sanshodayu
(0)
Author:
Unita Sachchidanand, Mori OgaiPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction₹
495
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‘जापान’ का नाम सुनते ही आज आधुनिकता, समृद्धि और चकाचौंध का विचार कौंधता है। लेकिन सौ बरस पहले का जापान क़तई अलग था। इस संकलन में शामिल मोरी ओगाई (1862-1922) की तीन कहानियाँ तत्कालीन जापान की एक दूसरी तस्वीर पेश करती हैं। ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में रची गई ये कहानियाँ—‘सूर्योदय के देश’ के सामन्ती युग के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराती हैं। सानशोदायु, अँधेरे में एक नाव चलती थी और आख़िरी पंक्ति आपराधिक कथानकों के ज़रिए तत्कालीन राज और समाज की विद्रूपताओं को एक-एक कर सामने लाती हैं। लेकिन, ये कहानियाँ आपराधिक दृष्टान्त मात्र नहीं हैं। सानशोदायु और आख़िरी पंक्ति में आप पाएँगे कि किस तरह बाल चरित्र सामाजिक विसंगतियों से मुक़ाबले के लिए ऐसे वक़्त में उठ खड़े होते हैं, जब उनके अग्रज व्यवस्था के सामने हथियार डाल देते हैं। नन्हे चरित्र तत्क्षण महाकार ले लेते हैं। वे जापानी समाज को ‘आत्मबलिदान’ जैसी सर्वथा नई अवधारणाएँ सिखाते हैं। ‘अँधेरे में’ कहानी जापानी जनमानस पर बौद्ध मत के प्रभाव को ख़ासकर उकेरती है। इसलिए यह भारतीय पाठक को ख़ासकर अपील करेगी। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में अवतरित इन कहानियों के ज़रिए जापान के सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक जीवन-दर्शन को जानने का अवसर प्राप्त होगा। कहानियों के साथ प्रविष्ट टिप्पणियाँ पाठकों की जिज्ञासा के अनुरूप दी गई हैं।
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About the Book
‘जापान’ का नाम सुनते ही आज आधुनिकता, समृद्धि और चकाचौंध का विचार कौंधता है। लेकिन सौ बरस पहले का जापान क़तई अलग था। इस संकलन में शामिल मोरी ओगाई (1862-1922) की तीन कहानियाँ तत्कालीन जापान की एक दूसरी तस्वीर पेश करती हैं। ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में रची गई ये कहानियाँ—‘सूर्योदय के देश’ के सामन्ती युग के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराती हैं। सानशोदायु, अँधेरे में एक नाव चलती थी और आख़िरी पंक्ति आपराधिक कथानकों के ज़रिए तत्कालीन राज और समाज की विद्रूपताओं को एक-एक कर सामने लाती हैं। लेकिन, ये कहानियाँ आपराधिक दृष्टान्त मात्र नहीं हैं। सानशोदायु और आख़िरी पंक्ति में आप पाएँगे कि किस तरह बाल चरित्र सामाजिक विसंगतियों से मुक़ाबले के लिए ऐसे वक़्त में उठ खड़े होते हैं, जब उनके अग्रज व्यवस्था के सामने हथियार डाल देते हैं। नन्हे चरित्र तत्क्षण महाकार ले लेते हैं। वे जापानी समाज को ‘आत्मबलिदान’ जैसी सर्वथा नई अवधारणाएँ सिखाते हैं। ‘अँधेरे में’ कहानी जापानी जनमानस पर बौद्ध मत के प्रभाव को ख़ासकर उकेरती है। इसलिए यह भारतीय पाठक को ख़ासकर अपील करेगी। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में अवतरित इन कहानियों के ज़रिए जापान के सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक जीवन-दर्शन को जानने का अवसर प्राप्त होगा। कहानियों के साथ प्रविष्ट टिप्पणियाँ पाठकों की जिज्ञासा के अनुरूप दी गई हैं।
Book Details
-
ISBN9788119159499
-
Pages104
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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