनीति पर समाज हावी रहता था, उसके बाद समाज पर राजनीति हावी हो गई है। इसका आरम्भ आपातकाल के दौरान ही हो गया था पर वर्चस्व अब बना है। जब समाज हावी था, तब समाजवाद निश्चित अर्थव्यवस्था, धर्मनिरपेक्षता, समानता, स्वतंत्रता, दलितवाद, पिछड़ावाद, आदिवासी विमर्श, स्त्रीवाद आदि का बोलबाला था। (इसमें आदिवासी विमर्श का पूरा विकास नहीं हो पाया था, अब हो रहा है।) अयोध्या की घटना के बाद सांस्कृतिक राष्ट्रवाद आया और उससे जुड़े तमाम दीगर मुद्दे। अब माना जाने लगा है कि कोई एक बात वर्चस्व बनाकर चल सकती है तो वह है ‘हिन्दुत्व’। उसके लिए निर्वचन और उत्तर सत्य का सहारा लिया जा रहा है। भुला दिया जा रहा है कि इस बहुलता वाले देश में कोई बात देशकाल-परिस्थिति के अनुसार प्रमुख तो हो सकती है, ‘डॉमिनेंट’ नहीं।
इधर सरकार बदलने के बाद जो बहस के मुद्दे पीछे चले गए थे, वे फिर केन्द्र में आ गए हैं और कुछ नए मुद्दे उभर आए हैं। ऐसे ही नौ मुद्दे, जैसे हिन्दुइज्म, हिन्दुत्व, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, सामाजिक अभियंत्रण, उत्तर सत्य का प्रभाव, विकास का गुजरात मॉडल, जनजातीय विमर्श का आधार वग़ैरह की चर्चा इस पुस्तक में है। वहाँ जो तर्क-वितर्क रखे गए हैं, वे पाठकों को प्रबुद्ध तो करेंगे ही, अपना पक्ष चुनने में भी मदद करेंगे। उम्मीद है, यह पुस्तक प्रबुद्ध और सामान्य दोनों ही तरह के पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।
Vidyalaya Utsav
- Author Name:
Acharya Mayaram 'Patang'
- Book Type:

- Description: "‘उत्सव’ जीवन में उत्साह का संचार करते हैं। जिस समाज में उत्सव जितने जोश और आनंद से मनाए जाते हैं, वह समाज उतना ही जीवंत माना जाता है। भारतवर्ष अत्यंत प्राचीन देश है। यहाँ अवतारों, वीरों, धर्मगुरुओं की संख्या सहस्रों तक जाती है। विद्यालयों में सभी की जयंती मनाना संभव नहीं है। अनेक पर्व ऋतु-परिवर्तन से जुड़े हैं, अनेक पर्व किसी के बलिदान या महान् घटनाओं से जुड़े हैं। सच तो यह है कि हर तिथि और हर दिन का कुछ-न-कुछ महत्त्व है। हमारे विद्यालयों में अधिकांश शिक्षक अनेक उत्सवों की जानकारी से ही अनभिज्ञ होते हैं। कुछ जानकारी होते हुए भी बोलने में संकोच करते हैं। कई नए शिक्षक बोलना चाहते हैं, परंतु उन्हें तत्संबंधी विषय की जानकारी उपलब्ध नहीं होती। इन सब कारणों पर विचार करके यह आवश्यकता अनुभव हो रही थी कि एक ऐसी पुस्तक होनी चाहिए, जो वर्ष भर में मनाए जानेवाले प्रमुख त्योहारों की जानकारी शिक्षकों तथा छात्रों को उपलब्ध करा सके। विविध कक्षाओं के स्तर के अनुसार शिक्षक इस पुस्तक की सहायता से छात्रों को लिखवाकर या याद करवाकर सभा में बोलने के लिए तैयारी करवा सकते हैं। ज्ञातव्य है कि ये उत्सव वे नहीं हैं, जो विद्यालयों में मनाए जाते हैं, बल्कि ये ऐसे उत्सव हैं, जो मनाए जाने चाहिए। आप अपने स्थान, स्तर, विश्वास तथा अनुकूलता के आधार पर जो मनाना चाहें, मना सकते हैं। इस कार्य में पुस्तक आपकी सहायता करेगी। आशा है, शिक्षक एवं छात्र इससे लाभान्वित होंगे। "
Shubh Vivah
- Author Name:
Rajni Borar
- Book Type:

- Description: Indian weddings are known for their celebration of tradition, rituals and ceremonies. The book with its distinctive narrative style outlines, compiles, streamlines and simplifies the explanation of rituals and their significance in a memorable way to turn the wedding into an unforgettable event for you, your family and your guests. The book with its well written reader friendly step by step planning guide, is detailing every aspect of wedding from selecting a hall to a mehndi design. In addition, the readers will find a special section on Parotna, the hindi word for assimilation of the new bride/groom into the family fold. There is even a practical section on Jewellery, registration of marriage and other events. This book effectively translates old traditions into modern day in a chronological order, all the while taking a refreshingly scathing look at the ostentatiousness of Indian weddings. The usefulness and immense practicality of the book becomes self evident as the wedding moves forward and culminates into a memorable saga for all.
Let The Heart Lead
- Author Name:
Priyal Bansal
- Book Type:

- Description: “There is mindfulness inside you; all it takes is a little exploring.”- Priyal Bansal Forgetting the hustle-bustle of the regular world, let’s dive inside a deeper realm that has so many intriguing mysteries to offer. Our heart has a lot to teach us. This book will open your mind towards the untravelled purpose, the undetected significance and the unexplored value which lies within us and around us. LET THE HEART LEAD has everything it takes to make you acknowledge the spirituality that resides in all of our hearts. From “Self Ishq” to “Spirituality”, from Spirit Animals to Resonance and from soul mates to twin flames, this book has it all. So get ready to dive deep within yourself and the universe within the book talking about concepts that feel like pure magic.
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