Uttrakhand Ki Lok Evam Prayavaran Gathayen
(0)
Author:
Prabhat Kumar UpretiPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Folktales₹
400
320 (20% off)
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‘उत्तराखंड की लोक एवं पर्यावरण गाथाएँ' एक अनूठी पुस्तक है। प्रभात कुमार उप्रेती ने सहज बोध, अनुसन्धान और कल्पना के संयोग से इन कथाओं को आकार दिया है। संकलन की अधिकांश गाथाएँ या कथाएँ लोक-जीवन में व्याप्त अक्षय निधि की देन हैं। लोककथाओं की विशेषता है कि वे स्थान और समय के बीच विचित्र रीति से संचरण करती हैं। कई बार भाषा, घटना और पत्रों में अनायास संशोधन होता रहता है। अक्षुण्ण रहता है तो इन कथाओं का मन्तव्य। प्रभात कुमार उप्रेती ने उत्तराखंड के कण-कण से इन कथाओं का संचयन किया है। मनोरंजन, नीति, रहस्य, रोमांच, रोचकता और जीवनबोध का तत्त्व समेटे हुए ये कथाएँ पाठक के मन को गहरे से प्रभावित करती हैं। विशेष यह है कि हम चाहें तो समकालीन जीवन से जोड़कर भी इनका नया भाष्य कर सकते हैं। इनमें पुराण, प्रकृति और परम्परा की आवाजाही सहज भाव से होती है। लोककथाओं के साथ पर्यावरण कथाएँ हैं, जो लेखक की रचनाशीलता और वैचारिक पक्षधरता को रेखांकित करती हैं। समग्रतः मनोरंजन और जीवनादर्शों से युक्त यह पुस्तक निश्चित रूप से पाठकों को प्रभावित करेगी। उत्तराखंड की आंचलिक उपस्थिति (भाषा, परिवेश और कहन के रूप में) इसे और विशिष्ट बनाती है।
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‘उत्तराखंड की लोक एवं पर्यावरण गाथाएँ' एक अनूठी पुस्तक है। प्रभात कुमार उप्रेती ने सहज बोध, अनुसन्धान और कल्पना के संयोग से इन कथाओं को आकार दिया है।
संकलन की अधिकांश गाथाएँ या कथाएँ लोक-जीवन में व्याप्त अक्षय निधि की देन हैं। लोककथाओं की विशेषता है कि वे स्थान और समय के बीच विचित्र रीति से संचरण करती हैं। कई बार भाषा, घटना और पत्रों में अनायास संशोधन होता रहता है। अक्षुण्ण रहता है तो इन कथाओं का मन्तव्य।
प्रभात कुमार उप्रेती ने उत्तराखंड के कण-कण से इन कथाओं का संचयन किया है। मनोरंजन, नीति, रहस्य, रोमांच, रोचकता और जीवनबोध का तत्त्व समेटे हुए ये कथाएँ पाठक के मन को गहरे से प्रभावित करती हैं। विशेष यह है कि हम चाहें तो समकालीन जीवन से जोड़कर भी इनका नया भाष्य कर सकते हैं। इनमें पुराण, प्रकृति और परम्परा की आवाजाही सहज भाव से होती है।
लोककथाओं के साथ पर्यावरण कथाएँ हैं, जो लेखक की रचनाशीलता और वैचारिक पक्षधरता को रेखांकित करती हैं।
समग्रतः मनोरंजन और जीवनादर्शों से युक्त यह पुस्तक निश्चित रूप से पाठकों को प्रभावित करेगी। उत्तराखंड की आंचलिक उपस्थिति (भाषा, परिवेश और कहन के रूप में) इसे और विशिष्ट बनाती है।
Book Details
-
ISBN9788183616256
-
Pages208
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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किसी समाज में प्रचलित लोककथाएँ उसकी सभ्यता-संस्कृति की जड़ों तक पहुँचने का सूत्र होती हैं। अतीत में प्रत्येक पीढ़ी अपनी पूर्ववर्ती पीढ़ी से सुनकर और परवर्ती पीढ़ी को सुनाकर समाज के अनुभव और ज्ञान की इस संचित निधि को सुरक्षित रखती आई। लेकिन आधुनिक तौर तरीकों के प्रसार के साथ-साथ आम जनजीवन जैसे-जैसे बदलता गया वैसे-वैसे सदियों पुरानी यह परम्परा कमजोर पड़ती गई। ऐसे में लोककथाओं को वाचिक के भरोसे छोड़ देने के बजाय लिखित रूप में संग्रहीत-प्रकाशित करना आवश्यक हो गया। इस संदर्भ में युवा लेखक जोराम यालाम नाबाम की किताब ‘तानी कथाएँ : अरुणाचल के तानी आदिवासी समाज की विश्वदृष्टि’ एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
जोराम ने न केवल अरुणाचल प्रदेश के तानी समाज की लोककथाओं को इकट्ठा किया है बल्कि उनको आधार बनाकर इस आदिवासी समाज के विश्वासों, परम्पराओं, आचार-विचार, खान-पान आदि पक्षों का युक्तिसंगत विश्लेषण कर तानी समाज के जीवन-दर्शन को प्रस्तुत किया है। जोराम बतलाती हैं कि प्रकृति के समस्त चराचर के साथ अभिन्नता का भाव तानियों की विश्वदृष्टि की विशेषता है जो उनके दैनंदिन जीवन में सहज दिखाई देती है। जिसे अधिकतर गैर आदिवासी समाजों में देख पाना मुश्किल है। इन कथाओं से तानी समाज के धार्मिक विश्वासों का संकेत भी मिलता है जिनमें प्रकृति को प्रमुखता दी गयी है। धर्म को सांगठनिक या सांस्थानिक स्वरूप देने से परहेज किया गया है। पूरी प्रकृति पूजनीय है इसलिए अलग से किसी के लिए मंदिर निर्माण या पूजा आदि का विधान नहीं बनाया गया। तानी समाज की ये बातें न सिर्फ जानने योग्य हैं बल्कि मानव सभ्यता के संकटग्रस्त वर्तमान के संदर्भ में एक विश्वसनीय विकल्प का आधार तैयार करने वाली हैं। एक अत्यंत पठनीय और विचारणीय किताब!
Tani Kathayein : Arunachal Ke Taani Aadivasi Samaj Ki Vishvadrishti
Joram Yalam Nabam
20% off₹ 299
₹ 239.2
Available
Shekhchilli Ki Anokhi Duniya
- Author Name:
Ashok Maheshwari
- Book Type:

- Description:
शेखचिल्ली एक ऐसा कथा-नायक है जो आमलोक-जीवन के संघर्षों से बार-बार उबरता है और बार-बार उन्हीं संघर्षों में जुत जाता है। उसमें ईमानदारी है, निष्ठा है, मर्यादा है, परिस्थितिजन्य विवेक है, लगन और उत्साह है और इन सबसे बड़ी बात यह भी है कि वह अपने वर्तमान में जीता है। अतीत की स्मृतियों को उलीचता हुआ, वर्तमान की राह बनाता हुआ यह पात्र कभी भविष्य की चिन्ता में डूबता-उतराता नहीं है। जीवन के उतार-चढ़ाव में संयत रहते हुए मनमौजी जीवन जीता हुआ शेखचिल्ली कई बार हमें मूर्ख या बेवकूफ़ प्रतीत होता है, किन्तु उसकी अजीबो-ग़रीब हरकतों में समय की ऐसी समझ समाई रहती है कि पाठक उसकी सराहना किए बिना नहीं रह सकता। ये कहानियाँ शेखचिल्ली की कारस्तानियों का मनोरंजक विस्तार हैं। इस संग्रह में शेखचिल्ली की अलग-अलग कहानियाँ किसी माला में गूँथे गए मनकों की तरह पिरोई गई हैं। इस कथा-संग्रह की विशेषता है कि शेखचिल्ली के जीवन के कालखंडों को दर्शाती कथाओं को इसमें इस तरह रखा गया है कि उनका अलग अस्तित्व बना रहे और उसके जीवन की विकास-यात्रा की निरन्तरता का भी पता चलता रहे। आज भी उसकी कहानियाँ जहाँ हमें हँसाती हैं, वहीं जुल्म का सामना करने का साहस भी प्रदान करती हैं। रोचक और सरल भाषा में लिखी गई ये कहानियाँ पाठकों का भरपूर मनोरंजन करने का वादा करती हैं और दावा भी कि कोई है जो इन्हें पढ़कर हँसे बिना रह सके!
Tenaliram Ki Anokhi Duniya
- Author Name:
Ashok Maheshwari
- Book Type:

- Description:
दक्षिण भारत के गुंटूर ज़िले के गली पाडु नामक क़स्बे में एक सामान्य गृहस्थ के घर में तेनालीराम का जन्म हुआ था। उसके माता-पिता बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति के थे जिसके कारण उन्होंने अपने पुत्र का नाम रामलिंगम रखा। तेनालीराम यानी रामलिंगम अभी बहुत छोटा था, तभी उसके पिता का निधन हो गया। रामलिंगम की माता पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। वे अपनी ससुराल ‘गली पाडु’ से अपने भाई के पास लौट आईं। उनका भाई ‘तेनाली’ नामक क़स्बे में रहता था। तेनाली में रामलिंगम सामान्य बच्चों की तरह ही खेलता-पढ़ता हुआ बड़ा होने लगा। उसे गुरु के पास शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेजा गया, उस समय किसी ने सोचा न था कि अपनी मेधा के बल पर तेनालीराम ऐसी ख्याति अर्जित करेगा कि सदियों, सहस्त्राब्दियों तक लोग उसकी बुद्धि, न्यायप्रियता और हाज़िर जवाबी की कहानियाँ कहते रहेंगे। अपनी कुशाग्रबुद्धि और मिलनसारिता के गुणों के कारण तेनालीराम बचपन में ही लोगों के आकर्षण का केन्द्र हो गए थे। मूल नाम रामलिंगम तो था ही, गुरुकुल में उसे तेनाली वाला रामलिंगम कहा जाने लगा और बाद में यही तेनालीराम बन गए। तेनालीराम के बुद्धि-बल को लेकर इतनी किंवदन्तियाँ हैं जिनसे लगता है कि तेनालीराम जैसा कुशाग्र व्यक्ति दक्षिण भारत में न उनके पहले जन्मा था और न बाद में।
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