Manav Upayogi Ped
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जल, जंगल, ज़मीन निस्सन्देह मानव जीवन के आधार हैं। हमें शुद्ध वायु पेड़-पौधे ही उपलब्ध कराते हैं। लेकिन बढ़ते शहरीकरण के चलते पेड़-पौधों की उपेक्षा की गई और जंगल कटते चले गए जिसका ख़मियाजा मनुष्य असाध्य बीमारियों से लड़ते हुए भर रहा है। रामेश बेदी प्रकृति के विशेषज्ञ लेखक थे। यह पुस्तक विभिन्न पेड़ों की विभिन्न विशेषताओं से पाठक का परिचय कराती है। इसमें मानव उपयोगी 8 वृक्षों—अर्जुन, चालमुग्रा, खैर, तुवरक, गाइनोकार्डिआ, भिलावा, गोरख इमली तथा हरड़ का वर्णन किया गया है। पुस्तक में पेड़ों के विविध भाषाओं में नाम, उनकी पहचान, उनका प्राप्ति-स्थान, उनकी कृषि, रासायनिक संघटन, घरेलू दवा-दारू में उपयोग तथा औद्योगिक उपयोग आदि की जानकारी दी गई है। वृक्षों का स्वरूप बताने के लिए रेखाचित्रों तथा तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है, जो पुस्तक को पठनीय बनाते हैं। पुस्तक न सिर्फ़ पेड़-पौधों में रुचि रखनेवालों, आयुर्वेद व यूनानी के अध्येताओं, अनुसन्धानकर्त्ताओं, वन-अधिकारियों व वन-कर्मियों, फ़ार्मेसियों, कच्ची जड़ी-बूटियों के व्यापारियों के लिए उपयोगी है, वरन् आम जन के लिए स्वस्थ जीने के नुस्ख़े भी मुहैया कराती है।
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जल, जंगल, ज़मीन निस्सन्देह मानव जीवन के आधार हैं। हमें शुद्ध वायु पेड़-पौधे ही उपलब्ध कराते हैं। लेकिन बढ़ते शहरीकरण के चलते पेड़-पौधों की उपेक्षा की गई और जंगल कटते चले गए जिसका ख़मियाजा मनुष्य असाध्य बीमारियों से लड़ते हुए भर रहा है। रामेश बेदी प्रकृति के विशेषज्ञ लेखक थे। यह पुस्तक विभिन्न पेड़ों की विभिन्न विशेषताओं से पाठक का परिचय कराती है।
इसमें मानव उपयोगी 8 वृक्षों—अर्जुन, चालमुग्रा, खैर, तुवरक, गाइनोकार्डिआ, भिलावा, गोरख इमली तथा हरड़ का वर्णन किया गया है। पुस्तक में पेड़ों के विविध भाषाओं में नाम, उनकी पहचान, उनका प्राप्ति-स्थान, उनकी कृषि, रासायनिक संघटन, घरेलू दवा-दारू में उपयोग तथा औद्योगिक उपयोग आदि की जानकारी दी गई है। वृक्षों का स्वरूप बताने के लिए रेखाचित्रों तथा तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है, जो पुस्तक को पठनीय बनाते हैं।
पुस्तक न सिर्फ़ पेड़-पौधों में रुचि रखनेवालों, आयुर्वेद व यूनानी के अध्येताओं, अनुसन्धानकर्त्ताओं, वन-अधिकारियों व वन-कर्मियों, फ़ार्मेसियों, कच्ची जड़ी-बूटियों के व्यापारियों के लिए उपयोगी है, वरन् आम जन के लिए स्वस्थ जीने के नुस्ख़े भी मुहैया कराती है।
Book details
- Format
- Hardbound
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 4th
- Publication year
- 2000
- Weight
- 366 grams
- ISBN-13
- 9788126701025
- Pages
- 195
- Reading time
- ~7 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14.5 × 22.5 cm
- Language
- Hindi
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“अचानक जंगल में सन्नाटा गहरा गया। उस गहरे सन्नाटे को चीरती हाथियों के चिंघाड़ने की आवाज़ें, तभी एक अजीब–सी आवाज़ हाथियों की ओर से आई। मैं समझ गया कि यह वही आवाज़ है जो हाथी अपनी सूँड़ ज़मीन पर पटककर निकालते हैं लेकिन सिर्फ़ शेर के आसपास होने पर–––और फिर सारा जंगल शेर की दहाड़ से काँप उठा।’’ शेर से नज़दीकी का हैरतअंगेज़ रोमांच और एक शिकारी होने का एहसास आपके ज़ेहन को गुदगुदाए बिना नहीं रहेगा। हास्य और व्यंग्य से सँवारे ये लेखक के नितान्त अपने अनुभव हैं। शेरजंग की इस किताब में एक शिकारी का रोमांच भी है और शेरों के प्रति बाल सहज जिज्ञासा के जवाब भी। शुरू करते ही एक रोचकता पाठक को जकड़ते हुए, एक ऐसी दुनिया में ले जाती है जहाँ शेर ही नहीं जंगल के सारे जानवरों का एहसास होता है। जिसमें शामिल हैं—उनकी आदतें, व्यवहार और उनका जीवन–चक्र।
Ek Tha Zanskar : SuvaranKhudaiya Chiunton Ka Des
- Author Name:
Ajoy Sodani
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अजय सोडानी प्रकृति की यात्रा करते हैं, लेकिन वे सिर्फ़ यात्रा नहीं करते—वे एक पक्षधर यात्रा करते हैं। एक ऐसी यात्रा जो प्रकृति के पवित्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, और यह जानने के लिए आरम्भ होती है कि मनुष्य ने प्रकृति की इतनी विराट सभ्यता के ठीक मुक़ाबले पर अपनी यह सभ्यता खड़ी की तो क्यों, जिसमें सब तरफ क्षरण ही क्षरण है। वे प्रकृति के वकील की हैसियत से अपना झोला उठाते हैं। यह यात्रा-कथा है जाँस्कर की जहाँ आज 2900 हेक्टेयर में खेती होती है और कुल जनसंख्या है 13773। लद्दाख का यह हिस्सा न तो हमलावरों की नज़र में ज़्यादा पड़ा, न भारत आने वाले मुसाफ़िरों की। इसलिए वह विकास की मार से भी बचा रहा, अपनी जीवन शैली और संस्कृति के साथ। रेत के नीचे से सोना खोदने वाले चींटे भी अपना काम करते रहे यानी यहाँ से जुड़ी कथाएँ भी दूर देश के सैलानियों को आकर्षित करती रहीं। मंथर गति में एक समूचा जीवन जीने वाले जाँस्कर का यह सफ़र जुलाई 2013 में किया गया, जिसके बाद यात्रावृत्तकार को कहना पड़ा कि ‘नवपाषाण युग जैसे अभी-अभी ही व्यतीत हुआ हो इधर से।’ हिमालय की बर्फ़ीली दुनिया के इस यात्रावृत्त में रोमांच जितना है, उतने ही इतिहास और संस्कृति के हवाले भी हैं, कथाएँ-उपकथाएँ भी हैं। अर्थात इस पुस्तक को पढ़कर जब आप अपनी दुनिया में लौटते हैं तो सिर्फ़ दृश्यों के, जोखिमों के, थकानों और आश्चर्यों के दृश्य आपके साथ नहीं होते, ढेरों नए तथ्य और तर्क भी होते हैं। साथ ही सफ़रगोई की वह ताज़गी, कहन की वह रवानी भी जो अजय सोडानी की अपनी ईजाद है।
Janwar Aur Unka Bhojan
- Author Name:
Varen Nocks +1
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पेड़-पौधों को खाकर जीनेवाले जानवर कौन-से होते हैं? कीड़े-मकोड़े हमारे लिए क्या करते हैं? अलग-अलग जानवरों के दाँत, पैर आदि किस तरह अलग-अलग होते हैं। मौसमों के अनुसार हमें कौन से पक्षी, कीड़े आदि दिखाई देते हैं? और इसी तरह के ढेरों प्रश्नों के जवाब बच्चे चित्रों की सहायता से इस पुस्तक में पाएँगे। पानी के प्राणियों के साथ पानी और उसके विभिन्न रूपों पर भी एक अध्याय है, और पृथ्वी के विषय में जानकारी देनेवाली कुछ सामग्री भी इस पुस्तक में रखी गई है। इस पुस्तक का उद्देश्य स्कूली छात्रों को अपने आसपास के परिवेश के विषय में वैज्ञानिक जानकारी देना है। सरल प्रयोगों, प्रश्न-अभ्यासों और ‘स्वयं करके देखो’ जैसी प्रविधियों से प्रयास किया गया है कि यह ज्ञान बच्चों की सोच का हिस्सा बन जाए; और वे आगे चलकर विज्ञान सम्मत सोच को अपने जीवन का हिस्सा बना सकें।
Social Concepts in Rural India
- Author Name:
Dr. Abhishek Chauhan +2
- Book Type:

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This book on Rural Development in India comprises of eight units which focus to reconstruct the importance of villages in India since time immemorial. The authors have very well tried their level best to provide a historical and conceptual clarity on various aspects of Indian villages. The authors have discussed about the types and characteristics of Indian villages with focus on theoretical concepts like—Sanskritisation, Westernisation, Globalisation, Tribe-Caste-Continum. Focus has also been made on the practice of Jajmani System within the Indian villages. Above all the well-defined and chronological sequence of Indian village studies has been explained in this book.
Ethics For Civil Services With 100 Case Studies
- Author Name:
Alok Ranjan
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Awating description for this book
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