Ek Tha Zanskar : SuvaranKhudaiya Chiunton Ka Des
(0)
₹
550
₹ 440 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
अजय सोडानी प्रकृति की यात्रा करते हैं, लेकिन वे सिर्फ़ यात्रा नहीं करते—वे एक पक्षधर यात्रा करते हैं। एक ऐसी यात्रा जो प्रकृति के पवित्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, और यह जानने के लिए आरम्भ होती है कि मनुष्य ने प्रकृति की इतनी विराट सभ्यता के ठीक मुक़ाबले पर अपनी यह सभ्यता खड़ी की तो क्यों, जिसमें सब तरफ क्षरण ही क्षरण है। वे प्रकृति के वकील की हैसियत से अपना झोला उठाते हैं। यह यात्रा-कथा है जाँस्कर की जहाँ आज 2900 हेक्टेयर में खेती होती है और कुल जनसंख्या है 13773। लद्दाख का यह हिस्सा न तो हमलावरों की नज़र में ज़्यादा पड़ा, न भारत आने वाले मुसाफ़िरों की। इसलिए वह विकास की मार से भी बचा रहा, अपनी जीवन शैली और संस्कृति के साथ। रेत के नीचे से सोना खोदने वाले चींटे भी अपना काम करते रहे यानी यहाँ से जुड़ी कथाएँ भी दूर देश के सैलानियों को आकर्षित करती रहीं। मंथर गति में एक समूचा जीवन जीने वाले जाँस्कर का यह सफ़र जुलाई 2013 में किया गया, जिसके बाद यात्रावृत्तकार को कहना पड़ा कि ‘नवपाषाण युग जैसे अभी-अभी ही व्यतीत हुआ हो इधर से।’ हिमालय की बर्फ़ीली दुनिया के इस यात्रावृत्त में रोमांच जितना है, उतने ही इतिहास और संस्कृति के हवाले भी हैं, कथाएँ-उपकथाएँ भी हैं। अर्थात इस पुस्तक को पढ़कर जब आप अपनी दुनिया में लौटते हैं तो सिर्फ़ दृश्यों के, जोखिमों के, थकानों और आश्चर्यों के दृश्य आपके साथ नहीं होते, ढेरों नए तथ्य और तर्क भी होते हैं। साथ ही सफ़रगोई की वह ताज़गी, कहन की वह रवानी भी जो अजय सोडानी की अपनी ईजाद है।
Read moreAbout the Book
अजय सोडानी प्रकृति की यात्रा करते हैं, लेकिन वे सिर्फ़ यात्रा नहीं करते—वे एक पक्षधर यात्रा करते हैं। एक ऐसी यात्रा जो प्रकृति के पवित्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, और यह जानने के लिए आरम्भ होती है कि मनुष्य ने प्रकृति की इतनी विराट सभ्यता के ठीक मुक़ाबले पर अपनी यह सभ्यता खड़ी की तो क्यों, जिसमें सब तरफ क्षरण ही क्षरण है। वे प्रकृति के वकील की हैसियत से अपना झोला उठाते हैं।
यह यात्रा-कथा है जाँस्कर की जहाँ आज 2900 हेक्टेयर में खेती होती है और कुल जनसंख्या है 13773। लद्दाख का यह हिस्सा न तो हमलावरों की नज़र में ज़्यादा पड़ा, न भारत आने वाले मुसाफ़िरों की। इसलिए वह विकास की मार से भी बचा रहा, अपनी जीवन शैली और संस्कृति के साथ। रेत के नीचे से सोना खोदने वाले चींटे भी अपना काम करते रहे यानी यहाँ से जुड़ी कथाएँ भी दूर देश के सैलानियों को आकर्षित करती रहीं।
मंथर गति में एक समूचा जीवन जीने वाले जाँस्कर का यह सफ़र जुलाई 2013 में किया गया, जिसके बाद यात्रावृत्तकार को कहना पड़ा कि ‘नवपाषाण युग जैसे अभी-अभी ही व्यतीत हुआ हो इधर से।’ हिमालय की बर्फ़ीली दुनिया के इस यात्रावृत्त में रोमांच जितना है, उतने ही इतिहास और संस्कृति के हवाले भी हैं, कथाएँ-उपकथाएँ भी हैं। अर्थात इस पुस्तक को पढ़कर जब आप अपनी दुनिया में लौटते हैं तो सिर्फ़ दृश्यों के, जोखिमों के, थकानों और आश्चर्यों के दृश्य आपके साथ नहीं होते, ढेरों नए तथ्य और तर्क भी होते हैं। साथ ही सफ़रगोई की वह ताज़गी, कहन की वह रवानी भी जो अजय सोडानी की अपनी ईजाद है।
Book Details
-
ISBN9789360863098
-
Pages376
-
Avg Reading Time13 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Darakte Himalaya Par Dar-Ba-Dar
- Author Name:
Ajoy Sodani
- Book Type:

- Description:
अजय सोडानी की किताब 'दरकते हिमालय पर दर-ब-दर’ इस अर्थ में अनूठी है कि यह दुर्गम हिमालय का सिर्फ़ एक यात्रा-वृत्तान्त भर नहीं है, बल्कि यह जीवन-मृत्यु के बड़े सवालों से जूझते हुए वाचिक और पौराणिक इतिहास की भी एक यात्रा है। इस पुस्तक को पढ़ते हुए बार-बार लेखक और उनकी सहधर्मिणी अपर्णा के जीवट और साहस पर आश्चर्य होता है। अव्वल तो मानसून के मौसम में कोई सामान्य पर्यटक इस दुर्गम इलाक़े की यात्रा करता नहीं, करता भी है तो उसके बचने की सम्भावना कम ही होती है। ऐसे मौसम में ख़ुद पहाड़ी लोग भी इन स्थानों को प्रायः छोड़ देते हैं। लेकिन किसी ठेठ यायावर की वह यात्रा भी क्या जिसमें जोखिम न हो। इस लिहाज़ से देखें तो यह यात्रा-वृत्तान्त दाँतों तले उँगली दबाने पर मजबूर करनेवाला है। यात्रा में संकट कम नहीं है। भूकम्प आता है, ग्लेशियर दरक उठते हैं। कई बार तो स्थानीय सहयोगी भी हताश हो जाते हैं और इसके लिए लेखक की नास्तिकता को दोष देते हैं। फिर भी यह यात्रा न केवल स्थानीय जन-जीवन के कई दुर्लभ चित्र सामने लाती है, बल्कि हज़ारों फीट ऊँचाई पर खिलनेवाले ब्रह्मकमल, नीलकमल और फेनकमल जैसे दुर्लभ फूलों के भी साक्षात् दर्शन करा देती है। लेखक बार-बार पौराणिक इतिहास में जाता है और पांडवों के स्वर्गारोहण के मार्ग के चिह्न खोजता फिरता है। श्रुति-इतिहास से मेल बिठाते हुए पांडवों का ही नहीं, कौरवों का भी इतिहास जोड़ता चलता है। इस बारे में लेखक का अपना अलग ही दृष्टिकोण है। वह ‘महाभारत’ को इतिहास नहीं मानता, लेकिन यह भी नहीं मान पाता कि उसमें सब कुछ कपोल कल्पना है। इस अर्थ में देखें तो यह किताब इतिहास का भी यात्रा-वृत्तान्त है। आश्चर्य नहीं कि रवानी और मौज सिर्फ़ लेखक के योजना-निर्माण में ही नहीं, बल्कि इस वृत्तान्त की भाषा में भी है जिसे पढ़ने का सुख किसी औपन्यासिक रोमांच से भर देता है।
Irina Lok : Kachchh Ke Smriti Dweepon Par
- Author Name:
Ajoy Sodani
- Book Type:

- Description:
संस्कृति की लीक पर उल्टा चलूँ तो शायद वहाँ पहुँच सकूँ, जहाँ भारतीय जनस्मृतियाँ नालबद्ध हैं। वांछित लीक के दरस हुए दन्तकथाओं तथा पुराकथाओं में और आगाज़ हुआ हिमालय में घुमक्कड़ी का। स्मृतियों की पुकार ऐसी ही होती है। नि:शब्द। बस एक अदृश्य-अबूझ खेंच, अनिर्वचनीय कर्षण। और चल पड़ता है यायावर वशीभूत...दीठबन्द...। जगहों की पुकार गूगल गुरु की पहुँच से परे। गूगल मैप के अनुगमन से रास्ते तय होते हैं, जगहें मिलती हैं पर क्या उनसे राबता हो पाता है? जब चित्त संघर्ष, त्याग, आत्मा का अनुगामी हो जाए तब हासिल होती है आलम-ए-बेख़ुदी। जाग्रत होती हैं सुषुप्त स्मृतियाँ। खेंचने लगती हैं जगहें। घटित होता है असल रमण। अगस्त दो हज़ार दस में, ऐसी ही आलम-ए-बेख़ुदी में, हम पहुँचे थे हिमालय में—सरस्वती नदी के उद्गम स्थल पर। परन्तु आन्तरिक जगत में चपल चित्त अधिक ठहर थोड़े ही सकता है, सो बेख़ुदी के वे आलम भी अल्पकालिक ही होते हैं। इस वर्ष भी वही हुआ। हिमालय की ना-नुकुर से आजिज़ आ, हमने चम्बल के बीहड़ों में जाने का मन बनाया। जानकारियाँ जुट गईं, तैयारियाँ मुकम्मल हुईं। किन्तु घर से निकलने के ठीक पहले अनदेखे ‘रन’ का धुँधला-सा अक्स ज़ेहन में उभरा और मैं वशीभूत-सा चल दिया गुजरात की ओर। किसे ख़बर थी कि यह दिशा परिवर्तन अप्रत्याशित नहीं वरन् सरस्वती नदी की पुकार के चलते है, कि यह असल में ‘धूमधारकांडी’ अभियान की अनुपूरक यात्रा ही है। तो साहेब लोगो, आगे के सफहों पर दर्ज हर हर्फ दरअसल गवाह है उस परानुभूति का जिसके असर में मुझे शब्दों में मंज़र और मंज़रों में शब्द नज़र आए। या यूँ कहूँ कि प्रचलित किसी शब्द में इतिहास या परिपाटी में समूचा कालखंड अनुभूत हुआ यानी कि यह किताब यायावरी का ‘डबल डोज़’ है।
Darra-Darra Himalaya
- Author Name:
Ajoy Sodani
- Book Type:

- Description:
— ‘दर्रा-दर्रा हिमालय’ एक परिवार की हिमालय पर घुमक्कड़ी का वृत्तान्त है। ऐसा परिवार जो फ़ुर्सत के क्षणों में विदेशों की सैर के बजाय बर्फ़ ढँके इन पहाड़ों को वरीयता देता है। इंदौर के अजय सोडानी को हिमालय की सर्द, मनोहारी और जानलेवा वादियों से गहरा अनुराग है। काल्पनिक से लगनेवाले सौन्दर्यशाली पहाड़ों पर सपरिवार चढ़ाई और बर्फ़ के गगनचुम्बी शिखरों को दर्रा-दर्रा महसूस करने के दौरान प्रकृति के मनोरम स्पर्श से भीगे तन-मन कई बार मौत के मुक़ाबिल भी रहे, लेकिन ज़िन्दगी के पन्ने पर हौसले की स्याही से साहस की गाथा रचनेवाले मौत की परवाह कहाँ करते। जनश्रुतियों और पौराणिक ग्रन्थों में चर्चित स्थलों और मार्गों की सत्यता को परखने, हिमालय और वहाँ के जनजीवन के विलुप्तप्राय सौन्दर्य को निहारने-समझने की उत्कंठा में क़रीब बीस हज़ार फ़ीट की ऊँचाई वाले कालिंदी खाल पास को लाँघते हुए भी मौत का भय बर्फ़ की तरह पिघलता रहा। हिमालय की घाटियों में विचरती वायु में जाने ऐसा क्या था कि अजय बार-बार वहाँ लौटे और हर बार हिमालय की दी हुई एक नई चुनौती को स्वीकार किया। 'दर्रा-दर्रा हिमालय' अपनी राष्ट्रीय धरोहरों और प्रतीकों के प्रति अनुरक्ति वाले मानस की साहसिक यायावरी की गाथा तो कहती ही है, साथ ही रोज़-ब-रोज़ बढ़ती प्रदूषण की समस्या और पर्यावरण संरक्षण पर उसकी चिन्ता से भी रू-ब-रू कराती है।
Sarthwah Himalaya
- Author Name:
Ajoy Sodani
- Book Type:

- Description:
अजय सोडानी जानते हैं कि देखे हुए को दिखाया कैसे जाए। जैसे कि सफ़र के दौरान अगर एक कैमरा उनके हाथ में है तो एक भीतर भी है जो बाहर के चित्रों को शब्दों की शक्ल में कहीं अंकित करता चलता है। यही कारण है कि उनके यात्रा-वृत्तान्त, ख़ासकर जब वे हिमालय के बारे में लिखते हैं, सिर्फ़ हमारा ज्ञान नहीं बढ़ाते, अनुभूति की सतह पर हमें एक गहरा अनुभव देते हैं। एक समग्र यात्रा-अनुभव जिसमें भूगोल, इतिहास, परम्परा, लोक, समकालीन समाज, साहित्य, आत्मचिंतन, प्रकृति-चिन्ता, भविष्य-दृष्टि तथा रोमांच, सब एकसाथ शामिल होता है।
हिमालय को वे सागर, नदी, देवता, पशु आदि चराचर की तरह अपना और हम सबका सहोदर कहते हैं। उसकी विराटता के सम्मुख हमारे अस्तित्व की गौणता का एक विचित्र, सजीव लेकिन लोमहर्षक समीकरण बनता है जब उनके जैसा कोई हिमालय प्रेमी हमें गिरिराज के रहस्यों के सफ़र पर लेकर निकलता है।
‘दर्रा दर्रा हिमालय’ और ‘दरकते हिमालय पर दर-ब-दर’ के बाद हिमालय पर यह उनकी तीसरी किताब है। हिमालय जो बकौल उनके, पहली ही निगाह में देखने वाले के रक्त में घुलने लगता है, उसके अस्तित्व-बोध का अंश हो जाता है। उनके इन सफ़रनामों को पढ़कर भी हमारे साथ कुछ ऐसा ही घटित होता है।
Marjar Kosh
- Author Name:
Parashuram Shukla
- Book Type:

- Description:
मार्जार संस्कृत भाषा का शब्द है। इसका अर्थ होता है—बिल्ली। सामान्यतया बिल्ली से घरेलू बिल्ली का बोध होता है; किन्तु जीवविज्ञान में इस शब्द का विस्तृत अर्थों में प्रयोग किया गया है एवं इसके अन्तर्गत बाघ और सिंह से लेकर पालतू बिल्ली तक को सम्मिलित किया गया है। ये सभी जीव मार्जार परिवार के जीव कहलाते हैं। बाघ सहित मार्जार परिवार के अन्य जीवों की जानकारी पुस्तक के परिचय में संक्षेप में दी गई है। इनमें रोचक और रोमांचक तथ्यों के साथ ही ज्ञानवर्धक जानकारियाँ भी हैं, जो निश्चित रूप से जनसामान्य के लिए उपयोगी सिद्ध होंगी। इस पुस्तक का उद्देश्य लोगों में वन्यजीवों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना है। वन्यजीवों का सीधा सम्बन्ध वनों से है। वनों से वर्षा और वर्षा से जीवन। अर्थात् मानव का अस्तित्व बनाए रखने के लिए वन्यजीव आवश्यक हैं। हमारे देश में अधिकांश लोग ऐसे हैं, जिन्होंने बाघ, सिंह, तेंदुए आदि का नाम तो सुना है, किन्तु इनके विषय में कुछ नहीं जानते। घरेलू बिल्लियाँ तो सभी ने देखी होंगी, किन्तु इनके विषय में भी जनसामान्य को विशेष जानकारी नहीं है। भारत में मार्जार परिवार के ऐसे अनेक जीव पाए जाते हैं, जिनका लोगों ने नाम तक नहीं सुना। इस पुस्तक में इन्हीं सब जीवों की जानकारी बड़े रोचक ढंग से दी गई है।
Griha Vatika
- Author Name:
Pratibha Arya
- Book Type:

- Description:
आज से हज़ारों वर्ष पूर्व भी मनुष्य अपने घर के चारों ओर फूल, घास व कमल के तालाब आदि लगाता रहा होगा। बेबीलोन के ‘हैंगिंग गार्डन’ विश्व के सात आश्चर्यों में एक माने गए हैं। आज जब हम गृह वाटिका की बात करते हैं तो हमारे सामने उद्यान कला का एक दीर्घ इतिहास साकार हो उठता है। रूप योजना कैसी भी क्यों न रही हो, घर के भीतर, आसपास, रास्तों, दीवारों को, फूलों की झाड़ियों, लताओं, वृक्षों द्वारा सजाने की परम्परा बहुत पुरानी रही है। गुफाओं में रहनेवाले मानव ने जब घर बनाकर स्थिर जीवनचर्या शुरू की तो उसे सजाने-सँवारने का काम भी शुरू कर दिया। जीवन में जब स्थिरता आ जाती है तो मानव-मन कला-सौन्दर्य की ओर झुक जाता है। प्राचीन भारतीय उद्यानों में लतामंडप, पुष्पित लताओं, झाड़ियों वाली वीथियाँ, कुंज, सुगन्धित पुष्प व कमल फलों के जलाशयों का वर्णन मिलता है। वासन्ती लता, लवंग-लता, नवमल्लिका जैसी सुगन्धित लताओं एवं वृक्षों के झुरमुट से घिरी वीथियाँ एवं वाटिकाएँ, जहाँ गृहवासी अपने परिवार के सदस्यों के साथ आमोद-प्रमोद के क्षण व्यतीत करता था। मुग़लकालीन उद्यान सीढ़ीदार होते थे, साथ-साथ उनमें पानी की नहरें व फुहारें अवश्य होते थे। मध्य एशिया से सर्द एवं फलों से भरे प्रदेश से आए मुग़ल बादशाहों ने वहाँ की स्मृति को याद रखते हुए और भारत की गर्मी से बचने के लिए जल की योजना वाटिकाओं में ख़ूब बनाई। उद्यान की योजना का रूप, आकार चाहे अलग रहा हो परन्तु मूल में एक प्रवृत्ति ही काम करती रही—वह थी प्रकृति की सुन्दर आकर्षक विविध प्रकार की वनस्पतियों, पौधों, झाड़ियों, वृक्षों, लताओं को आकर्षक रूप में लगाना, उसे सँजोना और प्राकृतिक भूदृश्यों को अपनी कल्पना के पुट द्वारा अपने घर के भीतर प्रस्तुत करना। उद्यान कला के भी मूलभूत सिद्धान्त लगभग सभी जगहों पर एक जैसे ही होते हैं। इन्हें जानने व समझने के बाद पौधों की देखभाल का कार्य काफ़ी सरल हो जाता है। उद्यान कला एक वैज्ञानिक विषय है, परन्तु शौक़ के रूप में अपनाए जाने पर यह आनन्द व अनुभव का विषय बन जाता है।
Prithvi Manthan : Vaishvik Bharat Banane Ki Kahani
- Author Name:
Aseem Shrivastava
- Book Type:

- Description:
यह एक बेहतरीन किताब है...कक्षा में मैं इसका प्रयोग किसी और पुस्तक से ज़्यादा करता हूँ। —पी. साईनाथ; पत्रकार व लेखक प्रचार-हमला को चीरती हुई यह किताब बताती है कि आज क्या हो रहा है। —अमिताव घोष; लेखक यह आज के विरोधी-धाराओं का एक महत्त्वपूर्ण वृत्तान्त है...इस पक्ष को सुनना और समझना ज़रूरी है। —अरुणा रॉय; समाजकर्मी वैश्वीकरण के विशाल पुस्तक-संग्रह में यह किताब बौद्धिक साहस और ईमान का एक कीर्तिमान है जो बेहतर दुनिया के लिए रास्ता दिखाती है। —अमित भादुड़ी; अर्थशास्त्री आज अगर गाँधी जी ज़िन्दा होते और 'हिन्द स्वराज' की रचना करते, तो उन्हें लगभग उन्हीं सवालों से जूझना पड़ता जो इस किताब में हैं। —गणेश देवी; लेखक और भाषाविद् यह किताब दर्शाती है कि इस वैश्विक युग में हमारी तथाकथित स्वेच्छा वस्तुत: कितनी पराधीन है...आज की दुनिया से चिन्तित किसी भी इनसान के लिए यह पुस्तक अनिवार्य है। —मल्लिका साराभाई; नृत्यांगना और संस्कृतिकर्मी आज के वैश्विक युग की तमाम तब्दीलियों के परिप्रेक्ष्य में यह पुस्तक एक महत्त्वपूर्ण संश्लेषण है...साथ ही इस किताब में एक वैकल्पिक दुनिया की कल्पना की गई है जिस पर गम्भीरता से सोचने और बहस करने की ज़रूरत है। —माधव गाडगिल; पर्यावरणशास्त्री यह एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण और असरदार किताब है...लेखक जो व्यापक प्रमाण पेश करता है उसका हमें सामना करना होगा। —हर्ष मंदर; समाजकर्मी
Prithvi Manthan : Vaishvik Bharat Banane Ki Kahani
Aseem Shrivastava
20% off₹ 199
₹ 159.2
Available
Sheron Se Meri Mulakatein
- Author Name:
Sherjung
- Book Type:

- Description:
“अचानक जंगल में सन्नाटा गहरा गया। उस गहरे सन्नाटे को चीरती हाथियों के चिंघाड़ने की आवाज़ें, तभी एक अजीब–सी आवाज़ हाथियों की ओर से आई। मैं समझ गया कि यह वही आवाज़ है जो हाथी अपनी सूँड़ ज़मीन पर पटककर निकालते हैं लेकिन सिर्फ़ शेर के आसपास होने पर–––और फिर सारा जंगल शेर की दहाड़ से काँप उठा।’’ शेर से नज़दीकी का हैरतअंगेज़ रोमांच और एक शिकारी होने का एहसास आपके ज़ेहन को गुदगुदाए बिना नहीं रहेगा। हास्य और व्यंग्य से सँवारे ये लेखक के नितान्त अपने अनुभव हैं। शेरजंग की इस किताब में एक शिकारी का रोमांच भी है और शेरों के प्रति बाल सहज जिज्ञासा के जवाब भी। शुरू करते ही एक रोचकता पाठक को जकड़ते हुए, एक ऐसी दुनिया में ले जाती है जहाँ शेर ही नहीं जंगल के सारे जानवरों का एहसास होता है। जिसमें शामिल हैं—उनकी आदतें, व्यवहार और उनका जीवन–चक्र।
Ped-Paudhe Aur Jeev-Jantu
- Author Name:
Varen Nocks
- Book Type:

- Description:
छोटे स्कूली बच्चों के लिए तैयार की गई यह पुस्तक उन्हें प्रकृति,पेड़-पौधों जीव-जन्तुओं और वर्षा आँधी जैसी घटनाओं के बारे में आरम्भिक जानकारी देती है। चित्रों की सहायता से कहीं कहानी की तरह तो कहीं घर में किए जा सकनेवाले प्रयोगों के माध्यम से यह बच्चों को उनके आसपास के परिवेश का वैज्ञानिक बोध कराती है। दिशाएँ क्या हैं, उन्हें कैसे पहचानें, आकाश में ध्रुवतारे, सूरज, चाँद आदि के बारे में सरल शब्दों में बताया गया है जिससे बालक अपनी आरम्भिक जिज्ञासाओं को भविष्य के लिए वैज्ञानिक सोच की तरफ़ मोड़ सकें। आभास के लिए सरल प्रश्नोत्तरी के माध्यम से बच्चे अकेले या अपने साथियों के साथ दिलचस्प खेल भी खेल सकते हैं।
Meri Unesco Yatra
- Author Name:
Ramesh Pokhriyal 'Nishank'
- Book Type:

- Description:
"यूनेस्को या संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन विभिन्न देशों, समुदायों, संस्कृतियों और नागरिकों के बीच मानवीय मूल्यों की स्थापना को संभव बनाने के लिए एक सशक्त एवं व्यापक मंच प्रदान करता है। यूनेस्को का प्रमुख उद्देश्य शांति स्थापना, गरीबी उन्मूलन, सतत विकास और शिक्षा के माध्यम से विज्ञान, संस्कृति, संचार और सूचना के क्षेत्र में योगदान करना है। यूनेस्को के लक्ष्यों के केंद्र में अब प्राकृतिक विज्ञान और पृथ्वी के संसाधनों का प्रबंधन भी आ चुके हैं। इसके अंतर्गत विकसित और विकासशील देशों में संसाधन प्रबंधन और आपदा स्थिरता में सतत विकास प्राप्त करने के लिए पानी और पानी की गुणवत्ता, महासागर की रक्षा और विज्ञान तथा इंजीनियरिंग प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना शामिल है। भारत में मानव कल्याण संदर्भित चिंतन हजारों वर्ष पुराना है। हमारे वेदों, शास्त्रों एवं अन्य ग्रंथों में शासन करनेवालों को धर्म के आधार पर आचरण करने का परामर्श दिया गया है। इस दृष्टि से देखें तो सामाजिक और मानव विज्ञान पर ध्यान केंद्रित करते हुए यूनेस्को भी बुनियादी मानव अधिकारों के संरक्षण और संवर्धन को न केवल बढ़ावा देता है, बल्कि भेदभाव और नस्लवाद से लड़ने के लिए पूरे विश्व को तैयार करता है। मानव कल्याण के लिए सतत सक्रिय यूनेस्को की भूमिका, उसके कार्य-क्षेत्र, प्रभाव और संभावनाओं के विषय में प्रामाणिक जानकारी देती रोचक एवं पठनीय कृति।
Dharti Ki Pukar
- Author Name:
Sundarlal Bahuguna
- Book Type:

- Description:
विकास बनाम पर्यावरण इस सदी की सबसे बड़ी बहसों में से एक है। आज जबकि पूरी दुनिया में पर्यावरण-चेतना फैल रही है और विकास की लगभग हर गतिविधि के लिए पर्यावरणीय मानदंड निर्धारित किए जा रहे हैं, फिर भी विकासवादी निरन्तर इस कोशिश में रहते हैं कि पर्यावरणीय ख़तरों की अनदेखी करके भी किस तरह कोई बड़ा बाँध, कोई बड़ी परियोजना शुरू की जाए। इसलिए जब सुन्दरलाल बहुगुणा दुनिया के अन्य पर्यावरणविदों के साथ सुर मिलाकर यह कहते हैं कि तीसरा विश्वयुद्ध छिड़ गया है और वह तथाकथित विकासवादियों द्वारा प्रकृति के विरुद्ध छेड़ा गया है, तो वे ग़लत नहीं होते।
वे कहते हैं, ‘‘प्रश्न केवल विकास के विरोध का नहीं है, ज़िन्दा रहने के अधिकार की रक्षा का है। जिन परियोजनाओं को सरकारी मीडिया और शासन व अर्थनीति पर हावी आभिजात्य वर्ग देश के त्वरित विकास के लिए अनिवार्य मानता है, उन परियोजनाओं के औचित्य को चुनौती देनेवालों को विदेशी एजेंट, देशद्रोही और विकास के दुश्मन के रूप में प्रचारित किया जाता है।’’
सुन्दरलाल बहुगुणा भी इस दृष्टि से बौद्धिक समाज में नायक और खलनायक दोनों हैं। लेकिन हिमालय, गंगा, जंगल और टिहरी बाँध को लेकर जो सवाल बहुगुणा ने खड़े किए हैं और सरकार की प्रकृति-विरोधी नीतियों का पर्दाफ़ाश किया है, उसमें शायद ही किसी को आपत्ति हो। साथ ही उन्होंने विकास की जो वैकल्पिक दृष्टि दी है, उससे भी किसी को परहेज़ नहीं होगा।
यह पुस्तक ‘धरती की पुकार’ बहुगुणा जी के चिन्तन का सार है। इसमें ‘चिपको आन्दोलन’ से लेकर टिहरी बाँध के विरोध में उनके लम्बे उपवासों तक की चिन्तनभूमि के दर्शन होते हैं। आशा है, यह पुस्तक विकास और पर्यावरण के रिश्तों को सही परिप्रेक्ष्य में देखने-समझने में मदद करेगी।
Bin Pani Sab Soon
- Author Name:
Anupam Mishra
- Book Type:

- Description:
अनुपम मिश्र हमारे समय के उन बिरले सोचने-समझनेवाले चौकन्ने लोगों में से थे जिन्होंने लगातार हमें पानी के संकट की याद दिलाई, चेतावनी दी, पानी के सामुदायिक संचयन की भारतीय प्रणालियों से हमारा परिचय कराया। उनका इसरार था कि हम लोकबुद्धि से भी सीखें। उनकी असमय मृत्यु के बाद जो सामग्री मिली है उसमें से यह संचयन किया गया है। वह हिन्दी में बची ज़मीनी सोच और लोकचिन्ताओं से एक बार फिर हमें अवगत कराता है। वह इसका साक्ष्य भी है कि साफ़-सुथरा गद्य साफ़-सुथरे माथे से ही लिखा जा सकता है।” —अशोक वाजपेयी
Bharat Ke Sankatgrast Vanya Prani
- Author Name:
Gunakar Muley
- Book Type:

- Description:
हम इस बात की कल्पना भी नहीं कर सकते कि किसी दिन इस धरती पर केवल मानव जाति का अस्तित्व होगा। पशु–पक्षियों व अन्य जीवधारियों की असंख्य प्रजातियों और वनस्पतियों की अगणित क़िस्मों के अभाव में क्या इस सृष्टि में जीवन को बचाए रखना सम्भव होगा। सच्चाई तो यह है कि सृष्टि एक अखंड इकाई है। चराचर की पारस्परिक निर्भरता ही जीवन का मूल मंत्र है। यदि किसी कारण से जीवन–चक्र खंडित होता है तो इसके भीषण परिणाम हो सकते हैं। ‘भारत के संकटग्रस्त वन्य प्राणी’ में प्रसिद्ध लेखक गुणाकर मुळे ने ऐसे प्राणियों की चर्चा की है जो विलुप्त होने की कगार पर हैं। उन्होंने अनेक ऐसे प्राणियों का ज़िक्र किया है जिन्हें अब इस धरती पर कभी नहीं देखा जा सकता। विगत दशकों में 36 प्रजातियों के स्तनपायी प्राणी और 94 नस्लों के पक्षी प्रकृति के अंधाधुंध शोषण के कारण नष्ट हो चुके हैं। लेखक की चिन्ता यह है कि यदि इसी प्रकार हिंसा, लालच और अतिक्रमण का दौर चलता रहा तो इस ख़ूबसूरत दुनिया का क्या होगा! यह असन्तुलन विनाशकारी होगा। लेखक के अनुसार, ‘हमारे देश में प्राचीन काल से वन्य प्राणियों के संरक्षण की भावना रही है। हमारी सभ्यता और संस्कृति में वन्य प्राणियों के प्रति प्रेम-भाव रहा है। इसलिए हमारे समाज में वन्य जीवों को पूज्य माना जाता है। वन्य जीवों तथा पक्षियों को मुद्राओं और भवनों पर भी चित्रित किया जाता रहा है।’ हमें आज इस भाव को नए सन्दर्भों में विकसित करना होगा। वन्य प्राणी संरक्षण के लिए बनाए गए अधिनियमों से अधिक आवश्यकता व्यापक नागरिक चेतना की है। गुणाकर मुळे ने सहज, सरल भाषा में इस आवश्यकता को रेखांकित किया है। अनेक चित्रों से सुसज्जित यह पुस्तक पर्यावरण के प्रति जागरूकता निर्माण के लिए बहुत ही उपयोगी है। हर आयु के पाठकों के लिए एक पठनीय पुस्तक।
Jal Sankat Aur Jal Sangrah
- Author Name:
Mukesh Kumar
- Book Type:

- Description:
पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। कहा जाने लगा है कि तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो बहुत ही सम्भव है कि वह पानी को लेकर ही हो। शहरी इलाक़ों में पानी की कमी और उसके लिए रोज़-रोज़ होनेवाले स्थानीय झगड़े शायद इसी की बानगी हैं। उधर ग्रामीण क्षेत्रों में जल-स्तर न सिर्फ़ नीचे जा रहा है, पेयजल के रूप में उसका उपयोग भी ख़तरनाक होता जा रहा है। जनसंख्या के साथ-साथ जहाँ पानी की आवश्यकता बड़े पैमाने पर बढ़ी है, वहीं जल-संग्रहण की पारम्परिक पद्धतियों को भी हमने भुला दिया है, जितना जल उपलब्ध है, वह बढ़ते शहरीकरण के परिणामस्वरूप प्रदूषण का शिकार है। आँकड़े बताते हैं कि इस समय देश में रोज़ छह हज़ार से ज़्यादा लोग दूषित जल से पैदा होनेवाली बीमारियों से मर जा रहे हैं। यह पुस्तक इस विकराल संकट से निबटने के लिए एक आरम्भिक ढाँचा सुझाती है जिसका उपयोग हम जल-संरक्षण, और सामान्यत: पानी के प्रति अपना आधारभूत दृष्टिकोण बदलने में कर सकते हैं। वर्षा जल के संग्रहण की पुरानी और नई प्रविधियों, इसके साथ भू-जल स्रोतों की सम्यक् सार-सँभाल, जल-अपव्यय को रोकने की ज़रूरत तथा तरकीबें, सूखे इलाक़ों में जल-संचयन की वैज्ञानिक पद्धति, विभिन्न क़िस्म के बाँधों, कुँओं, तालाबों के निर्माण सम्बन्धी जानकारी, स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, आपूर्ति और वितरण की समस्या और कृषि-उपयोग के लिहाज़ से जल-प्रबन्ध, इन तमाम विषयों पर यह पुस्तक अद्यतन और वैज्ञानिक सामग्री उपलब्ध कराती है।
Janwar Aur Unka Bhojan
- Author Name:
Varen Nocks
- Book Type:

- Description:
पेड़-पौधों को खाकर जीनेवाले जानवर कौन-से होते हैं कीड़े-मकोड़े हमारे लिए क्या करते हैं अलग-अलग जानवरों के दाँत पैर आदि किस तरह अलग-अलग होते हैं। मौसमों के अनुसार हमें कौन से पक्षी कीड़े आदि दिखाई देते हैं और इसी तरह के ढेरों प्रश्नों के जवाब बच्चे चित्रों की सहायता से इस पुस्तक में पाएँगे। पानी के प्राणियों के साथ पानी और उसके विभिन्न रूपों पर भी एक अध्याय है और पृथ्वी के विषय में जानकारी देनेवाली कुछ सामग्री भी इस पुस्तक में रखी गई है। इस पुस्तक का उद्देश्य स्कूली छात्रों को अपने आसपास के परिवेश के विषय में वैज्ञानिक जानकारी देना है। सरल प्रयोगों प्रश्न-अभ्यासों और ‘स्वयं करके देखो’ जैसी प्रविधियों से प्रयास किया गया है कि यह ज्ञान बच्चों की सोच का हिस्सा बन जाए और वे आगे चलकर विज्ञान सम्मत सोच को अपने जीवन का हिस्सा बना सकें।
Ghumakkad Swami
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Book Type:

- Description:
‘घुमक्कड़ स्वामी’ बाबा हरिशरणानन्द का जीवन-वृत्त है जिसे राहुल सांकृत्यायन ने जीवनी के साथ-साथ यात्रा-वृत्तान्त का रूप देते हुए लिखा है। स्वामी हरिशरणानन्द का जन्म 1889 में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ जो कानपुर में व्यापार करता था। मात्र पन्द्रह वर्ष की उम्र में उन्होंने कुछ साधुओं के साथ गृह-त्याग कर दिया जो एक अथक, खोजी और जिज्ञासु यात्रा का आरम्भ था। योग-साधना से शुरू होकर उनका यह सफ़र स्वतंत्रता-आन्दोलन में भागीदारी से होते हुए आयुर्वेद में शोध तक चलता रहा, फिर 1941 में बावन वर्ष की आयु में वे गृहस्थ हुए। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी स्वामी हरिशरणानन्द ने हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों की यात्राएँ भी कीं। वे एक विज्ञान-प्रेमी और दृष्टिवान सन्त थे। रूढ़िवादी कर्मकांड और पंडों आदि के पाखंड को उजागर करते हुए उन्होंने ज्ञान के मार्ग का अवगाहन किया। इस प्रसिद्ध पुस्तक में राहुल जी उनकी जीवन-यात्रा को उस समय के नगरों, व्यवसायों, आध्यात्मिक परम्पराओं, साधु-सन्तों की जीवनचर्या, आश्रमों-मठों के वातावरण और आयुर्वेद की गहरी जानकारियाँ साझा करते हुए लिखते हैं। 19वीं-20वीं सदी का भारत इसमें अपने सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहलुओं के साथ साक्षात दिखता है।
Manav Upayogi Ped
- Author Name:
Ramesh Bedi
- Book Type:

- Description:
जल, जंगल, ज़मीन निस्सन्देह मानव जीवन के आधार हैं। हमें शुद्ध वायु पेड़-पौधे ही उपलब्ध कराते हैं। लेकिन बढ़ते शहरीकरण के चलते पेड़-पौधों की उपेक्षा की गई और जंगल कटते चले गए जिसका ख़मियाजा मनुष्य असाध्य बीमारियों से लड़ते हुए भर रहा है। रामेश बेदी प्रकृति के विशेषज्ञ लेखक थे। यह पुस्तक विभिन्न पेड़ों की विभिन्न विशेषताओं से पाठक का परिचय कराती है। इसमें मानव उपयोगी 8 वृक्षों—अर्जुन, चालमुग्रा, खैर, तुवरक, गाइनोकार्डिआ, भिलावा, गोरख इमली तथा हरड़ का वर्णन किया गया है। पुस्तक में पेड़ों के विविध भाषाओं में नाम, उनकी पहचान, उनका प्राप्ति-स्थान, उनकी कृषि, रासायनिक संघटन, घरेलू दवा-दारू में उपयोग तथा औद्योगिक उपयोग आदि की जानकारी दी गई है। वृक्षों का स्वरूप बताने के लिए रेखाचित्रों तथा तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है, जो पुस्तक को पठनीय बनाते हैं। पुस्तक न सिर्फ़ पेड़-पौधों में रुचि रखनेवालों, आयुर्वेद व यूनानी के अध्येताओं, अनुसन्धानकर्त्ताओं, वन-अधिकारियों व वन-कर्मियों, फ़ार्मेसियों, कच्ची जड़ी-बूटियों के व्यापारियों के लिए उपयोगी है, वरन् आम जन के लिए स्वस्थ जीने के नुस्ख़े भी मुहैया कराती है।
Bhukamp
- Author Name:
Harinarayan Srivastava
- Book Type:

- Description:
भूकम्प है क्या? यह किन परिस्थितियों में विध्वंसक हो जाता है? क्या इससे बचने का कोई उपाय है? इन और ऐसे ही अनेक प्रश्नों के माध्यम से इस पुस्तक में भूकम्प जैसे भौगोलिक और वैज्ञानिक विषय की शोध–खोज की गई है—यानी पृथ्वी के भीतरी, सर्वाधिक भयावह और रोमांचक घटना–क्षणों की विस्तृत और रोचक छानबीन। भूकम्पों के कारण, उनके पूर्वानुमान, भूकम्प–विज्ञान के विभिन्न उपयोगों—जैसे भूकम्प इंजीनियरिंग, नाभिकीय विस्फोटों का पता एवं चन्द्र–कम्पों आदि के बारे में आधुनिक अनुसन्धानों की विस्तृत चर्चा इस पुस्तक में की गई है। यद्यपि यह विषय भौतिकी और गणित के मूल सिद्धान्तों पर आधारित है, पर अपनी सहज भाषा–शैली और सार्थक प्रस्तुति के कारण दुरूह बिलकुल नहीं रह गया है। भूगोल के विद्यार्थियों, प्रोफ़ेसरों, भूगर्भशास्त्रियों, इंजीनियरों और धरती के गर्भ में पलते–पनपते, उमड़ते–घुमड़ते रहस्यों को जानने की इच्छा रखनेवाले सामान्य पाठकों के लिए भी यह सचित्र प्रकाशन समान रूप से उपयोगी और अनूठा है।
Paryavaran Ke Paath
- Author Name:
Anupam Mishra
- Book Type:

- Description:
''अनुपम मिश्र एक अत्यन्त विनम्र, निरभिमानी व्यक्ति थे जिन्होंने पर्यावरण के क्षेत्र में साधारण और सामुदायिक विवेक और विधि का जैसा अवगाहन किया वैसा आधुनिक टेकनॉलजी के दुश्चक्र में फँसे अन्य पर्यावरणविद् अकसर नज़रन्दाज़ करते रहे हैं। अनुपम जी लगभग ज़िद कर अपनी इस धारणा पर डटे रहे कि साधारण लोग और समुदाय पढ़े-लिखों से ज़्यादा जानता-समझता है और आधुनिकता को अपनी सर्वज्ञता के दम्भ से मुक्त हो सकना चाहिए। उनसे बातचीत का यह संचयन इस अनूठे व्यक्ति के सोच-विचार की नई परतें सहजता से खोलेगा, ऐसा हमारा विश्वास है।" —अशोक वाजपेयी
Vichar Ka Kapda
- Author Name:
Anupam Mishra
- Book Type:

- Description:
‘‘क़ायदे से अनुपम मिश्र न लेखक थे, न पत्रकार। वे साफ़ माथे के एक आदमी थे जो हर हालत में माथा ऊँचा और साफ़ रखना चाहते थे। उनकी निराकांक्षा उनकी बुनियादी बेचैनियों को ढाँप नहीं पाती थी। ये बेचैनियाँ ही उन्हें कई बार ऐसे प्रसंगों, व्यक्तियों, घटनाओं, वृत्तियों को खुली नज़र देखने-समझने की ओर ले जाती थीं। उनकी संवेदना में ऐसी ऐन्द्रियता थी कि वे विचार का कपड़ा भी पहचान लेती थीं। कुल मिलाकर अनुपम मिश्र की अकाल मृत्यु के बाद शेष रह गई सामग्री में से किया गया यह संचयन हिन्दी में सहज, निर्मल और पारदर्शी, मानवीय गरमाहट से भरे गद्य का विरल उपहार है। हमें मरणोत्तर अनुपम मिश्र को उनकी भरी-पूरी जीवन्तता में प्रस्तुत करने में प्रसन्नता है।”
—अशोक वाजपेयी
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book