Lakh Ki Naak
(0)
Author:
Sarveshwardayal SaxenaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction₹
295
₹ 236 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
लाख की नाक’ सर्वेश्वरदयाल सक्सेना द्वारा लिखा गया बाल नाटक है। इस नाटक के विषय में सर्वेश्वर कहते हैं, यदि आप बच्चों के साथ खेल नहीं सकते तो बच्चों के लिए लिख भी नहीं सकते, चाहे नर्सरी कविता हो चाहे नाटक। बच्चों के अनुभव संसार से जुड़कर ही किसी भी आयु वर्ग का अनुभव बच्चों का अपना अनुभव बन पाता है जिसमें तर्क से अधिक बाल अभिरुचि का महत्त्व है। ‘लाख की नाक’ एक ऐसा ही नाटक है। यह नाटक बाल-गीतों के प्रवाह में अपने संवादों को पूर्ण बनाता है।
Read moreDon’t Miss Out
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
लाख की नाक’ सर्वेश्वरदयाल सक्सेना द्वारा लिखा गया बाल नाटक है। इस नाटक के विषय में सर्वेश्वर कहते हैं, यदि आप बच्चों के साथ खेल नहीं सकते तो बच्चों के लिए लिख भी नहीं सकते, चाहे नर्सरी कविता हो चाहे नाटक। बच्चों के अनुभव संसार से जुड़कर ही किसी भी आयु वर्ग का अनुभव बच्चों का अपना अनुभव बन पाता है जिसमें तर्क से अधिक बाल अभिरुचि का महत्त्व है। ‘लाख की नाक’ एक ऐसा ही नाटक है। यह नाटक बाल-गीतों के प्रवाह में अपने संवादों को पूर्ण बनाता है।
Book Details
-
ISBN9788183618182
-
Pages24
-
Avg Reading Time1 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Kitabon mein Billi ne Bachche Diye Hain
- Author Name:
Sarveshwardayal Saxena +1
- Book Type:

- Description:
इब्न बतूता पहन के जूता, निकल पड़े तूफान में थोड़ी हवा नाक में घुस गई, घुस गई थोड़ी कान में Only a great poet such as Sarveshwar Dayal Saxena can write a poem for children about going into a storm. Not a regular storm, but a storm that can break you into two. Stopping only to repair his shoes, Ibn Batuta enters storm after storm. The poem rekindles memories of Ibn Battuta's courageous travels from Morocco to India as it brings life to the rhymes for children. All poems in this collection are equally remarkable. For instance, read the following poem, crisp composition with a breezy rhyme: महँगू ने महँगाई में, पैसे फूँके टाई में While poems' temperament rises and falls, Debabrata Ghosh's illustrations are quiet and serene. The green in these illustrations is at its quietest, and so is the colour blue. Age group 6-8 years
Nepali Kavitayen
- Author Name:
Sarveshwardayal Saxena
- Book Type:

- Description:
नेपाली साहित्य या भाषा की प्राचीनतम रचना चौदहवीं शती का एक ताम्रपत्र माना जाता है। लेकिन मल्लकाल के अन्त के साथ ही नेपाली में साहित्य सर्जना होने लगी। सुवानन्द दास की पहली कविता, जिसमें पृथ्वीनारायण शाह (प्रथम नेपाल नरेश) की विजय-यात्रा इत्यादि का वर्णन है, नेपाली साहित्य की प्रथम कविता है। लेकिन नेपाली साहित्य की वास्तविक शुरुआत भानुभक्त आचार्य और उनके महाकाव्य ‘नेपाली रामायण’ से माननी चाहिए, जिसे भानुभक्त आचार्य ने जेल के अन्दर लिखा था।
इस काल को हम नेपाली मानस के निराशा-युग, पराजय-काल के रूप में ले सकते हैं। अंग्रेज़ों के साथ अपमानजनक सुगौली सन्धि (1816) के समय अनेक दरबारी षड्यंत्रों की बीभत्सता चरम रूप में थी। सत्ता के लिए हर कोई दूसरे की लाश पर खड़े रहने को तत्पर था। नेपाली इतिहास के लहूलुहान पन्ने इन्हीं दिनों लिखे गए। भानुभक्त की ‘रामायण’ इसी भक्तिकाल (1853) की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि है।
सत्ता और शास्त्रीयता के विरुद्ध भयंकर युद्ध के नायक गोपालप्रसाद रिमाल प्रथम कवि हैं जिनका प्रभाव आज तक बरकरार है। 1940 में ही महाकवि लक्ष्मीप्रसाद देवकोटा भी स्वतंत्रता युद्ध में कूद गए। रिमाल और देवकोटा दो ऐसे अद्वितीय कवि हैं, वे अब हमारे मध्य नहीं रहे, जिन्होंने नेपाल को नई जागृति दी। 1950 में नेपाल में प्रजातंत्र की स्थापना हुई। 1950-60 के दशक को हम नेपाली साहित्य का अभूतपूर्व दशक कह सकते हैं।
इस संग्रह में 1961 के बाद के कवियों को ही प्रस्तुत किया गया है—अपवाद के रूप में सर्वश्री गोपालप्रसाद रिमाल, लक्ष्मीप्रसाद देवकोटा और मोहन कोइराला हैं।
संग्रह के कवियों में दुरूहतावादी और ‘कला कला के लिए’ माननेवाले और अपने को प्रगतिशील कहनेवाले किसी वाद के समर्थक कवियों को शामिल नहीं किया गया है।
नेपाली कविता में साठ के दशक के बाद जो पीढ़ी उभरी है, वह साहित्य को आदमी की व्यथा, वेदना, विसंगति, कटुता और जीवन के घिनौने यथार्थ को प्रकट करने का माध्यम स्वीकारती है और उसे आम आदमी तक ले जाना चाहती है। ऐसे सभी कवियों को इस संग्रह में शामिल करने का प्रयास किया गया है जो सौ साल बाद के पाठक के लिए नहीं लिखते बल्कि आज के पाठकों के सामने आज की संवेदना को लेकर जाना चाहते हैं।
Kuano Nadi
- Author Name:
Sarveshwardayal Saxena
- Book Type:

- Description:
“शब्द पड़ने लगे छोटे
दर्द बढ़ने लगा
कहे भी थे जो कभी सब हो गए अनकहे”
छठे दशक में हिन्दी कविता में जो ताज़गी और सम्पन्नता आई थी, वह आज भले ही इधर-उधर छितरा गई दिखती हो, पर सर्वेश्वर के काव्य में आज भी सही-सलामत मौजूद है। इंसान के गहरे दु:खों में सामयिक दृश्यों का अर्थ व्यक्त करनेवाली वही सहजता उनकी कविता में अन्त तक मिलती है जो पहले कविता-संग्रह ‘काठ की घंटियाँ’ के प्रकाशन ने उनके नाम के साथ जोड़ी थी। राजनीति की अमानवीयता और मानव सम्बन्धों के विशृंखलन का त्रास सर्वेश्वर ने समाज के दबे हुए वर्गों, युद्ध में खेत रहे समाजों और प्राकृतिक कोप में असहाय मरते लोगों के बीच महसूस और अभिव्यक्त किया है। यह संग्रह सर्वेश्वर की काव्य-यात्रा में किसी मोड़ का सूचक नहीं, केवल उन अन्तर्धाराओं के पहले से अधिक अधीर और मुखर हो उठने का सूचक है जिन्हें पाठक तथा समीक्षक उनकी कविता में बराबर पाते रहे हैं। ‘कुआनो नदी’ माला की तीन कविताओं के माध्यम से सर्वेश्वर ने एक ऐसा गहन प्रतीक हिन्दी कविता को दिया है, जिसका अर्थवृत्त समय के साथ फैलता रहा है।
Pratinidhi Kavitayen : Sarveshwar Dayal Saxena
- Author Name:
Sarveshwardayal Saxena +1
- Book Type:

- Description:
समकालीन हिन्दी कविता की व्यापक जनवादी चेतना और प्रगतिशील जीवन-मूल्यों के सन्दर्भ में सर्वेश्वर एक ऐसे कवि के रूप में सुपरिचित हैं जिनकी रचनाएँ पाठकों से बराबर धड़कता हुआ रिश्ता बनाए हुए हैं। उनकी कविताएँ ‘नई कविता’ की ऊहा और आत्मग्रस्तता से बड़ी हद तक मुक्त रही हैं। इस संग्रह में उनके समूचे काव्य-कृतित्व से महत्त्वपूर्ण कविताएँ संकलित की गई हैं।
ज़िन्दगी के बड़े सरोकारों से जुड़ी उनकी कविताएँ उन शक्तियों का विरोध करती हैं जो उसे किसी भी स्तर पर कुरूप करने के लिए ज़िम्मेदार हैं। वे घेरों के बाहर के कवि हैं। उनकी कविताओं में हिन्दी कविता का लोकोन्मुख जातीय संस्कार घनीभूत रूप में मौजूद है और उन्हें न तो राजनीतिक-सामाजिक परिस्थितियों से काटकर देखा जा सकता है और न कवि के अपने आत्मसंघर्ष को नकारकर। वस्तुत: दु:ख और गहन मानवीय करुणा से प्रेरित संघर्षशीलता, उदात्त सौन्दर्यबोध, मधुर भावनाओं के सन्धि संस्पर्श और ‘फ़ार्म’ की छन्दाछन्द विभिन्न मुद्राएँ इन कविताओं को व्यापक अर्थ में मूल्यवान बनाती हैं।
Pratinidhi Kavitayen : Sarveshwar Dayal Saxena
Sarveshwardayal Saxena
20% off₹ 199
₹ 159.2
Available
Sabhi Ke Liye Manvadhikar
- Author Name:
Pratapmal Devpura
- Book Type:

- Description:
जन्म से ही प्रत्येक मानव के कुछ अधिकार हैं। ‘सभी के लिए मानवाधिकार’ पुस्तक में मानवाधिकारों के विभिन्न पक्षों को सरल भाषा में समझाया गया है जिन्हें पढ़कर बच्चे और नवसाक्षर भी मानवाधिकारों को समझ सकते हैं। पुस्तक में पाठक को बच्चों के अधिकार, लैंगिक समानता, महिला समानता का अधिकार, महिलाओं के आर्थिक अधिकार, सामाजिक न्याय एवं मानवाधिकार और पुलिस जैसे विषयों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया है।
Mujhe Pahchano
- Author Name:
Sanjeev
- Book Type:

- Description:
‘मुझे पहचानो’ परम्परा और संस्कृति को एक नई रोशनी में देखने वाला उपन्यास है। इसकी कथा एक ऐसी रियासत से शुरू होती है जिसके लिए सती जैसी नृशंस प्रथा सांस्कृतिक गौरव की हैसियत रखती है। इसके पात्र एक ऐसे समाज में साँस ले रहे हैं जिसमें समानता, स्वतंत्रता और बन्धुत्व जैसे मानवीय मूल्य आकाशकुसुम बने हुए हैं, लेकिन जिसका प्रभुवर्ग अपने कथित सांस्कृतिक गौरव को यथावत रखने के लिए शुचिता को एक अपरिहार्य आवश्यकता बनाकर थोपे हुए है। यह शुचिता है वर्ण की, वर्ग की और रक्त की। लैंगिक और यौन शुचिताएँ भी इसमें शामिल हैं। आश्चर्य नहीं कि पुरुष-वर्चस्व पर टिके इस समाज में सती-प्रथा को व्याधि नहीं, अपनी विशेषता समझा जाता है और उसका धार्मिक-सांस्कृतिक महिमामंडन किया जाता है। इस जड़ता की जड़ें इतने गहरे धँसी हैं कि अधिकतर स्त्रियाँ भी सती को श्रद्धा की निगाह से देखती हैं। यह उपन्यास इसी छद्म गौरवबोध को अनावृत करता है। पुरुष-सत्ता की चालाकियों और उससे उत्पन्न सामाजिक ठहराव को तोड़ते हुए इस उपन्यास की कथा धर्म और धन के घातक गठजोड़ को भी बहुत ठोस रूप में पाठकों के सामने रखती है। संजीव का कथा-लेखन समूचे हिन्दी कथा-संसार में विशिष्ट इसलिए है कि उनकी लेखनी अविचलित भाव से न सिर्फ समाज की कथा कहती है, बल्कि हमें एक वैज्ञानिक दृष्टि देते हुए तर्कों और तथ्यों से भी समृद्ध करती है।
Bhoole-Bisre Chitra
- Author Name:
Bhagwaticharan Verma
- Book Type:

- Description:
एक महान् कृति, भारतीय समाज और परिवार के विकास की विविध दिशाओं और रूपों का एक विराट एवं प्रभावोत्पादक चित्र। -डॉ. एस.एन. गणेशन निकट अतीत के चित्रों का एक एलबम—वह अतीत जिसे वर्तमान पीढ़ी को न भूलना चाहिए और न जिससे विमुख ही होना चाहिए, क्योंकि उसी में हमारे नए जीवन का बीजारोपण हुआ था। परिवार के चित्रों के एलबम के विपरीत इस एलबम के चित्र धुँधले नहीं पड़े हैं, क्योंकि कैमरा एक ही रहा है। लैंसों का प्रयोग इस कुशलता से किया गया है कि चित्र बिल्कुल साफ़ और हूबहू अंकित हुए हैं, दूरी ने उन्हें धुँधला नहीं किया है, भावातिरेक या दुःख ने विकृत नहीं किया है। —जगदीशचन्द्र माथुर
The Hidden Hindu
- Author Name:
Akshat Gupta
- Book Type:

- Description:
इक्कीस साल का पृथ्वी एक अधेड़ और रहस्यमयी अघोरी ओम् शास्त्री की तलाश कर रहा है, जिसे पकड़कर भारत के एक सुनसान द्वीप पर अत्याधुनिक सुविधाओं के बीच भेज दिया गया | विशेषज्ञों की एक टीम ने जब उस अघोरी को नशे की दवा दी और पूछताछ के लिए सम्मोहित किया, तो उसने दावा किया कि वह सभी चार युगों-सतयुग, त्रेता, द्वापर व कलियुग–(हिंदू धर्म के अनुसार चार युग) को देख चुका है और रामायण तथा महाभारत की घटनाओं में हिस्सा ले चुका है | जीवन के बाद मृत्यु के नियम को भी बेअसर साबित करनेवाले ओम् के अविश्वसनीय अतीत से जुड़े खुलासे सभी को हैरान कर देते हैं। उस टीम को यह भी पता चला कि ओम् हर युग के दूसरे अमर लोगों की भी तलाश कर रहा है। ऐसे विचित्र रहस्य अगर सामने आ गए तो प्राचीन धारणाएँ हिल जाएँगी और भविष्य की दिशा ही बदल जाएगी। तो यह ओम् शास्त्री कौन है? उसे पकड़ा क्यों गया? पृथ्वी उसे क्यों ढूँढ़ रहा है? सवार हो जाइए ओम् शास्त्री के रहस्यों, पृथ्वी की तलाश और हिंदू पौराणिक कथाओं के रहस्यों से भरे अन्य अमर लोगों के कारनामों की इस नाव पर, और चलिए एक रोचक और रोमांचक यात्रा पर|
Allahabad Passenger
- Author Name:
- Book Type:

- Description:
यह महज़ एक उपन्यास नहीं, बल्कि उन अनगिनत युवाओं की सामूहिक स्मृति है जिन्होंने अपने सपनों का सामान बाँधा और किसी छोटे गाँव-कस्बे से उठकर 'पूर्व के ऑक्सफ़ोर्ड' की पैसेंजर ट्रेन पकड़ ली। बस इस उम्मीद में कि यह ट्रेन उन्हें जीवन के नए मुकामों तक ले जाएगी।
Lohe Ke Pankh
- Author Name:
Himanshu Shrivastava
- Book Type:

- Description:
लोहे के पंख दलित समुदाय से आने वाले एक व्यक्ति की आपबीती के जरिये भारतीय किसान-मजदूरों के कठिन-कठोर जीवन-संघर्ष का जैसा ज़मीनी और विशद चित्र प्रस्तुत करता है, वैसा कम ही उपन्यासों में देखने को मिलता है। आज़ादी के पहले और बाद के लगभग तीन दशकों की पृष्ठभूमि में विन्यस्त और बिहार के ग्रामीण और शहरी समाज को समेटे यह उपन्यास तत्कालीन परिस्थितियों को अंकित करते हुए जिन सामाजिक-राजनीतिक विषमताओं को उजागर करता है वे आज भी समाप्त नहीं हुई हैं। सामन्ती वर्चस्व और अत्याचार, दलितों का शोषण-उत्पीड़न, राजनीतिक दलों की कथनी-करनी का अन्तर...आज भी आम हैं। ‘लोहे के पंख’ जिस समय—बीसवीं सदी के छठे दशक में—लिखा गया था उस समय हिन्दी साहित्य में दलित प्रश्न इतना केन्द्रीय और मुखर नहीं था। इस नजरिये से देखें तो हिमांशु श्रीवास्तव का एक दलित पात्र को अपने उपन्यास का नायक बनाकर उसके मुख से ही समय-समाज की पड़ताल कराना विशेष महत्व रखता है।
Krishnakali
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

- Description:
पाठक किसी पात्र से एकत्व स्थापित कर लेता है; जब उसका अपमान उसकी वेदना बन जाता है, तब ही लेखनी की सार्थकता को हम मान्यता दे पाते हैं। जब ‘कृष्णकली’ लिख रही थी तब लेखनी को विशेष परिश्रम नहीं करना पड़ा, सब कुछ स्वयं ही सहज बनता चला गया था। जहाँ क़लम हाथ में लेती, उस विस्तृत मोहक व्यक्तित्व को, स्मृति बड़े अधिकारपूर्ण लाड़-दुलार से खींच, सम्मुख लाकर खड़ा कर देती, जिसके विचित्र जीवन के रॉ-मैटीरियल से मैंने वह भव्य प्रतिमा गढ़ी थी। ओरछा की मुनीरजान के ही ठसकेदार व्यक्तित्व को सामान्य उलट-पुलटकर मैंने पन्ना की काया गढ़ी थी। जब लिख रही थी तो बार-बार उनके मांसल मधुर कंठ की गूँज कानों में गूँज उठती। वही विस्तृत मधुर गूँज, उनके नवीन व्यक्तित्व के साथ, ‘कृष्णकली’ में उतर आई। —शिवा
Karm Path Par
- Author Name:
Aashish Kumar Trivedi
- Book Type:

- Description:
novels
Nishpran Gawaah
- Author Name:
Kadambari Mehra
- Book Type:

- Description:
Book
Gajapati Kulapati
- Author Name:
Ashok Rajagopalan
- Book Type:

- Description:
Small noses catch small colds. Big noses catch big colds. Gajapati Kulapati the elephant has a big nose and catches a great, big, mighty cold! And what happens when he sneezes – Aaaaachoooo….? With repetitive sounds and words that roll rhythmically through the pages, this bestselling series about the adorable elephant puts the zing back into storytelling and reading aloud. Bright, zestful pictures and dynamic visual text echo the lilt, making these big, happy books of fun.
Calcutta Cosmopolitan : Dil Aur Dararein
- Author Name:
Alka Saraogi
- Book Type:

- Description:
अलका सरावगी अपने उपन्यासों में कॉस्मोपॉलिटन कलकत्ता की नई-नई गाथाएँ लेकर आती रही हैं। कलकत्ता के अलग-अलग काल-खंडों का, एक ही काल में रह रही अलग-अलग जीवन-स्थितियों का, अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों के टकराव और सामंजस्य का, उसके नए-नए कोणों और रहस्यों का, उसके दिल की दरारों का उत्खनन ‘कलकत्ता कॉस्मोपॉलिटन : दिल और दरारें’ में भी जारी है। यह ‘सुनील बोस’ की गाथा है जो एक मुस्लिम लड़की ‘दीबा’ से निकाह के लिए धर्मान्तरण करके ‘मोहम्मद दानियाल’ बन गया है। एक निम्नवर्गीय जीवन-स्थिति में बहुत सारे भीतरी और बाहरी संघर्षों के बीच नौकरियाँ और मकान बदलते हुए अपनी पहचान छुपाते या दूसरी पहचान ओढ़ते हुए उनका जीवन आगे बढ़ रहा है। इसी जीवन में ‘सुनील बोस’ और ‘मोहम्मद दानियाल’ के द्वन्द्व और द्वैत के रास्ते उपन्यास में सच और झूठ के बीच का फ़रेब भी मारक और मार्मिक होता जाता है। उपन्यास में इस मुख्य कथा के समानान्तर कलकत्ता की अँधेरी और उमस-भरी गलियों में रहनेवाले लड़ते-जूझते लोगों की कथाएँ भी चलती रहती हैं, जिनके जीवन में ग़लत और सही का हिसाब कब जीवन के अभावों और सपनों, यथार्थ और लालसाओं के बीच के तनाव का हिसाब बन जाता है, यह पता ही नहीं चलता। इसके बीच तमाम चरित्रों के ओढ़े हुए व्यक्तित्व जहाँ तार-तार होते हैं और हम उनके भीतर का ग़लीज़ देख पाते हैं वहीं अनेक चरित्रों में इनसानी गरिमा और ऊँचाई भी बारम्बार प्रकट होती है।
Parth Tumhen Jina Hoga
- Author Name:
Jyoti Jain
- Book Type:

- Description:
Book
Kuber
- Author Name:
Dr. Hansa Deep
- Book Type:

- Description:
Book
Joothi Gali
- Author Name:
Hrishikesh Sulabh
- Book Type:

- Description:
‘जूठी गली’ जीवनानुभव का एक ऐसा लोक है जिसके भीतर वर्तमान की आँधी में इतिहास की धूल और राख उड़ती रहती है। जब अठारहवीं सदी के आरम्भ में पटना का नाम अज़ीमाबाद हुआ, उन्हीं दिनों जूठी गली की नींव पड़ी थी। उन दिनों से अब तक यह गली ज़िन्दा है। लोग जनमते और विदा होते रहे, मकान बिकते-ढहते-बनते रहे, जूठी गली अपना रूप बदलती रही और किसी ज़िन्दा इनसान की तरह धड़कती रही। इसके बाशिन्दे ख़बरों के रसिया हैं। ख़बरें इस गली में हवा के पर लगाकर उड़ती हैं। जन्म और मृत्यु दोनों के लिए यहाँ समान भाव से सुख-दुःख उपजता है। प्रेम और नफ़रत एक ही बटुए में रखकर लोग आपस में मिलते-जुलते हैं। जो ज़ुबान प्रशंसा करते नहीं थकती वह पीठ फेरते ही निन्दा रस उड़ेलने लगती है। इस गली में मध्यवर्गीय प्रपंचों के कीचड़ में लिथड़कर जीती स्त्रियों के साथ ऐसी स्त्रियाँ भी हैं जो पुरुषों के वर्चस्व को चुनौती देती हैं और परिदृश्य बदल जाता है। राजनीति ने अपने नाख़ूनों के खरोचों से जूठी गली को जो घाव दिए हैं, लोग उन्हें सहलाते हुए जीते हैं। इस गली में जाति-दंश की ज़हरीली हवा बहती है। प्रेम करनेवाले यहाँ सम्मान नहीं, हँसी के पात्र हैं। हृषीकेश सुलभ अपनी रचनाओं में स्वयं नहीं बोलते बल्कि उनके पात्रों का जीवन-व्यापार और परिवेश कथ्य को सघनता से प्रकट करता है। अपनी सहज भाषा की मार्मिकता और आत्मीय कहन के हुनर के सहारे वे कथा के बीहड़ में उतरते हैं और जीवन के ऐसे क्षणों को रचते हैं जो मानवीय गरिमा की रक्षा करते हैं। जूठी गली हमारे समय का जीवन्त दस्तावेज़ है।
IAS Today
- Author Name:
Prof.. Vikas Sharma
- Book Type:


- Description:
लालच की दुनिया को वैराग्य की दुनिया से जोड़ते हुए, आईएएस टुडे एक गांधीवादी रोमेश की कहानी है, जो अपने प्रशिक्षण अवधि के दौरान त्रिशला वासु से शादी कर लेता है और बाद में अपनी सर्वोत्तम क्षमताओं से अपराधों को जड़ से खत्म करने की कोशिश करता है। उसी दुनिया में टिन्नी भी है, जो कुलीन माता-पिता का बेटा है, जो एक रिंग लीडर बन जाता है और काले, पेनी, वल्लू और गन्नू के साथ अपना गिरोह बनाता है और कांति, रेवती और स्वाति के साथ एक कामुक जीवन जीता है। उसके पाप का पिटारा पहले से ही भरा हुआ है, क्या उसे अपने दुष्कर्मों का परिणाम भुगतना पड़ेगा? मजबूत महिला पात्रों के साथ, उपन्यास पाठकों को प्रेम और वासना, हिंसा और अहिंसा, देहाती और शहरी जीवन के बीच संघर्ष प्रस्तुत करता है। अभी भी इस सवाल का जवाब मिलना बाकी है कि क्या फैंसी एक धोखा देने वाली योगिनी है?
Neem Ka Ped
- Author Name:
Rahi Masoom Raza +1
- Book Type:

- Description:
“मैं अपनी तरफ़ से इस कहानी में कहानी भी नहीं जोड़ सकता था। इसीलिए इस कहानी में आपको हदें भी दिखाई देंगी और सरहदें भी। नफ़रतों की आग में मोहब्बत के छींटे दिखाई देंगे। सपने दिखाई देंगे तो उनका टूटना भी।...और इन सबके पीछे दिखाई देगी सियासत की काली स्याह दीवार। हिन्दुस्तान की आज़ादी को जिसने निगल लिया। जिसने राज को कभी भी सु-राज नहीं होने दिया। जिसे हम रोज़ झंडे और पहिए के पीछे ढूँढ़ते रहे कि आख़िर उसका निशान कहाँ है? गाँव मदरसा ख़ुर्द और लछमनपुर कलाँ महज़ दो गाँव-भर नहीं हैं और अली ज़ामिन खाँ और मुस्लिम मियाँ की अदावत बस दो ख़ालाज़ाद भाइयों की अदावत नहीं है। ये तो मुझे मुल्कों की अदावत की तरह दिखाई देती है, जिसमें कभी एक का पलड़ा झुकता दिखाई देता है तो कभी दूसरे का और जिसमें न कोई हारता है, न कोई जीतता है। बस, बाक़ी रह जाता है नफ़रत का एक सिलसिला... “मैं शुक्रगुज़ार हूँ उस नीम के पेड़ का जिसने मुल्क को टुकड़े होते हुए भी देखा और आज़ादी के सपनों को टूटे हुए भी देखा। उसका दर्द बस इतना है कि वह इन सबके बीच मोहब्बत और सुकून की तलाश करता फिर रहा है।”
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book