Visarjan
Author:
Raju SharmaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 360
₹
450
Unavailable
अपने पहले उपन्यास ‘हलफ़नामे’ से प्रसिद्धि पानेवाले कथाकार राजू शर्मा का दूसरा उपन्यास है ‘विसर्जन’।
हिन्दी संसार में भूमंडलीकरण पर लगभग दो दशकों से चर्चा हो रही है किन्तु उस यथार्थ को बड़े औपन्यासिक ढाँचे में विन्यस्त और प्रकट करने का श्रेय ‘विसर्जन’ के रचनाकार राजू शर्मा के ही हिस्से में जाता है। भूमंडलीकरण ने हमारी दुनिया की शक्ल को बुनियादी तौर पर बदलकर रख दिया है। यह कहना अत्युक्ति न होगी कि उसने मनुष्य के मूल्यों, आस्थाओं, संवेदनाओं, सम्बन्धों के इलाक़े में अब तक के इतिहास की सबसे भारी उथल-पुथल पैदा की है। मनुष्यता पर पड़नेवाले उसके प्रभाव पर केन्द्रित भले ही कुछ रचनात्मक दृष्टान्त हैं, किन्तु भूमंडलीकरण की शक्ति-संरचना का उसी की ज़मीन पर विखंडन पहली बार ‘विसर्जन’ में ही सम्भव हुआ। प्रधानमंत्री, अर्थशास्त्री, प्रशासनिक मशीनरी, गुप्तचरी आदि के ज़रिए राजू शर्मा ‘विसर्जन’ में ऐसा अद्भुत आख्यान रचते हैं कि उत्तर-पूँजीवादी दुनिया के ब्रह्मास्त्र और कवच भूमंडलीकरण का सारा भेद खुल जाता है। राजू शर्मा की रचनात्मक शक्ति इस मायने में भी आश्वस्त करती है कि वे भूमंडलीकरण के क़िले में प्रविष्ट होकर उसकी व्यूह रचना को उजागर करते हैं।
‘विसर्जन’ में मनुष्यता के सम्मुख उपस्थित संकट की गहन खोज और उसका आखेट है, पर यह सब कुछ ऐसे गहरे रचनात्मक धैर्य और सूझ-भरी निस्संगता से मुमकिन किया गया है कि ‘विसर्जन’ सत्य और गल्प, यथार्थ और कला, विचार और संवेदना, प्रतिबद्धता और निष्पक्षता जैसी विपर्यय दिखनेवाली सृजनात्मक सिद्धियों को एक साथ अर्जित करनेवाला उपन्यास बन जाता है।
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—अखिलेश
ISBN: 9788183613316
Pages: 455
Avg Reading Time: 15 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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