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Author:
Bhagwandas MorwalPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction₹
299
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‘रेत’ ऐसे दुर्दम्य समाज की कथा है जिसकी परम्पराओं पर हम सहजता से विश्वास नहीं कर सकते। यह उपन्यास कंजर जनजाति की आस्था, धार्मिक विश्वास, समाज, संस्कृति का आईना है। उपन्यास ‘रेत’ के केन्द्र में कमला सदन है जहाँ एक ही घर की चौहद्दी में एक साथ दो अन्तर्विरोधी परम्पराएँ आमने-सामने टकरा रही हैं। खेलावड़ी (वेश्यावृत्ति) के पेशे के साथ कमला बुआ, सुशीला, माया, रुकमणि, वंदना और पूनम एक ही घर में सन्तो और अनीता भाभी, यानी विधिवत् विवाह के बाद भाभी कही जानेवाली पतिव्रताओं के साथ रहती हैं। कमला बुआ उपन्यास में मातृसत्तात्मक वर्चस्व की प्रतीक है और ‘भाभी’ ब्याहता होते हुए भी बाहर से लाई गई दोयम दर्जे की सदस्या। मोरवाल का यह उपन्यास अद्भुत क़िस्सागोई के साथ ही हिन्दी में नारी-विमर्श का सूत्रपात करता है। प्रकाशन के बाद से ही विवादों के केन्द्र में रहे ‘रेत’ उपन्यास में कंजर जनजाति (काननचर जनजाति) के लोक विश्वासों, प्रथाओं, जीवन-शैली और परम्पराओं का सटीक और दिलचस्पप विवरण है। जरायम पेशा और कथित सभ्य समाज के मध्य गड़ी यौन-शुचिताओं का अतिक्रमण करता यह उपन्यास आज भी अपनी विलक्षण छवि बनाए हुए है।
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‘रेत’ ऐसे दुर्दम्य समाज की कथा है जिसकी परम्पराओं पर हम सहजता से विश्वास नहीं कर सकते। यह उपन्यास कंजर जनजाति की आस्था, धार्मिक विश्वास, समाज, संस्कृति का आईना है। उपन्यास ‘रेत’ के केन्द्र में कमला सदन है जहाँ एक ही घर की चौहद्दी में एक साथ दो अन्तर्विरोधी परम्पराएँ आमने-सामने टकरा रही हैं। खेलावड़ी (वेश्यावृत्ति) के पेशे के साथ कमला बुआ, सुशीला, माया, रुकमणि, वंदना और पूनम एक ही घर में सन्तो और अनीता भाभी, यानी विधिवत् विवाह के बाद भाभी कही जानेवाली पतिव्रताओं के साथ रहती हैं। कमला बुआ उपन्यास में मातृसत्तात्मक वर्चस्व की प्रतीक है और ‘भाभी’ ब्याहता होते हुए भी बाहर से लाई गई दोयम दर्जे की सदस्या। मोरवाल का यह उपन्यास अद्भुत क़िस्सागोई के साथ ही हिन्दी में नारी-विमर्श का सूत्रपात करता है। प्रकाशन के बाद से ही विवादों के केन्द्र में रहे ‘रेत’ उपन्यास में कंजर जनजाति (काननचर जनजाति) के लोक विश्वासों, प्रथाओं, जीवन-शैली और परम्पराओं का सटीक और दिलचस्पप विवरण है। जरायम पेशा और कथित सभ्य समाज के मध्य गड़ी यौन-शुचिताओं का अतिक्रमण करता यह उपन्यास आज भी अपनी विलक्षण छवि बनाए हुए है।
Book Details
-
ISBN9788126724437
-
Pages324
-
Avg Reading Time11 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Dr. Ram Singh
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- Description: सफलता के मंदिर तक पहुँचने के लिए सतर्कता और एकाग्रता की महती आवश्यकता है, जैसे पनिहारिन सिर पर गगरी रखकर सतर्क और एकाग्रचित्त होकर ही तो पनघट तक पहुँचती है, धीरे-धीरे कदम रखकर। जब चलोगे, तभी तो मंजिल मिलेगी, उसके लिए सुनिश्चित लक्ष्य जरूरी है। लक्ष्य प्राप्त करने या मंजिल तक पहुँचने में गरीबी, अभाव, हीनता और विकलांगता जैसी मुसीबतें बाधक नहीं हैं। अनेक घातों-प्रतिघातों और ठोकर खाकर ही व्यक्ति मंजिल पर पहुँच पाता है। पत्थर पर घिसे जाने के बाद ही तो रंग लाती है मेहँदी। अरे! चलो तो सही, राह के शूल आल्थस फूल बन जाएँगे। चट्टानें मोम हो जाएँगी। नेपोलियन के सामने आल्प्स पर्वत भी हिम्मत हार गया था। इस पुस्तक का उद्देश्य आपके अंदर प्रसुप्त अनेक आत्मिक शक्तियों को जगाना है; ऐसी योग्यता को संप्रेरित करना है, जिससे आप सचेतन प्रयास से सितारों की दुनिया से आगे जा सकें।
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